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  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पाकिस्तान में खलबली, खुद के देश में ट्रोल हो रहे मुनीर और शहबाज

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पाकिस्तान में खलबली, खुद के देश में ट्रोल हो रहे मुनीर और शहबाज

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर जल्द ही आधिकारिक घोषणा होने वाली है। इस डील से भारत को बड़ा फायदा होने वाला है, क्योंकि अमेरिका अब भारत से आयातित सामान पर 50% की बजाय केवल 18% टैरिफ लगाएगा। खास बात यह है कि किसानों के हित पर किसी तरह का समझौता नहीं हुआ।

    इस समझौते के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी खुद अपने सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का मजाक उड़ा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि भारत ने पाक की तरह किसी के दबाव में आकर अमेरिका की खुशामद नहीं की और अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटा।

    एक पाकिस्तानी यूजर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मुनीर की रोती हुई तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके साथ ऐसा बर्ताव किया जैसे कोई अपने निजी फायदे के लिए दूसरों का इस्तेमाल करता है। वहीं अन्य यूजर्स ने लिखा कि भारत ने यूरोपियन यूनियन, यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड समझौते किए और अब अमेरिका ने भी टैरिफ 18% कर दिया, वह भी बिना किसी झुकाव या पुरस्कार की उम्मीद के।

    पूर्व पीएम इमरान खान के समर्थकों और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने भी शहबाज सरकार पर निशाना साधा। PTI के पूर्व मंत्री हम्माद अजहर ने कहा कि आधुनिक विदेश नीति दिखावे और निजी रिश्तों की नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत, टैरिफ और बाजार तक पहुंच का फायदा उठाने की है। उन्होंने कहा, भारत के हालिया ट्रेड समझौते इस बात का उदाहरण हैं, पाकिस्तान में चापलूसी और फोटो खिंचवाना काम नहीं आता।

  • PM मोदी ने ट्रंप को नहीं किया फोन, अमेरिकी राष्ट्रपति का अहंकार हुआ आहत, अब नहीं होगी पुरानी डील

    PM मोदी ने ट्रंप को नहीं किया फोन, अमेरिकी राष्ट्रपति का अहंकार हुआ आहत, अब नहीं होगी पुरानी डील


    नई दिल्ली । अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अटके होने की एक चौंकाने वाली वजह का खुलासा किया है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच यह व्यापार डील किसी नीतिगत मतभेद की वजह से नहीं रुकी बल्कि इसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन न करना था। लटनिक ने कहा कि पूरी डील तैयार थी, लेकिन यह सिर्फ एक फोन कॉल की वजह से रुक गई। अब अमेरिका उस पुराने समझौते पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला कर चुका है।

    क्या हुआ था

    लटनिक के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग तैयार था लेकिन भारत ने तय समय पर ट्रंप को फोन नहीं किया। यह फोन कॉल प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से ट्रंप को किया जाना था, जो अंततः नहीं हुआ । ट्रंप का अहंकार इस बात से आहत हुआ और उन्होंने इस समझौते को आगे बढ़ाने का विचार बदल दिया। लटनिक ने साफ कहा कि अब वह समझौता लागू नहीं होगा और भारत को मिलने वाला लाभ अब नहीं मिलेगा।

    अमेरिका का निर्णय

    लटनिक ने आगे कहा कि अमेरिका ने उस व्यापार समझौते से खुद को पीछे खींच लिया है, जिस पर पहले सहमति बन चुकी थी। अमेरिका ने अब इंडोनेशिया, फिलीपींस, और वियतनाम के साथ डील कर ली है, जबकि भारत से उस समझौते पर उम्मीद थी कि वह पहले होगा। अब ट्रंप प्रशासन मान चुका है कि भारत से डील पहले होती, लेकिन देरी के कारण अमेरिका ने अन्य देशों से समझौते कर लिए।

    भारत को भुगतनी पड़ी कीमत

    लटनिक ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को 50 प्रतिशत तक टैरिफ की भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि डील नहीं हो पाई। ट्रंप अब भारत के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की बात भी कह चुके हैं। इससे यह साफ हो जाता है कि यह मामला अब सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि ट्रंप के अहंकार और विदेशी नीति से जुड़ा हुआ है।

    क्या था मामला

    ट्रंप और मोदी के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई बार बातचीत हुई थी। दोनों देशों के बीच यह डील कई मामलों में लगभग तय हो चुकी थी लेकिन मोदी सरकार ने उस निर्णायक पल में ट्रंप को फोन नहीं किया। लटनिक ने कहा यह ट्रंप की डील थी, और उसे पूरी तरह से ट्रंप ही अंजाम तक पहुँचाते। बस मोदी को ट्रंप को कॉल करना था। वे इसके लिए असहज थे और कॉल नहीं किया।

    अमेरिकी नीति में बदलाव

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब ठंडे बस्ते में चला गया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह इस पर आगे विचार नहीं करेगा। इसके साथ ही ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे भारत के खिलाफ अपने टैरिफ बढ़ा सकते हैं और भारत को इस मामले में नुकसान उठाना पड़ेगा।

    भारत की प्रतिक्रिया

    इस मामले पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध हमेशा ही रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहे हैं, और यह कदम निश्चित रूप से दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकता है।