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  • MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान

    MP: विस्थापित आदिवासी परिवारों को 15 लाख की मदद देंगे शिवराज….5 एकड़ जमीन देने का भी किया ऐलान


    रायसेन।
    बीते दिनों मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के नीलगढ़ में कई आदिवासी परिवारों (Tribal Families) को विस्थापित कर दिया गया था, जिसपर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने नाराजगी जताई थी। इस मामले को लेकर अब शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है। चौहान विस्थापित हुए सभी परिवारों के लिए 15 लाख रुपए राहत कोष से देने का ऐलान किया है। शिवराज सिंह ने 15 लाख रुपए के साथ आदिवासी परिवारों को 5 एकड़ खेती की जमीन भी देने का ऐलान किया है।


    क्या बोले शिवराज सिंह चौहान

    नीलगढ़ के विस्थापित आदिवासी परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये आदिवासी परिवार नीलगढ़ में सालों से रहते आ रहे हैं और जंगल बचाने के लिए अपनी जमीन, अपनी घर और अपना गांव छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं, इसके लिए मैं उनके लिए सम्मान प्रकट करना चाहता हूं। उन्होंने कहा आदिवासी परिवारों का ये त्याग जंगल को बचाने के लिए है।

    इस मामले पर बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब वो मुख्यमंत्री थे, तभी उनके लिए राहत पैकेज का ऐलान किया गया था। चौहान ने कहा कि अब इन परिवारों को नया नीलगढ़ में विस्थापित किया जा रहा है, जहां उन्हें 15 लाख रुपए और खेती करने के लिए हाईवे से लगी हुई 5 एकड़ जमीन दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ये सभी ऐलान विस्थापित परिवारों की राहत के लिए किए जा रहे हैं।


    विस्थापित परिवारों ने दिया न्योता

    विस्थापित परिवारों के लिए ऐलान करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इन आदिवासी परिवार के लोगों ने उन्हें नया नीलगढ़ में विस्थापित होने से पहले उन्हें और स्थानीय विधायक को अपने प्रोग्राम में आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि आदिवासी परिवार ये प्रोग्राम सालों से करते आ रहे हैं।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन परिवारों के बीच प्रोग्राम में जाना बहुत ही भावुक पल होगा। उन्होंने कहा कि जंगल बचाने के लिए गांव के लोग अपना घर, अपना गांव सब छोड़कर दूसरी जगह जा रहे होंगे। ऐसे में उनके साथ रहना एक भावुक पल होगा। चौहान ने कहा कि वो इन परिवारों के साथ बैठेंगे और उनकी विस्थापन के लिए हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं।

  • आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन

    आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार देर शाम केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रभावित आदिवासी परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। वह पहले भी इस मामले पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि मौके पर उन्होंने बच्चों को परेशान होते और महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा था। अब मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
    जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने अपने नुकसान को लेकर सवाल उठाए और मुआवजे की मांग की। परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं और मकानों के साथ फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन पर परिवारों की नजर बनी हुई है।
    बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर के. बालागुरु रात में कोनझीर पहुंचे और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को बस के जरिए वापस उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को परेशान नहीं किया जाए और जहां लोग स्थापित हैं वहां उनके साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए। हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कार्रवाई की परिस्थितियों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।
    कोसमी गांव की घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन ही नहीं बल्कि वास्तविक राहत भी मिले। उनके अनुसार मकान और फसलें प्रभावित होने से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हुई हैं। ऐसे में मुआवजे और जमीन के पट्टों से संबंधित मांगों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
    इधर कोसमी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च भी शुरू किया है। जानकारी के अनुसार ये परिवार शुक्रवार शाम तक राजधानी पहुंच सकते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मकान तोड़े जाने के मामले में न्याय मिले और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। मुख्यमंत्री की ओर से जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित परिवारों को किस तरह राहत मिलती है इस पर सभी की नजर रहेगी।