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  • उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर

    उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर


    ताशकंद।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की उज्बेकिस्तान (Uzbekistan Visit) की दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों का जोर आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ व्यापार एवं निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के वीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी।

    इससे पहले शनिवार को ताशकंद (Tashkent ) पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद द्विपक्षीय समझौतों के पैकेज पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना भी है। प्रधानमंत्री ताशकंद पहुंचने के बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचकर आजादी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसे देश की आजादी की 30वीं वर्षगांठ पर बनाया गया था। पीएम शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी गए।


    किर्गिस्तान दौरे पर पीएम मोदी के कार्यक्रमों में खास क्या?

    प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ समिट में शामिल होने के लिए बिश्केक जाएंगे। यह एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। इस साल की थीम है ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’। बिश्केक में होने वाले एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को वेलकम डिनर और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है। यहां प्रधानमंत्री मोदी भाषण भी देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।


    उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात कब हुई थी?
    पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकात 2023 में दुबई में सीओपी28 सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान हुई थी।

    2026 की मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध हैं। इस दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में इंडोलॉजिस्ट (भारतीय संस्कृति के जानकार) और अन्य विद्वानों से भी बातचीत करेंगे।


    कनेक्टिविटी की बाधा दूर करेंगे भारत और उज्बेकिस्तान

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक उज्बेकिस्तान संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत को अहम खनिजों की जरूरत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सप्लाई की सुदृढ़ व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक भारत और उज्बेकिस्तान एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक बाजार हैं। हम निश्चित रूप से ज्यादा आयात कर सकते हैं। बहुत ज्यादा निर्यात भी कर सकते हैं। लेकिन कनेक्टिविटी (संपर्क) एक बड़ी बाधा रही है। इसलिए, व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कनेक्टिविटी की इस बाधा को कैसे दूर किया जाए, इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।


    फार्मा, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे दोनों देश

    उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे का एजेंडा बहुत व्यापक है। 2015 में उनके पिछले द्विपक्षीय दौरे के बाद दोनों देशों का व्यापार 300% बढ़ा है। उज्बेकिस्तान में निवेश 700% से अधिक बढ़ा है। संस्कृति, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, स्वास्थ्य, पारंपरिक दवाओं, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात होगी। कई एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।


    पीएम मोदी से मिलने का उत्साह, कलाकारों और प्रवासियों में दिखी खुशी

    उज्बेकिस्तान के ताशकंद पहुंचे पीएम मोदी के स्वागत में बच्चों, युवतियों और युवाओं की एक टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। कार्यक्रम के दौरान एक छोटे बच्चे को पीएम मोदी से मिलने के लिए खास तौर पर उत्साहित देखा गया। प्रस्तुति के बाद स्थानीय लोगों को इस जेस्चर की सराहना करते देखा जा सकता है।


    ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत: पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने ताशकंद के अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा भी किया। उन्होंने लिखा कि वह ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रवासी समुदाय भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक जीवंत सेतु की तरह है, जो दोनों देशों के बीच मित्रता के संबंधों को लगातार मजबूत बना रहा है। स्वागत कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय की ओर से प्रस्तुत कथक और अंदिजान पोल्का नृत्य देखा। उज्बेकिस्तान के छोटे बच्चों ने प्रसिद्ध भारतीय गीत उड़े जब जब जुल्फें तेरी पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम ने तबले और पारंपरिक उज्बेक वाद्यों (दोइरा और चांग) की मनमोहक जुगलबंदी का भी आनंद लिया।


    राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की योजना

    विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी ब्यौरे के मुताबिक ताशकंद दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दोनों के बीच व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश संबंधों की समीक्षा के अलावा भविष्य की कार्ययोजना भी तय करेंगे। जनता के बीच जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने के मकसद से समुदाय के बीच संबंधों की गर्मजोशी बनाए रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।

  • जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

    जयशंकर और मंटुरोव की बैठक में भारत रूस व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, तकनीक और कनेक्टिविटी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति


    नई दिल्ली ।
    भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में नई दिशा देने के उद्देश्य से व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक मॉस्को में हुई। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए और कई प्रमुख क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    दो दिवसीय रूस यात्रा पर पहुंचे जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के संबंधों में लगातार मजबूती और अनुकूलन क्षमता दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच आपसी हित और विश्वास को रणनीतिक साझेदारी का आधार बताया गया।

    जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में करीब 13 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। व्यापार में यह वृद्धि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ व्यापार असंतुलन भी काफी बढ़ा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि व्यापार घाटे का अंतर करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने इस असंतुलन को दूर करना भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया। दोनों पक्षों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए नए अवसर तलाशने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

    बैठक में ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु सहयोग, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और मानव संसाधन की आवाजाही जैसे क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया। जयशंकर ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी माहौल में दोनों देशों को नए क्षेत्रों की संभावनाओं की पहचान करते हुए सहयोग का दायरा बढ़ाना होगा।

    उन्होंने भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में उद्योग जगत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार सरकारें व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक ढांचा तैयार कर सकती हैं, लेकिन वास्तविक निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन में कारोबारी क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका रहती है। इसलिए संस्थागत तंत्र को उद्योग की प्राथमिकताओं के साथ लगातार जोड़े रखने की आवश्यकता है।

    जयशंकर ने कहा कि अंतर-सरकारी आयोग के विभिन्न कार्य समूहों और उप-समूहों को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने समस्या समाधान और व्यावहारिक परिणामों को भविष्य की बैठकों की सफलता का प्रमुख आधार बताया।

    बैठक के बाद जयशंकर ने मंटुरोव को आयोग की सह-अध्यक्षता के लिए धन्यवाद दिया और चर्चा को उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बैठक उपयोगी रही। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाने तथा नई तकनीकी और रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप साझेदारी विकसित करने पर दोनों पक्षों का जोर रहा।

  • राखी बाजार में बढ़ी त्योहारी खरीदारी, दिल्ली समेत देशभर में स्वदेशी और थीम आधारित राखियों की मांग में तेजी

    राखी बाजार में बढ़ी त्योहारी खरीदारी, दिल्ली समेत देशभर में स्वदेशी और थीम आधारित राखियों की मांग में तेजी

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन से पहले देशभर के बाजारों में त्योहारी खरीदारी तेज हो गई है और कारोबारियों को इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर बिक्री की उम्मीद है। व्यापारिक संगठनों के आकलन के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है। इसमें अकेले राखियों की बिक्री करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

    त्योहार में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में राखियों, मिठाइयों, कपड़ों, उपहारों और अन्य त्योहारी सामान की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले अंतिम दिनों में बिक्री की रफ्तार और बढ़ेगी।

    दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में रक्षाबंधन से जुड़ी खरीदारी का असर दिखाई दे रहा है। स्थानीय बाजारों के अलावा छोटे और मध्यम व्यापारियों को भी त्योहार के कारण कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।

    अनुमान के मुताबिक, देशभर में सिर्फ राखियों का कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। दिल्ली में राखियों की बिक्री लगभग चार हजार करोड़ रुपये रहने की संभावना जताई गई है। राखियों के अलावा मिठाई, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी वस्तुएं, ड्राई फ्रूट्स, पूजा सामग्री और अन्य उपहारों की बिक्री को जोड़ने पर रक्षाबंधन से संबंधित कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

    इस वर्ष बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ अलग-अलग विषयों और संदेशों वाली राखियां भी दिखाई दे रही हैं। विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र गौरव और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने वाले संदेशों से जुड़ी राखियों की मांग को लेकर व्यापारिक क्षेत्र में उत्साह है।

    विकसित भारत राखी, मोदी गारंटी राखी, ब्रह्मोस राखी, नारी वंदन राखी, आत्मनिर्भर भारत राखी और वोकल फॉर लोकल राखी जैसे डिजाइन बाजार में उपलब्ध हैं। इसके अलावा भारत गौरव राखी, लखपति दीदी राखी, नमामि गंगे राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और अमृतकाल राखी भी ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

    बच्चों और युवाओं में ब्रह्मोस राखी, राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी और विकसित भारत राखी को लेकर खास रुचि बताई जा रही है। वहीं महिलाओं के बीच नारी वंदन और लखपति दीदी जैसी थीम वाली राखियों को पसंद किए जाने की बात सामने आई है। इससे राखी बाजार में डिजाइन और संदेश आधारित उत्पादों की विविधता बढ़ी है।

    व्यापारिक क्षेत्र का कहना है कि स्वदेशी राखियों की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और कुटीर उद्योगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की बिक्री त्योहार के दौरान छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन रही है।

    रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख भारतीय त्योहार है, लेकिन इसके साथ जुड़ा बाजार भी लगातार विस्तृत हो रहा है। अब राखी के साथ उपहार, मिठाई, कपड़े और अन्य सामान की खरीदारी त्योहार के कारोबार को व्यापक बनाती है। इस बार बाजार में स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय स्तर पर तैयार सामान को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कारोबारी वर्ग को उम्मीद है कि रक्षाबंधन से पहले खरीदारी के अंतिम दौर में बाजारों में भीड़ और बिक्री दोनों बढ़ेंगी। यदि राखियों और अन्य त्योहारी वस्तुओं की मांग अनुमान के अनुरूप रहती है, तो इस वर्ष रक्षाबंधन का कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार जा सकता है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच नई व्यापारिक डील को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह शुल्क कनाडा के कुछ उत्पादों पर लगाया गया है और इसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापारिक हितों के खिलाफ माने जा रहे कनाडाई कदमों का जवाब देना है। अमेरिका ने कनाडा पर अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने बातचीत के दौरान तय शर्तों के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया।

    टैरिफ लागू करने का फैसला अचानक नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच कई सप्ताह से व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। अगस्त के मध्य में दोनों पक्षों के बीच प्रगति के संकेत मिले थे और अमेरिका ने नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने की समयसीमा भी कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाई थी। इसके बावजूद अंतिम चरण में दोनों सरकारें किसी साझा समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रगति जरूर हुई थी, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें और बदलाव सामने आए जिन्हें कनाडा अपने हितों के अनुरूप नहीं मान सकता था। इसके बाद कनाडा ने व्यापार वार्ता को रोकने का फैसला किया है।

    कार्नी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब डॉलर के बदले डॉलर के आधार पर देगा। इसका अर्थ है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों पर भी समान आर्थिक प्रभाव वाला शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। कनाडाई सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अपने श्रमिकों, किसानों और कारोबारियों के हितों की रक्षा करना है।

    अमेरिकी कदम से प्रभावित होने वाले सामान कनाडा के कुल अमेरिकी निर्यात का एक सीमित हिस्सा हैं। फिर भी इसका राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हर वर्ष बड़े पैमाने पर वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है।

    नए टैरिफ से हॉकी उपकरण, कुछ औद्योगिक उत्पाद, डेयरी और अन्य निर्धारित श्रेणियों के सामान प्रभावित हो सकते हैं। इससे कारोबारियों की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव आने की आशंका है। यदि कनाडा भी जवाबी शुल्क लागू करता है तो दोनों देशों के उत्पादों की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब दोनों देश उत्तर अमेरिकी व्यापार व्यवस्था को लेकर भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की समीक्षा भी आगे महत्वपूर्ण विषय बनने वाली है। ऐसे में मौजूदा टैरिफ विवाद आने वाली व्यापार वार्ताओं को और जटिल कर सकता है।

    अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश सुरक्षा, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मामलों में भी लंबे समय से साझेदार रहे हैं। इसलिए व्यापारिक टकराव का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि तत्काल समझौते के बजाय आर्थिक दबाव और जवाबी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आने वाले कुछ घंटे दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ समझौते के लिए बुधवार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक की समयसीमा तय की है। निर्धारित समय तक सहमति नहीं बनने की स्थिति में कनाडा से अमेरिका पहुंचने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ गया है।

    ट्रंप की ओर से रखी गई मांगें केवल टैरिफ व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अधिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे। इसके अलावा कनाडा की अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रणनीतिक खनिजों को लेकर अमेरिका की चिंता का संबंध चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक नीति से है। ऐसे खनिज आधुनिक रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। कार्नी ने बातचीत को गहन और नाजुक बताया है और संकेत दिया है कि इस स्तर की चर्चा के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष अंतिम समय तक समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर इतना बड़ा है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

    ट्रंप का कनाडा के प्रति मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी नीति से काफी अलग दिखाई देता है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर अलग-अलग स्तर के टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन बयानों और व्यापारिक कदमों से कनाडा में अमेरिका के प्रति असंतोष बढ़ा है। कनाडाई सरकार पर घरेलू स्तर पर यह दबाव भी है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने आर्थिक हितों से समझौता न करे।

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद हालांकि नए नहीं हैं। सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और कई अन्य उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं। मौजूदा टैरिफ संघर्ष ने इन पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है। हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर जैसे उत्पादों पर भी अमेरिकी शुल्क लगाए जाने से विवाद का दायरा स्पष्ट होता है।

    दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और इस सीमा के जरिए रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग तथा करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी महंगे आयात और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर पड़ सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाएंगे। अंतिम दौर की बातचीत जारी रहने से उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी मांगों और कनाडा की घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। यदि आखिरी समय में समझौता हो जाता है तो दोनों देशों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो नए और ऊंचे टैरिफ व्यापारिक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।

  • उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल स्थानीय आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से वैश्विक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में उद्योग, निर्यात और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश के उद्योगों, किसानों, कारीगरों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को मिल रहा है।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते देश के विभिन्न राज्यों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख उद्योग अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे राज्य के निर्यातकों को नए बाजार मिल रहे हैं और स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ने की संभावना मजबूत हो रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानपुर का प्रसिद्ध चमड़ा उद्योग उत्तर प्रदेश की औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब व्यापार समझौतों और बेहतर वैश्विक पहुंच के कारण इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि चमड़ा उद्योग से जुड़े हजारों कारीगरों और कारोबारियों को इसका सीधा फायदा पहुंच सकता है।

    उन्होंने नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तकनीकी उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    पीयूष गोयल ने सहारनपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ रही है और व्यापारिक बाधाएं कम होने से छोटे कारीगरों और लघु उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय कला और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। बेहतर व्यापार व्यवस्था और निर्यात के नए रास्ते खुलने से कृषि उत्पादकों को अधिक अवसर मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम तेज हुआ है। कानपुर का चमड़ा उद्योग, नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, सहारनपुर का हस्तशिल्प और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। औद्योगिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलब्धि में विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली, शुल्क रियायतों का लाभ बढ़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए। सरकार का कहना है कि एफटीए की बदौलत भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है और निर्यात के नए क्षेत्रों में विस्तार संभव हुआ है।

    लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन से देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि भारतीय निर्यातकों को इनका अधिकतम लाभ मिल सके।

    सरकार के अनुसार भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का व्यापक रूप से उपयोग किया है। यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या भी वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत माना जा रहा है।

    भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत भी भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। समझौते के बाद अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या बढ़कर 5,668 हो गई है, जिनके माध्यम से 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसी प्रकार भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भी टैरिफ लाइनों और निर्यात मूल्य दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय उत्पादों की पहुंच नए क्षेत्रों तक विस्तारित हुई है।

    सरकार ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। समझौता लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जून 2026 में ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो मई 2026 की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक रहा। इसके अलावा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ लागू समझौते के बाद भी हजारों सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क रियायतों का व्यापक लाभ मिला है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए एफटीए में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खोले हैं। सरकार का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा के साथ संतुलित रणनीति अपनाई गई है, जिससे निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिली है।

  • भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड ने आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते (ईयू-भारत एफटीए) को इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है। दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं ने हेलसिंकी में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की।

    फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री रिक्का पुर्रा और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बैठक में आर्थिक संबंधों को अधिक विविध, मजबूत और दीर्घकालिक बनाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि ईयू-भारत एफटीए लागू होने के बाद व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य भी अधिक व्यावहारिक माना गया।

    बैठक के बाद फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री रिक्का पुर्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भारत और फिनलैंड की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उनके अनुसार डिजिटल और टिकाऊ प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    रिक्का पुर्रा ने यह भी कहा कि भविष्य में स्पेस, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि उनकी बैठकों में आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा डिजिटलाइजेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी का विस्तार करने पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री साकारी पुइस्तो से भी मुलाकात की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी संचार, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक और सस्टेनेबिलिटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

    फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति और ईयू-भारत एफटीए की संभावनाएं फिनलैंड की कंपनियों के लिए नए अवसर लेकर आएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार का विशाल आकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी निवेश और व्यावसायिक विस्तार के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।

    अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और निर्यात आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों का मानना है कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश पर आधारित यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई उड़ान, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; रक्षा, आतंकवाद और हिंद-प्रशांत सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति

    पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे से भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई उड़ान, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य; रक्षा, आतंकवाद और हिंद-प्रशांत सहयोग पर ऐतिहासिक सहमति


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का काम किया है। पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को दोगुना कर सात अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, शिक्षा, विज्ञान, कृषि और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के लिए व्यापक रोडमैप पर सहमति बनी।

    दोनों नेताओं ने ‘भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी : रोडमैप टू 2030’ का समर्थन करते हुए नियमित उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद, विदेश मंत्रियों की वार्ता और वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई। संसदीय सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के सांसदों के बीच संवाद को भी नई गति देने का निर्णय लिया गया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के बीच मजबूत संबंध भविष्य की साझेदारी का आधार बनेंगे।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने, नौसैनिक अभ्यासों को बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा के लिए वार्षिक मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने का फैसला किया। समुद्री सहयोग, हाइड्रोग्राफी, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सूचना साझाकरण को भी नई मजबूती देने पर सहमति बनी। साइबर सुरक्षा, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त प्रयासों को तेज करने तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

    आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। पर्यटन, डेयरी, कृषि, पशुपालन, बागवानी और वानिकी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। नाविकों के योग्यता प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए छात्र आदान-प्रदान, संस्थागत साझेदारी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया। आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति बनी। इस दौरान भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय आपात प्रबंधन एजेंसी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में न्यूजीलैंड के शामिल होने का स्वागत किया।

    क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए न्यूजीलैंड ने अपना समर्थन दोहराया। दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति पर शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भी बल दिया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 2030 रोडमैप के तहत तय सभी पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी का पूरा लाभ दोनों देशों को मिल सके।