Tag: Tiger Corridor

  • भोपाल में बाघों के भ्रमण क्षेत्र पर संकट, कलियासोत डैम किनारे 24 पेड़ काटने की अनुमति पर बवाल, पर्यावरणविदों ने उठाए गंभीर

    भोपाल में बाघों के भ्रमण क्षेत्र पर संकट, कलियासोत डैम किनारे 24 पेड़ काटने की अनुमति पर बवाल, पर्यावरणविदों ने उठाए गंभीर


    भोपाल । भोपाल में पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कलियासोत डैम के किनारे बिजली के टावर लगाने के लिए 24 पेड़ों को काटने की अनुमति दिए जाने पर पर्यावरणविदों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है वह बाघों के भ्रमण और विचरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। पर्यावरणविदों ने नगर निगम प्रशासन से इस मामले की जांच कराने और अनुमति को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

    पर्यावरणविद् राशिद नूर के मुताबिक नगर निगम की उद्यान शाखा ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड को बिजली के टावर लगाने के लिए 24 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। उनका आरोप है कि अनुमति पत्र में कार्यस्थल का सही विवरण दर्ज नहीं किया गया। जिस स्थान पर टावर लगाने का काम चल रहा है वह चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद अनुमति पत्र में स्थान का उल्लेख खुशीलाल अस्पताल के पीछे और कलियासोत बांध के डूब क्षेत्र के रूप में किया गया है। पर्यावरणविदों का कहना है कि स्थान की वास्तविक स्थिति और अनुमति पत्र में दर्ज विवरण के बीच अंतर की जांच जरूरी है।

    राशिद नूर ने बताया कि चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र में 13 शटर के पास टावर निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद इंजीनियर से पेड़ों की कटाई से संबंधित अनुमति पत्र मांगा। उनके अनुसार अनुमति पत्र में उस स्थान का उल्लेख नहीं था जहां वास्तव में निर्माण कार्य चल रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अनुमति जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि यह क्षेत्र वास्तव में बाघों के आवागमन और सघन वन क्षेत्र का हिस्सा है तो यहां किसी भी प्रकार की गतिविधि से पहले पर्यावरणीय और वन्यजीव संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    पर्यावरणविदों की चिंता केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि वन क्षेत्र में पेड़ वन्यजीवों को आश्रय देने के साथ उनके प्राकृतिक आवागमन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बिजली के टावर लगाने के लिए पेड़ों को हटाने से आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ सकता है। कलियासोत डैम के आसपास का इलाका पर्यावरण और वन्यजीवों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए यहां होने वाले निर्माण कार्यों की अनुमति और उनकी वास्तविक स्थिति का परीक्षण आवश्यक है।

    राशिद नूर ने नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई की अनुमति को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए और यह जांच की जानी चाहिए कि संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए किस आधार पर अनुमति जारी की गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कार्यस्थल बाघ भ्रमण क्षेत्र में आता है तो अनुमति पत्र में दूसरे स्थान का उल्लेख क्यों किया गया।

    बताया गया है कि इस क्षेत्र में पहले भी निर्माण गतिविधियों और पेड़ों की कटाई को लेकर आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। पर्यावरणविद् के अनुसार वन विभाग ने पूर्व में यहां चल रहे कार्यों और कटाई पर रोक लगाई थी। हालांकि मौजूदा मामले में अनुमति जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल कलियासोत डैम के पास 24 पेड़ों की कटाई का मामला पर्यावरण संरक्षण और बाघों के सुरक्षित आवागमन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

  • MP को बड़ी सौगात… 22 Km 4-लेन टाइगर कॉरिडोर के लिए 758 करोड़ रुपये स्वीकृत

    MP को बड़ी सौगात… 22 Km 4-लेन टाइगर कॉरिडोर के लिए 758 करोड़ रुपये स्वीकृत


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इटारसी-बैतूल सेक्शन (Itarsi-Betul section.) में स्थित 22 किलोमीटर लंबे ‘टाइगर कॉरिडोर’ (‘Tiger Corridor’) को अब चार लेन हाईवे (Four Lane Highway) में विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार (Central Government) ने इस परियोजना के लिए 758 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी और विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से इटारसी-बैतूल क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगी।

    NH-46 को मिलेगी स्पीड
    राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के इस हिस्से को चार लेन में अपग्रेड करने से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से न केवल आम लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि कृषि और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह इलाका कोयला, तांबा, ग्रेफाइट और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, जिससे माल ढुलाई तेज और सुरक्षित हो सकेगी।


    जानिए कहां से कहां को जुड़ेगा

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इस परियोजना के तहत 11 विशेष अंडरपास और ओवरपास बनाए जाएंगे, जिससे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित किया जा सके। इससे सड़क दुर्घटनाओं और जानवरों की मौत में कमी आने की संभावना है।

    यह कॉरिडोर बैतूल को आगे नागपुर से जोड़ेगा, जिससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच संपर्क और बेहतर होगा। इसके अलावा, ग्वालियर-बैतूल कॉरिडोर के इस शेष हिस्से के चार लेन बनने से पूरा मार्ग हाई-स्पीड कनेक्टिविटी वाला बन जाएगा।


    समय की होगी बचत

    परियोजना के पूरा होने से न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी। साथ ही सतपुरा टाइगर रिजर्व, महादेव नेशनल पार्क और रातापानी वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।