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  • TMC में बड़ा सियासी संकट, 19 सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में, NDA के साथ जाने के संकेत

    TMC में बड़ा सियासी संकट, 19 सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में, NDA के साथ जाने के संकेत


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी कलह अब संसद तक पहुंचती नजर आ रही है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसदों के एक अलग गुट बनाने के दावे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। यह बागी समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग कर सकता है और साथ ही सदन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ बैठने की अनुमति भी चाहता है।

    सूत्रों और बागी गुट के नेताओं के अनुसार, सांसद खुद को “असली टीएमसी” के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। इस समूह की ओर से वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार को नेता और शताब्दी रॉय को उपनेता के रूप में प्रस्तावित किए जाने की बात भी सामने आई है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि उनके पास 19 सांसदों का समर्थन है और अन्य सांसदों के लिए भी दरवाजे खुले हैं।

    बताया जा रहा है कि इस घटनाक्रम के बाद NDA की संसदीय ताकत बढ़ सकती है, जिससे संसद में विपक्षी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष और आगे चलकर चुनाव आयोग (EC) की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    बागी गुट के नेताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी में आंतरिक असंतोष की वजह नेतृत्व शैली और संगठनात्मक फैसले हैं। उनका कहना है कि पहले जब तक ममता बनर्जी का सीधा नियंत्रण था, स्थिति स्थिर थी, लेकिन अब संगठन में बदलाव के बाद असंतोष बढ़ा है। कुछ नेताओं ने यहां तक दावा किया है कि पार्टी अब “कॉरपोरेट ढांचे” की तरह काम कर रही है, जहां जमीनी नेताओं की अनदेखी हो रही है।

    बागी सांसदों का यह भी तर्क है कि वे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं और अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसी वजह से वे NDA के साथ जुड़कर काम करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि पहले लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और उसके बाद चुनाव आयोग का रुख किया जाएगा।

    इसी बीच, पार्टी के भीतर अन्य स्तरों पर भी असंतोष के संकेत सामने आए हैं। वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और बैठक से दूरी बनाए जाने की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। कुछ नेताओं ने संगठनात्मक फैसलों और रणनीतिक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं, जिससे TMC के भीतर गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और चुनाव आयोग की संभावित भूमिका पर टिकी हुई हैं, जो आगे की राजनीतिक दिशा तय कर सकते हैं।

  • TMC में बड़ी टूट के संकेत? बागी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात, 19 सांसदों की सूची से मचा सियासी हड़कंप

    TMC में बड़ी टूट के संकेत? बागी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात, 19 सांसदों की सूची से मचा सियासी हड़कंप


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी में असंतोष के बीच कई बागी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बैठक में टीएमसी के कुछ बागी सांसद भी मौजूद रहे।

    जानकारी के अनुसार, इस बैठक में प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सयानी घोष शामिल रहीं। बताया जा रहा है कि यह बैठक करीब एक घंटे तक चली, जिसमें राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

    सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर असंतोष केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कई सांसद भी बागी रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। बताया यह भी जा रहा है कि इन सांसदों ने अपने हस्ताक्षर के साथ एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

    इस सूची के सामने आने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में यदि 19 सांसदों के बागी होने का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।

    उधर, कोलकाता में पार्टी के बागी विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 64 विधायक उनके समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी विधायक जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को अपना पत्र सौंपेंगे और एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ काम करेंगे।

    ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें 3 जून को टीएमसी से निष्कासित किया गया था, को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है। उनके अनुसार, उनका गुट अब पश्चिम बंगाल के हितों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगा।

    फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते दावों ने राज्य की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • TMC बगावत पर भड़कीं सागरिका घोष, बोलीं- अमित शाह का एक फोन आते ही खत्म हो जाती है नैतिकता

    TMC बगावत पर भड़कीं सागरिका घोष, बोलीं- अमित शाह का एक फोन आते ही खत्म हो जाती है नैतिकता

    नई दिल्ली । तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच Sagarika Ghose ने पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं और सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर दल-बदल की राजनीति को शर्मनाक बताते हुए इसकी नैतिकता पर सवाल खड़े किए।

    सागरिका घोष ने कहा कि वह राजनीति में इसलिए आईं क्योंकि उनका मानना है कि Narendra Modi के नेतृत्व वाली बीजेपी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्ष की लड़ाई में उनका विश्वास है।

    टीएमसी सांसद ने Mamata Banerjee के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका भरोसा ममता बनर्जी पर पहले भी था और आगे भी रहेगा। उन्होंने ममता को साहस और मूल्य आधारित राजनीति का प्रतीक बताया।

    सागरिका घोष ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी की प्रतिबद्धता चुनाव परिणामों के साथ बदल जाती है, तो फिर उसकी प्रतिबद्धता कभी वास्तविक थी ही नहीं। उन्होंने कहा कि किसी नेता और पार्टी के नाम पर चुनाव जीतने के बाद मुश्किल समय में उनका साथ छोड़ देना समझ से परे है।

    अपने बयान में उन्होंने सीधे तौर पर Amit Shah पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या एक फोन कॉल आते ही सारी नैतिकता खत्म हो जाती है? उन्होंने इसे लोकतांत्रिक राजनीति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कई नेताओं और सांसदों के अलग रुख अपनाने की खबरों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। बागी खेमे के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि कई सांसद एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में हैं, जिससे राज्य की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • बंगाल में TMC के भीतर बढ़ी हलचल! सांसदों की दिल्ली बैठक से तेज हुई अटकलें, ममता के सामने नई चुनौती?

    बंगाल में TMC के भीतर बढ़ी हलचल! सांसदों की दिल्ली बैठक से तेज हुई अटकलें, ममता के सामने नई चुनौती?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों की दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन घटनाक्रम को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

    इस बैठक में राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रॉय की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर उभर रहे असंतोष के संकेत अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

    दिल्ली में जुटे कई सांसद
    दिल्ली में हुई इस मुलाकात में TMC के सांसद जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, अरूप चक्रवर्ती और कालीपदा सोरेन समेत कई नेता शामिल बताए गए। वहीं शाम को सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर भी एक बैठक हुई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की खबरें सामने आईं। इसी बीच TMC सांसद काकोली घोष ने दावा किया कि प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य से संवाद किया जा रहा है।

    इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रॉय के आरोप
    राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने संगठन में भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और आंतरिक लोकतंत्र की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र किया था। उनके बयान को पार्टी के अंदरूनी असंतोष का संकेत माना गया।

    कई महीनों से चल रही है नाराजगी की चर्चा
    राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, TMC के भीतर पिछले कुछ समय से असंतोष की चर्चा लगातार होती रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसे दावों को खारिज किया जाता रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। हाल के दिनों में पार्टी की बैठकों में कई नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही है। इससे संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

    ऋतब्रत बंद्योपाध्याय की भूमिका पर नजर
    विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुखता से सामने आ रहा है। उन्होंने दावा किया है कि TMC के कई नेता उनके संपर्क में हैं और पार्टी के भीतर चल रही हलचलों को लेकर लगातार संवाद जारी है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष इसे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में पेश कर रहा है।

    फिरहाद हाकिम की मुलाकात ने बढ़ाई चर्चा
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले फिरहाद हाकिम की विपक्षी नेताओं से हुई मुलाकात ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ इसे संवाद की कोशिश मान रहे हैं तो कुछ इसे पार्टी के भीतर की स्थिति को समझने की कवायद बता रहे हैं।

    ममता बनर्जी की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषय
    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया से अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखी। आमतौर पर राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र सरकार के मुद्दों पर मुखर रहने वाली ममता की इस बार की चुप्पी को भी राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।

    आगे क्या?
    फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया है कि TMC के भीतर कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इन चुनौतियों से कैसे निपटता है और क्या संगठन में किसी बड़े बदलाव की स्थिति बनती है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब TMC के अगले कदम और संभावित रणनीति पर टिकी हुई है, क्योंकि बंगाल की राजनीति में होने वाला हर बदलाव राज्य के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान

    चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान



    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दिए जाने के बाद TMC नेतृत्व और बागी गुट के बीच टकराव और तेज हो गया है। इसी बीच TMC सांसद Mahua Moitra ने बागी विधायकों पर जमकर हमला बोला है।

    एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन नेताओं ने वर्षों तक Mamata Banerjee की लोकप्रियता और पार्टी के संगठनात्मक बल का लाभ उठाया, वही आज पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बागी नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता में रहने की आदत पड़ चुकी है, इसलिए वे विपक्ष में संघर्ष करने के बजाय आसान रास्ता चुन रहे हैं। महुआ ने दो टूक कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी छोड़नी है तो वह खुलकर जाए, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस बताने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बागी नेता चाहें तो अपनी अलग पार्टी बना लें, लेकिन TMC के नाम और पहचान का इस्तेमाल न करें।

    भाजपा पर गंभीर आरो
    महुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि भाजपा योजनाबद्ध तरीके से TMC को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए कहा कि वे कभी तृणमूल का हिस्सा रहे हैं और पार्टी के नेताओं की राजनीतिक कमजोरियों से भली-भांति परिचित हैं। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर भाजपा नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है।

    महुआ ने दावा किया कि कुछ नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों और नेताओं को गिरफ्तारी की धमकियां दी गईं, जिसके चलते वे बागी खेमे के साथ चले गए।

    “असली TMC ममता के साथ”
    बागी गुट के बढ़ते प्रभाव और चुनाव चिह्न पर संभावित विवाद के सवाल पर महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस आज भी ममता बनर्जी और उनके साथ खड़े नेताओं के पास ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल संगठन, विचारधारा और जनाधार ममता बनर्जी के नेतृत्व में कायम है।

    महुआ ने यह भी कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति आती है कि पार्टी को अपना मौजूदा चुनाव चिह्न छोड़ना पड़े, तब भी उन्हें कोई चिंता नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी थी, तब उन्होंने अपनी पहचान और चुनावी प्रतीक खुद तैयार किया था।

    नया सिंबल बनाकर भी जीत सकती हैं ममता
    महुआ मोइत्रा ने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी का राजनीतिक कद किसी चुनाव चिह्न का मोहताज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस नेता ने नया दल बनाकर और नया प्रतीक लेकर पश्चिम बंगाल में तीन बार सरकार बनाई, वह भविष्य में भी नया चुनावी चिह्न बनाकर जनता का समर्थन हासिल कर सकती हैं।

    उनके अनुसार, चुनाव चिह्न या पार्टी का नाम बदल सकता है, लेकिन जनता के बीच ममता बनर्जी की पहचान और राजनीतिक प्रभाव को कोई नहीं छीन सकता।

  • हम रेड कारपेट बिछाते हैं, वो ब्लैक से कर रहे स्वागत…', दिल्ली पहुंचते ही गुस्से से लाल हुईं ममता बनर्जी

    हम रेड कारपेट बिछाते हैं, वो ब्लैक से कर रहे स्वागत…', दिल्ली पहुंचते ही गुस्से से लाल हुईं ममता बनर्जी


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली पहुंचते ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि वह चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन जा रही हैं, जहां बंगाल से आए लोगों से मिलेंगी और दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे अत्याचारों की जानकारी लेंगी. ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है और केंद्रीय एजेंसियां बीजेपी के इशारे पर काम कर रही हैं.

    रेड कार्पेट बनाम ब्लैक कार्पेट का आरोप

    ममता बनर्जी ने कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री पश्चिम बंगाल आते हैं तो राज्य सरकार उनका रेड कार्पेट से स्वागत करती है, लेकिन जब बंगाल के लोग या जनप्रतिनिधि दिल्ली आते हैं तो उनके साथ ‘ब्लैक कार्पेट’ जैसा व्यवहार किया जाता है. उन्होंने इसे अपमानजनक और पक्षपातपूर्ण बताया.

    दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप
    मुख्यमंत्री ने दिल्ली पुलिस पर बंगाल के लोगों के साथ ज्यादती करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पुलिस को संयम बरतना चाहिए और बंगाल से आए लोगों को परेशान करना बंद करना चाहिए. ममता ने दावा किया कि कई मामलों में निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.

    बीजेपी के टूल की तरह काम कर रहीं एजेंसियां

    ममता बनर्जी ने कहा कि दिल्ली पुलिस और देश की अन्य जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहीं, बल्कि बीजेपी के राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति है.

    जरूरत पड़ी तो मैं खुद लड़ूंगी

    मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि अगर देश में कोई अन्याय के खिलाफ खड़ा नहीं होता, तो वह खुद लड़ेंगी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी पूरी ताकत से मुकाबला करेगी. उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

    बंग भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस

    ममता बनर्जी ने बताया कि बंग भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें पूरे मामले की जानकारी साझा की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग यह नहीं जानते कि बंगाल में और बंगाल के लोगों के साथ क्या हो रहा है.

  • बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'

    बंगाल चुनाव से पहले अभिषेक बनर्जी का बड़ा बयान कहा 'कांग्रेस की हमें नहीं जरूरत इंडिया गठबंधन पर भी दिया बयान'


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने के लिए उनकी पार्टी को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। हालांकि अभिषेक ने यह भी साफ किया कि तृणमूल कांग्रेस अब भी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है।

    अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कहा कांग्रेस के पास बंगाल में ऐसा कुछ नहीं है जिसकी हमें जरूरत हो या जो वह हमें दे सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल की जबकि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें गठबंधन का प्रस्ताव दिया था जिसे कांग्रेस ने ठुकरा दिया। अभिषेक ने कहा इसका परिणाम सबके सामने है उनकी सीट अब घटकर एक रह गई है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर कोई भी निर्णय ममता बनर्जी ही लेंगी। उन्होंने कहा जब पार्टी कोई फैसला लेगी तो आपको पता चल जाएगा। फिलहाल कांग्रेस से कोई गठबंधन नहीं है।
    इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि इसका नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने सरकार से पश्चिम बंगाल को बकाया राशि का भुगतान करने की मांग की। केंद्र सरकार को पश्चिम बंगाल का बकाया भुगतान करना चाहिए। मनरेगा का नाम बदलने से कोई फायदा नहीं होगा उन्होंने कहा।

    अभिषेक ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल के खिलाफ काम कर रही है और गांधीजी के नाम को हटाना बंगाल विरोधी कदम है। उन्होंने कहा गांधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी इसलिए बंगाल से गांधीजी का नाम हटाना गलत है।इस बयान ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया है और यह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतियों का इशारा है। अब यह देखना होगा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस क्या कदम उठाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई नया मोड़ आता है या नहीं।

  • CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?

    CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?


    नई दिल्‍ली । सीएए से लेकर एनआरसी और एसआईआर से लेकर बाबरी तक पूरे पश्चिम बंगाल(West Bengal) का सियासी पारा हाई है. हिंदू-मुस्लिम (Hindu-Muslim)और बंगाली बनाम बाहरी(Bengalis versus outsiders) जैसे समीकरणों से इतर मुर्शिदाबाद जिले से निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)के बाबरी प्लान ने बंगाल के चुनावी समर को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया है. इसी आधार पर दावा किया जा रहा है कि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होगी. 2019 में बीजेपी का मिशन बंगाल अधूरा रह गया था, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) हर हाल में सत्ता हासिल करना चाहती है.

    सीएए-एनआरसी और एसआईआर तक मुद्दे कई हैं…
    बीजेपी 10 सालों से आक्रामक होकर ममता बनर्जी को घेर रही है. एंटी इनकमबेंसी से इतर वो टीएमसी पर सनातन और हिंदुओं की अपेक्षा करने का आरोप लगाती आई है. ऐसे कुछ सवालों का जवाब ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी रणनीति से दे चुकी हैं. बंगाल में मुसलमानों पर करम और हिंदुओं पर सितम करने जैसे आरोपों से जूझ रही टीएमसी सुप्रीमों ने ऐसे आरोप खारिज करने के लिए दुर्गा माता के मंत्र पढ़कर सुना चुकी हैं.

    सीएए, एनआरसी और बेटियों के बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों यानी लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर भी बीजेपी टीएमसी को घेर रही है. कुल मिलाकर लाख टके का सवाल ये है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस नए ध्रुवीकरण वाले मुद्दे से कैसे निपटेंगी. बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जो वामदलों की सफाए के बाद से टीएमसी को वोट करते आए हैं.

    टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं. हुमायूं ओवीसी की पार्टी एआईएमआईएम और अन्य दलों संग अलायंस करके चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. ताकि बंगाल में किंग मेकर की भूमिका में आ सकें.

    पुराना कार्ड चलेगा?
    ध्रुवीकरण की कथित खेल को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इस बार हर हाल में बंगाल में भगवा लहराना चाहती है. ये मुद्दा किसे फायदा करेगा और किसे बैकफायर करेगा इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है. ममता बनर्जी और TMC हुमायूं कबीर को BJP की बी पार्टी बताकर काउंटर कर सकती हैं. वो पहले भी दावा करती रही हैं कि बीजेपी असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमान वोटों का बंटवारा करने के लिए खड़ा करती है. ऐसे में चुनावी तारीखों का ऐलान होने से पहले ममता बनर्जी जनता से अपील कर रही हैं कि BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए लोग केवल और केवल टीएमसी को चुने.

    SIR, पहचान की राजनीति और ‘बंगाली अस्मिता’
    TMC ध्रुवीकरण वाली चुनौती का सामना ‘बंगाली अस्मिता’ के कार्ड से कर सकती है. ये ‘ट्रंप’ कार्ड ‘दीदी’ का आजमाया हुआ नुस्खा है. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बड़े प्रभावी ढंग से इसका इस्तेमाल किया. बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा उठाकर अपना किला बचा चुकीं ममता बनर्जी अब शाकाहार और मांसाहार की जंग के सहारे नया नैरेटिव देने की कोशिश कर रही हैं.

    कुछ समय पहले भगवद्गीता पाठ के आयोजन स्थल के पास नॉनवेज बेचने पर एक शख्स के साथ मारपीट हुई थी. तब नैरेटिव गढ़ा गया कि बीजेपी देश को शाकाहार की ओर धकेल रही है, जो बहुलतावाद और बंगाल की पहचान के खिलाफ है. सूत्रों के मुताबिक एसआईआर और अन्य मुद्दों से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ी है, जिससे उनके वोट टीएमसी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं. ऐसी खबरों के बीच सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा.

  • SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें

    SIR पर ममता बनर्जी का तीखा हमला: अगर नाम हटाएँ, तो किचन में रखे सामानों के साथ तैयार रहें


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में स्टैंडर्डाइज्ड इलेक्टोरल रजिस्टर (SIR) को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कृष्णानगर में एक रैली के दौरान बेहद तीखा और विवादित बयान देते हुए महिलाओं से आह्वान किया कि यदि वोटर लिस्ट की समीक्षा में उनके नाम हटाए जाएँ, तो वे किचन में मौजूद सामानों के साथ तैयार रहें।

    अगर नाम काटे जाएँ… महिलाएँ आगे बढ़ें, पुरुष पीछे खड़े रहें

    कृष्णानगर की सभा में ममता बनर्जी ने कहा,
    अगर चुनाव के दौरान दिल्ली से पुलिस बुलाकर माताओं-बहनों को डराया जाएगा और आपके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएँगे, तो इसे सहन मत करो। आपके किचन में हथियार हैं… महिलाएँ आगे बढ़ेंगी और पुरुष उनके पीछे खड़े होंगे।

    उनके इस बयान को भाजपा ने भड़काऊ करार दिया है, जबकि तृणमूल समर्थक इसे जन अधिकार की लड़ाई बता रहे हैं।

    बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप

    सभा में ममता ने भाजपा पर तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा,
    बीजेपी हर चुनाव में पैसे और बाहरी लोगों का इस्तेमाल कर जनता को बांटती है। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास करती हूं। धर्म का मतलब पवित्रता, मानवता और शांति है-हिंसा या भेदभाव नहीं।

    उन्होंने धार्मिक आयोजनों पर भी टिप्पणी की और कहा कि लोग जब घर में गीता का पाठ करते हैं या दिल में अल्लाह से दुआ करते हैं, तब इसका दिखावा करने की जरूरत नहीं होती।

    क्या मुझे दंगाइयों की पार्टी को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी?

    NRC और SIR को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए ममता बोलीं,
    क्या अब मुझे दंगाइयों की पार्टी (बीजेपी) को अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी?

    उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री बंगालियों को बांग्लादेशी बताकर डिटेंशन सेंटर भेजने की कोशिश कर सकते हैं।

    किसी को बंगाल से बाहर नहीं जाने देंगे

    उन्होंने जोर देकर कहा,
    हम किसी को पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं निकालने देंगे। अगर किसी को जबरन निकाला गया, तो उसे वापस लाने का तरीका हम जानते हैं।

    राजनीतिक माहौल गरम, SIR पर टकराव बढ़ा

    SIR को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस कहती है कि यह बंगालियों को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है, जबकि बीजेपी इसे पारदर्शिता और फर्जी वोटिंग खत्म करने की प्रक्रिया बताती है।
    ममता का यह बयान आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।

  • ‘हैदराबाद का ओवैसी वो, बंगाल का मैं’ – हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की सियासत में बवंडर

    ‘हैदराबाद का ओवैसी वो, बंगाल का मैं’ – हुमायूं कबीर के बयान से बंगाल की सियासत में बवंडर


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देते हुए खुद को “बंगाल का ओवैसी” बताया है और एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का बड़ा ऐलान किया है।

    कबीर ने दावा किया कि उनकी नई
    पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर साबित होगी और वे राज्य की 135 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे।

    बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति के कार्यक्रम के बाद निलंबन

    मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति निर्माण की आधारशिला रखने के बाद हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया था। निलंबन के कुछ दिनों बाद उन्होंने राजनीतिक मैदान में अलग राह चुनने का ऐलान कर दिया।

    नई पार्टी का गठन और ओवैसी से बातचीत का दावा

    एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कबीर ने कहा-

    “मैंने असदुद्दीन ओवैसी से बात की है। वो हैदराबाद के ओवैसी हैं और मैं बंगाल का ओवैसी हूँ।”

    उन्होंने बताया कि 12 दिसंबर को कोलकाता में लाखों समर्थकों की मौजूदगी में वे अपनी नई पार्टी का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य के मुस्लिम समाज के अधिकारों और प्रतिनिधित्व के लिए काम करेगी।

    हालांकि उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तृणमूल के वोट बैंक को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन बाद के बयानों ने इस दावे को कमजोर कर दिया।

    ‘तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक खत्म’ – कबीर का दावा

    कबीर ने एक बयान में कहा-

    “मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। मेरी पार्टी ही चुनाव का गेमचेंजर होगी। तृणमूल का मुस्लिम वोट बैंक खत्म हो जाएगा।”

    गौरतलब है कि बंगाल में लगभग 27% मुस्लिम आबादी है, जो अब तक तृणमूल कांग्रेस की बड़ी ताकत मानी जाती रही है। यही वजह है कि कबीर का दावा टीएमसी के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

    AIMIM से गठबंधन के संकेत

    हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि वे AIMIM के संपर्क में हैं और संभव है कि ओवैसी की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ें।
    हालांकि AIMIM या असदुद्दीन ओवैसी ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    राजनीतिक हलचल तेज – टीएमसी की बढ़ी चिंता

    कबीर के ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में तेजी से हलचल बढ़ गई है। विश्लेषक मानते हैं कि यदि कबीर AIMIM से हाथ मिलाते हैं, तो यह मुस्लिम वोटों के बड़े हिस्से पर असर डाल सकता है। इसका सीधा लाभ विपक्षी दलों – खासकर बीजेपी और लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन – को मिल सकता है।

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि-

    कबीर की नई पार्टी को जमीनी स्तर पर कितना समर्थन मिलता है?

    क्या ओवैसी वास्तव में उनके साथ कदम मिलाकर चलेंगे?

    और क्या यह कदम तृणमूल के मजबूत वोट बैंक को वास्तव में नुकसान पहुंचा पाएगा?

    अभी इतना तय है कि हुमायूं कबीर के बयान और घोषणा ने बंगाल की सियासत में तेज हलचल मचा दी है।