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  • भारत विरोधी साजिशों के बीच पाकिस्तान-यूक्रेन का सीक्रेट गठजोड़: 'ऑपरेशन सिंदूर' में मुंह की खाने के बाद ड्रोन तकनीक के लिए मुनीर सेना ने थामा कीव का हाथ

    भारत विरोधी साजिशों के बीच पाकिस्तान-यूक्रेन का सीक्रेट गठजोड़: 'ऑपरेशन सिंदूर' में मुंह की खाने के बाद ड्रोन तकनीक के लिए मुनीर सेना ने थामा कीव का हाथ

    नई दिल्ली । भारतीय सीमाओं पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत रची गई एक बहुत बड़ी सैन्य साजिश के पूरी तरह विफल होने के बाद पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की बौखलाहट साफ नजर आ रही है। भारत द्वारा रणनीतिक मोर्चे पर मात खाने और सिंधु जल समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाने के बाद पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व अब सीधे युद्ध की धमकियां देने पर उतर आया है। इस करारी शिकस्त और भारी नाकामी के बावजूद पाकिस्तानी सेना के इस अप्रत्याशित आक्रामक तेवर और बढ़े हुए आत्मविश्वास के पीछे एक नया अंतरराष्ट्रीय कोण सामने आ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, पाकिस्तान ने अब रूस के साथ भीषण युद्ध में लगे यूक्रेन के साथ एक गुप्त सैन्य समझौता किया है।

    इस गुप्त सैन्य गठजोड़ के तहत यूक्रेन की सेना पाकिस्तानी मिलिट्री को आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की सीक्रेट ट्रेनिंग दे रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पाकिस्तानी सेना ने भारत के खिलाफ एक अत्यंत आधुनिक और घातक साजिश रचने का प्रयास किया था, जिसके तहत भारतीय सीमाओं के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक साथ करीब 600 ड्रोन्स को लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और अचूक रक्षा प्रणाली के सामने पाकिस्तानी सेना का यह ‘मेगा ड्रोन प्लान’ पूरी तरह मटियामेट हो गया।

    पाकिस्तानी सेना के अधिकांश लड़ाकू ड्रोन्स को भारतीय सेना ने सीमा पर ही मार गिराया, जबकि कई ड्रोन तकनीकी खामियों के कारण स्वयं ही क्रैश हो गए। इस रणनीतिक विफलता ने पाकिस्तानी जनरलों को यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि उनकी मौजूदा सैन्य तकनीक और परिचालन क्षमता भारत के आधुनिक रक्षा तंत्र के सामने बेहद कमजोर और अपर्याप्त है। इसी कमजोरी को छिपाने और आधुनिक युद्ध कौशल सीखने के लिए पाकिस्तान ने अपने पुराने रणनीतिक सहयोगी यूक्रेन का रुख किया है, जो पिछले कई वर्षों से रूस के खिलाफ अत्यधिक हाई-टेक और ड्रोन-आधारित युद्ध लड़ रहा है।

    लगातार जारी इस युद्ध ने यूक्रेन को ‘कामिकेजे ड्रोन्स’ (आत्मघाती ड्रोन) और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर्स के क्षेत्र में दुनिया का सबसे अनुभवी और युद्ध-प्रशिक्षित देश बना दिया है। अब यूक्रेन अपनी इस सैन्य महारत और युद्ध के अनुभवों को एक कमर्शियल एसेट के रूप में इस्तेमाल करते हुए आर्थिक लाभ के लिए पाकिस्तानी सेना को प्रशिक्षित कर रहा है। पाकिस्तान इस ड्रोन ट्रेनिंग को अपने लिए एक संजीवनी बूटी की तरह देख रहा है, जिसके बल पर वह भारत के हाथों मिली तकनीकी शिकस्त का बदला लेने का सपना देख रहा है। यही मुख्य कारण है कि जनरल मुनीर का कॉन्फिडेंस अचानक बढ़ा हुआ नजर आ रहा है।

    रणनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन का भारत के प्रति रुख हमेशा से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पूर्व के वर्षों में यूक्रेन ने कई महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों और संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमाणु परीक्षणों तथा कश्मीर मुद्दे पर नई दिल्ली की नीतियों के खिलाफ रुख अपनाया था। हालांकि, बाद के वर्षों में यूक्रेन की आधिकारिक नीति में बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखा गया और उसने जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच का एक द्विपक्षीय मामला मानते हुए इसे 1972 के शिमला समझौते के तहत सुलझाने की बात कही थी। परंतु, वर्तमान में पाकिस्तान के साथ उसका यह गुप्त सैन्य सहयोग भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाला है।

  • ऐतिहासिक कूटनीतिक कामयाबी: ट्रंप और पेजेश्कियान के हस्ताक्षरों से टला महायुद्ध, अमेरिका-ईरान शांति समझौता तत्काल प्रभाव से लागू

    ऐतिहासिक कूटनीतिक कामयाबी: ट्रंप और पेजेश्कियान के हस्ताक्षरों से टला महायुद्ध, अमेरिका-ईरान शांति समझौता तत्काल प्रभाव से लागू

    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के पन्नों में आज का दिन एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। पिछले कई महीनों से युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान ने अपने सारे विवादों और दुश्मनी को पीछे छोड़ते हुए आखिरकार शांति समझौते पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव पूरी तरह समाप्त हो गया है और यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है।

    व्हाइट हाउस और ईरानी राजनयिकों द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते से जुड़ी दो बेहद महत्वपूर्ण तस्वीरें और वीडियो वैश्विक मीडिया के सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय महल में आयोजित एक विशेष रात्रिभोज के दौरान इस समझौते की मूल प्रति पर हस्ताक्षर किए। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उनके ठीक बगल में मौजूद थे, जिनकी गवाही में व्हाइट हाउस ने हस्ताक्षर का वीडियो भी जारी किया है। दूसरी तरफ, तेहरान से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भी समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए तस्वीरें दुनिया के सामने आईं। इससे पहले बीते रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने इस मसौदे पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक समारोह की जगह इसे तुरंत ही लागू करने का फैसला लिया गया।

    इस ऐतिहासिक समझौते के तहत कुल 14 प्रमुख शर्तें तय की गई हैं, जो दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगी। समझौते की पहली और सबसे बड़ी शर्त के अनुसार, अमेरिका और ईरान सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा करते हैं। दोनों देशों ने वचन दिया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह का युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे। इसके साथ ही, लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाएगा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने और 60 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए एक अंतिम और पूर्ण रूप से बाध्यकारी समझौता तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई है।

    मध्य प्रदेश और देश के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते से वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति को बड़ी राहत मिलेगी। समझौते के तहत अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और सभी व्यापारिक अवरोधों को पूरी तरह हटा लेगा। इसके बदले में ईरान फारस की खाड़ी से लेकर ओमान सागर तक आने-जाने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए अगले 60 दिनों तक पूरी तरह निशुल्क और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए ओमान के साथ बातचीत शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक पुनर्वास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग सुनिश्चित करने पर सहमत हुआ है।

    परमाणु कार्यक्रम के मोर्चे पर भी इस समझौते ने बेहद संवेदनशील मुद्दों को सुलझाया है। ईरान ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि उसके पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री के प्रबंधन का समाधान दोनों देश आपसी सहमति के मैकेनिज्म से निकालेंगे। जब तक अंतिम समझौता पूरा नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे, जिसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्तमान स्थिति से आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल बैंकिंग और बीमा छूट प्रदान करेगा, और विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को भी पूरी तरह रिलीज किया जाएगा। इस ऐतिहासिक शांति समझौते को अंतिम रूप देने के बाद अब इसे औपचारिक मंजूरी के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के समक्ष भेजा जाएगा।