Tag: TradeDeal

  • ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ

    ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ


    नई दिल्ली ।
    भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा शेष है। उनका कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    पीयूष गोयल ने बातचीत के दौरान सामने आई सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी वार्ता के दौरान सबसे अधिक परेशानी दोनों देशों के बीच समय के अंतर के कारण हुई। दिल्ली और वॉशिंगटन के अलग-अलग टाइम ज़ोन के चलते कई दौर की बैठकें देर रात तक चलीं, जिससे अधिकारियों और वार्ता टीमों को अपने कार्य समय में लगातार बदलाव करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इसे तकनीकी चुनौती बताया और कहा कि इससे बातचीत की सकारात्मक गति प्रभावित नहीं हुई।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वार्ता टीमों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग का माहौल रहा। बातचीत के दौरान किसी बड़े मतभेद के बजाय अधिकांश मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा हुई और समाधान निकालने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार दोनों पक्षों ने समझौते को व्यावहारिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। इससे कई क्षेत्रों के उद्योगों को लाभ मिलने की संभावना है और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा। उनके अनुसार भारत को ऐसे कई क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, जहां अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के साथ मुकाबला अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। इससे निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार से जुड़े विभिन्न विषयों पर लगातार बातचीत जारी है। इस दौरान बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक सहयोग जैसे अनेक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। अब अधिकांश विषयों पर सहमति बनने के बाद अंतिम चरण की बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समय के अनुसार अंतिम रूप लेता है, तो इससे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे। फिलहाल दोनों पक्ष शेष बिंदुओं पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

  • पुतिन के बाद ट्रंप का भी मोदी पर विश्वास, बोले- अच्छे दोस्त हैं पीएम, जल्द होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील

    पुतिन के बाद ट्रंप का भी मोदी पर विश्वास, बोले- अच्छे दोस्त हैं पीएम, जल्द होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और समझौते को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताया और कहा कि उनके साथ उनके व्यक्तिगत तथा कूटनीतिक संबंध बेहद अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर प्रगति हो रही है और दोनों देश जल्द ही इस दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम हासिल कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अतीत में भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क को लेकर अमेरिका की चिंताएं रही हैं, लेकिन वर्तमान दौर में दोनों देश व्यापारिक संबंधों को नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रयासरत हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से इस सप्ताह एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा था। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश और विभिन्न व्यापारिक बाधाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के समापन के बाद दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।

    इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि व्यापार समझौते को लेकर लगभग 99 प्रतिशत बातचीत पूरी हो चुकी है। इसी क्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिया कि अब केवल कुछ सीमित मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी शेष बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार संपर्क में हैं और अगले कुछ सप्ताह के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में वृद्धि होने के साथ-साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    उल्लेखनीय है कि ट्रंप का यह बयान रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की टिप्पणी के तुरंत बाद सामने आया है। पुतिन ने भी प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत की प्रशंसा करते हुए कहा था कि भारत एक महान लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश पर बाहरी दबाव बनाना आसान नहीं है तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    लगातार आ रहे इन बयानों को वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत जहां एक ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर अपने आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से नई साझेदारियां विकसित कर रहा है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का संभावित निष्कर्ष दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।

  • PM मोदी का UAE दौरा: अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर अहम चर्चा

    PM मोदी का UAE दौरा: अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर अहम चर्चा



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे, जहां अबू धाबी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका भव्य स्वागत किया। पीएम मोदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता शुरू हुई। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक हालात पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और दोनों देश आने वाले समय में हर क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे। बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति पर भी चिंता जताई गई, जहां दोनों नेताओं ने संयम और संवाद को ही समाधान बताया।

    इस दौरे को लेकर सबसे अहम घटनाक्रम में दोनों देशों के बीच ऊर्जा और निवेश से जुड़े कई समझौते हुए। LPG सप्लाई, स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व, रक्षा सहयोग और वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर जैसे क्षेत्रों में MoU साइन किए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार UAE ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, RBL बैंक और सम्मान कैपिटल में लगभग 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है।

    इसके अलावा UAE ने अपनी क्रूड ऑयल उत्पादन क्षमता को 2027 तक 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में यह दौरा भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

    भारत और UAE के बीच पहले से ही गहरा व्यापारिक संबंध है। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और दोनों देशों के बीच 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होता है। भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट, जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फूड आइटम, मशीनरी और केमिकल्स का बड़ा निर्यातक है।

    कुल मिलाकर यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।