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  • ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे

    ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर फिर हमला कर सकता है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी और वैश्विक कारोबार प्रभावित होने का खतरा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना की जानकारी दी है। एक अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हमला होने की स्थिति में समुद्र के नीचे की केबल और सैन्य ठिकानों समेत कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबल तक पहुंच है और वह उन्हें नष्ट कर सकता है।

    ट्रंप बोले- एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकते हैं

    ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई कार्रवाई कब और किस तरह की हो सकती है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या युद्ध को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए या फिर इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास संघर्ष खत्म करने की क्षमता है, लेकिन यह फैसला करना बाकी है कि ऐसा कब किया जाए।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है, जिसकी उसे जरूरत है।

    ट्रंप पहले भी युद्ध के उद्देश्यों और उसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं। इसी महीने उन्होंने कहा था कि अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में अमेरिकी संसद पर नियंत्रण को लेकर फैसला होना है।

    तुर्की और फ्रांस ने नई सैन्य कार्रवाई से किया आगाह

    ईरान पर दोबारा हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव बढ़ा सकता है और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा है। उन्होंने संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताया।

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से किसी को फायदा नहीं होगा और इसका तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न करे।

    होर्मुज के नीचे मौजूद 7 इंटरनेट केबल निशाने पर

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।

    समुद्र के नीचे बिछी केबल वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जरिए दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचार होता है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    केबल क्षतिग्रस्त होने पर इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं में भी बाधा आने की आशंका है। असर कितना व्यापक होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी जल्दी भेजा जा सकता है और उन नेटवर्क में कितनी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।

    युद्ध की स्थिति में केबल की मरम्मत भी मुश्किल हो सकती है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत में बढ़ोतरी और मरम्मत के लिए अनुमति मिलने में देरी से बहाली का काम प्रभावित हो सकता है।

    खाड़ी देशों के टेक्नोलॉजी निवेश पर भी खतरा

    खाड़ी के देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े केंद्र बनने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ उनकी साझेदारी भी बढ़ी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ईरान के हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ था।

    हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक नेटवर्क मौजूद हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।

    फिलहाल, अमेरिका की ओर से संभावित नई सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट और कारोबारी नेटवर्क पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • होर्मुज पर ईरान की दोटूक चेतावनी, दूसरा समुद्री रास्ता बना तो अमेरिकी युद्धपोत होंगे निशाने पर

    होर्मुज पर ईरान की दोटूक चेतावनी, दूसरा समुद्री रास्ता बना तो अमेरिकी युद्धपोत होंगे निशाने पर


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में वैकल्पिक समुद्री मार्ग बनाने के लिए अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो उन्हें मिसाइलों से निशाना बनाया जाएगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत जारी होने का दावा किया है, लेकिन तेहरान ने किसी भी तरह की वार्ता से इनकार कर दिया है।

    ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार और एक्सपीडियेंसी काउंसिल के सदस्य जनरल मोहसिन रेजाई ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में दूसरा समुद्री मार्ग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका इस उद्देश्य से युद्धपोत भेजता है तो ईरान सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

    अमेरिका को व्यवहार बदलने की नसीहत
    रेजाई ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता की प्राथमिकता यह है कि अमेरिका अपने रवैये में वास्तविक बदलाव दिखाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका कुछ अहम शर्तों पर आगे बढ़ता है तो इसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका समुद्री नाकेबंदी जारी रखता है तो उसके जहाजों और सैन्य ठिकानों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

    ओमान से सुरक्षा पर चर्चा, अमेरिका से नहीं
    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ किसी प्रकार की बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल केवल ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है। बघाई ने कहा कि निकट भविष्य में न तो कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल ईरान आएगा और न ही ईरानी वार्ताकार विदेश जाएंगे।

    ट्रंप बोले- बातचीत जारी है
    दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान के साथ वार्ता जारी है और जल्द ही औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और अन्य देशों के अनुरोध पर यह संवाद आगे बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि उनकी कोशिश होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समाधान निकालने की है।

    ट्रंप का नया दावा
    बाद में ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को “दोहरे रवैये वाला” बताते हुए कहा कि ईरान ने ही बैठक की इच्छा जताई है और निकट भविष्य में वार्ता तय है। उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण है और अमेरिका की अनुमति के बिना वहां कोई गतिविधि संभव नहीं है।

    तेल बाजार पर पड़ा असर
    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की अटकलों के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में राहत देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। माना जा रहा है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने से ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।

  • लश्कर कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर… 26/11 जैसे हमले की दी धमकी

    लश्कर कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर… 26/11 जैसे हमले की दी धमकी


    नई दिल्ली।
    बीते साल मई महीने में भारत (India) ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) चलाकर जिस तरह आतंकियों को करारा सबक सिखाया था, उससे आतंकी सरगना अब तक बौखलाए हुए हैं। हाल ही में इसके सबूत देखने को मिले हैं। पहलगाम हमले (Pahalgam Attack) के कथित मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के नंबर दो के कमांडर सैफुल्लाह कसूरी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। इस दौरान उसने भारत में 26/11 जैसे हमले की धमकी भी दी है।

    बता दें कि पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम में स्थित खूबसूरत बैसरन की घाटी में 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। आतंकियों ने इस दौरान लोगों को धर्म पूछकर उनपर गोलियां बरसाईं थीं। इस हमले का मास्टरमाइंड कसूरी को ही माना जाता है। कसूरी अक्सर अपनी भारत विरोधी बयानबाजियों के लिए जाना जाता है।

    एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल ही में सैफुल्लाह कसूरी ने 2008 के मुंबई हमले की याद दिलाते हुए एक चेतावनी दी है। इसमें उसने समुद्री रास्ते से भारत में फिर से 26/11 जैसा हमला करने की धमकी दी है। वीडियो में, कसूरी कहता है कि पाकिस्तान ने 2025 में हवा पर कब्जा कर लिया था और अब 2026 में वे समुद्र पर कब्जा कर लेंगे। कथित तौर पर कसूरी ने कहा कि जमीन, हवा या समुद्र, दुश्मन के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

    वीडियो में कसूरी मुरीद के और बहावलपुर पर भारत के किए हमलों से बहुत बौखलाया लग रहा है। कसूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए भारत पर वॉटर टेररिज्म का आरोप लगाया, और धमकी दी कि कश्मीर पर दबाव का जवाब बलूचिस्तान समेत दूसरी जगहों पर अशांति से दिया जाएगा।