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  • उज्जैन में स्कूल बसों पर चला सुरक्षा का चाबुक: 70 वाहनों की जांच, फिटनेस से लेकर सीसीटीवी तक की हुई पड़ताल

    उज्जैन में स्कूल बसों पर चला सुरक्षा का चाबुक: 70 वाहनों की जांच, फिटनेस से लेकर सीसीटीवी तक की हुई पड़ताल


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और यातायात पुलिस पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। स्कूल खुलने के साथ ही शहर में छात्र परिवहन वाहनों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बुधवार और गुरुवार को यातायात पुलिस द्वारा विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया, जिसके तहत करीब 70 स्कूल बसों और अन्य छात्र परिवहन वाहनों का निरीक्षण किया गया।

    अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हाल के वर्षों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि नए सत्र के पहले ही सप्ताह में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा शुरू कर दी गई है।

    मोहन नगर चौराहे पर आयोजित इस विशेष जांच अभियान में ट्रैफिक डीएसपी विक्रम कनपुरिया, डीएसपी दिलीप परिहार और यातायात थाना प्रभारी सूबेदार इंद्रपाल सिंह सहित पुलिस अधिकारियों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने एक-एक वाहन की बारीकी से जांच कर सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण किया।

    जांच के दौरान स्कूल बसों की फिटनेस को विशेष रूप से परखा गया। साथ ही यह भी देखा गया कि वाहन के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इसके अलावा अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरों जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी जांच की गई। अधिकारियों ने वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, अनुभव और परिचालकों की उपलब्धता की भी जानकारी ली।

    यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अभियान चलाया गया है। स्कूल वाहन संचालकों और प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। जिन वाहनों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।

    अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को यह भी समझाया कि बच्चों के परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी परीक्षण बेहद आवश्यक है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए सभी सुरक्षा उपकरण हमेशा कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए।

    यातायात पुलिस ने साफ किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। समय-समय पर स्कूल बसों और छात्र परिवहन वाहनों की जांच की जाएगी ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। पुलिस का मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और अभिभावकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

    नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ शुरू हुआ यह अभियान स्कूल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल वाहन संचालकों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक भरोसा मिलेगा।

  • झाबुआ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस का शिकंजा, 14 बाइक चालकों पर कार्रवाई; 5 वाहन जब्त

    झाबुआ में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस का शिकंजा, 14 बाइक चालकों पर कार्रवाई; 5 वाहन जब्त


    मध्यप्रदेश । झाबुआ शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ रविवार देर शाम पुलिस ने सख्त अभियान चलाया। सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए गए इस विशेष अभियान में तेज रफ्तार से वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने, बिना नंबर प्लेट के वाहन चलाने तथा नियमों के विपरीत नंबर प्लेट का उपयोग करने वाले बाइक चालकों पर कार्रवाई की गई।

    पुलिस अधीक्षक Devendra Patidar के निर्देश पर यातायात विभाग ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान संचालित किया। यातायात सूबेदार धर्मेंद्र पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने प्रमुख मार्गों के साथ-साथ शहर की आंतरिक गलियों में भी निगरानी रखी, ताकि नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों को चिन्हित किया जा सके।

    अभियान के दौरान पुलिस ने ऐसे वाहन चालकों को रोका जो बिना नंबर प्लेट के वाहन चला रहे थे या जिनकी नंबर प्लेट पर निर्धारित मानकों के विपरीत शब्द और प्रतीक अंकित थे। इसके अलावा तेज गति से बाइक चलाने और एक ही वाहन पर तीन लोगों के सवार होने जैसी यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।

    यातायात विभाग के अनुसार अभियान के दौरान कुल 14 बाइकों को पकड़ा गया। इनमें से 5 वाहनों को गंभीर नियम उल्लंघन के कारण जब्त कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि इन वाहनों को न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही छोड़ा जाएगा। शेष वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई।

    पुलिस ने विभिन्न मामलों में जुर्माना लगाते हुए कुल 5 हजार रुपए की राशि वसूल की। अधिकारियों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया।

    यातायात विभाग ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे हेलमेट का उपयोग करें, निर्धारित गति सीमा का पालन करें और वाहन से संबंधित सभी दस्तावेज अपने साथ रखें। साथ ही नंबर प्लेट को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने और यातायात नियमों का पालन करने की भी सलाह दी गई है।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शहर में ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

    इस अभियान में यातायात विभाग के कई पुलिसकर्मियों ने भाग लिया और नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित

    दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में सड़क हादसों ने 2025 में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जनवरी 2026 के न्यूजलेटर के अनुसार बीते साल 649 लोगों की मौत हुई और 1 738 लोग घायल हुए। इनमें पैदल यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रही। आंकड़े बताते हैं कि निजी कारों की चपेट में आने से 92 दोपहिया वाहनों से 75 और भारी वाहनों से 43 पैदल यात्रियों की मौत हुई।

    तेज रफ्तार लापरवाही यातायात नियमों का उल्लंघन और सुरक्षित पारपथों की कमी हादसों के मुख्य कारण हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने 13 जनवरी को दोपहिया वाहनों की जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली में 70 पुलिस कर्मियों और 200 से अधिक लोग शामिल हुए। रैली का उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों के बीच सड़क सुरक्षा नियमों और हेलमेट के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता फैलाना था। अधिकारियों ने जोर दिया कि आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

    सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए सख्ती भी बढ़ाई गई। दिसंबर 2025 में गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ 42 945 चालान किए गए जो पिछले साल के 8 854 मामलों से कई गुना अधिक है। इनमें दोपहिया वाहन चालक सबसे आगे थे जिनके खिलाफ 30 224 चालान किए गए। जनवरी 2026 में पहली बार भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत 173 FIR दर्ज की गईं। इस धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की कैद या 1 000 रुपये तक का जुर्माना और वाहन ज़ब्त किया जा सकता है।

    ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाना सड़क हादसों की बड़ी वजह है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें सतर्क रहें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। सड़क पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ा चुनौती बन चुका है।
    यह आंकड़े और उपाय दर्शाते हैं कि दिल्ली में सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए केवल कानून नहीं बल्कि जागरूकता और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही जरूरी है

  • ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर। नए साल 2026 की शुरुआत शहर में कुछ अलग अंदाज में हुई। इंदरगंज चौराहे पर आयोजित दूध अभियान में लोगों ने शराब छोड़कर दूध पीकर नववर्ष का स्वागत किया। एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयास से यह अनोखा अभियान चलाया गया।सुबह-सुबह पंडाल पर 2 क्विंटल केसरिया दूध तैयार कर निशुल्क वितरण किया गया। राहगीरों, वाहन चालकों, युवाओं और बुजुर्गों ने रुककर दूध पिया और अभियान का समर्थन किया। एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने खुद लोगों को दूध दिया और नशामुक्त नववर्ष का संदेश फैलाया। पंडाल के आसपास बड़े-बड़े बैनरों और साउंड सिस्टम के जरिए संदेश दिया गया-दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।

    आयोजकों का कहना है कि नए साल पर शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। युवाओं में नशे की लत चिंता का विषय है। इसी चुनौती के समाधान के लिए यह अभियान शुरू किया गया।दूध वितरण कार्यक्रम में लोगों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोगों ने इसे नए साल की सबसे अच्छी और सार्थक शुरुआत बताया। युवाओं ने कहा कि ऐसे अभियान नशे के प्रति सोच बदलने में मददगार हैं। स्थानीय निवासियों ने आयोजन की सराहना की और इसे आगे जारी रखने की मांग की।

    यातायात पुलिस ने भी मौके पर लोगों से नशे में वाहन न चलाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जश्न वही बेहतर है, जो खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।ग्वालियर की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सार्वजनिक जागरूकता का संदेश है। नए साल की सुबह दूध के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि जश्न और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। शहर की इस अनोखी शुरुआत ने साबित कर दिया कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है।

  • भोपाल में ट्रैफिक नियंत्रण के लिए रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक वन-वेरांग साइड से आए तो होगा चालान

    भोपाल में ट्रैफिक नियंत्रण के लिए रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक वन-वेरांग साइड से आए तो होगा चालान


    भोपाल।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। अब रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक ट्रैफिक एकतरफा यानी वन-वे कर दिया गया है। यह निर्णय पुराने शहर की सड़कों पर यातायात की समस्या को ध्यान में रखते हुए लिया गया हैजहां दिनभर भारी ट्रैफिक दबाव बना रहता है। इस मार्ग को नए और पुराने शहर को जोड़ने वाला सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता हैजिस पर रोजाना लगभग एक लाख वाहन गुजरते हैं।
    सख्त ट्रैफिक नियंत्रण के उपाय

    रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक का मार्गजो कि भोपाल के पुराने इलाके का प्रमुख रास्ता हैअब पूरी तरह वन-वे हो गया है। इससे पहले इस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बहुत अधिक होता थाजिसके कारण लंबे समय से यातायात व्यवस्था में गड़बड़ी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था। पुलिस ने इस समस्या से निपटने के लिए रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक वाहनों की आवाजाही को एकतरफा करने का निर्णय लिया हैताकि ट्रैफिक की गति को नियंत्रित किया जा सके और दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम किया जा सके।

    इसके तहत अब वापसी के लिए अलग वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया गया हैजिससे यात्री अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकें। लेकिनयदि कोई वाहन चालक रांग साइड से इस मार्ग पर प्रवेश करता हैतो उसे चेकिंग प्वाइंट्स पर पकड़कर चालान किया जाएगा। पुलिस ने इस व्यवस्था के तहत नियमों को कड़ा करने का निर्णय लिया है ताकि शहर में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुचारू और सुरक्षित बनाया जा सके।

    आईटीएमएस कैमरे की निगरानी

    पुलिस ने ट्रैफिक की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए कई स्थानों पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कैमरे भी लगाए हैं। इन कैमरों से यातायात की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगीऔर रांग साइड से वाहन चलाने वालों को पकड़ा जाएगा। यह कदम शहर में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए उठाया गया हैताकि नियमों का पालन सख्ती से किया जा सके और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

    ट्रैफिक समस्या और वन-वे का महत्व

    भोपाल के पुराने शहर की सड़कों पर रोजाना लगभग एक लाख वाहन गुजरते हैंजिससे ट्रैफिक का दबाव दिनभर बना रहता है। रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक का मार्ग इस क्षेत्र का प्रमुख यातायात मार्ग हैऔर यह दोनों शहरों को जोड़ता है। इस मार्ग पर अत्यधिक ट्रैफिक होने के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती थीजिससे आम जनजीवन प्रभावित होता था। इस समस्या को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की हैजो आने वाले समय में ट्रैफिक के दबाव को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

    आगे की योजना और जागरूकता

    पुलिस ने ट्रैफिक के इस नए नियम को लागू करने के बाद अब जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई हैताकि लोग इस नए ट्रैफिक नियम को समझें और उसका पालन करें। पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे रांग साइड से वाहन न चलाएं और नए नियमों का पालन करें। इसके अलावापुलिस ने चालानी कार्रवाई को कड़ा करते हुए यह स्पष्ट किया है कि इस नियम का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    भोपाल में ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए रेतघाट से भोपाल टॉकीज तक वन-वे व्यवस्था लागू करना एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है। इस कदम से जहां एक ओर यातायात की समस्या को हल करने में मदद मिलेगीवहीं दूसरी ओर दुर्घटनाओं को भी रोका जा सकेगा। पुलिस की ओर से नियमों की सख्ती से पालन कराने और आईटीएमएस कैमरों की मदद से ट्रैफिक की निगरानी को और बेहतर बनाया जाएगा। इस तरह की ट्रैफिक सुधार योजनाएं अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती हैं।

  • जानें—कार में ब्लैक-फिल्म लगाने पर कितना जुर्माना लगता है, किसे है छूट..

    जानें—कार में ब्लैक-फिल्म लगाने पर कितना जुर्माना लगता है, किसे है छूट..


    नई दिल्ली/ हाल ही में देश के कई राज्यों में कारों पर ब्लैक या टिंटेड फिल्म लगाने वालों पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। दिल्ली यातायात पुलिस ने सिर्फ एक हफ्ते में 2,235 से अधिक चालान काटे, जबकि उत्तर प्रदेश के मेरठ में ‘ऑपरेशन ब्लैक कैट’ चलाकर तीन दिन में 454 वाहनों पर चालान किए गए। आंकड़े बताते हैं कि लाखों लोग अब भी इस नियम को या तो जानते नहीं, या जानबूझकर उसका उल्लंघन करते हैं। सिर्फ दिल्ली में पिछले एक साल में 20,232 चालान ब्लैक फिल्म को लेकर किए गए। लेकिन आखिर ब्लैक फिल्म हटाने पर इतनी कड़ाई क्यों है? इसका सीधा संबंध सड़क सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा से है।

    लोग ब्लैक फिल्म क्यों लगवाते हैं?
    अक्सर कार मालिक कुछ कारणों से ब्लैक/टिंटेड फिल्म लगवा लेते हैं- कार के अंदर गर्मी को कम करने के लिए  ज़्यादा प्राइवेसी पाने के लिए मॉडिफिकेशन और लग्जरी लुक के शौक के चलते  कानून की जानकारी न होने के कारण  लेकिन फायदे के बावजूद यह पूरी तरह अवैध है-चाहे फिल्म हल्की ही क्यों न हो या VLT मानकों को पूरा करती हो।

    कानून क्या कहता है?
    इस विषय में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबसे महत्वपूर्ण है।सुप्रीम कोर्ट का 2012 का आदेश Abhishek Goenka vs Union of India कोर्ट ने साफ कहा- कार खरीदने के बाद बाहर से किसी भी प्रकार की फिल्म लगवाना गैर-कानूनी है, चाहे वह ब्लैक हो, कलर्ड हो, स्मोक्ड हो या हल्की ही क्यों न हो।पुलिस को अधिकार है कि वह मौके पर फिल्म उतरवाए और चालान करे।

    CMVR नियम 100 (1989)
    यह नियम फैक्ट्री में बने ग्लास के VLT Visible Light Transmission मानक तय करता है-फ्रंट और रियर विंडशील्ड – कम से कम 70% विजिबिलिटी साइड विंडो – कम से कम 50% विजिबिलिटी अर्थात् कार कंपनियां हल्का टिंट दे सकती हैं लेकिन यह फैक्ट्री से ही होना चाहिए और मानक के भीतर होना चाहिए। बाजार में लगवाई गई कोई भी फिल्म अवैध है।

    ब्लैक फिल्म से होने वाले खतरे

    1. सड़क सुरक्षा को बड़ा जोखिम
    ब्लैक या स्मोक्ड फिल्म से विजिबिलिटी 40–70% तक कम हो जाती है।
    रात, धुंध, बारिश या हाईवे पर इससे दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

    2. अपराधों को बढ़ावा
    पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि- ब्लैक फिल्म के कारण कार के अंदर क्या हो रहा है, यह बाहर से दिखाई नहीं देता। अपहरण, छेड़छाड़, तस्करी और कई आपराधिक गतिविधियों में ऐसे वाहनों का उपयोग बढ़ता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।

    कितना जुर्माना लगता है?

    अधिकतर राज्यों में चालान- 100 से 1,000 कुछ राज्यों में इसे बढ़ाकर- ₹2,000 तक कर दिया गया है। बार-बार पकड़े जाने पर जुर्माना और अधिक लगाया जा सकता है। पुलिस मौके पर फिल्म उतरवाने का अधिकार भी रखती है।

    किन लोगों को छूट मिलती है?

    केवल Z+ या Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त VIPs को वह भी सरकारी अनुमति पत्र के साथ।
    Ministers, MPs, MLAs, Judges-किसी को भी व्यक्तिगत छूट नहीं। छूट सिर्फ विशेष सुरक्षा श्रेणी के लिए है। फिल्म हटाने का सुरक्षित तरीका फिल्म को खींचकर नहीं उतारें। हेयर ड्रायर या हीट गन से ग्लास को हल्का गर्म करें। किनारे से धीरे-धीरे फिल्म निकालें। बचा गोंद ग्लास क्लीनर या साबुन-पानी से साफ करें।

    क्या इससे इंश्योरेंस क्लेम पर असर पड़ता है?

    हाँ! अवैध मॉडिफिकेशन होने पर- क्लेम कम किया जा सकता है या पूरी तरह रिजेक्ट भी हो सकता है अगर पहले चालान हो चुका है  तो बीमा कंपनी इसे रूल वायलेशन मानकर केस और सख्ती से जांचती है।

    पुलिस कैसे जांच करती है?

    VLT मीटर टिंट मीटर से विजुअल इंस्पेक्शन – अगर फिल्म साफ दिख रही हो, तो चालान तुरंत

     किया जाता है।