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  • विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह मंगलवार से पूर्ण निर्यात-आयात संचालन के साथ अपने विकास के नए चरण में प्रवेश करेगा। भारत के पहले गहरे पानी वाले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के रूप में विकसित किए गए विझिंजम में अब ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों के साथ प्रत्यक्ष वाणिज्यिक व्यापार संचालन भी शुरू होगा। इसे केरल की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    पूर्ण निर्यात-आयात संचालन की शुरुआत के अवसर पर सुबह 10:45 बजे पहले निर्यात कंटेनर को रवाना किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस शुरुआत के साथ केरल के निर्यातकों को अपने माल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए दूसरे ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

    अब तक विझिंजम मुख्य रूप से ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर विकसित किया गया है। नई व्यवस्था के बाद यहां से केरल और देश के अन्य हिस्सों के निर्यातक सीधे विदेशी बाजारों के लिए कंटेनर भेज सकेंगे। इससे कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे पारंपरिक ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के जरिए माल भेजने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है। इसका असर परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    विझिंजम की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी प्राकृतिक समुद्री गहराई और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति शामिल है। बंदरगाह में करीब 20 से 24 मीटर की प्राकृतिक गहराई है, जिससे यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित हुई है। यह अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग कॉरिडोर से लगभग 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार के प्रमुख मार्गों तक इसकी पहुंच मजबूत होती है।

    परीक्षण संचालन के दौरान स्पेन के वालेंसिया भेजा गया पहला निर्यात कंटेनर इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। अब नियमित निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद कृषि उत्पाद, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, हथकरघा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

    बंदरगाह के विस्तार का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सहायक सुविधाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

    राज्य सरकार इस अवसर के साथ बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास को गति देने के लिए मिशन समुद्र शुरू कर रही है। इसके तहत विझिंजम मैरीटाइम इकोनॉमिक रीजन विकसित करने की योजना है। इसमें आठ औद्योगिक क्लस्टर और तीन नए शहरों को विकसित करने के साथ केरल की करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने इस पहल के लिए 400 करोड़ रुपये का कैटेलिटिक फंड निर्धारित किया है। इसका इस्तेमाल बंदरगाह और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक क्लस्टर, नए शहरों, कार्यक्रम प्रबंधन और क्षमता निर्माण से जुड़ी 14 उप-योजनाओं में किया जाएगा। वर्ष 2031 तक निजी निवेश के जरिए सार्वजनिक निवेश की तुलना में कई गुना अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा करने की उम्मीद जताई गई है।

    विझिंजम के संचालन का जिम्मा अदाणी पोर्ट्स के पास है। मजबूत सड़क और रेल संपर्क के साथ बंदरगाह के विस्तार से केरल के विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। पूर्ण निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद विझिंजम केवल ट्रांसशिपमेंट केंद्र नहीं, बल्कि केरल के लिए वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास का प्रमुख द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • अमेरिका ने चीन के जरिए टैरिफ बचाने के आरोपों में भारत समेत 40 से अधिक व्यापारिक साझेदारों को जोखिम वाले देशों में रखा

    अमेरिका ने चीन के जरिए टैरिफ बचाने के आरोपों में भारत समेत 40 से अधिक व्यापारिक साझेदारों को जोखिम वाले देशों में रखा

    नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 40 से अधिक देशों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए कुछ तीसरे देशों के रास्ते अपने सामान को अमेरिकी बाजार तक पहुंचा सकता है। इस प्रक्रिया को ट्रांसशिपमेंट के तौर पर चिन्हित किया गया है।

    अमेरिकी रिपोर्ट में भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ के अलावा ताइवान, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम सहित कई व्यापारिक साझेदारों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में कुछ ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जहां चीन से आने वाले सामान की मामूली प्रोसेसिंग, पैकेजिंग या लेबल बदलकर उसके मूल स्रोत को अलग तरीके से प्रदर्शित किया जा सकता है।

    ट्रंप प्रशासन के मुख्य व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रांसशिपमेंट की गतिविधियों में 2018 के बाद बढ़ोतरी देखने को मिली। इसी अवधि में अमेरिका ने चीन के कथित अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत अतिरिक्त टैरिफ लागू किए थे। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन शुल्कों के प्रभाव से बचने के लिए चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए भेजने की कोशिशें बढ़ी हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में चीन से तैयार या निर्मित वस्तुओं को किसी तीसरे देश में भेजकर उनका री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग, री-इनवॉइसिंग या मामूली स्तर का प्रसंस्करण किया जा सकता है। इसके बाद सामान को उस देश का उत्पाद दिखाकर अमेरिका में भेजने की कोशिश की जा सकती है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस तरह सामान पर लागू होने वाले टैरिफ में अंतर का लाभ उठाया जा सकता है।

    अमेरिका ने इस पूरी व्यवस्था को अवैध ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क से जोड़ते हुए कहा है कि इससे व्यापार नियमों और सीमा शुल्क व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि चीनी कंपनियां ऐसे देशों और क्षेत्रों का इस्तेमाल कर सकती हैं जहां श्रम लागत अपेक्षाकृत कम हो, सीमा शुल्क निगरानी सीमित हो या मुक्त व्यापार क्षेत्रों में प्रक्रियात्मक लचीलापन उपलब्ध हो।

    इस मामले में अमेरिकी सरकार अब तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस और यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन मिलकर सीमा पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करना और यह पता लगाना है कि कहीं किसी वस्तु को तीसरे देश के माध्यम से भेजकर उसके वास्तविक मूल को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया।

    भारत का नाम इस सूची में आने से अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा बढ़ सकती है। हालांकि किसी देश का रिपोर्ट में उल्लेख होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां से होने वाला प्रत्येक व्यापार या शिपमेंट गैरकानूनी है। अमेरिकी प्रशासन ने मुख्य रूप से संभावित जोखिम और निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है।

    ट्रंप प्रशासन का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में टैरिफ, सप्लाई चेन और चीन से जुड़े आयात को लेकर अमेरिकी नीतियां लगातार सख्त हो रही हैं। आने वाले समय में अमेरिकी सीमा शुल्क जांच और एआई आधारित निगरानी बढ़ने से उन देशों के निर्यातकों पर भी अतिरिक्त जांच का दबाव पड़ सकता है, जिनका नाम जोखिम वाले व्यापारिक साझेदारों में शामिल किया गया है।