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  • 2027 में मेष में शनि का होगा गोचर, इन 3 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, जानें बचाव के उपाय

    2027 में मेष में शनि का होगा गोचर, इन 3 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, जानें बचाव के उपाय


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म, न्याय और अनुशासन का कारक माना जाता है। शनि का राशि परिवर्तन सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव डालता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 3 जून 2027 को शनिदेव अपनी मित्र और स्वराशि की यात्रा पूरी कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं में मेष को शनि की नीच और शत्रु राशि माना गया है।

    मान्यता है कि किसी ग्रह के नीच राशि में पहुंचने पर उसके शुभ प्रभाव कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में शनि के मेष राशि में गोचर के दौरान कुछ जातकों को कामकाज में देरी, मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खास तौर पर मेष, वृषभ और कन्या राशि के जातकों को इस अवधि में अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    मेष राशि: साढ़ेसाती के साथ बढ़ेगी चुनौती
    शनि का प्रवेश मेष राशि में ही होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दौरान मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव भी रहेगा। इससे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और भ्रम जैसी स्थितियां बढ़ सकती हैं।

    बनते हुए काम आखिरी समय में अटक सकते हैं। सेहत को लेकर लापरवाही से बचना होगा। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों के साथ विवाद से दूर रहें और जल्दबाजी में किसी बड़े वित्तीय जोखिम से बचें।

    वृषभ राशि: खर्च बढ़ने से बिगड़ सकता है बजट
    वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का गोचर बारहवें भाव में होगा। इससे साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू होने की बात कही गई है। इस दौरान अचानक और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं, जिसका असर बजट पर पड़ सकता है।

    भविष्य को लेकर चिंता बनी रह सकती है। पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतना जरूरी होगा। किसी को बड़ी रकम उधार देने से बचें। साथ ही कोर्ट-कचहरी या विवादों में उलझने से भी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    कन्या राशि: नौकरी-बिजनेस में आ सकती हैं रुकावटें
    कन्या राशि वालों के लिए शनि आठवें भाव में गोचर करेंगे। ज्योतिष में आठवें भाव को अचानक होने वाले बदलावों और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है।

    इस दौरान नौकरी या कारोबार में अनपेक्षित रुकावटें आ सकती हैं। सहकर्मियों और कारोबारी साझेदारों के साथ गलतफहमियां बढ़ने की आशंका रहेगी। वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और चोट-चपेट से बचने के लिए सतर्क रहें। इस अवधि में अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं को गोपनीय रखना और बिना पूरी जानकारी के निवेश करने से बचना बेहतर माना गया है।

    शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए क्या करें?

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शनि के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं—
    – शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – नियमित रूप से हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
    – ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का रोज 108 बार जाप करें।
    – शनिवार को काले तिल, उड़द की दाल, लोहे के बर्तन या जूते-चप्पल जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।