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  • पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

    पहलगाम हमला केस: NIA की चार्जशीट में लश्कर कमांडर सैफुल्लाह आरोपी नंबर-1 घोषित, ड्रोन और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी साजिश का खुलासा

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में वर्ष 2025 में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी और अब जांच एजेंसी ने इस पूरी साजिश के पीछे पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन टीआरएफ के शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जाट उर्फ ‘लंगड़ा’ को मुख्य साजिशकर्ता और आरोपी नंबर-1 बताया है। जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी स्थानीय घटना का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क द्वारा रची गई गहरी साजिश थी, जिसमें डिजिटल संचार, ड्रोन तकनीक और ओवरग्राउंड नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया गया।

    जांच एजेंसी के अनुसार सैफुल्लाह पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर इस पूरे हमले को अंजाम देने की रणनीति तैयार कर रहा था और हमलावरों को रियल टाइम निर्देश भी दे रहा था। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को जीपीएस कोऑर्डिनेट्स और रास्तों की जानकारी लगातार उपलब्ध कराई जा रही थी, जिससे वे अपने लक्ष्य तक आसानी से पहुंच सके। जांच में मिले तकनीकी सबूतों, जैसे आईपी एड्रेस और मोबाइल नेटवर्क डेटा, ने इस बात की पुष्टि की है कि हमले की योजना और संचालन पूरी तरह सीमापार बैठे नेटवर्क द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था।

    एजेंसी ने यह भी खुलासा किया है कि इस हमले के पीछे केवल हिंसा ही उद्देश्य नहीं था, बल्कि इसके साथ एक संगठित प्रोपेगैंडा अभियान भी चलाया गया था, जिसका मकसद इस घटना को गलत तरीके से पेश कर भ्रम फैलाना था। हालांकि जांच में जुटाए गए डिजिटल और मानव स्रोतों के साक्ष्यों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। चार्जशीट के अनुसार हमले से पहले और बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके।

    सैफुल्लाह उर्फ ‘लंगड़ा’ के बारे में जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से कश्मीर में सक्रिय रहा है और उसने पहले भी कई गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसका जन्म पाकिस्तान के कसूर में हुआ था और वह वर्ष 2005 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में छिपकर रहा था। इस दौरान उसने स्थानीय नेटवर्क तैयार किया और कई लोगों को संगठन से जोड़ा। बाद में वह पाकिस्तान लौट गया, लेकिन वहां से लगातार अपने नेटवर्क का संचालन करता रहा।

    जांच में यह भी सामने आया है कि 2019 के बाद कश्मीर में युवाओं को प्रभावित करने के लिए टीआरएफ नामक संगठन के विस्तार में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके साथ ही वह ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी में भी सक्रिय था, जिससे सीमा पार से गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा था। हमले से कुछ दिन पहले ही उसने फिदायीन हमलावरों को निर्देशित कर बेसरन घाटी की ओर रवाना किया था। इस पूरे मामले में जुटाए गए सबूतों के आधार पर एजेंसी ने कहा है कि यह हमला एक सुनियोजित, तकनीकी रूप से संचालित और सीमा पार से नियंत्रित आतंकवादी अभियान था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

  • NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल

    NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल


    नई दिल्ली । चर्चित जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मामले में अपनी चार्जशीट दायर की है जिसमें सात आरोपियों का नाम शामिल है। इन आरोपियों में प्रमुख पाकिस्तानी आतंकवादी साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकवादी संगठनों का नाम भी शामिल है जो पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। चार्जशीट में यह बताया गया है कि पाकिस्तान से इस हमले की साजिश रची गई और इसमें लश्कर और TRF की भूमिका अहम रही। एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों ने धर्म आधारित टार्गेट हत्याएं की थीं और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय था।

    एनआईए द्वारा दायर 1597 पन्नों की चार्जशीट में पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी शामिल हैं जिनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। इन तीन आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षा बलों ने जुलाई में श्रीनगर के दाचीगाम में ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया था।

    कौन है साजिद जट्ट

    चार्जशीट में लश्कर के टॉप कमांडर साजिद जट्ट को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। उनका पूरा नाम सैफुल्लाह साजिद जट्ट है और वह पाकिस्तान के पंजाब राज्य के कसूर जिले का रहने वाला है। साजिद जट्ट लश्कर-ए-तैयबा का तीसरा सबसे बड़ा कमांडर माना जाता है और हाफिज सईद के बाद वह इस संगठन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक हैं।

    साजिद जट्ट को द रेजिस्टेंस फ्रंट का चीफ भी बताया जाता है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है। TRF ने ही पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था। भारत सरकार ने साल 2023 में TRF को यूएपीए के तहत बैन कर दिया था। एनआईए ने साजिद जट्ट पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।

    चार्जशीट में साजिद जट्ट के अलावा अन्य चार आतंकवादियों पर भी आरोप लगाए गए हैं जिनमें भारतीय न्याय संहिता शस्त्र अधिनियम 1959 और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम 1967 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों को आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में 22 जून को एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

    एनआईए ने अपनी जांच में यह पुष्टि की कि दोनों स्थानीय कश्मीरी आरोपियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान की और यह भी बताया कि ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इसके अलावा एनआईए ने पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है।

    इस चार्जशीट से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय सीमा में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित कर रहा है और ऐसे आतंकवादियों की मदद करने में स्थानीय कश्मीरी भी शामिल हो रहे हैं। एनआईए की यह कार्रवाई इस बात को भी उजागर करती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है।

  • NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार

    NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार


    नई दिल्ली । 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के संबंध में अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। इस चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रजिस्टेंस फ्रंट के सात प्रमुख आतंकवादियों को आरोपी ठहराया गया है। इनमें से तीन आतंकवादी मारे जा चुके हैं जबकि दो स्थानीय लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए थे जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आतंकवादी गतिविधियां और तनाव उत्पन्न हो गया था।

    चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और लश्कर-ए-तैयबा तथा के आतंकवादियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। इसके अलावा पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी इसमें शामिल हैं जिनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी का नाम शामिल है। ये तीनों आतंकवादी श्रीनगर के जंगलों में चलाए गए ऑपरेशन महादेव के दौरान भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गए थे।

    चार्जशीट में एनआईए ने भारतीय दंड संहिता के तहत आर्म्स एक्ट 1969 और यूएपीए 1967 की धारा 13 18 और 20 के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा एनआईए ने दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी आरोपी बनाया है। इन दोनों को 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें मदद पहुंचाने का आरोप है। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान के ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।

    एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों स्थानीय कश्मीरियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान भी की। इससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठनों ने इस हमले की साजिश रची थी और इसमें स्थानीय कश्मीरियों का भी सहयोग था।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमला करना शुरू कर दिया लेकिन भारतीय सेना के मजबूत डिफेंस सिस्टम के सामने पाकिस्तान की कार्रवाइयां नाकाम हो गईं। अंत में पाकिस्तान को युद्धविराम की ओर कदम बढ़ाना पड़ा।

    यह चार्जशीट आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति और पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को पनाह देने की निरंतर कोशिशों को उजागर करती है। एनआईए द्वारा किए गए इस खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और TRF जैसे आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रच रहे हैं।

    एनआईए की चार्जशीट से यह भी संदेश जाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। इस मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपी आतंकवादियों को पकड़ा जाने तक उनकी तलाश जारी रहेगी।