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  • बड़ी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,140 के पार बंद

    बड़ी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक चढ़ा और निफ्टी 23,140 के पार बंद

    नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में बंद हुए। सेंसेक्स में 0.43 प्रतिशत और निफ्टी में 0.34 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ। इससे पहले यह पिछले कारोबारी सत्र के 73,580.54 के स्तर से 54.61 अंक नीचे 73,525.92 पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 73,968.05 का उच्चतम स्तर छुआ। इस तरह इंट्रा-डे कारोबार में सूचकांक ने 387.51 अंक यानी करीब 0.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।

    निफ्टी 50 भी बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी में 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,140.50 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार की शुरुआत में निफ्टी पिछले बंद स्तर की तुलना में करीब 28 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,035 पर खुला था। दिन के दौरान इसने 23,162.70 का उच्चतम स्तर दर्ज किया, जो इंट्रा-डे आधार पर 99.60 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त थी।

    व्यापक बाजार की तस्वीर हालांकि पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि बाजार में अलग-अलग श्रेणियों के शेयरों में निवेशकों की गतिविधियां अलग-अलग रहीं।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑटो में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत निफ्टी सीमेंट, निफ्टी मीडिया, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में दबाव रहा। प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, पावरग्रिड, टाइटन और इंडिगो बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।

    दूसरी ओर मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, इंफोसिस, ओएनजीसी और ट्रेंट के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर बना रहा।

    बाजार के प्रदर्शन पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर का असर भी देखा गया। महंगाई को लेकर चिंता, विदेशी फंड की निकासी और उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव जैसे मुद्दे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने रहे। हालिया गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी से बाजार को समर्थन मिला।

    बाजार के 23,000 के स्तर से ऊपर बने रहने को घरेलू बाजार में मजबूती और घरेलू लिक्विडिटी से मिलने वाले समर्थन से जोड़कर देखा गया। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार के लिए निकट अवधि में महत्वपूर्ण कारक बने रह सकते हैं। बेहतर वैल्यूएशन और घरेलू विकास की संभावनाओं के बीच चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रहने से शुक्रवार को बाजार ने पिछले सत्र की गिरावट के बाद बढ़त के साथ सप्ताह का कारोबार समाप्त किया।

  • एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ में निवेश के लिए सोमवार को आखिरी मौका है। सब्सक्रिप्शन के अंतिम दिन इश्यू के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौजूदा स्थिति में जीएमपी 60 रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 59 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 3.31 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है।

    एनएसई के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कमजोरी देखने को मिली है। 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद जीएमपी करीब 218 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को जब आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, तब ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर या करीब 7.96 प्रतिशत था।

    अब अंतिम दिन तक जीएमपी घटकर 59 रुपये रह गया है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधिकारिक बाजार संकेतक नहीं माना जाता है। यह आईपीओ के इश्यू प्राइस से ऊपर अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। इसलिए जीएमपी का मौजूदा स्तर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।

    एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। इस आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी। ऐसे में आईपीओ के जरिए कंपनी के कारोबार में सीधे नई पूंजी का प्रवेश नहीं होगा।

    निवेशकों के बीच एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा है। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से कंपनी की आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। समीक्षा अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट है।

    आईपीओ के अंतिम दिन जीएमपी में आई कमी और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में दर्ज गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। इश्यू की अंतिम स्थिति और आगे शेयर की बाजार में लिस्टिंग का प्रदर्शन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • Share Market Holiday: 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद, कमोडिटी और EGR सेगमेंट में शाम पांच बजे बाद शुरू होगी ट्रेडिंग

    Share Market Holiday: 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद, कमोडिटी और EGR सेगमेंट में शाम पांच बजे बाद शुरू होगी ट्रेडिंग

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार, 14 सितंबर 2026 को देश के शेयर बाजार में कारोबार बंद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर आज सामान्य ट्रेडिंग नहीं होगी। बाजार की छुट्टी के कारण निवेशक इक्विटी समेत कई प्रमुख सेगमेंट में खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।

    आज इक्विटी सेगमेंट, डेरिवेटिव्स सेगमेंट और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग यानी SLB सेगमेंट में कारोबार पूरी तरह बंद रहेगा। इसके अलावा करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में भी सोमवार को कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। इस तरह इन सभी प्रमुख बाजार सेगमेंट में पूरे कारोबारी दिन गतिविधियां बंद रहेंगी।

    गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजार बंद रहने के साथ देश के कई सरकारी और निजी कार्यालयों में भी अवकाश है। इसके अलावा कई सरकारी और निजी बैंक भी सोमवार को बंद रहने वाले हैं। हालांकि, सभी कार्यालयों में छुट्टी होना जरूरी नहीं है और कुछ जगहों पर सामान्य कामकाज जारी रहेगा।

    शेयर बाजार में छुट्टी के बावजूद कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR सेगमेंट में आंशिक कारोबार की व्यवस्था रहेगी। इन सेगमेंट में सुबह का कारोबारी सत्र बंद रहेगा। शाम के सत्र में कारोबार दोबारा शुरू किया जाएगा।

    कमोडिटी बाजार में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होगी। यानी इक्विटी और अन्य प्रमुख सेगमेंट के विपरीत कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR सेगमेंट में दिन के दूसरे हिस्से में कारोबार किया जा सकेगा।

    बाजार बंद रहने की यह व्यवस्था गणेश चतुर्थी के अवसर पर लागू है। ऐसे में निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों के लिए सोमवार को शेयर बाजार की सामान्य गतिविधियां उपलब्ध नहीं रहेंगी। BSE की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आज संबंधित सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं होगी।

    अब बाजार अगले कारोबारी दिन मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को फिर से खुलेगा। उस दिन BSE और NSE पर सामान्य कारोबार शुरू होने की उम्मीद रहेगी। वहीं, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR सेगमेंट के लिए सोमवार शाम 5 बजे के बाद कारोबार का सत्र उपलब्ध रहेगा।

    गणेश चतुर्थी के कारण शेयर बाजार की छुट्टी निवेशकों के लिए कारोबारी कैलेंडर का हिस्सा है। इसलिए 14 सितंबर को इक्विटी, डेरिवेटिव्स, SLB, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में लेन-देन नहीं किया जा सकेगा। बाजार से जुड़े लोगों को अगले कारोबारी दिन यानी 15 सितंबर से सामान्य गतिविधियां फिर शुरू करनी होंगी।

    इस तरह सोमवार को शेयर बाजार की प्रमुख गतिविधियां बंद रहेंगी, जबकि कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR में शाम के सत्र में सीमित कारोबार जारी रहेगा। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि बाजार की छुट्टी केवल संबंधित ट्रेडिंग सेगमेंट के तय कार्यक्रम के अनुसार लागू है और मंगलवार से सामान्य कारोबार फिर शुरू होगा।

  • बीएसई में तकनीकी गड़बड़ी से एफएंडओ कारोबार प्रभावित, जेरोधा यूजर्स ने कीमतें अपडेट और ऑर्डर में दिक्कत की शिकायत

    बीएसई में तकनीकी गड़बड़ी से एफएंडओ कारोबार प्रभावित, जेरोधा यूजर्स ने कीमतें अपडेट और ऑर्डर में दिक्कत की शिकायत


    नई दिल्ली ।
    गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ समय के लिए ट्रेडिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। एक्सचेंज के अनुसार, सुबह 9:42 बजे कैश सेगमेंट के एक हिस्से और उससे जुड़े शेयरों में तकनीकी समस्या सामने आई। हालांकि, अन्य सभी सेगमेंट और पार्टिशन सामान्य रूप से काम करते रहे। तकनीकी टीम ने समस्या का समाधान किया और सुबह 10:08 बजे से सामान्य परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया।

    तकनीकी समस्या के सामने आने के बाद बाजार में सक्रिय कई ट्रेडर्स के बीच चिंता देखी गई। खासकर डेरिवेटिव कारोबार करने वाले यूजर्स ने कीमतों के अपडेट नहीं होने और ऑर्डर से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत की। कुछ ट्रेडर्स के लिए बाजार में उपलब्ध कीमतों में बदलाव समय पर दिखाई नहीं देने से ट्रेडिंग निर्णय लेना मुश्किल हुआ।

    इस दौरान जेरोधा के कई यूजर्स ने भी बीएसई पर एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतें अपडेट नहीं होने की शिकायत की। इसके बाद जेरोधा ने अपने ग्राहकों को बताया कि बीएसई पर कुछ फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों के अपडेट और ऑर्डर प्लेसमेंट से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। कंपनी ने कहा कि समस्या को जल्द दूर करने के लिए वह एक्सचेंज के साथ लगातार संपर्क में है।

    बाद में जेरोधा की ओर से जानकारी दी गई कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और दोपहर 1:03 बजे तक स्थिति सामान्य हो गई। हालांकि, इसके बावजूद कुछ ट्रेडर्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि तकनीकी परेशानी बीच-बीच में दोबारा सामने आती रही।

    कई यूजर्स ने शिकायत की कि कीमतें लंबे समय तक अपडेट नहीं हो रही थीं। कुछ ट्रेडर्स ने यह भी दावा किया कि उनके ऑर्डर समय पर न तो निष्पादित हो रहे थे और न ही रद्द हो पा रहे थे। कुछ निवेशकों ने सेंसेक्स कॉल ऑप्शंस की कीमतें स्थिर रहने और नए ऑर्डर प्लेस नहीं कर पाने की भी शिकायत की।

    एक निवेशक ने कहा कि करीब 15 मिनट तक कीमतें अपडेट नहीं हो रही थीं और ऐसी स्थिति में संभावित नुकसान की जिम्मेदारी को लेकर चिंता है। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि समस्या दोबारा सामने आने पर उसका ऑर्डर रद्द नहीं हो पाया। इस तरह कीमतों के अपडेट और ऑर्डर प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी परेशानियों ने एफएंडओ ट्रेडर्स की चिंता बढ़ाई।

    यह तकनीकी समस्या ऐसे समय सामने आई, जब सेंसेक्स का साप्ताहिक एफएंडओ एक्सपायरी सेशन था। एक्सपायरी वाले दिन बाजार में आमतौर पर ट्रेडिंग गतिविधियां और उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसे में कीमतों के अपडेट या ऑर्डर निष्पादन में तकनीकी बाधा ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    एफएंडओ एक्सपायरी के दौरान बाजार में छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव भी ट्रेडर्स की पोजीशन और संभावित मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इस तरह के सत्र में ट्रेडिंग सिस्टम और कीमतों की जानकारी का समय पर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    तकनीकी व्यवधान के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की कमजोरी के साथ खुला, जबकि निफ्टी मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    बीएसई और जेरोधा की ओर से तकनीकी समस्या के समाधान की जानकारी दिए जाने के बाद परिचालन सामान्य हुआ। हालांकि, इस घटना से ट्रेडिंग सिस्टम की तकनीकी स्थिरता और भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत फिर सामने आई है। खासकर ऐसे समय में जब खुदरा निवेशकों की बाजार में भागीदारी बढ़ रही है और एफएंडओ कारोबार में गतिविधियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।

  • वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने अगस्त समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार में किया बड़ा फेरबदल, 31 अगस्त से प्रभावी होंगे बदलाव।

    वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने अगस्त समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार में किया बड़ा फेरबदल, 31 अगस्त से प्रभावी होंगे बदलाव।


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई अर्थात मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल ने अपनी अगस्त की आवधिक समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। इस नवीनतम समीक्षा के अंतर्गत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित चार नई कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में स्थान दिया गया है। इसके विपरीत तीन कंपनियों को इस सूचकांक से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह सभी पुनर्संतुलन 31 अगस्त के कारोबार की समाप्ति के पश्चात आधिकारिक रूप से प्रभावी कर दिए जाएंगे।

    एमएससीआई द्वारा जारी विवरण के अनुसार, मुख्य सूचकांक में शामिल की गई अन्य कंपनियां मुख्य रूप से पूंजी बाजार और फार्मास्यूटिकल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबद्ध रखती हैं। वैश्विक सूचकांक में कंपनियों का चयन उनके बाजार पूंजीकरण, तरलता और फ्री-फ्लोट जैसे कड़े वैश्विक मानकों के आधार पर किया जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर यह निर्धारित होता है कि किस कंपनी का सूचकांक में प्रवेश होगा अथवा किसे बाहर किया जाएगा।

    मुख्य सूचकांक के साथ-साथ एमएससीआई इंडिया डोमेस्टिक स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बड़ा पुनर्गठन देखने को मिला है। इस स्मॉल कैप सूचकांक में 12 नए शेयरों को स्थान दिया गया है, जबकि 19 शेयरों को सूचकांक से हटा दिया गया है। इस प्रकार स्मॉल कैप श्रेणी में सात कंपनियों की शुद्ध कमी दर्ज की गई है। इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन की प्रक्रिया प्रारंभ होने की संभावना है।

    एमएससीआई इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक और पैसिव फंड मुख्य बेंचमार्क के रूप में उपयोग करते हैं। जब भी इस सूचकांक में कोई बदलाव होता है, तब अंतरराष्ट्रीय फंड प्रबंधक अपने पोर्टफोलियो को नए वेटेज के अनुसार पुनर्संतुलित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप संबंधित कंपनियों के शेयरों में भारी मात्रा में विदेशी पूंजी का आगमन या निकासी देखने को मिलती है। एमएससीआई का भारत केंद्रित सूचकांक भारतीय इक्विटी बाजार के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

    बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस समीक्षा के बाद भारतीय शेयर बाजार में अरबों रुपये का पैसिव निवेश प्रवाह आ सकता है। पूर्व में भी यह संभावना व्यक्त की गई थी कि कुछ बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां स्मॉल कैप श्रेणी से पदोन्नत होकर स्टैंडर्ड इंडेक्स का हिस्सा बन सकती हैं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजरें इन बदलावों के बाद होने वाले पूंजी प्रवाह पर टिकी हुई हैं।

    एमएससीआई की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद संबंधित कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी का रुझान देखा गया। विशेष रूप से अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में शुरुआती सत्र में ही बढ़त दर्ज की गई। लंबे समय के वित्तीय प्रदर्शन के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कंपनी के शेयर ने पिछले वर्षों में निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न प्रदान किया है। इस वैश्विक सूचकांक में शामिल होने से कंपनी के शेयरों में अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रवाह और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    नई दिल्ली । भारतीय बुलियन और सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वर्ष की शुरुआत में सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद अब सोने के दामों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रिकॉर्ड स्तर से करीब 37 हजार रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या यह नए निवेश का सही समय है या अभी कीमतों में और सुधार देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक बाजार के रुझानों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण सोने की वैश्विक दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जनवरी महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब घटकर करीब 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इसी के प्रभाव से भारतीय बाजार में भी कीमतें एक लाख अस्सी हजार रुपये के पीक स्तर से गिरकर एक लाख तैंतालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में इस नरमी का मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां हैं। अमेरिका में महंगाई पर नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही कड़ी मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर होने के कारण निवेशक फिक्स्ड रिटर्न देने वाले अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि सोना कोई प्रत्यक्ष ब्याज या लाभांश प्रदान नहीं करता, इसलिए उच्च ब्याज दर के दौर में इसकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

    बाजार के दीर्घकालिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि सोने ने ऐतिहासिक रूप से निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न दिया है। पिछले तीन दशकों के दौरान इस पीली धातु के मूल्यों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। यद्यपि अल्पकालिक अवधि में भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक नीतियों के कारण इसमें बड़े उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से इसे हमेशा से एक मजबूत परिसंपत्ति माना जाता रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से किस्तों में खरीदारी करना अधिक जोखिम-रहित रणनीति हो सकती है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार के रुझानों और नीतिगत निर्णयों के आधार पर कीमतों में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • शेयर बाजार में बढ़ते नए निवेशकों के बीच NSE IPO बना चर्चा का केंद्र, बाजार की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है यह बड़ा अवसर

    शेयर बाजार में बढ़ते नए निवेशकों के बीच NSE IPO बना चर्चा का केंद्र, बाजार की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है यह बड़ा अवसर


    नई दिल्ली। देश में निवेश की दुनिया तेजी से बदल रही है और पिछले कुछ वर्षों में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक समय था जब अधिकतर लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक विकल्पों को प्राथमिकता देते थे। सुरक्षित रिटर्न और कम जोखिम के कारण यह निवेश का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता था। लेकिन बदलते आर्थिक माहौल, तकनीक की पहुंच और बढ़ती वित्तीय जागरूकता ने निवेशकों की सोच को नई दिशा दी है। अब बड़ी संख्या में लोग शेयर बाजार की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

    बीते कुछ वर्षों में शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पहले जहां निवेश केवल बड़े शहरों या सीमित वर्ग तक केंद्रित था, वहीं अब छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक बाजार की पहुंच बढ़ चुकी है। मोबाइल आधारित निवेश सुविधाओं और आसान डिजिटल प्रक्रियाओं ने करोड़ों लोगों को बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही कारण है कि निवेश की संस्कृति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

    इसी बदलते माहौल के बीच अब एक बड़े संभावित आईपीओ को लेकर निवेशकों की उत्सुकता तेजी से बढ़ रही है। बाजार में इस संभावित पेशकश को लेकर काफी चर्चा हो रही है और इसे भारतीय पूंजी बाजार की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है। निवेशकों के बीच इसकी चर्चा केवल आकार को लेकर नहीं बल्कि इसके प्रभाव को लेकर भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य आईपीओ नहीं बल्कि बाजार के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा अवसर बन सकता है।

    वित्तीय बाजार में मजबूत पहचान रखने वाली संस्थाएं निवेशकों के बीच हमेशा विशेष आकर्षण रखती हैं। ऐसे संस्थानों की कारोबारी संरचना, बाजार में पकड़ और लंबे समय की भूमिका उन्हें अन्य कंपनियों से अलग बनाती है। यही वजह है कि निवेशक इस संभावित अवसर को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अवसर निवेशकों को लंबे समय के नजरिए से भी आकर्षित कर सकते हैं।

    हालांकि निवेश को लेकर उत्साह जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही जरूरी सावधानी भी मानी जाती है। किसी भी बड़े आईपीओ को लेकर चर्चा और उत्साह अक्सर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा देता है, लेकिन केवल लोकप्रियता के आधार पर निर्णय लेना समझदारी नहीं माना जाता। निवेश से पहले कंपनी की स्थिति, कारोबार मॉडल, आय के स्रोत और भविष्य की संभावनाओं को समझना आवश्यक होता है। बाजार में अवसरों के साथ जोखिम भी मौजूद रहते हैं और संतुलित निर्णय हमेशा बेहतर माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार का दायरा और अधिक बढ़ सकता है। नई पीढ़ी का निवेश के प्रति बढ़ता रुझान, डिजिटल माध्यमों का विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। ऐसे माहौल में बड़े निवेश अवसरों को लेकर उत्साह स्वाभाविक है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर इसी संभावित बड़ी पेशकश पर टिकी हुई है। बाजार में लगातार यह चर्चा हो रही है कि आने वाले समय में यह अवसर निवेश जगत में एक नया अध्याय जोड़ सकता है और निवेशकों के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकता है।

  • निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर

    निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर


    नई दिल्ली।इस सप्ताह कीमती धातुओं के बाजार में कमजोरी का माहौल देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों ही मुनाफावसूली के दबाव में आ गए। शुरुआती मजबूती के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का रुझान गिरावट की ओर ही रहा।

    सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 0.34 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। हफ्ते के अंत में इसमें मामूली सुधार हुआ और कीमत करीब 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई। दिन के दौरान सोने ने 1,53,164 रुपये का उच्च स्तर और 1,50,750 रुपये का निचला स्तर छुआ, जो बाजार में जारी अस्थिरता को दर्शाता है। पूरे सप्ताह में सोना करीब 523 रुपये सस्ता हो गया, जो यह बताता है कि निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    चांदी के मामले में गिरावट और ज्यादा गहरी रही। एक हफ्ते के दौरान इसकी कीमत में 7,000 रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई। हालांकि अंतिम कारोबारी दिन इसमें तेजी आई और यह करीब 2,44,321 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दिनभर के कारोबार में चांदी ने 2,45,555 रुपये का उच्च स्तर और 2,38,291 रुपये का निचला स्तर छुआ, जिससे इसके दामों में तेज उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह मुनाफावसूली रही। जब कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो निवेशक लाभ सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे घटनाक्रमों ने भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक हल निकलने की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश की मांग को थोड़ा कमजोर किया, जिससे सोने और चांदी पर दबाव पड़ा।

    हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को कुछ समर्थन दिया, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों की आकर्षण क्षमता बढ़ती है। इसके बावजूद बाजार में मजबूत तेजी नहीं आ सकी, क्योंकि निवेशक अभी भी अनिश्चित परिस्थितियों को लेकर सतर्क हैं। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन यह तेजी को स्थायी रूप नहीं दे सकी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट की आशंका है और न ही मजबूत तेजी के स्पष्ट संकेत। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की चाल और आर्थिक नीतियां कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगी। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ रणनीति बनानी होगी, क्योंकि बाजार में अस्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।