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  • बंगाल की राजनीति में बढ़ा सस्पेंस, बागी टीएमसी गुट में मतभेद खुलकर आए सामने, ममता के नेतृत्व पर फिर बनी सहमति

    बंगाल की राजनीति में बढ़ा सस्पेंस, बागी टीएमसी गुट में मतभेद खुलकर आए सामने, ममता के नेतृत्व पर फिर बनी सहमति


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े घटनाक्रम लगातार नए मोड़ ले रहे हैं। कुछ दिन पहले पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक विभाजन की खबरों के बीच जिस बागी गुट ने खुद को संगठन की नई ताकत के रूप में पेश किया था, उसी समूह के भीतर अब मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। कई विधायकों द्वारा सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के नेतृत्व के समर्थन ने इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है।

    राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति में यह बदलाव उस समय सामने आया है जब हाल ही में पार्टी से अलग हुए विधायकों के एक समूह ने अपना स्वतंत्र गुट बनाकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाई थी। इस गुट ने दावा किया था कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे संगठन के भविष्य को नई दिशा देना चाहते हैं। इसके बाद विधानसभा स्तर पर भी उनकी सक्रियता देखने को मिली थी और विपक्षी नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया था।

    हालांकि अब बागी गुट के भीतर से ही अलग-अलग आवाजें सामने आने लगी हैं। हावड़ा क्षेत्र के विधायक गुलशन मलिक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ममता बनर्जी केवल मार्गदर्शक की भूमिका में रहें और नेतृत्व किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया जाए, यह विचार उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ही उनके लिए सर्वोच्च नेता हैं और पार्टी का नेतृत्व भी उनके हाथों में ही रहना चाहिए।

    गुलशन मलिक के इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बागी गुट के भीतर नेतृत्व को लेकर पूर्ण सहमति नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई अन्य विधायक भी इसी सोच से सहमत हैं और इस विषय पर आपसी चर्चा हो चुकी है। उनके अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ जुड़ी हुई हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बागी गुट की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। यदि बड़ी संख्या में विधायक नेतृत्व परिवर्तन के बजाय ममता बनर्जी के नेतृत्व को जारी रखने के पक्ष में रहते हैं तो बागी खेमे की राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक दावे कमजोर पड़ सकते हैं। इससे भविष्य में गुट की एकजुटता बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    गौरतलब है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा अलग समूह बनाए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। बागी खेमे ने विधानसभा स्तर पर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की थी और राजनीतिक मान्यता हासिल करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं भी पूरी की थीं। इस कदम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा था।

    अब जबकि उसी समूह के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं, राजनीतिक समीकरण फिर बदलते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी गुट अपनी एकजुटता बनाए रख पाता है या फिर आंतरिक मतभेद उसके प्रभाव को सीमित कर देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी यह घटनाक्रम राज्य के राजनीतिक भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है और सभी दलों की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।
  • हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे

    हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal)में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid)की नींव रख चुके विधायक हुमायूं कबीर(Humayun Kabir) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Mamata Banerjee) को चुनौती दी है। उन्होंने बुधवार को कहा है कि वह अगले विधानसभा चुनाव में सीएम बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। इससे पहले वह दावा कर चुके हैं कि बनर्जी 2026 में सीएम नहीं बन पाएंगी। तृणमूल कांग्रेस ने कबीर को निलंबित कर दिया है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं 22 दिसंबर को एक नई पार्टी का ऐलान करूंगा। मैं ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवारों को उतारूंगा। जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे ऐसा करने के लिए हुमायूं कबीर का समर्थन लेना पड़ेगा।’ उन्होंने पहले भी कहा था कि वह अगले चुनाव में पश्चिम बंगाल में किंगमेकर बनकर सामने आएंगे।

    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कबीर ने दावा किया कि 2026 में न तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू पाएगी। कबीर ने कहा कि उनका अनुमान है कि 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी।

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता।’ कबीर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। आप देखेंगे कि मैं जो पार्टी बनाऊंगा, वह इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा, उसे मेरी पार्टी के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’

    TMC ने उड़ाया मजाक
    टीएमसी ने कबीर के इस दावे का मजाक उड़ाया था। सीएम बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। सरकार बनाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी जमानत बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे निराधार दावे उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं।’