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  • FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    नई दिल्ली ।FASTag ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल भुगतान की प्रक्रिया को काफी आसान बनाया है। वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा FASTag संबंधित बैंक खाते या वॉलेट से जुड़ा होता है और टोल प्लाजा से गुजरते समय निर्धारित राशि अपने आप कट जाती है। ऐसे में अगर FASTag चोरी हो जाए या वाहन से निकाल लिया जाए तो समय रहते उसे ब्लॉक करना जरूरी हो जाता है।

    FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी मिलते ही सबसे पहला कदम उसे बंद करवाना होना चाहिए। इसके लिए FASTag जारी करने वाले बैंक के टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। बैंक को FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी देकर उसे हॉटलिस्ट या ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    अगर संबंधित बैंक का कस्टमर केयर नंबर उपलब्ध नहीं है या तत्काल संपर्क करने में परेशानी हो रही है तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हेल्पलाइन 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इस नंबर के माध्यम से FASTag की हॉटलिस्टिंग या ब्लॉकिंग के लिए अनुरोध दर्ज कराया जा सकता है।

    FASTag को ऑनलाइन भी बंद किया जा सकता है। इसके लिए जिस बैंक या वॉलेट से FASTag जुड़ा है, उसके आधिकारिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद FASTag से संबंधित सेक्शन में जाकर मैनेज FASTag या ब्लॉक/डीएक्टिवेट जैसे विकल्प को तलाशना होगा।

    ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान FASTag के बंद करने का कारण पूछा जा सकता है। ऐसी स्थिति में चोरी या गुम होने से संबंधित विकल्प का चयन करके FASTag को डीएक्टिवेट किया जा सकता है। इससे चोरी हुए या गुम FASTag के आगे इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।

    अगर FASTag के साथ वाहन भी चोरी हुआ है या केवल FASTag ही चोरी किया गया है तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराना भी जरूरी कदम है। ऑनलाइन FIR या पुलिस शिकायत दर्ज कराने से चोरी की घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो जाता है। इससे भविष्य में चोरी किए गए FASTag के किसी गलत इस्तेमाल से संबंधित स्थिति में वाहन मालिक के पास शिकायत का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा।

    पुलिस शिकायत की जरूरत नया FASTag जारी कराने के दौरान भी पड़ सकती है। संबंधित बैंक नया FASTag जारी करने के लिए पुलिस रिपोर्ट की कॉपी मांग सकता है। इसलिए चोरी या गुम होने की स्थिति में ब्लॉक कराने के साथ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी पूरी करना उपयोगी है।

    पुराना FASTag पूरी तरह ब्लॉक होने के बाद वाहन मालिक संबंधित बैंक से नया FASTag जारी करने का अनुरोध कर सकता है। नया FASTag मिलने और सक्रिय होने के बाद पुराने FASTag से जुड़े बकाया वॉलेट बैलेंस के संबंध में बैंक की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    पुराने FASTag में मौजूद राशि को लेकर भी बैंक से जानकारी लेना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद बचा हुआ वॉलेट बैलेंस नए FASTag से जुड़े खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसलिए FASTag चोरी या गुम होने पर देरी करने के बजाय पहले उसे बंद कराना, फिर पुलिस शिकायत और नया FASTag जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।

  • पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    नई दिल्ली । केरल के त्रिशूर में शनिवार को पलियक्कारा टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लाइन करीब दो किलोमीटर से अधिक तक पहुंच गई थी। इसी दौरान त्रिशूर के सांसद और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी इस जाम में फंस गए। वह त्रिशूर से एर्नाकुलम की ओर जा रहे थे। शाम करीब 5:45 बजे उनका काफिला इस रास्ते से गुजर रहा था।

    जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मंत्री के काफिले को वहां से आगे निकाल दिया। इसके बाद सुरेश गोपी ने पलियक्कारा टोल प्लाजा के सभी 12 गेट खोलने का आदेश दिया। उनका कहना था कि सड़क पर इतनी लंबी कतार देखकर लोगों को हो रही परेशानी पर ध्यान देना जरूरी था। इसी वजह से उन्होंने तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला किया।

    सुरेश गोपी ने बताया कि जब उन्होंने सड़क पर वाहनों की लंबी लाइन देखी तो उन्हें लगा कि इस स्थिति में कुछ कदम उठाना जरूरी है। उनका कहना था कि गाड़ियां लंबे समय तक खड़ी रहती हैं तो इससे ईंधन की खपत होती है और धुआं भी निकलता है। ऐसे हालात में टोल गेट खोलकर वाहनों को आगे जाने देना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने सभी 12 गेट खोलने का निर्देश दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को जाम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि वहां तैनात कर्मचारी अपना काम कर रहे थे और टोल लेना उनकी जिम्मेदारी है। हालांकि, जब एक साथ बड़ी संख्या में वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचते हैं तो टोल लेने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इस वजह से सड़क पर वाहनों की कतार बढ़ने लगती है और जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सुरेश गोपी ने आगे कहा कि ऐसे दिनों में जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से लोगों को जाम की परेशानी से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यातायात की स्थिति को संभालने के लिए इस तरह के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

    इस बीच जाम के दौरान पुलिस द्वारा मंत्री के काफिले को आगे निकालने पर कुछ वाहन चालक नाराज भी हुए। सुरेश गोपी ने माना कि कई लोगों को उनका काफिला आगे जाता देखकर गुस्सा आया था। उन्होंने कहा कि कुछ वाहन चालक उन्हें आगे निकलते देखकर नाराज नजर आए। हालांकि, बाद में जब टोल प्लाजा के गेट खोले गए और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो स्थिति में सुधार होने लगा और लोगों को राहत मिली।

    पुलिस के मुताबिक, करीब 30 मिनट के भीतर टोल प्लाजा के दोनों तरफ यातायात की स्थिति काफी बेहतर हो गई थी। वाहनों की लंबी कतार कम होने लगी और गाड़ियां आगे बढ़ने लगीं। इसके बाद सुरेश गोपी भी वहां से आगे रवाना हो गए।

    पूरी घटना के दौरान सुरेश गोपी ने लंबे समय से जाम में फंसे वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए टोल प्लाजा के सभी गेट खोलने का निर्देश दिया। उन्होंने टोल कर्मचारियों को दोषी नहीं माना और कहा कि बड़ी संख्या में वाहन एक साथ पहुंचने पर टोल प्रक्रिया में समय लगना जाम की वजह बन सकता है। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के बीच समन्वय की जरूरत बताई।

  • 77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    77 लाख लोगों ने अपनाया FASTag एनुअल पास, डिजिटल टोल सिस्टम की बढ़ी रफ्तार, जल्द आएगी AI आधारित नई तकनीक

    नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और FASTag एनुअल पास की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार पिछले 11 महीनों में 77 लाख से अधिक FASTag एनुअल पास जारी किए जा चुके हैं। इन पासों के माध्यम से 63 करोड़ से अधिक टोल लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि निजी वाहन चालकों के बीच यह सुविधा तेजी से स्वीकार की जा रही है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

    सरकार के मुताबिक कार, जीप और वैन श्रेणी के वाहनों द्वारा किए जाने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा केवल FASTag एनुअल पास के माध्यम से हो रहा है। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली के तहत वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 98 प्रतिशत टोल शुल्क FASTag के जरिए ही वसूला जा रहा है। इससे टोल भुगतान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनी है।

    FASTag एनुअल पास विशेष रूप से निजी कार, जीप और वैन मालिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। इसकी कीमत 3,075 रुपये निर्धारित की गई है। यह पास एक वर्ष तक या अधिकतम 200 टोल क्रॉसिंग तक वैध रहता है। जो भी सीमा पहले पूरी होती है, उसी के अनुसार इसकी वैधता समाप्त हो जाती है। नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए यह सुविधा समय और प्रक्रिया दोनों के लिहाज से उपयोगी मानी जा रही है।

    सरकार का कहना है कि FASTag नेटवर्क को बहु-स्तरीय डिजिटल सुरक्षा प्रणाली के साथ संचालित किया जा रहा है। इसमें टोल प्रबंधन प्रणाली, अधिग्रहण बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) तथा FASTag जारी करने वाले बैंक आपस में समन्वित रूप से कार्य करते हैं। प्रत्येक टोल लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है और भुगतान होते ही वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर तुरंत सूचना भेजी जाती है। किसी भी प्रकार की शिकायत के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की गई है।

    सरकार भविष्य में टोल संग्रह प्रणाली को और आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक लागू करने की तैयारी चल रही है। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण और RFID तकनीक का उपयोग किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने या गति कम करने की आवश्यकता नहीं होगी। कैमरा और सेंसर वाहन की पहचान कर संबंधित खाते से स्वतः टोल शुल्क काट देंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक लागू होने से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी, यात्रा का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सड़क परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु बनेगी। साथ ही डिजिटल भुगतान और टोल संग्रह प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने के साथ राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों को अधिक सुविधाजनक और निर्बाध सफर का अनुभव मिलेगा।