Tag: trapped

  • तिरुवनंतपुरम में होटल की लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे शशि थरूर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर से सुरक्षित निकाला बाहर

    तिरुवनंतपुरम में होटल की लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे शशि थरूर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर से सुरक्षित निकाला बाहर


    तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर शुक्रवार शाम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित एक निजी होटल की लिफ्ट में करीब 15 मिनट तक फंस गए। वह यहां ‘रोटरी क्लब ऑफ त्रिवेंद्रम ईस्ट’ के स्थापना समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

    घटना की जानकारी मिलते ही होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आधुनिक उपकरणों की मदद से शशि थरूर समेत लिफ्ट में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शाम 7:37 बजे सूचना मिली कि सांसद होटल की लिफ्ट में फंस गए हैं। इसके बाद रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। शुरुआती प्रयासों में होटल स्टाफ और अन्य लोगों ने लोहे की रॉड से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यहां तक कि लिफ्ट मैकेनिक भी तकनीकी खराबी दूर कर दरवाजा नहीं खोल सके।

    बताया गया कि तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट निर्धारित मंजिल तक नहीं पहुंच पाई, जिससे उसका ऑटोमैटिक डोर लॉक सक्रिय हो गया और अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके।

    हाइड्रोलिक स्प्रेडर से खोला गया दरवाजा
    मौके पर पहुंची फायर फोर्स की टीम ने आधुनिक हाइड्रोलिक स्प्रेडर का इस्तेमाल किया और कुछ ही मिनटों में शाम 7:51 बजे लिफ्ट के दरवाजे को खोल दिया। दरवाजा खुलते ही शशि थरूर मुस्कुराते हुए बाहर आए और राहत की सांस ली।

    बाहर निकलने के बाद उन्होंने रेस्क्यू टीम का आभार जताते हुए कहा, “आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। वेल डन! आपने बेहतरीन काम किया है।” अधिकारियों द्वारा उनका हालचाल पूछे जाने पर थरूर ने बताया कि लिफ्ट में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    रेस्क्यू अभियान के बाद शशि थरूर ने फायर विभाग के अधिकारियों की तत्परता और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने टीम को चाय के लिए आमंत्रित भी किया, लेकिन अधिकारियों ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाकर उनका धन्यवाद किया और अपनी ड्यूटी पर लौट गए। बाद में थरूर ने त्वरित कार्रवाई के लिए अग्निशमन कर्मियों को सम्मानित भी किया।

  • ऐसे फंसती हैं हिंदू बेटियां…. हर्षा रिछारिया ने शेयर किए ईमेल….'लव जिहाद'-'ब्रेनवॉश' का दावा!

    ऐसे फंसती हैं हिंदू बेटियां…. हर्षा रिछारिया ने शेयर किए ईमेल….'लव जिहाद'-'ब्रेनवॉश' का दावा!


    उज्जैन।
    महाकुंभ (Mahakumbh) से चर्चा बटोरने वाली मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर नई बहस छेड़ दी है. वीडियो में हर्षा खुद को मुस्लिम शख्स (Muslim man.) के भेजे ईमेल्स को लेकर कथित ‘लव जिहाद’ या ‘ब्रेनवॉश’ का दावा करती नजर आईं।

    हर्षा रिछारिया ने वीडियो में कहा, ”मैं एक बात बताती हूं. आज हो सकता है बहुत से लोगों को मिर्ची लगे. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मुझे एक व्यक्ति के कुछ मेल मिले. पिछले कुछ दिनों में जिसने बराबर मुझसे ये पूछा कि तुम कैसी हो, कहां हो? कोई खबर नहीं तुम्हारी, तुम्हारी हेल्थ ठीक है कि नहीं है? तुम कोई पोस्ट क्यों नहीं डाल रही हो?

    देखो हर्षा ये सब चीजें फेम के लिए और फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए तो ठीक हैं, लेकिन आखिर में इससे घर नहीं चलता. इससे इनकम नहीं होती. उसके लिए तुम्हारा क्या फ्यूचर प्लान है? तुम मुझसे शेयर कर सकती हो।

    साध्वी हर्षा के मुताबिक, मेल भेजने वाले शख्स ने बराबर मुझे कई मेल्स किए. उसने बाकियों की तरह मुझे ‘फेक’, ‘पाखंडी’ जैसा कुछ भी नहीं बोला. उसने मुझे मेल करके पूछा. अब मैं आपको बताती हूं कि आपकी बेटियां ‘लव जिहाद’ में कैसे फसती हैं।

    महाकुंभ में वायरल हुई साध्वी हर्षा रिछारिया ने आगे कहा, ”हमारे खुद के धर्म में यह कमी है कि जब हमें अपने धर्म के लोगों की जरूरत होती है, हमें अपने क्लोज्ड ओन्स की जरूरत होती है तब वो हमारा मजाक उड़ाने में व्यस्त होते हैं।

    हमें फेक, पाखंडी, झूठा, मक्कार, फरेबी पता नहीं क्या क्या कहने में व्यस्त होते हैं. तब वो ये सोचने में यह बोलने में व्यस्त होते हैं कि अरे वो तो ये सब दिखावा कर रही है. तब जब आप उस इंसान को मानिसिक और भावानात्मक तौर पर बुर तरह तोड़ देते हैं।

    तब वो कमी दूसरे धर्म के लोग नोटिस करते हैं. और तब उन्हें समझ में आ जाता है कि ये लड़की टूटी हुई है, ये लड़की परेशान है, इसे कंधे की जरूरत है. इसे साथ की जरूरत है. तब वो वो साथ बन के आते हैं। तब वो ये यकीन दिलाते हैं कि देखो, मैंने तुम्हे तब समझा जब कोई और तुम्हें सुनने तक को राजी नहीं था।

    तब उस लड़की को लगता है कि हां, इससे अच्छा मेरे लिए कौन हो सकता है. मेरे धर्म के लोग मुझे नहीं समझ रहे, मेरे धर्म के लोग मुझे नहीं सुन रहे हैं. मेरे अपने मुझे नहीं सुन रहे हैं, तो ये इंसान तो मेरी जिंदगी में फरिश्ता बनकर आया। तब वो उस लड़के के कंधे पर सिर रख के रोने लगती है… और तब यहां से शुरुआत होती है ‘ब्रेनवॉश’ और ‘लव जिहाद’ की।

    हर्षा रिछारिया ने अंत में यह स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी कमी हमारे खुद के धर्म और समाज की है, जो अपने लोगों को सहारा देने के बजाय उन्हें नीचा दिखाने में व्यस्त रहता है. उन्होंने इसे ‘कड़वी हकीकत’ बताते हुए “जय श्री राम” के साथ अपनी बात खत्म की।