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  • सैन्य कार्रवाई के वीडियो में गाने के उपयोग से नाराज हुईं कैटी पेरी, कहा- मेरी मंजूरी के बिना नहीं होना चाहिए था इस्तेमाल

    सैन्य कार्रवाई के वीडियो में गाने के उपयोग से नाराज हुईं कैटी पेरी, कहा- मेरी मंजूरी के बिना नहीं होना चाहिए था इस्तेमाल


    नई दिल्ली । अमेरिकी पॉप सिंगर और गीतकार कैटी पेरी ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों से जुड़े एक वीडियो में उनके लोकप्रिय गीत ‘Firework’ के इस्तेमाल पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस गाने को उपयोग करने से पहले उनसे किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी और वह इस तरह के किसी भी उपयोग का समर्थन नहीं करती हैं। इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सैन्य संदेशों में लोकप्रिय संगीत के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है।

    विवाद तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित होने लगा, जिसमें ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े दृश्य दिखाए गए थे। वीडियो की पृष्ठभूमि में कैटी पेरी का वर्ष 2010 में रिलीज हुआ चर्चित गीत ‘Firework’ सुनाई दे रहा था। वीडियो के व्यापक रूप से साझा होने के बाद सिंगर ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि इस उपयोग के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई थी।

    कैटी पेरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सैन्य हमलों के दृश्यों के साथ उनके गीत का इस्तेमाल देखकर उन्हें गहरा आश्चर्य और दुख हुआ। उन्होंने कहा कि उनसे न तो इस संबंध में कोई अनुमति मांगी गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई। उनके अनुसार, वह किसी भी प्रकार की हिंसा या सैन्य कार्रवाई को बढ़ावा देने वाले संदेश से अपने संगीत को जोड़कर नहीं देखना चाहतीं।

    सिंगर ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि ‘Firework’ गीत का मूल उद्देश्य लोगों को कठिन परिस्थितियों में आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा देना था। उन्होंने कहा कि यह गीत आत्मबल और प्रेरणा का प्रतीक है, इसलिए इसे युद्ध या सैन्य कार्रवाई से जुड़े दृश्यों के साथ प्रस्तुत करना उसके मूल संदेश के विपरीत है। उनका मानना है कि संगीत लोगों को जोड़ने और उनका मनोबल बढ़ाने का माध्यम होना चाहिए, न कि संघर्ष या हिंसा का प्रतीक।

    कैटी पेरी लंबे समय से सामाजिक और मानवीय मूल्यों के समर्थन में अपनी राय खुलकर रखती रही हैं। वर्ष 2021 में अमेरिका के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर उन्होंने इसी गीत ‘Firework’ की प्रस्तुति दी थी। उस समय भी उन्होंने इसे एकता, उम्मीद और सकारात्मक बदलाव के संदेश से जोड़ा था। यही वजह है कि मौजूदा विवाद में उन्होंने विशेष रूप से इस गीत के उद्देश्य और उसके भावनात्मक महत्व का उल्लेख किया।

    यह पहली बार नहीं है जब किसी लोकप्रिय कलाकार ने राजनीतिक या सरकारी प्रचार से जुड़े वीडियो में अपने गीत के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई हो। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय कलाकार अपने संगीत के अनधिकृत उपयोग को लेकर सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज करा चुके हैं। हाल के महीनों में गायिका अरियाना ग्रांडे ने भी एक वीडियो में अपने गीत के उपयोग को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी और स्पष्ट किया था कि उनके संगीत का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

    इस तरह के मामलों ने बौद्धिक संपदा अधिकारों, कलाकारों की सहमति और सार्वजनिक मंचों पर रचनात्मक सामग्री के उपयोग से जुड़े कानूनी और नैतिक पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रचनात्मक कृति का उपयोग उसके निर्माता की अनुमति और लागू नियमों के अनुरूप होना चाहिए, विशेषकर तब जब उसका संबंध राजनीतिक, सरकारी या सैन्य संदेशों से जुड़ा हो। कैटी पेरी की आपत्ति ने इसी संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।