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  • दिल्ली के बाजारों और व्यापारियों पर प्रदर्शनों की मार, सप्लाई चेन तक प्रभावित होने का दावा, कैट ने मांगा स्थायी समाधान

    दिल्ली के बाजारों और व्यापारियों पर प्रदर्शनों की मार, सप्लाई चेन तक प्रभावित होने का दावा, कैट ने मांगा स्थायी समाधान


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक आयोजनों के कारण व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की चिंता सामने आई है। व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी कैट ने दिल्ली के उपराज्यपाल से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है। संगठन ने मांग की है कि राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाकों में विरोध-प्रदर्शनों और जनसभाओं के लिए आधिकारिक स्थान निर्धारित किए जाएं। कैट का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है लेकिन इसके कारण बाजारों और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

    कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने सोमवार को उपराज्यपाल को पत्र लिखकर दिल्ली में बार-बार होने वाले प्रदर्शनों और राजनीतिक गतिविधियों से पैदा हो रही परेशानियों की ओर ध्यान दिलाया। पत्र में कहा गया है कि पिछले एक महीने से अधिक समय से राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शनों के कारण रुक-रुककर व्यवधान पैदा हो रहे हैं। इसका असर व्यापारियों के साथ आम नागरिकों और रोज कमाकर अपना परिवार चलाने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। संगठन ने उपराज्यपाल से हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने और उन्हें आधिकारिक रूप से अधिसूचित करने के निर्देश देने का आग्रह किया है।

    कैट का कहना है कि दिल्ली देश के सबसे बड़े व्यापारिक और थोक बाजारों में शामिल है। यहां हजारों बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं जिनसे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। जब किसी व्यस्त बाजार के आसपास प्रदर्शन होता है या सड़कें बंद की जाती हैं तो उसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता। रेहड़ी-पटरी लगाने वाले छोटे कारोबारी फेरीवाले दिहाड़ी मजदूर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर कर्मचारी और डिलीवरी से जुड़े लोग भी इससे प्रभावित होते हैं। होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के कारोबार पर भी इसका असर पड़ सकता है।

    व्यापारी संगठन ने पत्र में दावा किया है कि ट्रैफिक डायवर्जन और सड़कों की नाकेबंदी के कारण बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार व्यावसायिक इलाकों में प्रवेश सीमित होने से ग्राहकों की आवाजाही कम हो जाती है। देश के दूसरे हिस्सों से दिल्ली आने वाले व्यापारियों और कारोबारियों ने भी ऐसी बाधाओं के कारण अपनी यात्राएं कम की हैं। इससे व्यापारिक लेन-देन प्रभावित होने के साथ सामान की आपूर्ति और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने की बात कही गई है।

    इस समस्या के समाधान के लिए कैट ने पांच प्रमुख सुझाव दिए हैं। इनमें विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थान घोषित करना और बाजारों तथा व्यावसायिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा संगठन ने लोकतांत्रिक विरोध के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने और आम लोगों की आजीविका को सुरक्षित रखने की मांग की है। कैट ने यह भी सुझाव दिया है कि दिल्ली पुलिस ट्रैफिक पुलिस नगर निगम और अन्य संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए ताकि किसी भी आयोजन के दौरान यातायात और व्यापारिक गतिविधियों को व्यवस्थित रखा जा सके।

    संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य विरोध-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करना नहीं है। कैट के मुताबिक संविधान शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने की आजादी देता है। इसी तरह नागरिकों को व्यापार और रोजगार करने का अधिकार भी प्राप्त है। इसलिए जरूरी है कि दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जाए। संगठन ने उपराज्यपाल से इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने और दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में प्रदर्शन स्थल तय करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। कैट ने इस मुद्दे पर व्यापारियों की समस्याएं और सुझाव विस्तार से रखने के लिए उपराज्यपाल से मुलाकात का समय भी मांगा है।