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  • मुरैना में खाद संकट गहराया, टोकन व्यवस्था के बीच घंटों लाइन में इंतजार को मजबूर किसान

    मुरैना में खाद संकट गहराया, टोकन व्यवस्था के बीच घंटों लाइन में इंतजार को मजबूर किसान

    मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। गल्ला मंडी स्थित वितरण केंद्र पर बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन सीमित उपलब्धता और टोकन प्रणाली के कारण उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों की चिंता और बढ़ गई है।

    किसानों का कहना है कि उनकी फसल खेतों में तैयार खड़ी है और समय पर खाद नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उनका आरोप है कि खाद प्राप्त करने के लिए पहले पंजीकरण कराना पड़ता है, उसके बाद टोकन मिलने का इंतजार करना होता है और निर्धारित तिथि पर भी घंटों लंबी कतार में खड़े रहने के बावजूद कई बार खाद नहीं मिल पाती। इस पूरी प्रक्रिया ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें अपने गांव से काफी दूर स्थित गोदामों के लिए टोकन आवंटित किए जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और आर्थिक दोनों तरह का अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। कई किसान लगातार कई दिनों तक वितरण केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

    वितरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। किसानों का कहना है कि कई घंटे इंतजार करने के बाद भी सभी को खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे खेती के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक उर्वरक समय पर नहीं मिलने की चिंता लगातार बढ़ रही है। किसानों का मानना है कि वितरण व्यवस्था में सुधार किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।

    प्रदेश सरकार समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होने का दावा करती रही है, लेकिन मुरैना के वितरण केंद्रों पर दिखाई दे रही स्थिति अलग तस्वीर पेश कर रही है। बड़ी संख्या में किसानों की भीड़, सीमित वितरण और लंबा इंतजार यह संकेत दे रहे हैं कि जमीनी स्तर पर व्यवस्था अभी भी पूरी तरह सुचारु नहीं हो सकी है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ेगा।

    कुछ किसानों ने खाद की कालाबाजारी और वितरण में अनियमितताओं की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन को वितरण प्रक्रिया की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि सभी पात्र किसानों को निर्धारित समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। साथ ही ई-टोकन प्रणाली को अधिक प्रभावी और सरल बनाने की भी मांग उठ रही है।

    हाल के समय में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों का असंतोष सामने आता रहा है। इससे पहले भी उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन देखने को मिले थे। किसानों का कहना है कि खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में यदि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई तो इसका व्यापक असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।

    फिलहाल मुरैना में प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाने की है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा और टोकन प्रणाली में आवश्यक सुधार कर उनकी परेशानियों को कम किया जाएगा।

  • इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला

    इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला


    इंदौर इंदौर में पचकुइया मुक्तिधाम पर शनिवार को अस्थियों की अदला-बदली से हंगामा मच गया। मामला तब सामने आया जब एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए। इसी कारण गलती से एक अन्य परिवार स्व. मदनलाल विश्वकर्मा की अस्थियों को अपने स्वजन समझकर ले गया। जब परिवार अस्थियां लेने पहुंचा, तब उन्हें यह पता चला कि अस्थियां उनके स्वजन की नहीं हैं।

    विश्वकर्मा परिवार के अनुसार, 55 वर्षीय मदनलाल विश्वकर्मा का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पंडित ने अस्थि संचय की तिथि रविवार तय की थी, लेकिन शनिवार को परिवार जब संग्रह के लिए मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां वहां नहीं मिलीं। इसके बाद परिवार ने ड्यूटी पर मौजूद निगमकर्मी से जानकारी ली, लेकिन कर्मचारी नशे में होने के कारण मदद नहीं कर सके।

    घटना की तहकीकात में पता चला कि 13 नंबर के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी कारण चौबे परिवार, जिनके 65 वर्षीय स्व. सुनील चौबे का निधन 5 मार्च को हुआ था, ने गलती से विश्वकर्मा परिवार की अस्थियां ले ली। सुबह लगभग 8.30 बजे चौबे परिवार अस्थियों को संग्रह कर खेड़ी घाट के लिए रवाना हुआ, तभी उन्हें मुक्तिधाम से फोन आया कि उन्होंने गलत अस्थियां ले ली हैं। इसके बाद दोनों परिवारों की अस्थियां तीन घंटे बाद सही ढंग से लौटाई गईं।

    विश्वकर्मा परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम में तैनात पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के कर्मचारी की लापरवाही से यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी से गलती हुई और उसने टोकन संख्या में गड़बड़ी कर दी।

    मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने खेद जताते हुए बताया कि गलती करने वाला कर्मचारी 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है और कोरोना महामारी के दौरान भी उसने अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह मानवीय भूल थी और संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी गई है।

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डायल 100 भेजा और एडी. डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर मुक्तिधाम संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता और टोकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता उजागर कर दी है।