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  • सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    नई दिल्ली । दिल्ली में एसिड अटैक की शिकार हुई महिला के इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सर गंगा राम अस्पताल को निर्देश दिया कि पीड़िता को भर्ती रखकर सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसमें दवाएं, प्लास्टिक सर्जरी और जरूरत के अनुसार अन्य उपचार भी शामिल हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को तब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाए, जब तक वह वहां से जाने के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट न हो जाए और उसे केवल बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में उपचार की जरूरत न रह जाए। अदालत ने इलाज पर होने वाले खर्च की परवाह किए बिना उपचार जारी रखने और उसका बिल अदालत में जमा करने को भी कहा।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले पर तत्काल सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिका में सामने आए तथ्यों को चिंताजनक बताया। यह मामला एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन ब्रेव सोल्स फाउंडेशन की ओर से उठाया गया था। संगठन की प्रमुख शाहीन मलिक के मुताबिक, महिला पर छह अक्टूबर को दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एसिड अटैक हुआ था। इस हमले में वह लगभग 45 प्रतिशत तक झुलस गई थी।

    शाहीन मलिक ने अदालत को बताया कि कानून के तहत मुफ्त इलाज का अधिकार होने के बावजूद महिला को दिल्ली के बड़े निजी अस्पतालों में पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा था। उनके आरोप के मुताबिक, सर गंगा राम अस्पताल और अपोलो अस्पताल ने बर्न वार्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर इलाज से इनकार किया था। पीड़िता को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा। इस स्थिति के बाद संगठन ने मामले में हस्तक्षेप किया और पीड़िता के उपचार के लिए न्यायिक मदद मांगी।

    पीड़िता की मां के अनुसार, हमले के बाद पुलिस कंट्रोल रूम की मदद से उनकी बेटी को सबसे पहले जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेज दिया गया। मां ने बताया कि बेटी को दर्द से जूझते देखना उनके लिए बेहद मुश्किल था और उन्हें लगा कि उसकी परेशानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनके मुताबिक, गुरुवार दोपहर बेटी को गुरु तेग बहादुर अस्पताल से छुट्टी दिलाकर सर गंगा राम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद परिवार को उसके इलाज को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    मां ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात सर गंगा राम अस्पताल के कर्मचारियों ने परिवार से बाहर से दवाएं खरीदने को कहा। जब उन्होंने बताया कि उनके पास दवाएं खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, तो शनिवार सुबह उन्हें बेटी को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया। हालांकि, गुरु तेग बहादुर अस्पताल के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने वहां इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने मरीज की जरूरत के अनुसार पूरा उपचार दिया था। उनके मुताबिक, परिवार अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहता था, इसलिए मरीज को वहां से छुट्टी दिलाई गई।

    याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 397 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों को एसिड अटैक पीड़ितों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराना होता है। शाहीन मलिक ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए थे। उन्होंने एसिड पर प्रतिबंध के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में इसकी बिक्री जारी रहने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पीड़िता को इलाज दिलाने के लिए संगठन और वकीलों को हस्तक्षेप करना पड़ा तथा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

  • छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    छिंदवाड़ा में गलत इलाज के बाद महिला की मौत, बिना डिग्री इलाज कर रहे दो झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार होकर जेल भेजे गए

    मध्य प्रदेश: के छिंदवाड़ा जिले में गलत इलाज के बाद एक महिला की मौत के मामले में पुलिस ने दो झोलाछाप डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर बिना किसी मान्य चिकित्सा डिग्री और पंजीयन के मरीजों का एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने का आरोप है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों मरीजों को दवाएं देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। महिला की मौत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें दोनों के पास चिकित्सा शिक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिले।

    पुलिस के अनुसार घटना 18 जुलाई 2026 की है। ग्राम बम्होरी निवासी 43 वर्षीय आरती, पत्नी रामभगस साहू, को बुखार आया था। तब उसके परिजन इलाज के लिए महाराजा मार्केट स्थित एक क्लिनिक पर लेकर पहुंचे थे। यहां राजेश सिन्हा नाम का व्यक्ति इलाज करता था। महिला की जांच और उपचार के दौरान उसके भाई ज्योतिप्रकाश मंडल उर्फ काली ने फोन पर राजेश से बातचीत की।

    इसके बाद ज्योतिप्रकाश ने आरती को दो इंजेक्शन लगाए। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक और बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तत्काल हर्रई अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकीय उपचार के दौरान आरती की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपचार से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।

    जांच के दौरान पुलिस को राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल के पास चिकित्सा शिक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र, डिग्री या डिप्लोमा नहीं मिला। इसके अलावा दोनों के पास मेडिकल रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। इसके बावजूद दोनों मरीजों का इलाज कर रहे थे और उन्हें दवाएं तथा इंजेक्शन दे रहे थे। पुलिस ने इसी आधार पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की।

    मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 3(5) के साथ मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजेश सिन्हा और ज्योतिप्रकाश मंडल दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस की जांच का मुख्य आधार महिला को दिए गए उपचार, दोनों आरोपियों की चिकित्सा योग्यता और घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से जुड़े तथ्य रहे।

    मामला बिना वैध चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने से जुड़ा है। जांच में दोनों आरोपियों के पास इलाज करने के लिए जरूरी डिग्री, डिप्लोमा और मेडिकल रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद वे मरीजों को दवाएं और इंजेक्शन दे रहे थे।

    आरती को बुखार की शिकायत के बाद इलाज के लिए क्लिनिक ले जाया गया था, लेकिन दो इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

  • मंगला एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खंडवा में ट्रेन रोककर किया इलाज

    मंगला एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खंडवा में ट्रेन रोककर किया इलाज


    भोपाल। दिल्ली से केरल लौट रहे स्कूली बच्चों के एक दल में शुक्रवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद करीब 15-20 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों ने उल्टी, जी मिचलाने और बेचैनी की शिकायत की। सूचना मिलते ही ट्रेन को खंडवा रेलवे स्टेशन पर रोका गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने ट्रेन में ही बच्चों की जांच कर प्राथमिक उपचार दिया।

    जानकारी के मुताबिक, बच्चे स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक टूर पर दिल्ली गए थे। टूर पूरा होने के बाद सभी ट्रेन से केरल लौट रहे थे। इटारसी स्टेशन के बाद बच्चों ने ट्रेन की पेंट्री कार से खाना मंगाकर खाया था। इसके कुछ समय बाद एक के बाद एक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। ट्रेन स्टाफ ने इसकी सूचना रेलवे अधिकारियों को दी।

    स्टेशन पर पहले से तैयार थी मेडिकल टीम

    बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना खंडवा रेलवे प्रशासन को ट्रेन के पहुंचने से पहले ही मिल गई थी। ऐसे में स्टेशन पर डॉक्टरों की टीम को तैयार रखा गया था। मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस रात करीब 9:05 बजे खंडवा स्टेशन पहुंची। ट्रेन रुकते ही मेडिकल टीम ने प्रभावित बच्चों की जांच शुरू कर दी।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, सीएसपी अभिनव बारंगे और सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर समेत रेलवे और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। डॉक्टरों ने बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं। चिकित्सकों ने फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है।

    40 मिनट स्टेशन पर खड़ी रही ट्रेन

    खंडवा के स्टेशन मास्टर जीएल मीणा के अनुसार, बच्चों के उपचार के दौरान ट्रेन करीब 40 मिनट स्टेशन पर खड़ी रही। मेडिकल टीम ने बच्चों की जांच कर उन्हें जरूरी दवाइयां दीं। उपचार के बाद ट्रेन को रात करीब 9:45 बजे भुसावल की ओर रवाना कर दिया गया।

    बच्चों के साथ रेलवे के डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम भी आगे के सफर के लिए रवाना की गई, ताकि रास्ते में जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता मिल सके।

    15 से 18 साल के हैं सभी बच्चे

    बताया गया है कि बीमार हुए सभी बच्चे केरल के रहने वाले हैं और एक क्रिश्चियन स्कूल से जुड़े हुए हैं। उनकी उम्र करीब 15 से 18 वर्ष बताई गई है। बच्चे स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक भ्रमण के लिए दिल्ली गए थे। टूर खत्म होने के बाद वे ट्रेन से वापस केरल लौट रहे थे।

    अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की हालत फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरे मामले पर नजर रख रही है। खाना खाने के बाद एक साथ कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने के कारण फूड पॉइजनिंग की आशंका के आधार पर मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • MP: इंदौर की 3 वर्षीय अनिका के लिए एक-एक पल भारी, राशि जुटाने के बाद शुरू नहीं हुआ इलाज…. AIIMS में घूम रहीं फाइलें

    MP: इंदौर की 3 वर्षीय अनिका के लिए एक-एक पल भारी, राशि जुटाने के बाद शुरू नहीं हुआ इलाज…. AIIMS में घूम रहीं फाइलें


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) की तीन वर्षीय अनिका शर्मा (Anika Sharma) के लिए समय लगातार भारी पड़ता जा रहा है. स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy- SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही इस मासूम का इलाज अब भी शुरू नहीं हो पाया है. जबकि परिवार, समाज और संस्थाओं की मदद से उपचार के लिए अधिकांश राशि जुटाई जा चुकी है. इसके बावजूद प्रशासनिक देरी बच्ची के इलाज की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

    दरअसल, इसी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सुनवाई करते हुए दिल्ली एम्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई. अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद एम्स की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया. इस पर अदालत ने साफ निर्देश दिए कि हर हाल में 23 जुलाई 2026 तक जवाब पेश किया जाए. मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

    याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इलाज के लिए अब केवल सीमित राशि की जरूरत है, लेकिन एम्स की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से जीवनरक्षक इंजेक्शन की खरीद अटकी हुई है. एक ओर केंद्र सरकार से स्वीकृत सहायता की प्रक्रिया लंबित है, तो दूसरी ओर क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि भी इनवॉइस के अभाव में जारी नहीं हो पा रही है।

    हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इतने संवेदनशील मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि अनिका के लिए बीतता हर दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जिंदगी और उम्मीद के बीच की दूरी बढ़ा रहा है।

    इससे पहले, हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 22 जून को जवाब तलब किया था. साथ ही राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि वह बच्ची के इलाज में किसी प्रकार सहायता कर सकती है या नहीं?

    बता दें कि बच्ची के इलाज के लिए करीब 9.50 करोड़ रुपये की जरूरत है. परिजन अब तक करीब 8 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत 50 लाख रुपये और तमाम लोगों एवं सामाजिक संगठनों से प्राप्त सहयोग राशि शामिल है.

    बच्ची के इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाया जाना है. यह इंजेक्शन मंगवाकर उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ रहा है.

    स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशीय रोग है. इसमें रीढ़ की हड्डी में मौजूद ‘मोटर न्यूरॉन’ धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है.

    ‘मोटर न्यूरॉन’ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग क्रियाओं के वास्ते संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं. फिलहाल मासूम की हालत स्थिर है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

  • रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा

    रामोजी फिल्म सिटी में प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, डॉक्टरों ने कहा- फेफड़ों तक इन्फेक्शन पहुंचा तो जान को खतरा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के जाने-माने और दिग्गज अभिनेता राजेश शर्मा की तबीयत अचानक बेहद खराब होने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपनी आगामी फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में व्यस्त चल रहे अभिनेता को सेट पर किसी बेहद जहरीले कीड़े ने काट लिया, जिसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। इस समय डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखे हुए है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह खतरनाक संक्रमण उनके फेफड़ों (लंग्स) तक पहुंच गया, तो स्थिति और अधिक चिंताजनक और जानलेवा हो सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा जगत के साथ-साथ उनके प्रशंसकों में गहरी चिंता व्याप्त है।

    ‘भूत बंगला’, ‘भूल भुलैया 2’, ‘भूल भुलैया 3’, ‘क्रू’, ‘लक्ष्मी’ और ‘डार्लिंग्स’ जैसी कई सुपरहिट और कद्दावर फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवा चुके राजेश शर्मा को फिलहाल पश्चिम बंगाल के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में वेंटिलेशन और गहन चिकित्सा इकाई की निगरानी में रखा गया है। अभिनेत्री सुदीपा चटर्जी ने राजेश शर्मा के परिवार की ओर से सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए उनके स्वास्थ्य की ताजा स्थिति (हेल्थ अपडेट) के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में किसी को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें किसी सांप, बिच्छू या मकड़ी में से किसने काटा है, लेकिन इस बाइट का असर पूरी बॉडी पर बेहद घातक साबित हुआ।

    यह दर्दनाक हादसा हैदराबाद की रामोजी फिल्म सिटी में हुआ, जहां राजेश शर्मा सुपरस्टार प्रभास की मुख्य भूमिका वाली एक बड़ी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग का पैकअप होने के बाद राजेश फिल्म सिटी के पास स्थित घने जंगलों से घिरे एक सुनसान इलाके में स्थानीय तकनीशियनों के साथ किसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, तभी अचानक उन्हें अपने पैर में किसी जीव के काटने का तीखा अहसास हुआ। शुरुआती पलों में यह मामला बहुत गंभीर नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने सेट पर मौजूद टीम से कोई तात्कालिक मेडिकल सपोर्ट नहीं लिया और लगातार अपना काम करते रहे। उनकी यही लापरवाही बाद में उन पर भारी पड़ गई।

    हादसे के करीब 6 घंटे बीत जाने के बाद अभिनेता राजेश शर्मा को अपने दाएं पैर में असहनीय और तेज दर्द महसूस होने लगा, जिसके साथ ही उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। सेहत में आ रही इस गिरावट के बावजूद उन्होंने कोलकाता वापस लौटने के लिए फ्लाइट पकड़ी। हवाई सफर के दौरान ही उन्हें अत्यधिक तेज बुखार ने जकड़ लिया और शरीर में भारी बेचैनी होने लगी। अगले दिन सुबह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने पर उन्हें आनन-फानन में कोलकाता के ढाकुरिया स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत एडमिट कर इलाज शुरू कर दिया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनका तेज बुखार कम नहीं हो रहा है और उन्हें सांस लेने में भी भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश। अस्पताल से आ रही ताजा चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार, जहरीला इन्फेक्शन अब उनके दाएं पैर की उंगलियों से लेकर घुटने तक बहुत तेजी से फैल चुका है। शरीर के जिस-जिस हिस्से में यह जहर और संक्रमण पहुंच रहा है, वहां त्वचा पर बड़े-बड़े और दर्दनाक छाले पड़ गए हैं। मुख्य चिकित्सक डॉ. अविजित भट्टाचार्य और उनकी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार अभिनेता की स्थिति को स्थिर करने के प्रयास में जुटी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि राजेश शर्मा खतरे से पूरी तरह बाहर हैं, क्योंकि संक्रमण के चलते उनके शरीर के भीतर ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) बनने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।

    चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ये ब्लड क्लॉट्स खून के बहाव के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, तो यह पल्मोनरी एम्बोलिज़्म जैसी घातक स्थिति पैदा कर सकता है जो सीधे तौर पर जानलेवा साबित होती है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और उनके पारिवारिक सदस्य लगातार डॉक्टरों के संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर सुदीपा चटर्जी की इस भावुक पोस्ट के वायरल होने के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सह-कलाकार, निर्देशक और फैंस राजेश शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने और उनके सुरक्षित दीर्घायु जीवन के लिए लगातार प्रार्थनाएं कर रहे हैं।