Tag: Tukaram Mundhe

  • महाराष्ट्र: MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनाया गया समिति का सचिव

    महाराष्ट्र: MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनाया गया समिति का सचिव


    मुंबई। महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने सुधार की दिशा में कदम उठाया है। पुणे में भर्ती अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार 10 दिनों से जारी था। इसी बीच सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की व्यवस्था में बदलाव के सुझाव देने के लिए एक समिति बनाई है। इसमें प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।

    राज्य सरकार में मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने रविवार को पुणे के एसएम जोशी पुल पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद समिति के गठन की घोषणा की। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे समिति के सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    समिति के अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीडी नाइक शामिल हैं। समिति से एमपीएससी की भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने की अपेक्षा है।

    तीन साल में 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग

    अभ्यर्थियों का आंदोलन केवल एमपीएससी के कामकाज में बदलाव तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी अगले तीन वर्षों में सरकारी विभागों के 70 हजार पदों पर भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को गति देने के साथ परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

    इसके अलावा, अभ्यर्थियों ने जनवरी में प्रस्तावित समूह-सी की परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई है। उनका जोर भर्ती के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर है, ताकि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को राहत मिल सके।

    आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी है। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने आश्वासन दिया कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के अलावा अभ्यर्थियों की अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

    MPSC अध्यक्ष को हटाने की भी मांग

    प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आयोग के मौजूदा अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।

    हालांकि, अध्यक्ष को हटाने के संबंध में सरकार ने कोई निर्णय लिया है या नहीं, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका। समिति का गठन भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांगों के बीच हुआ है, लेकिन अभ्यर्थियों की सभी मांगों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।

    रोहित पवार ने किया मुंढे की नियुक्ति का स्वागत

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव बनाए जाने का स्वागत किया।

    पवार ने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का रास्ता साफ हो सकेगा।

    अब समिति की कार्यवाही और उससे सामने आने वाले सुझावों पर नजर रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती कैलेंडर को प्रभावी बनाना, पर्याप्त पदों पर नियुक्तियां करना और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद आंदोलनकारी अपनी बाकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

  • शाहरुख अजय और टाइगर को नोटिस के बाद तुकाराम मुंढे का सख्त रुख बोले विज्ञापन करने वाले भी जिम्मेदार

    शाहरुख अजय और टाइगर को नोटिस के बाद तुकाराम मुंढे का सख्त रुख बोले विज्ञापन करने वाले भी जिम्मेदार


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों अपने सख्त रवैये को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी से जुड़े मामलों पर कार्रवाई के बीच उन्होंने बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों शाहरुख खान अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को लेकर भी कड़ा बयान दिया है। मामला विमल इलायची के विज्ञापन से जुड़ा है। FDA की ओर से तीनों अभिनेताओं को शो कॉज नोटिस जारी किया गया था और अब इसी मामले पर तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि किसी सेलिब्रिटी की लोकप्रियता कानून से ऊपर नहीं हो सकती।

    एनडीटीवी से बातचीत में तुकाराम मुंढे ने कहा कि लोगों के लिए शाहरुख खान अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ बड़े स्टार हो सकते हैं लेकिन उनके लिए वे उन लोगों के तौर पर देखे जाते हैं जिन्होंने संबंधित उत्पाद का विज्ञापन किया है। उन्होंने कहा कि अगर विज्ञापन के जरिए कानून का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उनके मुताबिक FDA ने जो कार्रवाई शुरू की है वह कानून के तहत की गई है और इस मामले में आगे की प्रक्रिया भी नियमों के अनुसार ही चलेगी।

    मुंढे ने यह भी बताया कि तीनों अभिनेताओं को 11 अगस्त को नोटिस जारी किया गया था और उनसे निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा गया था। तीनों में से एक अभिनेता के जवाब को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ने की बात कही गई है। हालांकि जब उनसे विशेष रूप से पूछा गया कि क्या शाहरुख खान ने नोटिस का जवाब दिया है तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी याद नहीं है क्योंकि यह मामला असिस्टेंट कमिश्नर के स्तर पर है। उन्होंने संभावना जताई कि शायद जवाब नहीं दिया गया है लेकिन इस बारे में वह निश्चित नहीं हैं। वहीं उन्होंने संकेत दिया कि बाकी दो अभिनेताओं की ओर से दिए गए जवाब पर विभाग की ओर से विचार किया जाएगा।

    इस पूरे मामले में सबसे अहम मुद्दा विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी को लेकर है। आमतौर पर किसी उत्पाद से जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी को निर्माता या कंपनी से जोड़ा जाता है लेकिन तुकाराम मुंढे ने इस तर्क से असहमति जताई है। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति या संस्था की ओर से किसी उत्पाद का प्रचार किया जा रहा है उसे भी उस उत्पाद और उसके दावों के बारे में पर्याप्त जानकारी हासिल करनी चाहिए। यानी किसी ब्रांड का चेहरा बनने से पहले विज्ञापन करने वाले व्यक्ति की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    शाहरुख खान की बात करें तो उनकी पिछली रिलीज फिल्म डंकी थी जो 2023 में आई थी। अब वह किंग को लेकर चर्चा में हैं जिसमें सुहाना खान सहित कई कलाकार नजर आएंगे। अजय देवगन भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। वहीं टाइगर श्रॉफ की फिल्मों को लेकर भी दर्शकों की नजर बनी हुई है। ऐसे में तीनों सितारों से जुड़ा यह मामला फिल्मी दुनिया के साथ-साथ सेलिब्रिटी विज्ञापनों की जिम्मेदारी पर भी बहस खड़ी करता है।