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  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा श्रृंगार किया गया। शनिवार तड़के हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया, सफेद और हरे रंगों से सजाया गया। इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंदिर के कपाट तड़के 2.30 बजे खोले गए। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत से अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न हुई।

    पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक और पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार शुरू हुआ। इस दौरान भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों के साथ भगवान का अलंकरण किया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के कारण इस बार श्रृंगार में तिरंगे के रंगों को प्रमुखता दी गई। बाबा महाकाल के मस्तक पर केसरिया, सफेद और हरे रंग का तिरंगा त्रिपुंड लगाया गया। इसके साथ रजत मुकुट पर भारत के तिरंगे का प्रतीक भी सजाया गया।

    श्रृंगार के दौरान भगवान के दोनों ओर हाथी के आभूषण लगाए गए। इसके अलावा रंग-बिरंगी पुष्प मालाओं से भी बाबा महाकाल का अलंकरण किया गया। भस्म आरती की धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजन और श्रृंगार की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

    भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को विभिन्न रजत आभूषणों से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इसके साथ पुष्प मालाओं और सुगंधित फूलों से भी भगवान का श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया और फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए इस विशेष श्रृंगार में धार्मिक परंपरा के साथ तिरंगे रंगों की झलक देखने को मिली।

    मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के बीच श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन किए।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने नंदी के कान के समीप अपनी मनोकामना व्यक्त की और आशीर्वाद मांगा।

    आरती के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे रंगों में सजे बाबा महाकाल के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए इस दिन के धार्मिक आयोजन की खास झलक रहे।

  • कर्रेगुट्टा पर आजादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा… नक्सलवाद के अंत से बस्तर के 90 गांवों में नई सुबह

    कर्रेगुट्टा पर आजादी के बाद पहली बार लहराया तिरंगा… नक्सलवाद के अंत से बस्तर के 90 गांवों में नई सुबह


    सुकमा।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों (Karregutta hills) पर आजादी (Independence) के बाद पहली बार तिरंगा (First Time Tricolour) लहराया गया है. यह पहाड़ी कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती थी. सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर जिलों के करीब 90 गांवों में भी 80 साल में पहली बार तिरंगा फहराया गया. छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप बाइक से करीगुट्टा पहुंचे और वहां झंडा फहराया. यह पूरा कार्यक्रम बस्तर तिरंगा यात्रा के तहत हुआ, जो तीन दिन तक चली।

    बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने के बाद लोगों के मन से डर और भ्रम दूर करने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा तीन दिन की तिरंगा यात्रा पर निकले थे. यात्रा का आखिरी दिन बीजापुर से शुरू हुआ और आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी, ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर खत्म हुआ. मंत्री द्वय ने तीन दिनों में नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर, इन पांच जिलों में करीब 600 किलोमीटर की दूरी बाइक से तय की।

    कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर जवानों से मिलकर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और मंत्री केदार कश्यप ने शहीदों की याद में पेड़ लगाए. इसके बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर झंडा फहराया गया. इस मौके पर विजय शर्मा ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि वे नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ में जवानों के साथ खड़े होकर झंडा फहरा रहे हैं. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ट सेवा और सराहनीय सेवा पदक देकर सम्मानित किया है।

    वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे बिना किसी डर के इस पहाड़ी पर आ पाएंगे, लेकिन आज यह मुमकिन हुआ है. सांसद महेश कश्यप ने इसे ऐतिहासिक पल बताते हुए कहा कि आजादी के 79 साल बाद पहली बार इन इलाकों में तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहरा रहा है. यात्रा के दौरान मंत्रियों और सांसद ने रास्ते में पड़ने वाले सभी गांवों में शहीदों की याद में पौधे लगाए और शहीदों की मिट्टी एकत्र की. उन्होंने शहीदों के परिजनों और ग्रामीणों से भी मुलाकात की।

    यात्रा के दूसरे दिन देर रात मंत्री टेकलगुडेम पहुंचे थे, जो कभी नक्सल प्रभावित इलाका था. यहां तक कि कुख्यात नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती से भी लोग स्वागत के लिए पहुंचे थे. भारी बारिश के बावजूद सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा के ग्रामीण देर शाम तक मंत्रियों के स्वागत के लिए मौजूद रहे. इस मौके पर विधायक चैतराम अटामी और पूर्व विधायक महेश गागड़ा भी मौजूद रहे।

  • जम्मू-कश्मीर के रामबन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने हर घर तिरंगा अभियान को जनभागीदारी का रूप दिया

    जम्मू-कश्मीर के रामबन में राष्ट्रीय राजमार्ग पर ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने हर घर तिरंगा अभियान को जनभागीदारी का रूप दिया

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में स्वतंत्रता दिवस से पहले हर घर तिरंगा अभियान के तहत आयोजित ई-रिक्शा तिरंगा रैली ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और नागरिक भागीदारी का संदेश दिया। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर निकली इस रैली में करीब 300 ई-रिक्शा और ऑटो चालकों ने हिस्सा लिया। रैली के दौरान वाहनों पर तिरंगा लहराता नजर आया और प्रतिभागियों ने देशभक्ति के नारे लगाए।

    रैली का उद्देश्य हर घर तिरंगा अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ना और नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के प्रति जागरूक करना रहा। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई कि वे अपने घरों पर तिरंगा लगाएं और राष्ट्रीय ध्वज को पूरी गरिमा एवं सम्मान के साथ प्रदर्शित करें।

    अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक के नेतृत्व में आयोजित यह रैली कैफेटेरिया मोड़ से शुरू हुई। इसके बाद ई-रिक्शा और ऑटो का काफिला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-44 के साथ आगे बढ़ते हुए करोल क्षेत्र से गुजरा और जिला कार्यालय पहुंचकर इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग पर तिरंगे से सजे वाहनों की मौजूदगी ने अभियान को अलग पहचान दी।

    रैली में प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। एआरटीओ वरुण भासिन, डिप्टी एसपी कुलदीप राज, मुख्यालय तहसीलदार रीजूता महाजन और नगर निकाय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरदर्शन जमवाल समेत कई अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    अतिरिक्त उपायुक्त वरुणजीत सिंह चरक ने कहा कि जिले में हर घर तिरंगा अभियान के तहत कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने ई-रिक्शा और ऑटो रैली को जनभागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए लोगों से अपने घरों पर तिरंगा लगाने का आग्रह किया।

    उन्होंने कहा कि अभियान तभी प्रभावी रूप ले सकता है, जब इसमें समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो। प्रशासन का जोर इस बात पर रहा कि राष्ट्रीय ध्वज केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रत्येक परिवार तक सम्मानपूर्वक पहुंचे।

    रैली में शामिल करीब 300 ई-रिक्शा चालकों की भागीदारी ने स्थानीय परिवहन समुदाय को भी अभियान से जोड़ा। तिरंगा लेकर आगे बढ़ते वाहनों और देशभक्ति के नारों से राष्ट्रीय राजमार्ग का वातावरण उत्साहपूर्ण नजर आया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय पर्व से जुड़े अभियान में समाज के विभिन्न वर्ग अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

    स्वतंत्रता दिवस से पहले रामबन जिले में कई स्तरों पर तिरंगा रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ई-रिक्शा तिरंगा रैली इसी क्रम का हिस्सा रही, जिसमें प्रशासन और आम नागरिकों की संयुक्त भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान, देश के प्रति नागरिक जिम्मेदारी और स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • हार्दिक पंड्या पर तिरंगे के अपमान का आरोप, टी-20 वर्ल्ड कप जश्न में वायरल वीडियो के आधार पर शिकायत दर्ज

    हार्दिक पंड्या पर तिरंगे के अपमान का आरोप, टी-20 वर्ल्ड कप जश्न में वायरल वीडियो के आधार पर शिकायत दर्ज



    नई दिल्ली। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत के जश्न के दौरान क्रिकेटर हार्दिक पंड्या पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप लगाते हुए बेंगलुरु में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुणे के वकील वाजिद खान बिडकर ने यह शिकायत शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में दी। शिकायत में कहा गया है कि अहमदाबाद में भारत की जीत के मौके पर पंड्या ने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मंच पर लेटते हुए तिरंगा ओढ़ा था, जो राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के खिलाफ है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, मैदान पर जश्न मनाते हुए वायरल हुए वीडियो में पंड्या अपने कंधे पर तिरंगा ओढ़कर दौड़ते और नाचते दिखाई दे रहे हैं। वाजिद खान का आरोप है कि जश्न के दौरान पंड्या ने तिरंगे का सम्मान नहीं किया और इस कारण यह ‘द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ की धारा 2 के तहत अपराध बनता है। इस कानून के तहत राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है और तिरंगे को जमीन पर गिराने या अनुचित तरीके से पहनने पर दंडनीय कार्रवाई की जा सकती है।

    प्रारंभ में पुलिस ने कहा कि घटना अहमदाबाद में हुई थी, इसलिए मामला वहीं दर्ज होना चाहिए, लेकिन वकील ने तर्क दिया कि तिरंगा पूरे देश का राष्ट्रीय प्रतीक है, इसलिए शिकायत कहीं भी दर्ज की जा सकती है। बाद में पुलिस ने उनकी शिकायत स्वीकार कर ली और उसकी कॉपी उन्हें प्रदान की।

    टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर ट्रॉफी अपने नाम की। यह भारत का तीसरा टी-20 वर्ल्ड कप खिताब है। इससे पहले भारत ने 2007 और 2024 में भी यह खिताब जीता था। खास बात यह है कि यह पहली बार है जब किसी टीम ने अपने ही देश में टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर लगातार दो खिताब अपने नाम किए।

    इस बीच सोशल मीडिया पर पंड्या के वीडियो ने खूब सुर्खियां बटोरीं। खेल प्रेमियों और आलोचकों ने पंड्या की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान हर भारतीय की जिम्मेदारी है। वहीं, कई समर्थकों ने यह भी कहा कि जश्न के दौरान भावनाओं में गलती हो सकती है, लेकिन कानून का पालन करना सभी के लिए जरूरी है।

    पंड्या और उनके एजेंट की तरफ से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस ने कहा कि शिकायत दर्ज हो गई है और मामले की जांच की जाएगी। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या पंड्या के द्वारा तिरंगे की गरिमा के साथ किसी प्रकार का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ‘द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971’ का उद्देश्य केवल दिखावे या अनजाने में किए गए उल्लंघन को नहीं, बल्कि जानबूझकर राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान करने वाले कार्यों को रोकना है।

    इस पूरे मामले ने एक बार फिर खेल और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता पर बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि खेल के जश्न और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।