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  • मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली

    मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली


    नई दिल्ली। लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद की बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देते हुए उनके लिए नई सीटें आवंटित कर दी हैं। इस फैसले का असर केवल इन सांसदों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे सीटिंग प्लान में बदलाव करना पड़ा जिसके चलते कुल 39 सांसदों की सीटें बदल दी गईं। नई व्यवस्था सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र से लागू होगी और सभी सांसद अपने नए डिवीजन नंबर तथा नई सीटों के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

    लोकसभा सचिवालय के अनुसार टीएमसी से अलग हुए सांसदों को एक साथ बैठाने के लिए सदन की पूरी बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था। इसी कारण कई अन्य सांसदों की सीटें भी बदलनी पड़ीं। संसद में सीटों का निर्धारण डिवीजन नंबर के आधार पर किया जाता है और यही नंबर किसी सांसद की पहचान तथा उसकी निर्धारित सीट तय करता है। संसदीय कार्यवाही के दौरान मतदान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में भी इसी डिवीजन नंबर का उपयोग किया जाता है।

    इस फेरबदल का असर कई प्रमुख नेताओं पर भी पड़ा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की सीट बदल दी गई है। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के पी वी मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को भी नई सीटें आवंटित की गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय की सीट भी बदलकर 354 कर दी गई है जबकि पहले उनका सीट नंबर 280 था। इन बदलावों के साथ संसद की नई बैठक व्यवस्था मानसून सत्र में पहली बार देखने को मिलेगी।

    लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शनिवार को दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। पहला फैसला शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को स्वीकार करने से जुड़ा था। दूसरा फैसला टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देने का था। जानकारी के अनुसार ये सभी सांसद अब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई से जुड़े हुए हैं और इसी आधार पर उन्होंने अलग बैठने की मांग की थी।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण है। संसद में किसी समूह को अलग सीटें मिलना उसकी अलग पहचान को भी दर्शाता है। ऐसे में इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे समय में सीटिंग प्लान में यह बदलाव राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद सांसद अपने नए डिवीजन नंबर के अनुसार सदन में बैठेंगे और संसदीय कार्यवाही में भाग लेंगे। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी देखने को मिल सकती है क्योंकि विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर चुका है।

  • TMC में बढ़ी कलह? भाजपा का दावा- 60 विधायक नाराज, ममता-अभिषेक से बना रहे दूरी..

    TMC में बढ़ी कलह? भाजपा का दावा- 60 विधायक नाराज, ममता-अभिषेक से बना रहे दूरी..


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress के भीतर कथित असंतोष को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने दावा किया है कि पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है और कई नेता वर्तमान नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं।

    पूनावाला ने आरोप लगाया कि करीब 60 विधायक खुद को “असली टीएमसी” बता रहे हैं और Mamata Banerjee तथा Abhishek Banerjee के नेतृत्व से असहज हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में परिवारवाद हावी हो गया है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।

    भाजपा प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ सांसद भी पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं और संगठन के भीतर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। उनके अनुसार यह स्थिति तृणमूल कांग्रेस के अंदर नेतृत्व संकट की ओर इशारा करती है।

    विवाद उस समय और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर एक कथित सूची वायरल हुई। इस सूची में दावा किया गया कि टीएमसी के 20 सांसदों का एक समूह केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने की तैयारी कर रहा है। सूची में पार्टी के कई वरिष्ठ और नए सांसदों के नाम होने की बात कही गई।

    हालांकि टीएमसी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी नेता Kirti Azad ने वायरल सूची को फर्जी और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि सूची में शामिल कई सांसदों ने ऐसे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार किया है।

    कीर्ति आजाद ने भाजपा पर “ऑपरेशन लोटस” के जरिए पार्टी में फूट डालने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट है और विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम का कोई असर नहीं पड़ेगा।

    फिलहाल भाजपा के आरोपों और टीएमसी के खंडन के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पार्टी के भीतर वास्तविक स्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है।