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  • पीएम विश्वकर्मा योजना ने हासिल किया 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य, 24.37 लाख कारीगरों को मिला कौशल प्रशिक्षण

    पीएम विश्वकर्मा योजना ने हासिल किया 30 लाख पंजीकरण का लक्ष्य, 24.37 लाख कारीगरों को मिला कौशल प्रशिक्षण

    नई दिल्ली ।पीएम विश्वकर्मा योजना ने लॉन्च होने के तीन साल के भीतर 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। योजना के तहत देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना की प्रगति से संबंधित जानकारी में इसके तहत अब तक हुई गतिविधियों और सहायता का विवरण दिया गया है।

    योजना के तहत 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को टूलकिट प्रदान की गई हैं। कच्चा माल खरीदने, औजारों को बेहतर बनाने और कारोबार के विस्तार में मदद के लिए 6.19 लाख से अधिक ऋण मंजूर किए गए हैं। इन ऋणों की कुल राशि करीब 5,316 करोड़ रुपये है।

    डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए भी योजना के तहत लाभार्थियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्रोत्साहन दिया गया है। इसके तहत 42 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।

    योजना के तहत कारीगरों को बदलते बाजार और तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर 12,000 से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने में कारीगरों की मदद करना है।

    बाजार से जुड़ाव बढ़ाने के लिए 30,000 से अधिक विश्वकर्मा लाभार्थियों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जीईएम, ओएनडीसी, मीशो, अमेजन, फैबइंडिया और सुलेखा जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसके जरिए कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    योजना के प्रचार और कारीगरों तक इसकी जानकारी पहुंचाने के लिए देशभर में विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। अब तक 1,500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम और शिविर, 50 से अधिक कार्यशालाएं, 82 व्यापार मेले, 37 राज्य स्तरीय प्रदर्शनियां और 50 से अधिक फ्लैश मॉब आयोजित किए गए हैं।

    पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को शुरुआत से लेकर बाजार तक सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे कारीगर हाथों के कौशल, परिवार आधारित ज्ञान और छोटे स्तर के उद्यमों पर निर्भर रहते हैं। योजना के जरिए गुरु-शिष्य परंपरा और परिवारों में पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कौशल को मजबूत और संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र के माध्यम से मान्यता दी जाती है। कौशल प्रशिक्षण में आधुनिक औजारों, बेहतर कार्यप्रणालियों और नए डिजाइन से जुड़ी जानकारी दी जाती है। इसके साथ डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

    योजना के तहत बुनियादी प्रशिक्षण पांच से सात दिनों का होता है, जबकि उन्नत प्रशिक्षण 15 दिन या उससे अधिक समय का हो सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाता है। मार्केटिंग सहायता में व्यापार मेले, प्रदर्शनियां, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विज्ञापन और प्रचार जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

  • Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग

    Pak: आतंकी संगठनों में अब महिलाओं की हो रही भर्ती… हनी ट्रैप की भी दी जा रही ट्रेनिंग


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (Intelligence agencies) के ताजा आकलन में पाकिस्तान (Pakistan) स्थित आतंकी संगठनों (Terrorist organizations) की रणनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। खुफिया इनपुट के अनुसार, आतंकी संगठन अब महिलाओं की सुनियोजित तरीके से भर्ती के लिए गुप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं। इन प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य महिलाओं को आतंकवादी नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए तैयार करना है।

    ये प्रशिक्षण कार्यक्रम 2 से 4 सप्ताह तक चलते हैं और इन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा जीवन कौशल सिखाने के नाम पर आयोजित किया जाता है। हालांकि, वास्तविक मकसद महिलाओं को आतंकी संगठनों के लिए तैयार करना है। एजेंसियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों के लिए बैच बनाए जाते हैं। कुछ चुनिंदा मदरसों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाता है।

    इन स्थानों पर आने वाली महिला परिजनों के जरिए भर्ती और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रचार ऐसे किया जाता है कि यह मजबूत आस्था और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए है। इसके जरिए धार्मिक प्रतिबद्धता व व्यक्तिगत विकास को प्रमुख उद्देश्य बताकर महिलाओं को आकर्षित किया जाता है।


    ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग

    प्रशिक्षण में महिलाओं को विभिन्न भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं बैक-एंड लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल सपोर्ट, तकनीकी सहायता, ड्रोन संचालन, खुफिया जानकारी जुटाना, हनी-ट्रैप के जरिए लक्ष्यों को फंसाना और समझौता कराने जैसी गतिविधियां। यह व्यवस्था आतंकियों को जमीनी स्तर पर मजबूत बैक-एंड सपोर्ट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।


    कई ठिकाने चिन्हित

    खुफिया एजेंसियों ने बहावलपुर, फैसलाबाद सहित आधा दर्जन से अधिक ऐसे स्थानों की पहचान की है, जहां महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये इलाके पिछले दो दशकों से विभिन्न आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक केंद्र माने जाते रहे हैं।


    ऑपरेशन सिंदूर के बाद रणनीति में बदलाव

    खुफिया अधिकारियों का कहना है ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों की भर्ती रणनीति में यह बड़ा बदलाव देखा गया है। महिलाओं की पहचान उनकी क्षमता और भूमिका के आधार पर की जा रही है और उन्हें विशेष कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।