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  • Plant Vastu: छत पर पौधे लगाने से पहले जान लें वास्तु के ये जरूरी नियम, सही दिशा और देखभाल से बनी रहे सकारात्मकता

    Plant Vastu: छत पर पौधे लगाने से पहले जान लें वास्तु के ये जरूरी नियम, सही दिशा और देखभाल से बनी रहे सकारात्मकता


    नई दिल्ली ।
    घर की छत को पौधों और गमलों से सजाकर खूबसूरत बनाने का चलन बढ़ा है। कई लोग छत पर अलग-अलग तरह के पौधे लगाकर उसे छोटे गार्डन का रूप देते हैं। वास्तु शास्त्र में भी पौधों को लेकर कई नियम बताए गए हैं। इनके अनुसार पौधों की दिशा, आकार, संख्या और रखरखाव का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि सही दिशा में लगाए गए पौधे घर के वातावरण में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि से जुड़ी ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होते हैं।

    छत पर गमले रखने से पहले सबसे जरूरी बात उनकी दिशा को लेकर बताई गई है। वास्तु के अनुसार छोटे, हल्के और फूल वाले पौधों को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है। तुलसी, गेंदा, पुदीना और अन्य औषधीय पौधों को भी इन दिशाओं में रखने की सलाह दी गई है।

    वहीं, बड़े और ऊंचे पौधों के लिए दक्षिण और पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना गया है। भारी गमलों वाले पौधों को भी इन दिशाओं में रखने की बात कही गई है। वास्तु के अनुसार दक्षिण और पश्चिम दिशा में भारी वस्तुएं रखने से स्थिरता बनी रहने की मान्यता है और इसे नकारात्मक ऊर्जा को रोकने से भी जोड़ा जाता है।

    छत के बीच के हिस्से को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वास्तु में इस स्थान को ब्रह्मस्थान कहा जाता है और इसे खुला तथा साफ रखना बेहतर माना जाता है। इसलिए छत के बिल्कुल बीच में भारी गमला या बड़ा पौधा रखने से बचने की सलाह दी गई है।

    पौधों के चुनाव में भी सावधानी जरूरी बताई गई है। छत पर कैक्टस या दूसरे कांटेदार पौधे लगाने से बचने की सलाह दी गई है। गुलाब को इसका अपवाद बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार कांटेदार पौधों को तनाव और नकारात्मकता से जोड़ा जाता है।

    इसके अलावा छत को जरूरत से ज्यादा गमलों से भरने से भी बचना चाहिए। बहुत अधिक संख्या में गमले रखने या भारी गमलों की भीड़ लगाने को वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना गया है। पौधों के बीच पर्याप्त खुली जगह रखना बेहतर बताया गया है। इससे छत पर पौधों को व्यवस्थित रखने में भी आसानी रहती है।

    सूखे, टूटे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक छत पर नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र में ऐसे पौधों को नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए पौधों की नियमित देखभाल करने और किसी पौधे के सूखने या खराब होने पर उसे तुरंत हटाने की सलाह दी गई है।

    छत पर पौधे लगाते समय केवल वास्तु नियमों का ही नहीं, बल्कि पौधों की जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। ऐसे पौधों का चुनाव करना चाहिए जिन्हें पर्याप्त धूप मिल सके और जिनकी देखभाल आसानी से की जा सके। बहुत अधिक फैलने वाले या भारी होने वाले पौधों को लगाने से पहले उनकी बढ़त और छत पर पड़ने वाले भार का ध्यान रखना चाहिए। इस तरह पौधों की दिशा, संख्या, आकार और नियमित देखभाल पर ध्यान देकर छत को व्यवस्थित रखा जा सकता है।

  • क्योंकि सास भी कभी बहू थी के 1833 एपिसोड ने बनाया इतिहास, तुलसी-मिहिर की जोड़ी आज भी दर्शकों को याद

    क्योंकि सास भी कभी बहू थी के 1833 एपिसोड ने बनाया इतिहास, तुलसी-मिहिर की जोड़ी आज भी दर्शकों को याद

    नई दिल्ली । टीवी धारावाहिकों की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो प्रसारण खत्म होने के वर्षों बाद भी दर्शकों की यादों में बनी रहती हैं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ भी ऐसा ही धारावाहिक रहा, जिसने पारिवारिक रिश्तों और बदलते सामाजिक परिवेश को टेलीविजन पर लंबे समय तक प्रमुखता से पेश किया। एकता कपूर के निर्माण में तैयार यह शो साल 2000 में शुरू हुआ था और करीब आठ वर्षों तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना रहा।

    3 जुलाई 2000 को शुरू हुए इस धारावाहिक का प्रसारण 6 नवंबर 2008 तक चला। इस दौरान शो के कुल 1833 एपिसोड प्रसारित हुए। इतनी लंबी अवधि तक लगातार दर्शकों से जुड़े रहना इसकी लोकप्रियता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। कहानी का केंद्र विरानी परिवार और उनका घर शांति निकेतन था, जहां परिवार के सदस्यों के रिश्तों, परंपराओं, मतभेदों और बदलते समय के साथ आने वाले बदलावों को कहानी का हिस्सा बनाया गया।

    धारावाहिक में स्मृति ईरानी ने तुलसी विरानी का किरदार निभाया था, जबकि अमर उपाध्याय मिहिर विरानी की भूमिका में नजर आए थे। तुलसी के किरदार ने स्मृति ईरानी को टेलीविजन की दुनिया में अलग पहचान दिलाई। दर्शकों के बीच उनका नाम लंबे समय तक तुलसी के किरदार के साथ जुड़ा रहा। वहीं मिहिर के रूप में अमर उपाध्याय भी खासे लोकप्रिय हुए। दोनों की जोड़ी छोटे पर्दे की चर्चित जोड़ियों में शामिल हुई।

    शो की एक बड़ी खासियत इसका टाइटल सॉन्ग भी था। धारावाहिक के शीर्षक गीत ने अपनी धुन, बोल और प्रस्तुति के जरिए दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसे प्रिय भट्टाचार्य ने अपनी आवाज दी थी। गीत के बोल नवाब आरजू ने लिखे थे और संगीत ललित सेन ने तैयार किया था। समय बीतने के बावजूद यह टाइटल सॉन्ग धारावाहिक की पहचान के तौर पर याद किया जाता है।

    कहानी में सास-बहू के रिश्ते के साथ परिवार की कई पीढ़ियों के बीच बदलते संबंधों को भी दिखाया गया। समय के साथ नए किरदार कहानी में शामिल होते गए और परिवार के भीतर रिश्तों के समीकरण बदलते रहे। तुलसी का परिवार के प्रति समर्पण, जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष और रिश्तों को संभालने की कोशिश कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल रहे।

    धारावाहिक की लोकप्रियता का असर इसके कलाकारों और किरदारों की पहचान पर भी दिखाई दिया। तुलसी और मिहिर की जोड़ी दर्शकों के बीच इतनी चर्चित हुई कि दोनों किरदार लंबे समय तक टीवी संस्कृति का हिस्सा बने रहे। शांति निकेतन भी शो की कहानी के साथ दर्शकों की स्मृतियों में अपनी जगह बनाने में सफल रहा।

    इस धारावाहिक की लोकप्रियता को बाद के वर्षों में भी आगे बढ़ाने की कोशिश हुई। 25 साल पूरे होने के मौके पर इसका दूसरा सीजन शुरू किया गया, जिसमें स्मृति ईरानी फिर तुलसी विरानी के किरदार में लौटीं और अमर उपाध्याय ने मिहिर की भूमिका निभाई। नया सीजन 29 जुलाई 2025 को शुरू हुआ। पुराने किरदारों और नई पीढ़ी की कहानी के मेल ने इस लोकप्रिय धारावाहिक की पुरानी यादों को फिर से दर्शकों के सामने ला दिया।

  • गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर

    गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर


    नई दिल्ली । गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और इस दिन किए गए उपायों का प्रभाव भी जल्दी दिखता है। अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और धन की कमी दूर हो, तो गुरुवार की शाम को प्रदोष काल में कुछ खास उपाय जरूर करें। मान्यता है कि शाम के समय घर में मां लक्ष्मी के आगमन का समय होता है और इस समय दीपक जलाने से वे प्रसन्न होती हैं। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इस उपाय से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए गुरुवार की शाम को ईशान कोण में दीपक जलाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और धन लाभ के योग बनते हैं। खासकर जब यह दीपक प्रदोष काल में जलाया जाए तो इसके प्रभाव और भी बढ़ जाते हैं।

    इसके अलावा, शाम के समय घर के आंगन में दीपक जलाना भी शुभ होता है। पुराने समय में लोग आंगन में दीपक जलाकर अंधेरे को दूर करते थे। आज भी अगर आप अपने आंगन में दीपक जलाते हैं, तो इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए प्रदोष काल में तुलसी के पास दीपक जलाने से धन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही, घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से विष्णु-लक्ष्मी की कृपा से घर में धन लाभ होता है और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।

    गुरुवार की शाम को इन उपायों को नियमित रूप से करने से न केवल घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि धन-लाभ के अवसर भी बढ़ते हैं। अगर आप सच्‍चे मन से और श्रद्धा के साथ दीपक जलाएंगे तो माना जाता है कि मां लक्ष्मी आपके घर पर अपनी कृपा बरसाएंगी और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहेगी।