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  • भोपाल से जबलपुर तक गरमाया केस: समर्थ सिंह की जमानत पर टिकी निगाहें

    भोपाल से जबलपुर तक गरमाया केस: समर्थ सिंह की जमानत पर टिकी निगाहें


    मध्य प्रदेश । भोपाल और जबलपुर से जुड़ा मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने पर अपनी सहमति दे दी है। सरकार का यह कदम मामले में निष्पक्ष और गहराई से जांच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया था कि राज्य सरकार हर संभव सहायता करेगी और जरूरत पड़ने पर मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जाएगा। इसी आश्वासन के बाद अब औपचारिक रूप से CBI जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    मामले की मुख्य पात्र ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे प्रदेश में सवाल खड़े कर दिए थे। उनके परिजनों ने शुरू से ही जांच की निष्पक्षता पर संदेह जताया और लगातार CBI जांच की मांग कर रहे थे। अब सरकार की मंजूरी के बाद यह मांग काफी हद तक पूरी होती दिख रही है।

    उधर, इस केस में एक और बड़ा घटनाक्रम जबलपुर हाईकोर्ट में देखने को मिला, जहां ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी। हालांकि महाधिवक्ता द्वारा केस डायरी पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के कारण सुनवाई को 2:30 बजे के बाद तक के लिए स्थगित कर दिया गया। मामले की सुनवाई वैकेशन बेंच में चल रही है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

    ट्विशा के पिता ने एक बार फिर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उनका दावा है कि केस से जुड़े कुछ लोग प्रभावशाली पदों पर रहे हैं और वे जांच को दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कई स्तरों पर निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई है।

    दूसरी ओर समर्थ सिंह के वकील ने अदालत में कहा कि दंपती के बीच संबंध सामान्य थे और घरेलू जीवन में किसी बड़े विवाद के संकेत नहीं मिलते। उन्होंने यह भी दलील दी कि शादी के बाद शुरुआती समय में छोटे-छोटे मतभेद सामान्य हैं और इसे आपराधिक एंगल से नहीं देखा जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले में अब नजर इस बात पर टिकी है कि CBI जांच औपचारिक रूप से कब शुरू होती है और हाईकोर्ट में जमानत पर क्या निर्णय आता है। राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • ट्विशा केस में बड़ा अपडेट: दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज, जांच पर सरकार का कदम

    ट्विशा केस में बड़ा अपडेट: दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज, जांच पर सरकार का कदम


    भोपाल। भोपाल की एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार नया मोड़ लेता जा रहा है। इस केस में अब अदालत ने दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग को खारिज कर दिया है, जिससे जांच प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले भोपाल एम्स में हुआ पोस्टमॉर्टम नियमों के अनुसार किया गया था और रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या मिलीभगत का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। केवल आशंकाओं के आधार पर दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराना उचित नहीं माना जा सकता।

    हालांकि, कोर्ट ने साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए ताकि वह खराब न हो। आदेश में कहा गया है कि शव को ऐसी मॉर्च्युरी में रखा जाए जहां उसे लंबे समय तक संरक्षित किया जा सके, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में केवल माइनस 4 डिग्री तापमान की सुविधा है, जो कुछ ही दिनों तक शरीर को सुरक्षित रख सकती है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि दीर्घकालिक संरक्षण के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है।

    इसी बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले को और गंभीरता से लेते हुए CBI जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ट्विशा के परिजनों से मुलाकात के दौरान यह आश्वासन दिया कि सरकार हर संभव सहायता देगी और यदि जरूरत पड़ी तो शव को दिल्ली AIIMS तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत रिटायर्ड जज और ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह की जमानत रद्द कराने के लिए भी आवेदन किया जाएगा।

    यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसमें प्रशासनिक, राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी कई पहलू जुड़ते जा रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने एफआईआर की धाराओं, आरोपी की गिरफ्तारी, फोरेंसिक जांच, कॉल रिकॉर्ड और CCTV फुटेज जैसी सभी जानकारियां तलब की हैं।

    दूसरी ओर, परिजनों ने अदालत के फैसले के बाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि उन्हें जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है और निष्पक्ष जांच के लिए दूसरी एजेंसी की आवश्यकता है। परिजनों ने रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह को कंज्यूमर फोरम से हटाने की भी मांग की है, जिसको लेकर राज्यपाल को पत्र भेजा गया है।

    फिलहाल पुलिस की तरफ से आरोपी समर्थ सिंह पर लुकआउट नोटिस जारी किया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम राशि भी बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन हर एंगल से जांच जारी है।

    इसी बीच भोपाल में रिटायर्ड सैनिकों ने भी प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। बाइक रैली निकालकर उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

    कुल मिलाकर ट्विशा शर्मा केस अब एक हाई-प्रोफाइल जांच में बदल चुका है, जहां अदालत, सरकार, आयोग और जनता सभी की नजरें इस मामले के अगले फैसलों पर टिकी हुई हैं।