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  • इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सफर की शुरुआत, थाईलैंड की हाईटेक TBM बनाएगी मजबूत सुरंग, 24 घंटे चलेगा काम

    इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सफर की शुरुआत, थाईलैंड की हाईटेक TBM बनाएगी मजबूत सुरंग, 24 घंटे चलेगा काम


    इंदौर  इंदौर मेट्रो परियोजना के अंडरग्राउंड चरण ने अब नई रफ्तार पकड़ ली है। शहर में पहली बार अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम की मदद से भूमिगत सुरंग निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है। थाईलैंड से लाई गई करीब 1000 टन वजनी इस हाईटेक मशीन की असेंबलिंग का काम शुरू हो चुका है और अगले एक महीने में इसे जमीन के करीब 20 मीटर नीचे उतार दिया जाएगा। इसके बाद यह मशीन चौबीसों घंटे लगातार काम करते हुए प्रतिदिन लगभग 20 मीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी।

    इंदौर मेट्रो परियोजना का यह चरण तकनीकी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टीबीएम केवल सुरंग की खुदाई नहीं करेगी बल्कि उसी समय सुरंग की मजबूत कंक्रीट दीवारें भी तैयार करती चलेगी। इससे निर्माण कार्य की गति बढ़ेगी और सुरंग की मजबूती तथा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आधुनिक तकनीक से लैस यह मशीन भूमिगत निर्माण को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तेज बनाएगी।

    अधिकारियों के अनुसार मशीन का पहला ऑपरेशन एयरपोर्ट क्षेत्र से शुरू होगा। यहां से कालानी नगर तक पहले चरण की अंडरग्राउंड सुरंग तैयार की जाएगी। इसके बाद अगले चरण में आगे का निर्माण कार्य शुरू होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल 12 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनाया जाना है जिसे पूरा होने में लगभग चार से पांच वर्ष का समय लग सकता है।

    टनल बोरिंग मशीन को भूमिगत इंजीनियरिंग का चलता फिरता कारखाना कहा जाता है। इसके सबसे आगे लगा विशाल गोलाकार कटर हेड लगातार घूमते हुए मिट्टी और चट्टानों को काटता है। करीब साढ़े छह मीटर व्यास वाले इस कटर हेड में लगे मजबूत स्टील ब्लेड कठिन से कठिन चट्टानों को भी आसानी से काट सकते हैं। मशीन जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे उसके पीछे सुरंग का निर्माण पूरा होता जाता है।

    खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी और पत्थरों को मशीन के अंदर लगे विशेष कन्वेयर सिस्टम के माध्यम से पीछे की ओर भेजा जाता है। वहां से इस मलबे को बाहर निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरंग के भीतर मलबा जमा नहीं होता और मशीन बिना किसी रुकावट के लगातार आगे बढ़ती रहती है।

    टीबीएम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खुदाई के साथ ही सुरंग की स्थायी कंक्रीट लाइनिंग भी तैयार हो जाती है। मशीन के भीतर लगे हाइड्रोलिक सिस्टम पहले से तैयार कंक्रीट रिंग को एक के बाद एक जोड़ते चलते हैं। ये सभी रिंग मिलकर सुरंग की मजबूत गोलाकार दीवार का निर्माण करती हैं। इससे मिट्टी धंसने या सुरंग कमजोर होने की संभावना काफी कम हो जाती है और निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा होता है।

    इस हाईटेक मशीन में मैकेनिकल हाइड्रोलिक इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेटिक कंट्रोल सिस्टम का समन्वय किया गया है। शक्तिशाली मोटर गियर और सेंसर लगातार मशीन की गति दिशा और दबाव पर नजर रखते हैं ताकि सुरंग निर्माण पूरी सटीकता और सुरक्षा के साथ किया जा सके। यही वजह है कि दुनिया के अधिकांश बड़े मेट्रो और रेलवे प्रोजेक्ट में इसी तकनीक का उपयोग किया जाता है।

    इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सेक्शन में दो समानांतर सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। एक सुरंग से मेट्रो ट्रेन शहर की ओर जाएगी जबकि दूसरी सुरंग से वापसी करेगी। इस दोहरी सुरंग व्यवस्था से दोनों दिशाओं में ट्रेन संचालन सुचारू रूप से किया जा सकेगा और यात्रियों को तेज सुरक्षित तथा आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

    टीबीएम के मैदान में उतरने के साथ ही इंदौर मेट्रो परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। आधुनिक तकनीक और तेज निर्माण गति के कारण यह परियोजना शहर के सार्वजनिक परिवहन को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद

    इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद


    इंदौर।
    इंदौर और धार के बीच नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना के तहत 17 साल के लंबे इंतजार के बाद 2026 में पहली बार ट्रेन चलने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2008 में किया गया था और इसके बाद से ही इस पर काम जारी था। अब रेलवे विभाग का दावा है कि मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है। हालांकिनिर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखते हुए इसे लेकर कुछ संशय भी बना हुआ हैऔर हो सकता है कि इस योजना में छह महीने की और देरी हो।
    इस परियोजना के तहत कुल 204.76 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनाई जा रही हैजो इंदौर से दाहोद तक फैली हुई है। इस परियोजना के हिस्से के तौर पर इंदौर से टीही 21 किमी और दाहोद से कटवारा 11.30 किमी खंड का निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। इस रूट पर ट्रेन सेवा की शुरुआत से न केवल इंदौर और धार के बीच यात्रा का समय घटेगाबल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र धार में पहली बार रेलवे सेवा का लाभ भी मिलेगा।

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक इस परियोजना के तहत टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। टनल का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्सा हैजिसके कारण पहले ही निर्माण कार्य में देरी हुई है। रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों ने इस काम को प्राथमिकता दी है और इसके लिए एक टाइमलाइन तय कर काम किया जा रहा हैजिसमें हर दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूदपरियोजना की गति को देखकर ऐसा लगता है कि ट्रेन सेवा में और कुछ समय की देरी हो सकती है।

    इस रेलवे परियोजना का महत्व सिर्फ इस क्षेत्र के लिए नहींबल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़ा है। इंदौर और धार के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आएगीजिससे व्यापारपरिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ हीआदिवासी क्षेत्रों में रेलवे सेवा का विस्तार स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसरों की संभावनाएं खोलेगा। इस रेलवे परियोजना से इंदौर के साथ ही धारझाबुआऔर आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज हो सकती है।

    हालांकिपरियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि रेलवे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और किसी भी प्रकार की और देरी न हो। टनल निर्माण के अलावाट्रैकस्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समय पर व्यवस्था की जानी जरूरी हैताकि ट्रेन सेवा बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके। इस परियोजना में देरी के कारण पहले ही लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा हैलेकिन अगर यह समय पर पूरी होती है तो यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।

    कुल मिलाकरइंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा का आरंभ इस क्षेत्र की यात्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बादअगर यह परियोजना समय पर पूरी होती हैतो यह न केवल मध्य प्रदेश के लिएबल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती हैजहां लंबी देरी के बावजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।