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  • तेज रफ्तार ने ली चार जिंदगियां ,अनूपपुर में ट्रैक्टर गड्ढे में पलटा ,बड़ा हादसा

    तेज रफ्तार ने ली चार जिंदगियां ,अनूपपुर में ट्रैक्टर गड्ढे में पलटा ,बड़ा हादसा


    अनूपपुर । अनूपपुर जिले में रविवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया जब एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरे गड्ढे में जा पलटा। हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर के इंजन और ट्रॉली के बीच दबकर चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां एकत्र हो गए।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा करन पठार थाना क्षेत्र के अंतर्गत ठाड़ पाथर गांव के पास हुआ। डिंडौरी जिले के भीमकुंडी गांव से चार दोस्त सुबह लगभग साढ़े पांच बजे ट्रैक्टर लेकर अनूपपुर के पौनी गांव गिट्टी लेने के लिए निकले थे। ट्रैक्टर में ट्रॉली खाली थी और सभी युवक रोजमर्रा के काम के लिए निर्माण सामग्री लेने जा रहे थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही ट्रैक्टर ठाड़ पाथर गांव के पास एक मोड़ पर पहुंचा वहां सड़क का संतुलन बिगड़ गया और तेज रफ्तार के कारण वाहन अचानक नीचे उतर गया। देखते ही देखते ट्रैक्टर गहरे गड्ढे में पलट गया और उसमें सवार सभी युवक भारी मशीनरी के नीचे दब गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।

    ग्रामीणों ने अपनी ओर से ट्रैक्टर को हटाने की कोशिश की लेकिन भारी वजन और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर करन पठार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीन की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद सुबह साढ़े छह बजे चारों शवों को ट्रैक्टर के नीचे से बाहर निकाला जा सका।

    हादसे में जान गंवाने वालों में अंकुश उइके उम्र चौबीस वर्ष जो ट्रैक्टर का चालक और मालिक था शामिल है। इसके अलावा ब्रजेश पेंदो उम्र अठारह वर्ष रवींद्र कुमार गोयल उम्र अठारह वर्ष और प्रकाश मार्को उम्र सत्रह वर्ष भी इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए। सभी मृतक डिंडौरी जिले के भीमकुंडी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं।

    घटना की जानकारी जैसे ही मृतकों के गांव भीमकुंडी पहुंची पूरे गांव में कोहराम मच गया। एक साथ चार युवकों की मौत से गांव में मातम का माहौल छा गया और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी युवक मेहनतकश थे और रोजाना काम के लिए आसपास के क्षेत्रों में जाते थे।

    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और मोड़ पर नियंत्रण खोना माना जा रहा है हालांकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके।

    यह हादसा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और ग्रामीण मार्गों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसे खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

  • दमोह में दिल दहला देने वाला हादसा: चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, 4 महीने के मासूम की जिंदा जलकर मौत

    दमोह में दिल दहला देने वाला हादसा: चूल्हे की चिंगारी से झोपड़ी में लगी आग, 4 महीने के मासूम की जिंदा जलकर मौत


    मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जहां एक छोटी-सी लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। देहात थाना क्षेत्र के ग्राम बांसातारखेड़ा के चिथरयाऊ टोला में खेत पर बनी कच्ची झोपड़ी में आग लगने से चार महीने के मासूम बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    खेत में काम कर रहे थे माता-पिता

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बांसातारखेड़ा निवासी जितेंद्र गौंड गांव के ही किसान शैलेंद्र तिवारी के खेत में सिंचाई का ठेका लेकर काम करता था। खेत की देखरेख के लिए उसने वहीं एक अस्थायी झोपड़ी बना रखी थी, जहां वह अपने परिवार के साथ रहता था।शनिवार की रात जितेंद्र अपनी पत्नी धनाबाई के साथ खेत में पानी देने गया हुआ था। इस दौरान उनका चार महीने का बेटा निशांत झोपड़ी के अंदर सो रहा था। झोपड़ी में चूल्हा जल रहा था जिस पर खाना बनाया गया था।

    चूल्हे की चिंगारी बनी काल
    बताया जा रहा है कि रात के समय चूल्हे से निकली एक चिंगारी झोपड़ी में रखे कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते आग भड़क उठी। झोपड़ी कच्ची होने और आसपास सूखी घास व अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। आग लगने के बाद झोपड़ी के अंदर सो रहा मासूम जोर-जोर से रोने लगा। उसकी चीखें सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया और माता-पिता को सूचना दी।

    अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

    ग्रामीणों की आवाज सुनते ही जितेंद्र और धनाबाई दौड़ते हुए झोपड़ी की ओर पहुंचे। किसी तरह आग की लपटों के बीच से वे अपने झुलसे हुए बच्चे को बाहर निकाल पाए। आनन-फानन में मासूम को इलाज के लिए जिला अस्पताल दमोह ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में पूरी झोपड़ी जलकर खाक हो गई। परिवार के पास रहने और खाने तक का सामान भी नहीं बचा।

    प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची
    घटना की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। देर रात एएसपी सुजीत सिंह भदोरिया, दमोह एसडीएम आर.एल. बागरी और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। नगर पुलिस अधीक्षक एच.आर. पांडेय ने बताया कि यह एक दुर्घटनाजन्य मामला प्रतीत हो रहा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    पोस्टमार्टम के बाद सौंपा जाएगा शव

    मासूम के शव को जिला अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवाया गया है। प्रशासन के अनुसार, रविवार को तहसीलदार की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। घटना के बाद से परिजन गहरे सदमे में हैं और रात में ही अपने गांव लौट गए थे।

    पीड़ित परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता

    दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि घटना बेहद दुखद है। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही शासन की योजनाओं के तहत मिलने वाली मदद भी सुनिश्चित की जाएगी। देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा ने कहा कि मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण चूल्हे की चिंगारी ही सामने आया है।

    गांव में शोक का माहौल

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। हर कोई इस बात से आहत है कि महज चार महीने का मासूम इस तरह काल का शिकार हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बनी कच्ची झोपड़ियों में आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में लोग वहीं रहने को विवश होते हैं।