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  • दिल्ली में आज से पुराने वाहनों की एंट्री बंद, नियम तोड़ने पर लगेगा 20 हजार रुपये तक जुर्माना…

    दिल्ली में आज से पुराने वाहनों की एंट्री बंद, नियम तोड़ने पर लगेगा 20 हजार रुपये तक जुर्माना…


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली-NCR में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वाहनों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी गई है। 1 नवंबर 2026 से राजधानी में दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-6 से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया गया है। इस फैसले का सीधा असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाने वाले वाहन चालकों पर भी पड़ेगा। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन चालकों को 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

    प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें लोगों से दिल्ली जाने से पहले अपने वाहन का उत्सर्जन मानक जांचने और लागू प्रतिबंधों की जानकारी लेने की अपील की गई है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-6 से कम मानक वाले वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। ऐसे में नोएडा और ग्रेटर नोएडा से राजधानी जाने वाले लोगों को अपनी गाड़ी के दस्तावेज और श्रेणी की जांच करना जरूरी होगा।

    नए प्रतिबंधों के तहत यात्री बसों और भारी माल ढोने वाले ट्रकों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। वहीं, BS-6 मानक वाले वाहनों के साथ CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को निर्धारित शर्तों के अनुसार दिल्ली में प्रवेश की अनुमति रहेगी। इससे पहले वाहन चालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी गाड़ी संबंधित नियमों के दायरे में आती है या नहीं।

    पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को लेकर भी सख्ती बरती जा रही है। जारी एडवाइजरी के मुताबिक, 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध का पालन कराया जाएगा। यह व्यवस्था ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लागू प्रतिबंधों से जुड़ी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त किया जा सकता है और उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

    BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल श्रेणी के ऐसे पुराने वाहन, जो दूसरे राज्यों में पंजीकृत हैं, यदि प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर चलते पाए जाते हैं तो उन पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए वाहन चालकों को केवल अपनी गाड़ी की उम्र ही नहीं, बल्कि उसका BS उत्सर्जन मानक भी जांचना होगा। दोनों के आधार पर लागू नियम अलग-अलग हो सकते हैं।

    दिल्ली से होकर दूसरे राज्यों की ओर जाने वाले वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग भी सुझाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे या यमुना एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करके वाहन चालक जीरो पॉइंट, परी चौक, कस्बा कासना और सिरसा होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद वहां से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सकते हैं। इस मार्ग से दिल्ली के प्रतिबंधित रास्तों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अनावश्यक रूप से निजी वाहनों का इस्तेमाल नहीं करने और संभव होने पर सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की है। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव और प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। यातायात संबंधी जानकारी या परेशानी के लिए लोग हेल्पलाइन नंबर 9971009001 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा व्हाट्सऐप नंबर 7065100100 और आधिकारिक एक्स हैंडल @noidatraffic के जरिए भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    ऐसे में नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाने की योजना बना रहे लोगों के लिए जरूरी है कि वे घर से निकलने से पहले अपने वाहन का BS मानक, पंजीकरण और लागू प्रतिबंधों की जानकारी जरूर जांच लें। लापरवाही की स्थिति में जुर्माने के साथ वाहन जब्त होने की कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

  • शिवपुरी में नो एंट्री के बावजूद घुसा ईंटों से भरा ट्रक, रामकिशन के दोनों पैर कुचले, व्यवस्था पर उठे सवाल

    शिवपुरी में नो एंट्री के बावजूद घुसा ईंटों से भरा ट्रक, रामकिशन के दोनों पैर कुचले, व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश। शिवपुरी शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक और यातायात व्यवस्था के पालन को लेकर एक हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं। शहर के फतेहपुर क्षेत्र में पुलिस सहायता केंद्र के सामने ईंटों से भरे एक ट्रक की चपेट में आने से रामकिशन आदिवासी के दोनों पैर कुचल गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाने के बाद उनकी हालत को देखते हुए शासकीय मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में भर्ती कराया गया।

    जानकारी के अनुसार, शिवपुरी निवासी 35 वर्षीय रामकिशन आदिवासी रविवार सुबह करीब 10:30 बजे फतेहपुर में पुलिस सहायता केंद्र के सामने स्थित तिराहे पर खड़े थे। इसी दौरान बड़ौदी की ओर से ईंटों से भरा एक ट्रक वहां पहुंचा। ट्रक का पंजीकरण नंबर यूपी 78 डीएन 1927 बताया गया है। तिराहे पर मुड़ते समय रामकिशन ट्रक के पहियों की चपेट में आ गए।

    इस हादसे में उनके दोनों पैर ट्रक के पहियों के नीचे आ गए, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए। एक पैर में गंभीर चोट आने की जानकारी भी सामने आई है। घटनास्थल से उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए बाद में उन्हें शासकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। घटना के बाद क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और नो एंट्री के नियमों के पालन को लेकर चिंता जताई जा रही है।

    हादसे की जगह को लेकर भी यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दुर्घटना फतेहपुर पुलिस सहायता केंद्र के सामने हुई, जबकि थीम रोड पर बड़ौदी स्थित चिंकारा प्लांटेशन के पास वन नाका मौजूद है। इसी स्थान के सामने से फतेहपुर की ओर जाने वाली पक्की सड़क जुड़ती है। इस मार्ग से शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने हाइट लिमिट पोल लगाया था।

    हालांकि, कुछ समय बाद किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से यह पोल टूट गया। इसके बाद इसे दोबारा लगाने की दिशा में कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में भारी वाहनों को निर्धारित सीमा के भीतर रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लंबे समय से प्रभावी नहीं है। स्थानीय यातायात व्यवस्था में इस कमी को हादसे के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यातायात पुलिस के अनुसार, नो एंट्री के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई जारी है। यातायात थाना शिवपुरी के प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि जनवरी से अब तक 78 वाहनों के चालान काटे गए हैं और उनसे 3.90 लाख रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है। उन्होंने कहा कि यदि नगर पालिका हाइट लिमिट पोल दोबारा लगा देती है, तो भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने में मदद मिलेगी।

    वहीं, संबंधित व्यवस्था को लेकर दिन के समय नो एंट्री में ट्रक और डंपरों का प्रवेश रोकने के लिए कदम उठाने की बात कही गई है। बड़ौदी वन नाके पर पहले लगे हाइट लिमिट पोल के बारे में जानकारी जुटाने और निर्धारित स्थान पर इसे फिर से लगवाने की बात भी कही गई है।

    रामकिशन के साथ हुए हादसे ने शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और नो एंट्री के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। अब इस मामले में हाइट लिमिट पोल दोबारा लगाने और प्रतिबंधित समय में भारी वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

  • शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन

    शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर धार्मिक उत्सव और प्रतिमा विसर्जन की गतिविधियां तेज रहेंगी। खटीक मोहल्ले में विराजमान मां काली की प्रतिमा को श्रद्धालु पालकी में बैठाकर भव्य शोभायात्रा के साथ विसर्जन स्थल गणेश कुंड तक ले जाएंगे। शिवपुरी की महारानी के नाम से प्रसिद्ध मां काली की इस यात्रा में हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है। यात्रा का निर्धारित समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। इस दौरान यात्रा मार्ग को वाहनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया जाएगा।

    खटीक समाज द्वारा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि में खटीक मोहल्ले में मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। नवरात्रि के समापन पर दशहरे के दिन प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा है। इस शोभायात्रा की खास पहचान पालकी में मां काली की प्रतिमा का नगर भ्रमण और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी है। प्रतिमा की पालकी लगभग 2 किलोमीटर की दूरी करीब 30 से 35 मिनट में तय करती है। यात्रा को देखने और मां के दर्शन करने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

    इस बार तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण महाअष्टमी, महानवमी और दशहरे के आयोजन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलीं। शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट के बाद शुरू हुई और 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10 बजकर 52 मिनट तक रही। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो गई। इसी कारण 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों पर्व मनाए गए, जबकि 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जा रहा है। कुछ श्रद्धालुओं ने नवरात्रि के नौ दिनों के अनुसार पूजा-अर्चना और विसर्जन का कार्यक्रम पहले ही पूरा कर लिया था। इसके चलते सोमवार को भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

    मंगलवार को शिवपुरी में मां काली के साथ अन्य देवी प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं भी निकाली जाएंगी। शहर में आधा सैकड़ा से अधिक शोभायात्राएं निकलने की संभावना है। माधव चौक पर स्थापित वैष्णो देवी की झांकी का चल समारोह भी दशहरे के दिन निकाला जाएगा। यह शोभायात्रा शाम को शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरेगी। इसके अलावा क्षत्रिय समाज का चल समारोह भी आयोजित होगा। प्रतिमाओं की शोभायात्राओं के चलते शहर में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्राओं को व्यवस्थित रखने के लिए जिला प्रशासन तथा पुलिस ने यातायात प्रबंध किए हैं। मां काली की यात्रा के दौरान दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक संबंधित मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। शाम 6 बजे से माधव चौक के चारों ओर के रास्ते कार्यक्रम समाप्त होने तक बंद रहेंगे। फिजिकल रोड से माधव चौक की ओर और गुरुद्वारा की तरफ से कोर्ट रोड पर अनावश्यक वाहनों का प्रवेश रोका जाएगा। लक्ष्मी निवास से सब्जी मंडी और हंस बिल्डिंग की ओर जाने वाला मार्ग शाम 7 बजे से अंतिम झांकी निकलने तक बंद रहेगा।

    यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माधव चौक पर वन-वे व्यवस्था लागू रहेगी। सुरवाया तिराहे पर मंगलवार रात 7 बजे से बुधवार सुबह 10 बजे तक हाईवे से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य अमोला में विसर्जन के दौरान संभावित हादसों को रोकना है। भीड़ कम होने के बाद मार्गों को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करने की अपेक्षा की गई है।

  • 14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार लगा जाम, आदि कैलाश में घंटों फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह

    14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार लगा जाम, आदि कैलाश में घंटों फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में पहली बार जाम की स्थिति सामने आई। सोमवार को देशभर से बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। बीते दिनों क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई थी, जिसके बाद सड़क पर तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हो गई थी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने जेसीबी की मदद से सड़क से बर्फ हटाकर यातायात सुचारु कराया, लेकिन सड़क के दोनों किनारों पर जमा बर्फ पूरी तरह नहीं हट सकी। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई और वाहनों के एक-दूसरे को रास्ता देने में परेशानी होने लगी।

    आदि कैलाश में जाम के पीछे हालिया बर्फबारी के साथ वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रमुख कारण मानी जा रही है। सड़क से बर्फ हटाने के बाद भी दोनों किनारों पर तीन से चार फीट तक बर्फ के ढेर बने हुए हैं। इससे मार्ग संकरा हो गया है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ निजी वाहनों का दबाव भी बढ़ा है। ऐलागाड़, कुलागाड़, एस बैंड और मलघाट जैसे संवेदनशील हिस्सों में सड़क पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी है। इन स्थानों पर एक साथ अधिक वाहन पहुंचने पर आमने-सामने से वाहनों को निकालना मुश्किल हो जाता है। बर्फबारी के कारण सड़क की स्थिति खराब होने से समस्या और बढ़ जाती है। एक जगह वाहन रुकने पर पीछे आने वाले वाहनों पर भी इसका असर पड़ता है और धीरे-धीरे लंबी कतार बन जाती है।

    आदि कैलाश करीब 4,420 मीटर यानी 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कुछ वर्ष पहले तक यहां दुर्गम पहाड़ी रास्ते और मौसम की कठिन परिस्थितियां यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती थीं। अब वाहनों का बढ़ता दबाव भी नई परेशानी बन गया है। आदि कैलाश मार्ग चीन सीमा तक पहुंच का प्रमुख रास्ता होने के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बीआरओ की ओर से सड़क को बेहतर बनाने और कई हिस्सों में डामरीकरण किए जाने के बाद यहां वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान हुई है। इसका असर श्रद्धालुओं की यात्रा पर भी पड़ा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों से आदि कैलाश पहुंच रहे हैं।

    पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर वाहनों की संख्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 में आदि कैलाश क्षेत्र में 10,079 पर्यटक पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,423 हो गई और 2025 में 31,558 पर्यटक यहां पहुंचे। 2026 में अब तक यह आंकड़ा 61,950 तक पहुंच चुका है। यानी कुछ ही वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती आवाजाही के बीच उच्च हिमालयी क्षेत्र की सीमित सड़क चौड़ाई और मौसम की परिस्थितियां यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं।

    आदि कैलाश क्षेत्र में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था को सुचारु करने में जुटे हैं। फिलहाल जाम की समस्या के पीछे मुख्य वजह हालिया बर्फबारी बताई जा रही है। सड़क से बर्फ हटाए जाने के बावजूद किनारों पर जमा बर्फ के कारण मार्ग की चौड़ाई कम बनी हुई है। इसके साथ बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होने से संकरी जगहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम में अचानक बदलाव और भारी बर्फबारी जैसी परिस्थितियों के बीच वाहनों की बढ़ती संख्या ने यात्रा और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।

  • पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    नई दिल्ली । केरल के त्रिशूर में शनिवार को पलियक्कारा टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लाइन करीब दो किलोमीटर से अधिक तक पहुंच गई थी। इसी दौरान त्रिशूर के सांसद और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी इस जाम में फंस गए। वह त्रिशूर से एर्नाकुलम की ओर जा रहे थे। शाम करीब 5:45 बजे उनका काफिला इस रास्ते से गुजर रहा था।

    जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मंत्री के काफिले को वहां से आगे निकाल दिया। इसके बाद सुरेश गोपी ने पलियक्कारा टोल प्लाजा के सभी 12 गेट खोलने का आदेश दिया। उनका कहना था कि सड़क पर इतनी लंबी कतार देखकर लोगों को हो रही परेशानी पर ध्यान देना जरूरी था। इसी वजह से उन्होंने तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला किया।

    सुरेश गोपी ने बताया कि जब उन्होंने सड़क पर वाहनों की लंबी लाइन देखी तो उन्हें लगा कि इस स्थिति में कुछ कदम उठाना जरूरी है। उनका कहना था कि गाड़ियां लंबे समय तक खड़ी रहती हैं तो इससे ईंधन की खपत होती है और धुआं भी निकलता है। ऐसे हालात में टोल गेट खोलकर वाहनों को आगे जाने देना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने सभी 12 गेट खोलने का निर्देश दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को जाम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि वहां तैनात कर्मचारी अपना काम कर रहे थे और टोल लेना उनकी जिम्मेदारी है। हालांकि, जब एक साथ बड़ी संख्या में वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचते हैं तो टोल लेने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इस वजह से सड़क पर वाहनों की कतार बढ़ने लगती है और जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सुरेश गोपी ने आगे कहा कि ऐसे दिनों में जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से लोगों को जाम की परेशानी से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यातायात की स्थिति को संभालने के लिए इस तरह के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

    इस बीच जाम के दौरान पुलिस द्वारा मंत्री के काफिले को आगे निकालने पर कुछ वाहन चालक नाराज भी हुए। सुरेश गोपी ने माना कि कई लोगों को उनका काफिला आगे जाता देखकर गुस्सा आया था। उन्होंने कहा कि कुछ वाहन चालक उन्हें आगे निकलते देखकर नाराज नजर आए। हालांकि, बाद में जब टोल प्लाजा के गेट खोले गए और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो स्थिति में सुधार होने लगा और लोगों को राहत मिली।

    पुलिस के मुताबिक, करीब 30 मिनट के भीतर टोल प्लाजा के दोनों तरफ यातायात की स्थिति काफी बेहतर हो गई थी। वाहनों की लंबी कतार कम होने लगी और गाड़ियां आगे बढ़ने लगीं। इसके बाद सुरेश गोपी भी वहां से आगे रवाना हो गए।

    पूरी घटना के दौरान सुरेश गोपी ने लंबे समय से जाम में फंसे वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए टोल प्लाजा के सभी गेट खोलने का निर्देश दिया। उन्होंने टोल कर्मचारियों को दोषी नहीं माना और कहा कि बड़ी संख्या में वाहन एक साथ पहुंचने पर टोल प्रक्रिया में समय लगना जाम की वजह बन सकता है। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के बीच समन्वय की जरूरत बताई।

  • मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप

    मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप


    मुंबई।
    मुंबई (Mumbai) में मॉनसून (Monsoon) की जोरदार बारिश (Heavy Rain) ने शहर के कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया है. सड़कें तालाब बन गई हैं, ट्रैफिक ठप हो गया है. लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे (अंडरपास) में इतना पानी भर गया है कि उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।

    रातभर की बारिश से अंधेरी, बांद्रा, खार, मालाड, गोरेगांव, जुहू, वर्सोवा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया है. वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, अंधेरी सबवे में पानी भर गया है, जिसके बाद उसे बंद करना पड़ा।

    बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं. मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में जलजमाव होना पुरानी समस्या है।

    शहर के निचले इलाकों में कई जगहों पर भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जलजमाव को देखते हुए एहतियातन अंधेरी सबवे को देर रात 1:45 बजे से यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को रोकने के लिए सबवे के बाहर पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

    एक तरफ जोरदार बारिश से मुंबईवासियों को उमस और गर्मी से तो बड़ी राहत मिली है, तो वहीं सुबह-सुबह दफ्तर और काम पर जाने वालों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए आज भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बता दें कि मॉनसून इस बार 13 दिन देरी से मुंबई पहुंचा था।