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  • US: ट्रंप फेमिली को 1.6 अरब डालर की डील में हुआ बंपर मुनाफा…. वित्त मंत्री का नाम भी शामिल

    US: ट्रंप फेमिली को 1.6 अरब डालर की डील में हुआ बंपर मुनाफा…. वित्त मंत्री का नाम भी शामिल


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को लेकर एक नया बवाल शुरू हो गया है। हाल ही में हुए एक बड़े खुलासे के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने हाल ही में एक ऐसी डील (Deel) की है जिससे ट्रंप के बेटे को अरबों का फायदा होने जा रहा है। वहीं इस प्रॉफिट वाली डील में ट्रंप के परिवार के साथ साथ अमेरिका के वित्त मंत्री हावर्ड लुटनिक (Finance Minister Howard Lutnick) का नाम भी है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की अमेरिका फर्स्ट की नीति को लेकर सवाल उठने शुरू हो हुए हैं।

    दरअसल यह खुलासा द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में हुआ है। इसके मुताबिक कजाकिस्तान (Kazakhstan) के साथ दुनिया के सबसे बड़े दुर्लभ खनिज ‘टंगस्टन’ के भंडार को विकसित करने के लिए अमेरिका ने हाल ही में 1.6 अरब डॉलर यानी करीब 13,500 करोड़ रुपये की सरकारी डील की है। इस डील से सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के बेटों और उनके वाणिज्य मंत्री के परिवार को तगड़ा वित्तीय मुनाफा होने जा रहा है।

    बेहद अहम है ये डील
    कजाकिस्तान के साथ हुआ यह सौदा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। फिलहाल वैश्विक टंगस्टन बाजार पर पूरी तरह चीन का कब्जा है। चीन लगातार इस दुर्लभ खनिज के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध बढ़ा रहा है। बता दें कि टंगस्टन का इस्तेमाल मिसाइल वॉरहेड्स, फाइटर जेट्स, सेमीकंडक्टर्स और कई एडवांस सैन्य तकनीकों में होता है। अमेरिका इस डील के जरिए चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है। हालांकि अब टंगस्टन से ज्यादा अब चर्चा उन चेहरों की हो रही है, जिनकी तिजोरियां इस सरकारी सौदे से भरने वाली हैं।

    तय हुई डील, पीछे-पीछे बेटों ने लगा दिए पैसे
    दस्तावेजों के मुताबिक, जैसे-जैसे सरकारी स्तर पर इस डील की बातचीत आगे बढ़ रही थी, ठीक उसी समय ट्रंप और उनके करीबी मंत्रियों के परिवारों की कंपनियां इस सौदे में अपनी हिस्सेदारी खरीद रही थीं। सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क के सेंट रेजिस होटल में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव के बीच बैठक हुई। इसी बैठक के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद फोन कॉल के जरिए कजाकिस्तान के राष्ट्रपति को इस प्रोजेक्ट के लिए राजी किया।

    इस बैठक के ठीक कुछ हफ्तों बाद, ‘डोमिनारी सिक्योरिटीज’ नाम की एक इन्वेस्टमेंट फर्म ने इस कजाकिस्तान माइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य कंपनी में शेयर खरीद लिए। यह कंपनी ट्रंप टावर से चलती है और इसमें डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की 20% हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बेटों ब्रैंडन और काइल की एक कंपनी इन्वेस्टमेंट बैंक ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ ने इस प्रोजेक्ट में निवेश के लिए 210 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया।

    सरकारी तिजोरी से $8.9 अरब पाने की होड़
    यह कोई इकलौता मामला नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और लुटनिक परिवारों से जुड़ी कंपनियां कम से कम 14 ऐसी माइनिंग प्रोजेक्ट्स में हित रखती हैं, जिन्हें अमेरिकी सरकार का समर्थन प्राप्त है। ये कंपनियां अमेरिकी सरकार से लगभग 8.9 अरब डॉलर की फेडरल फंडिंग, लोन या रेगुलेटरी मंजूरी पाने की रेस में सबसे आगे हैं।

    संसद में उठे सवाल, वाइट हाउस ने खारिज किए आरोप
    अमेरिकी सांसद मैक्सिन डेक्सटर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, “संसद को यह सुनिश्चित करना होगा कि टैक्सपेयर्स के पैसों का इस्तेमाल देश के हित में हो, न कि ट्रंप प्रशासन के करीबी लोगों और उनके परिवार के सदस्यों की जेबें भरने के लिए।” वहीं हितों के टकराव के आरोपों पर अब वाइट हाउस ने अपनी सफाई जारी की है। वाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “ट्रंप प्रशासन के फैसलों के पीछे सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी जनता का हित है। अमेरिका की क्रिटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित करना राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकता है।” इधर वाणिज्य विभाग ने कहा है कि मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने अपनी पुरानी कंपनी ‘कैंटर फिट्जगेराल्ड’ में अपनी हिस्सेदारी पहले ही बेच दी है और उनका इस लोन या फंडिंग फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है।

  • पाकिस्तान में शुरू हुआ स्टेबलकॉइन का नया दौर… ट्रंप फैमिली की क्रिप्टो कंपनी ने की है बड़ी डील

    पाकिस्तान में शुरू हुआ स्टेबलकॉइन का नया दौर… ट्रंप फैमिली की क्रिप्टो कंपनी ने की है बड़ी डील


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच संबंध कैसा है, यह बताने की जरूरत नहीं। खासकर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद। अब तक अमेरिकी प्रशासन और पाकिस्तानी सरकार के बीच बात होती थी, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का परिवार भी पाकिस्तान से जुड़ रहा है। असल में ट्रंप परिवार से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वर्ल्ड लिबर्टी का किसी राष्ट्रीय सरकार के साथ सार्वजनिक रूप से घोषित पहला बड़ा समझौता है। बता दें कि कंपनी की शुरुआत सितंबर 2024 में हुई थी।

    इस समझौते के तहत वर्ल्ड लिबर्टी की सहयोगी कंपनी एससी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के साथ मिलकर काम करेगी। यह MoU (समझौता) पिछले साल पाकिस्तानी अधिकारियों और अमेरिकी पक्ष के बीच हुई कई बैठकों के बाद हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ल्ड लिबर्टी के USD1 स्टेबलकॉइन को एक नियंत्रित डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शामिल करना है। इससे यह स्टेबलकॉइन पाकिस्तान के मौजूदा डिजिटल करेंसी सिस्टम के साथ काम कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में इस्तेमाल हो सकेगा। पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (PVARA) ने बुधवार को इस MoU पर हस्ताक्षर किए।


    पाकिस्तान के लिए काफी अहम

    माना जा रहा है कि यह समझौता पाकिस्तान के लिए काफी अहम है। पाकिस्तान सरकार नकदी के इस्तेमाल को कम करना चाहती है और विदेशों से रेमिटेंस (पैसे भेजना) को आसान व सस्ता बनाना चाहती है। क्रिप्टोकरेंसी, खासकर स्टेबलकॉइन, इसमें बड़ी मदद कर सकते हैं। पाकिस्तान में लाखों लोग पहले से क्रिप्टो का इस्तेमाल करते हैं और हर साल बड़ी रकम रेमिटेंस के रूप में आती है। माना जा रहा है कि इस डील से पाकिस्तान नई डिजिटल तकनीक को समझ सकेगा, उसे नियमों के दायरे में लाएगा और राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करेगा।

    बता दें कि स्टेबलकॉइन ऐसी डिजिटल मुद्रा होती है जिसकी कीमत अमेरिकी डॉलर जैसी स्थिर चीज से जुड़ी रहती है, इसलिए इसमें मूल्य में उतार-चढ़ाव का जोखिम बहुत कम होता है। वर्ल्ड लिबर्टी एक क्रिप्टो-आधारित फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म है, जो डिजिटल वॉलेट की तरह काम करता है और दुनिया भर में पैसे भेजने-पाने को आसान बनाता है। दुनिया की कई सरकारें अब स्टेबलकॉइन को भुगतान प्रणाली और बड़े वित्तीय सिस्टम में शामिल करने के तरीके तलाश रही हैं।


    समझौते के बाद उठ रहे सवाल

    ट्रंप की पाकिस्तान से निकटता पर अमेरिका में कुछ सवाल भी उठे हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप परिवार अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान में परिवार के व्यापारिक सौदों के चलते भारत से संबंध प्रभावित हुए। ट्रंप परिवार के पाकिस्तान में क्रिप्टो कारोबार से जुड़े सवाल पर सुलिवन ने कहा कि यह ट्रंप की विदेश नीति की उन कहानियों में से एक है, जिन पर कम ध्यान दिया गया है।