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  • श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत

    श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में आगामी दौरों को लेकर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीसीसीआई शनिवार को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए राष्ट्रीय टीम की घोषणा करने जा रही है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, चयनकर्ता न केवल नए खिलाड़ियों को आजमाने के मूड में हैं, बल्कि टी20 टीम के नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर चुके हैं।

    मौजूदा टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर इस समय खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में मार्च में उनकी कप्तानी में भारत ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था, लेकिन इसके बावजूद चयनकर्ता उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का मन बना रहे हैं। उनकी जगह मध्यक्रम के अनुभवी बल्लेबाज श्रेयस अय्यर को भारतीय टी20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया जा सकता है।

    नेतृत्व परिवर्तन का यह सिलसिला केवल कप्तानी तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। टीम के उप-कप्तान अक्षर पटेल को भी इस जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है, और उनकी जगह युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को नया उप-कप्तान बनाया जा सकता है। चयनकर्ताओं का यह कड़ा रुख भविष्य की योजनाओं, विशेषकर 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक और उसी वर्ष होने वाले अगले टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।

    सूर्यकुमार यादव के लिए यह बदलाव दोहरा झटका साबित हो सकता है क्योंकि उन्हें न सिर्फ कप्तानी से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि खराब फॉर्म के चलते पूरी टीम से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। टी20 वर्ल्ड कप की नौ पारियों में उनका स्ट्राइक रेट तो ठीक था, लेकिन वे केवल 242 रन बना सके। इसके बाद आईपीएल 2026 के सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां उन्होंने 13 पारियों में सिर्फ 20.76 के औसत से 270 रन बनाए।

    दूसरी ओर, नए कप्तान के रूप में उभर रहे 31 वर्षीय श्रेयस अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उस समय सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा की मध्यक्रम में मौजूदगी के कारण अय्यर को टीम संयोजन में जगह नहीं मिल पा रही थी। इसी साल जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान उन्हें चोटिल खिलाड़ी के विकल्प के रूप में शामिल जरूर किया गया था, लेकिन मैच खेलने का मौका नहीं मिला क्योंकि प्रबंधन तब वर्ल्ड कप की कोर टीम को आजमाना चाहता था।

    भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा कप्तानों को बदलने का यह लगातार दूसरा बड़ा फैसला है। इससे पहले साल 2025 में भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब रोहित शर्मा ने मार्च में भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जिताया था, लेकिन अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले चयनकर्ताओं ने उन्हें वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया था, हालांकि रोहित टीम में बने रहे थे।

    इस आगामी चयन में सबसे बड़ा आकर्षण 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी हो सकते हैं। आईपीएल 2026 के एक धमाकेदार सीजन में 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने वाले सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर टीम में शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वह 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के बाद भारत की सीनियर पुरुष टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे।

    राष्ट्रीय टीम के दौरों से ठीक पहले, सूर्यवंशी 9 से 21 जून तक श्रीलंका में होने वाली इंडिया ए की ट्राई-सीरीज का हिस्सा होंगे, जिसमें अफगानिस्तान की टीम भी शामिल है। इसके ठीक बाद सीनियर भारतीय टीम को 26 और 28 जून को बेलफास्ट में आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैच खेलने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 1 से 11 जुलाई तक इंग्लैंड के लंबे दौरे पर रहेगी, जहां पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज खेली जानी है।

  • कर्नाटक में सत्ता बदलाव की हलचल तेज, डीके शिवकुमार 3 जून को ले सकते हैं मुख्यमंत्री पद की शपथ

    कर्नाटक में सत्ता बदलाव की हलचल तेज, डीके शिवकुमार 3 जून को ले सकते हैं मुख्यमंत्री पद की शपथ

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से जारी अस्थिरता और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब सरकार गठन की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सहमति बनने के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के शपथ लेने की संभावना 3 जून को जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में यह घटनाक्रम राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी अब संतुलन और स्थिरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।

    राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद से ही सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई थी। कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद अब डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है, जिसके बाद शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    सूत्रों के अनुसार डीके शिवकुमार ने अपने पारिवारिक ज्योतिषी से विचार-विमर्श के बाद 3 जून की तारीख को शपथ ग्रहण के लिए उपयुक्त माना है। राजनीतिक और व्यक्तिगत निर्णयों में धार्मिक और ज्योतिषीय परामर्श की परंपरा रखने वाले शिवकुमार के इस फैसले को भी चर्चा का विषय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम बेहद सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ-साथ नई सरकार की नींव रखी जाएगी।

    नई सरकार के गठन के साथ ही मंत्रिमंडल को लेकर भी रणनीति तेज हो गई है। पार्टी के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए उपमुख्यमंत्री पदों के दो नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें एक प्रतिनिधित्व दलित समुदाय से और दूसरा अल्पसंख्यक समुदाय से हो सकता है। इस रणनीति को राज्य के विविध सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित राजनीतिक समीकरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सभी प्रमुख वर्गों को साथ लेकर चलना बताया जा रहा है।

    कांग्रेस नेतृत्व आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए नई सरकार में युवाओं और विभिन्न सामाजिक समूहों को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार कर रहा है। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए उनके परिवार से भी किसी प्रमुख भूमिका में शामिल किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इससे पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश स्पष्ट रूप से नजर आती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा को भी तय करेगा। राज्य में स्थिर सरकार देने की चुनौती के साथ नई टीम को विकास और संगठनात्मक मजबूती दोनों पर ध्यान देना होगा। वहीं कांग्रेस के लिए यह कदम आगामी चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल के नामों और शपथ ग्रहण की अंतिम तिथि को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिसके बाद कर्नाटक की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा