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  • कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी, वैध चीनी वीजा और तिब्बत परमिट के बिना सफर शुरू न करने की सलाह

    कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर विदेश मंत्रालय की सख्त एडवाइजरी, वैध चीनी वीजा और तिब्बत परमिट के बिना सफर शुरू न करने की सलाह

    नई दिल्ली। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए विदेश मंत्रालय ने एक नई और बेहद महत्वपूर्ण ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा की योजना बना रहे सभी नागरिकों को सचेत किया है कि वे अपने सभी जरूरी यात्रा दस्तावेज और परमिट प्राप्त करने के बाद ही भारत से प्रस्थान करें। मंत्रालय द्वारा यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिनमें आवश्यक अनुमति और प्रवेश पत्रों के अभाव में कई भारतीय नागरिकों के नेपाल में फंसे होने की बात सामने आई थी। पुष्ट दस्तावेजों के बिना केवल उम्मीद के सहारे यात्रा शुरू करना श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर रहा है।

    विदेश मंत्रालय को पिछले कुछ दिनों में उन भारतीय नागरिकों से मदद और आपातकालीन सहायता के लिए कई अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जो आवश्यक चीनी वीजा और तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन (TAR) परमिट के बिना ही काठमांडू पहुंच गए थे। वर्तमान में लगभग 52 भारतीय श्रद्धालु नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंसे हुए हैं और आगे की सुरक्षित यात्रा या स्वदेश वापसी के लिए तत्काल सरकारी सहायता की मांग कर रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह पवित्र यात्रा चीन के तिब्बत क्षेत्र से होकर गुजरती है, इसलिए सीमा पार करने के लिए नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास से जारी वैध वीजा और संबंधित चीनी प्राधिकारियों से मिलने वाला ट्रैवल परमिट अनिवार्य है।

    इस साल की यात्रा को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए भारत और चीन दोनों ही तरफ से नियमों को काफी कड़ा किया गया है। सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद अब प्रत्येक श्रद्धालु अपने साथ केवल 20 किलोग्राम तक का ही आवश्यक सामान ले जा सकेगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने पूरे यात्री समूह के लिए अलग से केवल 5 किलोग्राम अतिरिक्त वजन ले जाने की विशेष छूट दी है। इन नए नियमों के तहत सामान के वजन को लेकर चीनी सीमा चौकियों पर बेहद सख्त जांच की जाएगी, इसलिए यात्रियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप ही पैकिंग करने को कहा गया है।

    सामान के वजन के साथ-साथ इस बार श्रद्धालुओं की मेडिकल फिटनेस को लेकर सबसे कड़ा नियम लागू किया गया है। यात्रा पर रवाना होने वाले प्रत्येक दल के साथ पांच सदस्यीय एक समर्पित सर्विस टीम चलेगी, जिसमें चार पेशेवर रसोइये (कुक) और एक योग्य डॉक्टर अनिवार्य रूप से शामिल होगा। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि यात्रा के दौरान किसी भी मार्ग या पड़ाव पर डॉक्टर को यह महसूस होता है कि किसी यात्री की सेहत या शारीरिक स्थिति आगे बढ़ने के अनुकूल नहीं है, तो पूरे ग्रुप को उसी पॉइंट से अपनी यात्रा तुरंत स्थगित कर वापस लौटना होगा। किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए स्वास्थ्य मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    विदेश मंत्रालय ने श्रद्धालुओं से यह भी अपील की है कि वे जिस भी प्राइवेट ऑपरेटर के माध्यम से बुकिंग कर रहे हैं, उसकी प्रामाणिकता और पंजीकरण की अच्छी तरह जांच कर लें। वैध एजेंटों के माध्यम से ही नेपाल मार्ग के लिए अग्रिम अनुमति पत्र सुनिश्चित किए जाने चाहिए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस साल की कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला आधिकारिक जत्था आगामी 30 जून को नई दिल्ली से रवाना होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह जत्था विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए आगामी 5 जुलाई को धारचूला स्थित बेस कैंप पहुंचेगा, जहां से आगे की कठिन चढ़ाई और सीमा पार का सफर शुरू होगा।

  • दुनिया पर मंडरा रहा इबोला का नया खतरा: भारत ने नागरिकों को किया सावधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

    दुनिया पर मंडरा रहा इबोला का नया खतरा: भारत ने नागरिकों को किया सावधान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालात को गंभीर मानते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं और भारतीय नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह जारी की है। सरकार ने साफ कहा है कि इन देशों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता और सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है। इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है और कई देशों ने भी अपने स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है।

    इबोला वायरस को दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है और कई मामलों में मृत्यु दर भी काफी अधिक देखी गई है। वर्तमान में जिस वायरस स्ट्रेन को लेकर चिंता जताई जा रही है, उसने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संक्रमण को नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    भारत सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि जो लोग इन प्रभावित देशों में रह रहे हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, वे स्थानीय स्वास्थ्य नियमों और सुरक्षा दिशानिर्देशों का गंभीरता से पालन करें। लोगों को भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से दूरी बनाने, स्वच्छता बनाए रखने और स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी कहा है कि वर्तमान स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर पैनी नजर बनी हुई है।

    फिलहाल राहत की बात यह है कि भारत में इस वायरस से संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क के दौर में किसी भी बीमारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसी वजह से एयरपोर्ट और सीमा क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की समय रहते जांच की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार इबोला संक्रमण की शुरुआत तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, शरीर दर्द और अन्य गंभीर लक्षणों से हो सकती है। कई मामलों में यह बीमारी शरीर के अंदर गंभीर प्रभाव डाल सकती है, जिससे मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सलाह पर भरोसा करने की अपील कर रही हैं।

    बदलते वैश्विक हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सुरक्षा अब केवल किसी एक देश का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा बन चुकी है। ऐसे समय में सतर्कता, जागरूकता और समय पर उठाए गए कदम ही किसी बड़े संकट को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं।