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  • यूसीसी पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- वनवासियों की परंपराओं से नहीं होगी छेड़छाड़, धर्मांतरण पर भी दी सख्त चेतावनी

    यूसीसी पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- वनवासियों की परंपराओं से नहीं होगी छेड़छाड़, धर्मांतरण पर भी दी सख्त चेतावनी

    नई दिल्ली ।यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनजातीय समाज को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान देते हुए वनवासी समाज को आश्वस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो आशंकाएं फैलाई जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है और जनजातीय समुदाय की परंपराओं, अधिकारों तथा सांस्कृतिक पहचान पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर चल रही बहस को नया आयाम मिल गया है।

    एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि समाज में एक भ्रम फैलाया जा रहा है कि यूसीसी लागू होने के बाद जनजातीय समुदाय अपनी संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली से वंचित हो जाएगा। उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि वनवासी समाज के अधिकारों और परंपराओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में उनके सांस्कृतिक मूल्यों के साथ हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि जहां-जहां यूसीसी लागू किया गया है, वहां जनजातीय समाज को विशेष प्रावधानों के तहत अलग रखा गया है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय परंपराएं, सामाजिक ढांचे और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित बनी रहे। उन्होंने वनवासी समाज से अपील करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम में आने की आवश्यकता नहीं है।

    इस दौरान गृह मंत्री ने धर्मांतरण के विषय पर भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म और परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। लेकिन लालच, दबाव या किसी अन्य माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल पहचान की रक्षा करने का संदेश भी दिया।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय परंपराओं और धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वनवासी समाज और सनातन संस्कृति के ऐतिहासिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में जनजातीय समाज की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करने में उनका योगदान विशेष रहा है।

    इसके अलावा उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में विकास और बदलाव को लेकर भी कई बातें रखीं। उन्होंने कहा कि अब दूरस्थ और वन क्षेत्रों में विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और सरकार इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के जरिए जनजातीय समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    यूसीसी और जनजातीय अधिकारों को लेकर दिया गया यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है, क्योंकि इससे कानून, संस्कृति और सामाजिक संरचना जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं।

  • राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप

    राष्ट्रपति मुर्मू का सिलीगुड़ी कार्यक्रम विवाद: बंगाल सरकार पर गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की, आदिवासी समुदाय की उपेक्षा का आरोप


    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम स्थल परिवर्तन को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बंगाल के मुख्य सचिव से इस घटना की रिपोर्ट तलब की है और निर्देश दिए हैं कि इसे आज शाम 5 बजे तक गृह मंत्रालय को भेजा जाए। 7 मार्च को होने वाले 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया था।
    मूल रूप से यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होना तय था, लेकिन सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें लगता है कि बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती। नॉर्थ बंगाल दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उनका स्वागत करने आए।

    राष्ट्रपति ने कहा, ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन जैसी हैं।

    मैं भी बंगाल की बेटी हूं। अगर कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो बेहतर होता। वहां अधिक जगह थी और ज्यादा लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकते थे।” उन्होंने बताया कि गोशाईपुर में जगह छोटी होने के कारण कई लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ही उनका स्वागत करने मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विवाद पर कहा कि राष्ट्रपति का पद पॉलिटिक्स से ऊपर है और इसकी गरिमा हमेशा बनी रहनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल पर टिप्पणी करने से पहले राष्ट्रपति को BJP शासित राज्यों की स्थिति भी देखनी चाहिए।
    राष्ट्रपति ने अपने भाषण में संथाल युवाओं से भाषा, परंपरा और शिक्षा को बचाने की अपील की और स्वतंत्रता संग्राम में संथाल समुदाय के योगदान को याद दिलाया। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा 1925 में बनाई गई ओल चिकी लिपि का स्मरण किया और आदिवासी युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय ने सदियों से लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को सुरक्षित रखा है और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और संस्कृति के संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।

    राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल विवाद ने प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर हलचल मचा दी है। गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से रिपोर्ट तलब कर जांच शुरू कर दी है, वहीं आदिवासी समुदाय और देशभर में लोग इस मुद्दे पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दे रहे हैं।