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  • जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए किए जाएंगे विशेष प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण के लिए किए जाएंगे विशेष प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा स्थानीय कला और संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 120वीं जयंती पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमर शहीद महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली ने मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनकी 120वीं जयंती पर चंद्रशेखर आजाद नगर आना गौरव और सौभाग्य का विषय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आलीराजपुर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं, भाषा-बोली, कला, प्राकृतिक खेती व संपदा और वनोपज के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आलीराजपुर जिले को हर क्षेत्र में नंबर वन बनाया जाएगा।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव आलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, रतलाम सहित विभिन्न जिलों से आए कृषि, जनजातीय संस्कृति, ग्रामीण विकास और सामाजिक विषयों पर कार्य कर रहे युवा सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, सकारात्मक बदलाव लाने और जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।

    उन्होंने इन्फ्लूएंसर्स से कृषि, प्राकृतिक खेती, जनजातीय संस्कृति, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण नवाचार जैसे विषयों पर प्रभावी डिजिटल सामग्री तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश की सकारात्मक छवि, किसानों की सफलता की कहानियां, जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद में इन्फ्लूएंसर चंद्रभान सिंह भदौरिया ने वनोपज की बेहतर विपणन व्यवस्था करने की बात कही। कादुसिंह सिंह ने उड़द फसल को जीआई टैग दिलाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उड़द प्रदेश की प्रमुख फसलों में शामिल है और इसकी गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार किसानों को प्रति क्विंटल 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उड़द को जीआई टैग दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का पारंपरिक भगोरिया उत्सव मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है। राज्य सरकार इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है ताकि जनजातीय संस्कृति का गौरव पूरे विश्व तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और लोक कलाएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं तथा इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रश्न पर प्रियंका तोमर से कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी अनेक योजनाएँ संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति नारी सम्मान की संस्कृति है। हमारा देश “भारत माता की जय” का उद्घोष करने वाला विश्व का अनूठा राष्ट्र है। माँ सीता, माता पार्वती, देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और माँ जगदंबा हमारी संस्कृति की प्रेरणा हैं। प्रदेश सरकार भी महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा प्रत्येक माह लाड़ली बहनों को सम्मानपूर्वक आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके सशक्तिकरण का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में कैबिनेट में यूसीसी को मंजूरी दी गई है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी महिलाओं पर समर्पित है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तुषार पालीवाल के जनजातीय क्षेत्रों में कैबिनेट आयोजित करने संबंधी प्रश्न पर कहा कि प्रदेश में जनजाति सहित सभी क्षेत्रों में कैबिनेट आयोजित की जाएगी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने सहित स्थानीय स्तर के महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास की मुख्य धारा में प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग की समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।

    संवाद कार्यक्रम में राजेंद्र बासुनिया ने जनजातीय संस्कृति पर आधारित गीत प्रस्तुत किया, जिसकी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि जनजातीय युवाओं की प्रतिभा, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष योजनाएँ तैयार की जाएंगी।

    सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर आशीष पांडे ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आकर्षक पोर्ट्रेट तथा साक्षी भयड़िया ने पिथौरा कला पर आधारित सुंदर पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री डॉने इन उपहारों की सराहना करते हुए स्थानीय कला के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पिथौरा जैसी पारंपरिक जनजातीय कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स राजेंद्र बासुनिया, प्रियंका तोमर, साक्षी भयड़िया, भरत सस्तिया एवं रितेश राठौड़ को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया।

    कार्यक्रम संवाद में मुख्यमंत्री ने सभी सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया और उनसे आह्वान किया कि वे राज्य शासन की जनकल्याणकारी एवं किसान हितैषी योजनाओं पर आधारित प्रभावी रील्स, वीडियो और डिजिटल सामग्री तैयार करें ताकि अधिक से अधिक किसानों, युवाओं और आम नागरिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुँचे और वे उनका अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि युवा इन्फ्लूएंसर्स समाज में सकारात्मक परिवर्तन के प्रभावी वाहक बन सकते हैं और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

  • ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ से बदली पर्यटन की दिशा, नई पीढ़ी के यात्रियों को लुभाने की बड़ी पहल

    ‘टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल’ से बदली पर्यटन की दिशा, नई पीढ़ी के यात्रियों को लुभाने की बड़ी पहल


    नई दिल्ली ।अरुणाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने अपना नया ब्रांड अभियान टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल लॉन्च किया है, जो अरुणाचल को पारंपरिक पहाड़ों और मठों की छवि से आगे ले जाकर अनुभव, संस्कृति और आत्मीयता की भारत की अंतिम खोज सीमा के रूप में प्रस्तुत करता है। इस अभियान का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित अरुणाचल हाउस में पर्यटन, शिक्षा, आरडब्ल्यूडी, पुस्तकालय एवं संसदीय कार्य मंत्री पासांग दोरजी सोना ने किया।

    यह नया अभियान अरुणाचल की ब्रांड पहचान बियॉन्ड मिथ्स एंड माउंटेन्स के तहत तैयार किया गया है, जिसमें यात्रियों को केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने के बजाय यहां की जीवनशैली, जनजातीय परंपराओं और स्थानीय लोगों से जुड़ने का आमंत्रण दिया गया है। सरकार का मानना है कि आज की नई पीढ़ी का यात्री केवल डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि अर्थपूर्ण और प्रामाणिक अनुभव चाहता है, और अरुणाचल इस अपेक्षा पर पूरी तरह खरा उतरता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री पासांग दोरजी सोना ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश हजारों वर्षों पुरानी विरासत, विविध जनजातीय संस्कृतियों, बौद्ध परंपराओं और अद्वितीय जैव-विविधता का जीवंत संगम है। उन्होंने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिक यात्राएं, वन्यजीवन, प्रकृति भ्रमण और सांस्कृतिक उत्सवों की असीम संभावनाएं हैं। मंत्री ने कहा, अरुणाचल की यात्रा केवल स्थलों तक सीमित नहीं रहती, यह एक ऐसा मानवीय अनुभव बन जाती है जो जीवनभर याद रहता है।

    पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन ने उल्लेखनीय उछाल देखा है। वर्ष 2023 और 2024 में राज्य में हर साल 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो महामारी-पूर्व स्तर से कहीं अधिक है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, आक्रामक ब्रांडिंग और अनुभव-आधारित पर्यटन मॉडल इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं।नई पर्यटन नीति के तहत राज्य सरकार कनेक्टिविटी सुधारने, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और आवासीय क्षमता में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि पर काम कर रही है। साथ ही फार्म टूरिज्म, इको-टूरिज्म, जनजातीय पर्यटन, साहसिक पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन और सीमावर्ती पर्यटन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय समुदायों को भी सीधा लाभ मिल सके।

    टेक ए न्यू टर्न इन अरुणाचल अभियान में गंतव्यों को कहानी-आधारित अनुभवों के रूप में पेश किया गया है। तवांग को आध्यात्मिक विरासत और हिमालयी सौंदर्य के प्रतीक के रूप में, जीरो को स्वदेशी संस्कृति की धड़कन के रूप में, अनिनी को झीलों और झरनों की धरती के रूप में, नामसाई को आध्यात्मिकता और नदी संस्कृति के संगम के रूप में, डोंग को भारत में प्रथम सूर्योदय के स्थल के रूप में और मेचुका को रोमांच व शांति के अद्भुत मेल के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। अभियान की फिल्मों और प्रिंट विजुअल्स में स्थानीय लोग, वास्तविक क्षण और प्राकृतिक दृश्य केंद्र में हैं, जो अरुणाचल की प्रामाणिक छवि को उभारते हैं।मंत्री सोना ने बताया कि पिछले वर्ष राज्य ने अपना लोगो और ब्रांड आइडेंटिटी बदली थी और यह अभियान उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल अरुणाचल को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में भी मजबूती से स्थापित करेगी।