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  • मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश में 32 IAS अधिकारियों के तबादले, जिला पंचायत CEO से नगर निगम आयुक्त तक बदली प्रशासनिक जिम्मेदारियां

    मध्य प्रदेश :  में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 32 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों के मैदानी प्रशासन तक कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। इस फेरबदल में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगर निगम आयुक्तों, अपर कलेक्टरों और अनुविभागीय अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है।

    नए आदेश के तहत नगर निगम और विकास प्राधिकरण के स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। धार जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक चौधरी को ग्वालियर नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। दतिया जिला पंचायत के सीईओ अक्षय कुमार तेम्रवाल को भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

    सतना नगर निगम के आयुक्त पद पर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को पदस्थ किया गया है। उन्हें सतना स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। वहीं विवेक के.व्ही. को जबलपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पंचायत स्तर पर भी व्यापक बदलाव किया गया है। ग्वालियर नगर निगम आयुक्त रहे संघ प्रिय को सिंगरौली जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। सिंगरौली के सीईओ जगदीश कुमार गोमे को सागर जिला पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है। देवास जिला पंचायत के सीईओ पद पर नवीत कुमार धुर्वे की पदस्थापना की गई है।

    खंडवा में अपर कलेक्टर रहीं सृष्टि देशमुख गौड़ा को रीवा जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अभिषेक सराफ को सीधी, सौम्या आनंद को खंडवा, ऐश्वर्य वर्मा को श्योपुर और आशीष को टीकमगढ़ जिला पंचायत का सीईओ बनाया गया है। इसके अलावा अर्पित गुप्ता को बड़वानी और तनुश्री मीणा को बालाघाट जिला पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    प्रशासनिक फेरबदल का असर मंत्रालय स्तर पर भी दिखाई दिया है। संजना जैन को जल संसाधन विभाग में उप सचिव, ज्योति शर्मा को मध्य प्रदेश शासन में उप सचिव, अंजली जोसेफ जोनाथन को लोक निर्माण विभाग में उप सचिव और अनिल कुमार डामोर को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। कार्तिकेय जायसवाल, विशाल धाकड़ और सोनाली देव को भी उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन की जिम्मेदारी दी गई है।

    मैदानी प्रशासन में भी कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। काजल जावला को राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल में अपर मिशन संचालक बनाया गया है। श्रद्धा शुक्ला को खंडवा का अपर कलेक्टर पद सौंपा गया है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में राजस्व एसडीओ के पदों पर भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

    आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली और पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी का एसडीओ राजस्व बनाया गया है। सुशिर श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जामदार फरहान इरफान को शहपुरा, ठाकरे ऋषिकेष विजय को बिजावर और नवकिरण कौर को डबरा का एसडीओ राजस्व नियुक्त किया गया है।

    राज्य सरकार के आदेश के अनुसार सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना पर शीघ्र कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक फेरबदल को जिलों और स्थानीय निकायों में कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने तथा विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

  • मध्यप्रदेश में चार IAS अधिकारियों का तबादला, गृह से पर्यटन और खनिज से उच्च शिक्षा विभाग में बदली जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश में चार IAS अधिकारियों का तबादला, गृह से पर्यटन और खनिज से उच्च शिक्षा विभाग में बदली जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में प्रशासनिक स्तर पर एक बार फिर फेरबदल किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 अगस्त 2026 को चार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव के तहत अधिकारियों को गृह, उच्च शिक्षा, पर्यटन और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सभी पदस्थापनाएं अस्थाई रूप से स्थानापन्न पद पर की गई हैं और यह व्यवस्था अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी।

    तबादला आदेश के अनुसार 2012 बैच की IAS अधिकारी भारती जाटव ओगरे को नई जिम्मेदारी दी गई है। वे इससे पहले खनिज साधन विभाग में अपर सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें उच्च शिक्षा विभाग में अपर सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नई पदस्थापना 17 जून 2026 को जारी पुराने आदेश में संशोधन के तहत की गई है।

    2013 बैच की IAS अधिकारी मनीषा सेतिया की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। वे अब तक गृह विभाग में अपर सचिव के रूप में कार्य कर रही थीं। नए आदेश के तहत उन्हें गृह विभाग से हटाकर पर्यटन विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पर्यटन विभाग के प्रशासनिक कामकाज में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

    इसी क्रम में 2016 बैच की IAS अधिकारी शुचिस्मिता सक्सेना को भी नई जिम्मेदारी मिली है। वे पहले लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत थीं। अब उन्हें गृह विभाग में उप सचिव बनाया गया है। गृह विभाग राज्य प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां उनकी नई पदस्थापना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    2017 बैच के IAS अधिकारी विवेक कुमार को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। वे फिलहाल पदस्थापना का इंतजार कर रहे थे। अब उन्हें नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में उप सचिव नियुक्त किया गया है। उनकी नई पदस्थापना के बाद विभाग से जुड़े प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका तय होगी।

    सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है। आदेश पर मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतियां संबंधित अधिकारियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों को भेजी गई हैं। इनमें राज्यपाल कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तथा मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली सहित संबंधित विभाग शामिल हैं।

    गृह, उच्च शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। खासतौर पर गृह विभाग में अधिकारी स्तर पर बदलाव होने से विभागीय कामकाज की जिम्मेदारियों का नया वितरण हुआ है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग में नई पदस्थापना से शिक्षा प्रशासन से जुड़े कार्यों में नई भूमिका तय होगी।

    पर्यटन विभाग में मनीषा सेतिया की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने और विभिन्न पर्यटन स्थलों की सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग में विवेक कुमार की नियुक्ति ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    सरकार की ओर से इन तबादलों के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार यह प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की नवीन पदस्थापना है। अब संबंधित अधिकारी अपनी नई जिम्मेदारियों के अनुसार विभागों में कार्यभार संभालेंगे और उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभागीय कामकाज में बदलाव दिखाई देगा।

  • MP: मंदसौर में प्राचार्य के तबादले का विरोध…. छात्रों ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन, झुका प्रशासन

    MP: मंदसौर में प्राचार्य के तबादले का विरोध…. छात्रों ने सड़क जाम कर किया प्रदर्शन, झुका प्रशासन


    मंदसौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मंदसौर (Mandsaur) के लदुना (Laduna) स्थित सांदीपनी विद्यालय (Sandipani Vidyalaya) के प्रभारी प्राचार्य (Principal-in-Charge) के तबादले के विरोध में छात्रों ने लदुना-सीतामऊ मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन ने छात्रों से बातचीत कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम हटाया गया।

    छात्रों ने लदुना-सीतामऊ मार्ग पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब दो घंटे के प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन पर छात्रों ने आंदोलन समाप्त किया, जिसके बाद प्रभारी प्राचार्य अजीत त्रिपाठी को पुनः विद्यालय का प्रभार सौंप दिया गया।

    जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य अजीत त्रिपाठी को उनकी मूल पदस्थापना नाटाराम वापस भेजने के आदेश जारी किए गए थे। वे सांदीपनि विद्यालय का प्रभार संभाल रहे थे। इस आदेश की जानकारी मिलते ही विद्यालय के छात्र आक्रोशित हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।


    लदुना-सीतामऊ रोड पर आवागमन बाधित हुआ

    छात्रों ने विरोध स्वरूप लदुना-सीतामऊ रोड पर जाम लगा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। सूचना मिलने पर सीतामऊ थाना प्रभारी और तहसीलदार मोहित सिनम सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की समझाइश के बाद छात्रों ने सड़क से जाम हटा लिया, लेकिन विद्यालय के बाहर नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रखा।

    छात्रों का तर्क था कि अजीत त्रिपाठी के प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन और पढ़ाई के माहौल में उल्लेखनीय सुधार हुआ था। छात्रों ने उनके तबादले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आदेश को निरस्त कर उन्हें विद्यालय में बनाए रखने की मांग की।


    आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया

    लगभग दो घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश का हवाला देते हुए छात्रों को स्थिति स्पष्ट की।

    तहसीलदार मोहित सिनम ने छात्रों को बताया कि अजीत त्रिपाठी को उनकी मूल पदस्थापना के साथ-साथ सांदीपनि विद्यालय का प्रभारी प्राचार्य बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। इस आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

  • पीसी शर्मा का सरकार पर तीखा वार महिला आरक्षण को बताया इवेंट मैनेजमेंट और तबादलों को उद्योग

    पीसी शर्मा का सरकार पर तीखा वार महिला आरक्षण को बताया इवेंट मैनेजमेंट और तबादलों को उद्योग


    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल परिसीमन तबादला नीति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया।

    पीसी शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है वह सही प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक पहले जनगणना होनी चाहिए उसके बाद परिसीमन और फिर आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जो कुछ किया जा रहा है वह नारी सम्मान के नाम पर केवल दिखावा है

    और इसका उद्देश्य आगामी चुनावों में महिलाओं के वोट हासिल करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत और नगरीय निकायों में महिला आरक्षण पहले से लागू है जिसे दिग्विजय सिंह की सरकार के समय और राजीव गांधी के 73 और 74वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया जा चुका है।

    तबादला नीति को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में एक बार फिर तबादला उद्योग शुरू होने वाला है। उनके अनुसार ट्रांसफर प्रक्रिया में पैसों का लेनदेन बढ़ेगा और इसका सीधा असर प्रशासनिक पारदर्शिता पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस व्यवस्था का उपयोग अपने हितों के लिए करती है।

    कानून व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। हाल ही में सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों में कानून का डर खत्म हो गया है। उनका आरोप था कि अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है जिससे आम जनता में असुरक्षा का माहौल बन रहा है।

    मंदिर प्रबंधन को लेकर भी पीसी शर्मा ने सुझाव दिया कि सरकार को मंदिरों की व्यवस्था सुधारनी है तो सरकारी जमीन मंदिरों के नाम की जानी चाहिए और जो जमीनों पर कब्जा है उसे वापस दिलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर धार्मिक शिक्षा से जुड़े कोर्स शुरू किए जाते हैं तो सभी धर्मों के लिए समान रूप से प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

    शिक्षकों के आंदोलन पर समर्थन जताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षकों के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ऐसी हैं जिससे पद खाली कर अपने लोगों को अवसर दिया जा सके। कुल मिलाकर कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते हुए इसे जनहित के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए उठाए गए कदम बताया है।

  • इंदौर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कलेक्टर के आदेश से तहसील स्तर पर अधिकारियों के तबादले, राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद तेज

    इंदौर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कलेक्टर के आदेश से तहसील स्तर पर अधिकारियों के तबादले, राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद तेज

    इंदौर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कई अधिकारियों को हटाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में गति लाना और राजस्व प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाना बताया जा रहा है।

    जिले की विभिन्न तहसीलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। हालांकि महू और सांवेर तहसीलों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। कई अधिकारियों को उनकी मौजूदा शाखाओं से हटाकर अन्य विभागों में स्थानांतरित किया गया है, जबकि कुछ को राजस्व न्यायालयों से हटाकर प्रोटोकॉल और अन्य प्रशासनिक शाखाओं में जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रशासनिक आदेशों के अनुसार कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को नई तहसीलों की कमान सौंपी गई है, वहीं कई को विशेष शाखाओं में स्थानांतरित किया गया है। इससे न केवल कार्य विभाजन में बदलाव हुआ है बल्कि प्रशासनिक ढांचे को अधिक संतुलित करने का प्रयास भी किया गया है।

    कई तहसीलों में नए अधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही पुराने अधिकारियों को अन्य महत्वपूर्ण विभागों में भेजा गया है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि जमीनी स्तर पर राजस्व कार्यों में तेजी आएगी और नागरिकों को सेवाएं अधिक प्रभावी तरीके से मिल सकेंगी।

    इसी बीच नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। भुगतान संबंधी मामलों में मस्टरकर्मियों की नाराजगी सामने आई है और लंबे समय से बकाया भुगतान को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। अदालत के आदेशों के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

    प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे बदलाव को व्यवस्था सुधार और कार्यप्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।