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  • राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली का रूट मैप किया साझा, व्यापारियों ने उठाई रद्द करने की मांग

    राहुल गांधी ने रामलीला मैदान की महारैली का रूट मैप किया साझा, व्यापारियों ने उठाई रद्द करने की मांग

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने जा रहा है। इस रैली से पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसका रूट मैप साझा करते हुए लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर रैली का रास्ता बताते हुए देशभर के लोगों से दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

    राहुल गांधी ने 31 अक्टूबर को रैली का नक्शा साझा करते हुए लिखा, ‘कल मिलते हैं, साथ चलते हैं।’ उनके द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम के अनुसार, रैली का मार्ग कनॉट प्लेस से शुरू होकर मिंटो रोड जंक्शन और अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचेगा। इंडिया गठबंधन की इस रैली में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस आयोजन को लेकर दिल्ली में तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। शुक्रवार को हुई बारिश के कारण रामलीला मैदान में पानी भर गया था, जिससे आयोजन की तैयारियों को लेकर अतिरिक्त काम करना पड़ा। हालांकि, शनिवार को मैदान में पानी निकालने और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया गया। आयोजकों की ओर से मैदान को रैली के लिए तैयार करने की प्रक्रिया जारी रही।

    महारैली को लेकर जहां विपक्षी गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता जुटने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने इस आयोजन के समय पर सवाल उठाए हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने राहुल गांधी से एक बार फिर रैली रद्द करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दीपावली के प्रमुख कारोबारी समय में बड़े आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है।

    सीटीआई ने अपनी अपील में राहुल गांधी के ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ वाले संदेश का उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि दिल्ली के व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ आपसी विश्वास, प्रेम और सहयोग के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दीपावली के व्यस्त कारोबारी मौसम में बाजारों और दुकानों का कारोबार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन दिल्ली में रैली के आयोजन से पुरानी व्यापारिक दुकानों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक, चांदनी चौक और आसपास के बाजारों में कई दुकानें पीढ़ियों से कारोबार कर रही हैं। इन बाजारों का व्यापार केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका भी इससे जुड़ी हुई है।

    बृजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार की चूड़ी और बिंदी की दुकानें तथा चांदनी चौक के लहंगे के बाजार की अपनी अलग पहचान है। इसी तरह दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग की मशहूर कुल्फी की दुकानें भी दिल्ली के व्यापारिक बाजारों का हिस्सा हैं।

    उन्होंने कहा कि इन दुकानों से जुड़े प्रत्येक कारोबार पर करीब 10 से 20 लोगों के परिवारों की आजीविका निर्भर करती है। ऐसे में दीपावली जैसे बड़े त्योहार के ठीक पहले व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आने से दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों को नुकसान हो सकता है। व्यापारियों की चिंता है कि रैली के कारण बाजारों तक ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई तो त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री पर असर पड़ सकता है।

    सीटीआई ने राहुल गांधी से अपील की है कि वे व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए महारैली आयोजित करने के फैसले पर दोबारा विचार करें। संगठन का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उन व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जिनके लिए दीपावली का समय पूरे साल के कारोबार में महत्वपूर्ण होता है।

    फिलहाल 1 नवंबर को होने वाली महारैली को लेकर राजनीतिक तैयारियों के साथ व्यापारिक संगठनों की आपत्तियां भी सामने आ रही हैं। एक तरफ राहुल गांधी ने रैली में अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने का आह्वान किया है, वहीं दूसरी तरफ व्यापारियों ने त्योहार के मौसम में बाजारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। अब इस आयोजन के दौरान रैली के मार्ग और आसपास के बाजारों में कारोबार की स्थिति पर भी नजर रहेगी।

  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।

  • दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर धनतेरस और दिवाली से पहले होने वाले कारोबार पर पड़ने की आशंका है। इस संबंध में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

    कांग्रेस की इस महारैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। व्यापारिक संगठन का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए 15 से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है। संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। यहां 200 बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में बसों, कारों और अन्य वाहनों के मध्य दिल्ली में पहुंचने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    CTI ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट, पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

    संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में प्रतिदिन 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी समेत 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा रोजाना लगभग तीन हजार ट्रक इन बाजारों से सामान लेकर गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों तथा देश के विभिन्न राज्यों में जाते हैं।

    CTI का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रह सकता। संगठन के अनुसार, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग होने की आशंका भी जताई गई है। ट्रांसपोर्टरों की ओर से 31 अक्टूबर से ही मालवाहक गाड़ियां भेजने में असमर्थता जताए जाने की बात कही गई है।

    व्यापारियों ने अपनी आशंका के समर्थन में 10 अक्टूबर का उदाहरण भी दिया है। CTI के अनुसार, उस दिन जंतर-मंतर पर पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। ऐसे में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित भीड़ के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    संगठन ने सोनिया गांधी के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहली मांग है कि महारैली को दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली निर्धारित समय पर ही करनी है तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में कराया जाए, जहां संगठन के अनुसार 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।

    CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि त्योहारों के सबसे व्यस्त कारोबारी समय में अपने व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। संगठन ने राहुल गांधी से भी रैली आगे बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन उनकी ओर से इनकार किए जाने के बाद अब सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अंतिम गुहार लगाई गई है।

  • राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता बरकरार, दिल्ली में 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

    राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता बरकरार, दिल्ली में 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

    नई दिल्ली । दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों ने एक बार फिर कार्यक्रम की तारीख बदलने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि दिवाली के आसपास चल रहे खरीदारी के महत्वपूर्ण सीजन में रैली आयोजित होने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने आशंका जताई है कि स्थिति गंभीर होने पर व्यापारियों को करीब 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    यह मांग ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली आयोजित करने का उनका इरादा बरकरार है। सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पत्र की प्रति भेजकर अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के दूसरे सहयोगी दलों के साथ चर्चा करें। संगठन का कहना है कि रैली के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर बाजारों में कारोबार करने वाले व्यापारी असमंजस में हैं।

    राहुल गांधी ने सोमवार को व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी चिंताओं को सुना जा रहा है और उनकी परवाह की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ने मेट्रो बंद कर दी, सड़कों को सील कर दिया और राजधानी में लॉकडाउन जैसी स्थिति बना दी। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने पर विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। हालांकि, सीटीआई का कहना है कि इस बयान से व्यापारियों की व्यावहारिक चिंताएं दूर नहीं हुई हैं।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास स्थित 20 प्रमुख बाजारों के व्यापारी रैली की घोषणा के बाद से चिंतित हैं। कारोबारियों के सवाल हैं कि क्या 31 अक्टूबर से ही बैरिकेडिंग शुरू हो जाएगी, क्या प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए जाएंगे और क्या ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होगी। इन व्यवस्थाओं का असर खरीदारी और माल की आवाजाही पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    व्यापारियों ने रैली में शामिल होने वाले लोगों और वाहनों की संभावित संख्या पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, यदि आयोजकों के अनुमान के मुताबिक रैली में 10 लाख लोग और 15,000 से 20,000 वाहन पहुंचते हैं, तो पार्किंग की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी। सीटीआई का दावा है कि रामलीला मैदान के आसपास 200 वाहनों के लिए भी अधिकृत पार्किंग उपलब्ध नहीं है। संगठन के मुताबिक, इस आयोजन से करीब 21 प्रमुख बाजार सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

    सीटीआई ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, उस कार्यक्रम में 3,000 से 4,000 लोग शामिल हुए थे, लेकिन इसके कारण मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात प्रतिबंध लगाए गए और व्यापारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन का अनुमान है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित बड़ी रैली से पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।

    व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि रैली को भाई दूज के बाद, यानी 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। यदि तारीख बदलना संभव नहीं है, तो कार्यक्रम को रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कराने पर विचार किया जाए। उनका तर्क है कि इससे आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकता है।

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी राहुल गांधी के बयान को व्यापारियों की चिंताओं का समाधान नहीं माना। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेट्रो बंद करने और सड़कें सील करने की जरूरत पड़ी, तो प्रशासन ने ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की मुख्य चिंता त्योहारी सीजन में कारोबार को बड़े राजनीतिक आयोजनों के कारण होने वाले व्यवधान से बचाना है।

  • दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    नई दिल्ली । दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों का असर राजधानी के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में दुकानों को बंद रखना पड़ रहा है और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। इसका असर ऐसे समय में दिखाई दे रहा है, जब दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के कारण कारोबार में तेजी आने की उम्मीद रहती है। इस स्थिति को लेकर विभिन्न व्यापारी संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताई हैं और बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की मांग की है।

    राजधानी में केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। व्यापारियों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के कारण कई बाजारों में लोग खरीदारी के लिए आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि जब सड़कों पर प्रदर्शन होते हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी या असुरक्षा की आशंका रहती है, तो बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट जाती है। इससे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित होती है और त्योहारों के दौरान होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

    दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि दशहरा और दिवाली का समय बिजली की सजावटी लाइटों, झूमरों और घरों को सजाने वाले सामान के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन त्योहारों के दौरान लोग घरों और प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए बड़ी संख्या में सामान खरीदते हैं। ऐसे में बाजारों में मांग बढ़ने से व्यापारियों को साल के इस हिस्से में बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती है। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शनों के कारण उन्हें बिक्री प्रभावित होने की चिंता सता रही है।

    अजय शर्मा ने सरकार और प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की कि फिलहाल विरोध प्रदर्शनों को टालने पर विचार किया जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के कारण लोग सड़कों पर निकलने से डर रहे हैं। उनके मुताबिक, अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, जिससे विरोध भी दर्ज हो सके और आम लोगों तथा कारोबारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    व्यापारी संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि कारोबार में गिरावट का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। बाजारों में बिक्री कम होने पर सरकार को मिलने वाले कर राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी में कमी आने से व्यापारिक गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं, जिसका असर संबंधित कारोबार और उससे जुड़े लोगों की आय पर पड़ेगा।

    फोटो मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार सेठी ने कहा कि देश में त्योहारों का कारोबारी मौसम 15 अगस्त के बाद शुरू हो जाता है। रक्षाबंधन से लेकर दिवाली के बाद तक बाजारों में आम तौर पर खरीदारी और बिक्री का स्तर बेहतर रहता है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों की सालभर की कमाई का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इन चार महीनों में आता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान कारोबार प्रभावित होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    सेठी ने प्रदर्शनों के तरीके पर भी सवाल उठाए और इन गतिविधियों को अराजकता बताते हुए आरोप लगाया कि इनके जरिए देश की स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क पर भी भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखने का आरोप लगाया और अपनी बात रखते हुए नेपाल तथा श्रीलंका में हुए घटनाक्रमों से तुलना की। ये आरोप उनके निजी बयान के रूप में सामने आए हैं।

    सेठी ने सरकार से मांग की कि मध्य दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में प्रदर्शनों की अनुमति देने के मामले में विशेष ध्यान रखा जाए। व्यापारियों का कहना है कि विरोध और अपनी मांगें रखने के अधिकार के साथ बाजारों की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना भी जरूरी है। उनका आग्रह है कि ऐसी व्यवस्था हो, जिससे त्योहारों के दौरान ग्राहक बाजारों तक पहुंच सकें और व्यापारियों को लगातार कारोबार प्रभावित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

  • तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज

    तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश:
    की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारिक निवेश के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। तुअर दाल के कारोबार में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर एक कारोबारी से 65 लाख रुपए की राशि हासिल कर ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो माल की आपूर्ति की गई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी कारोबारी गिरीश रामनानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पहचान महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी गुरुशांतलिंग कुंभार और सोमनाथ हलगोदे से कई वर्ष पहले हुई थी। दोनों व्यापारियों से पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक लेन-देन हो चुका था। इसी पुराने परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें नए व्यापारिक निवेश का प्रस्ताव दिया।

    शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को तुअर दाल के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी फर्म के माध्यम से व्यापार में निवेश करने पर आकर्षक मुनाफा मिलने का दावा किया। फरवरी 2026 में एक आरोपी इंदौर पहुंचा और कारोबारी से मुलाकात की। इस दौरान उसने मोबाइल फोन पर बड़े पैमाने पर तुअर दाल के स्टॉक की तस्वीरें और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विवरण दिखाए। साथ ही निवेश करने पर कम समय में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा भी दिलाया।

    व्यापारिक अवसर को लाभदायक मानते हुए गिरीश रामनानी ने निवेश का निर्णय लिया। शिकायत के अनुसार उन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर कुल 65 लाख रुपए की व्यवस्था की। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में यह पूरी राशि आरोपियों द्वारा संचालित फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लेन-देन के दौरान कारोबारी को भरोसा दिलाया गया था कि तय समय के भीतर माल की आपूर्ति कर दी जाएगी और व्यापारिक लाभ भी मिलेगा।

    फरियादी का आरोप है कि रकम जमा होने के बाद आरोपियों का व्यवहार बदलने लगा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद तुअर दाल की खेप नहीं भेजी गई। जब माल की आपूर्ति को लेकर लगातार संपर्क किया गया तो आरोपियों ने विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगना शुरू कर दिया। कई बार बातचीत के बावजूद न तो व्यापार पूरा हुआ और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई।

    समय बीतने के साथ कारोबारी को संदेह हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने अपने स्तर पर आरोपियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और उपलब्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब धनराशि के लेन-देन, व्यापारिक दस्तावेजों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।

    यह मामला व्यापारिक निवेश के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति, फर्म और कारोबार की स्वतंत्र जांच करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका तथा धनराशि के उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल

    सोना खरीदने और ईंधन खपत कम करने की अपील पर विवाद, व्यापारियों और विपक्ष ने उठाए सवाल


    नई दिल्ली । देश में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संसाधनों के सीमित उपयोग और सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर की गई अपील के बाद राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बयान के बाद जहां विपक्षी दलों ने सरकार की आर्थिक स्थिति और नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी इसे लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है।

    प्रधानमंत्री द्वारा लगातार दो दिनों तक पेट्रोल-डीजल के सीमित इस्तेमाल और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील को कई लोग एहतियाती कदम मान रहे हैं, लेकिन व्यापारिक वर्ग का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक अपीलों का सीधा असर बाजार की गतिविधियों और लोगों की खरीदारी की मानसिकता पर पड़ता है। खासकर ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि सोना-चांदी की खरीद को लेकर पैदा हुई आशंका बाजार में मंदी ला सकती है।

    राजनीतिक मोर्चे पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो रही हो, तो सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच अचानक इस तरह की अपीलें आने से असमंजस की स्थिति पैदा होती है और इसका असर आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों पर भी पड़ता है।

    वहीं, सराफा व्यापार से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के रुख पर नाराज़गी जाहिर की है। व्यापारिक प्रतिनिधियों का कहना है कि देशभर में लाखों परिवार इस उद्योग पर निर्भर हैं और यदि बाजार में खरीदारी कम होती है, तो इसका असर सीधे रोजगार और छोटे कारोबारियों की आय पर पड़ेगा। उनका मानना है कि किसी भी बड़े फैसले या सार्वजनिक संदेश से पहले उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए थी।

    व्यापारियों का यह भी कहना है कि ज्वेलरी सेक्टर केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि देश की पारंपरिक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों में सोना-चांदी की खरीदारी लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रही है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता बाजार की गति को प्रभावित कर सकती है।

    इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि यदि जनता से बार-बार त्याग और खर्च कम करने की अपील की जा रही है, तो यह देश की आर्थिक चुनौतियों की ओर इशारा करता है। विपक्ष ने इसे आम लोगों पर मानसिक दबाव बनाने वाला कदम बताया है।

    हालांकि, सरकार की ओर से इन तमाम आशंकाओं को खारिज किया गया है। केंद्रीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि नागरिकों से केवल संसाधनों के जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की गई है, ताकि ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।

    फिलहाल, इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारिक जगत में भी नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर आगे क्या रुख अपनाती है और बाजार में इसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।