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  • दुनिया में आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत की मजबूत उड़ान, अप्रैल से जून के बीच निर्यात में दोहरे अंक की शानदार वृद्धि

    दुनिया में आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत की मजबूत उड़ान, अप्रैल से जून के बीच निर्यात में दोहरे अंक की शानदार वृद्धि


    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में निर्यात के मोर्चे पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून के दौरान देश का कुल निर्यात वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर 11.37 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 232.73 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर और व्यापारिक चुनौतियों से जूझ रही हैं। ऐसे माहौल में भारत का मजबूत निर्यात प्रदर्शन वैश्विक बाजार में उसकी बढ़ती साख और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।

    पहली तिमाही के दौरान वस्तु निर्यात 129.32 अरब डॉलर दर्ज किया गया जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले काफी अधिक रहा। हालांकि इस दौरान आयात भी बढ़ने से वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 86.86 अरब डॉलर तक पहुंच गया लेकिन इसके बावजूद निर्यात में दर्ज हुई तेज वृद्धि भारतीय विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। दूसरी ओर सेवा क्षेत्र ने भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेवा निर्यात बढ़कर 103.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया जबकि सेवा व्यापार अधिशेष भी बढ़कर 49.43 अरब डॉलर दर्ज किया गया। यह दर्शाता है कि सूचना प्रौद्योगिकी वित्तीय सेवाएं और अन्य पेशेवर सेवाएं वैश्विक स्तर पर लगातार भारत की पहचान मजबूत कर रही हैं।

    जून महीने के आंकड़े भी उत्साहजनक रहे। इस दौरान वस्तु निर्यात 40.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले वर्ष जून के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि है। वहीं सेवा निर्यात भी बढ़कर 33.03 अरब डॉलर रहा। लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय निर्यातक बदलते वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप खुद को तेजी से ढाल रहे हैं और नए अवसरों का लाभ उठा रहे हैं।

    नॉन पेट्रोलियम निर्यात में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। अप्रैल से जून के दौरान यह 106.30 अरब डॉलर तक पहुंच गया जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.44 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि भारत का निर्यात केवल ऊर्जा उत्पादों पर निर्भर नहीं है बल्कि विनिर्माण और उच्च मूल्य वाले उत्पाद भी वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।

    विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो रत्न एवं आभूषण उद्योग ने सबसे तेज वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा इंजीनियरिंग उत्पादों जैविक और अकार्बनिक रसायनों इलेक्ट्रॉनिक सामान तथा चावल के निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारत धीरे धीरे वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं और निर्यात बढ़ाने वाली नीतियों का सकारात्मक असर भी इन आंकड़ों में दिखाई देता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ती है तो आने वाले महीनों में भारत का निर्यात और अधिक मजबूत हो सकता है। हालांकि बढ़ते व्यापार घाटे को संतुलित करने और निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए सरकार को लॉजिस्टिक्स लागत कम करने नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और घरेलू उद्योगों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने होंगे। कुल मिलाकर पहली तिमाही के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी अपनी निर्यात क्षमता के दम पर विकास की नई कहानी लिख रहा है।

  • वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

    वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और सतत विकास से जुड़े सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बताते हुए कहा कि वैश्विक विकास और आर्थिक प्रगति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। उन्होंने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, बल्कि टिकाऊ विकास और नवाचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    मुंबई में बातचीत के दौरान हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के पुनः उपयोग और टिकाऊ उत्पादन की अवधारणा आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख जरूरत बनने जा रही है। उनके अनुसार भारत और फिनलैंड दोनों ऐसे देश हैं जो पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद आवश्यक है।

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बोलते हुए उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनका कहना था कि समझौते से जुड़ी बातचीत पूरी हो चुकी है और अब इसके क्रियान्वयन की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेज वृद्धि होगी। विशेष रूप से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान स्तर से दोगुना तक पहुंच सकता है। इससे निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    महाराष्ट्र की आर्थिक भूमिका पर चर्चा करते हुए हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि यह राज्य भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है और देश के औद्योगिक तथा निवेश परिदृश्य में इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड और महाराष्ट्र के बीच कई परियोजनाओं पर सहयोग जारी है। मुंबई के ससून डॉक के विकास से संबंधित परियोजना में फिनिश कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे संयुक्त प्रयास दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार मुलाकात हो चुकी है। इन बैठकों में हरित अर्थव्यवस्था, सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा विज्ञान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों पक्ष नए अवसर तलाश रहे हैं। हाल ही में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया था, जिसे भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और हरित विकास के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर सकता है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है, जिससे निवेश और कारोबार का दायरा भी व्यापक होगा।