Tag: Twisha death case

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

    ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत


    भोपाल भोपाल  के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को हुई अदालत की सुनवाई ने एक बार फिर इस बहुचर्चित प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने जेल में मिलने वाली सुविधाओं और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अदालत के समक्ष रखे।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कहा कि जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से संबंधित खबरों को काट दिया जाता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार पढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने मामले से जुड़ी खबरों और घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकें।

    इसके अलावा उन्होंने वकीलों से मुलाकात के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे समाप्त करने या बढ़ाने की मांग की। गिरिबाला का कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए प्रभावी कानूनी सलाह के लिए अधिक समय जरूरी है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक साथ अपने अधिवक्ताओं से मिलने की अनुमति दी जाए, जिससे कानूनी रणनीति पर बेहतर समन्वय किया जा सके।

    गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि ट्विशा शर्मा के परिजन और रिश्तेदार लगातार मीडिया में बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान ट्विशा की जब्त की गई दवाइयों का जब्ती पंचनामा अभी तक बचाव पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला ने सीबीआई द्वारा दाखिल न्यायिक हिरासत बढ़ाने संबंधी आवेदन की प्रति भी मांगी। अदालत के निर्देश पर संबंधित दस्तावेज उनके वकीलों को उपलब्ध करा दिए गए। वहीं ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने अदालत को बताया कि सीबीआई को अभी तक दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 जून तक बढ़ा दिया। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    इधर, मामले में लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को शिकायत भेजकर कुछ लीगल एड वकीलों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष से जुड़े दिखाई दिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की निगाहें सीबीआई की आगे की जांच, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही इस मामले की आगामी दिशा तय करेंगे।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात

    ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात


    मध्‍य प्रदेश। एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और अब एजेंसी मेडिकल, डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर विभिन्न तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर न्यायिक हिरासत में बंद ट्विशा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की।

    महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। आयोग की टीम ने गिरिबाला सिंह से भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। आयोग के अनुसार गिरिबाला सिंह ने किसी प्रकार की परेशानी या शिकायत नहीं बताई और कहा कि उन्हें जेल में कोई विशेष समस्या नहीं है।

    निरीक्षण के दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय से संबंधित एक पुस्तक पढ़ती हुई दिखाई दीं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि बातचीत के दौरान वह शांत रहीं और आयोग को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो। आयोग ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।

    दूसरी ओर सीबीआई मामले के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी को मिली दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर अब मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में कथित रूप से प्रेग्नेंसी, मेडिकल उपचार, शरीर पर मिले चोटों के निशान तथा घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसी ने अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    सूत्रों के अनुसार सीबीआई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो तथा डिलीट किए गए डेटा की भी जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला को समझना और उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है।

    मामले में ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने प्रारंभिक जांच प्रक्रिया और कुछ दस्तावेजी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि घटनास्थल से जब्त सामग्री और जांच प्रक्रिया में कुछ गंभीर विसंगतियां रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंचने की आशंका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला न्यायालय में विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिवक्ताओं द्वारा वकालतनामा प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

    फिलहाल सीबीआई मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।

  • ट्विशा केस की जांच तेज: CBI की दबिश, बेल्ट-फंदे को FSL भेजा गया, आज कोर्ट में अहम सुनवाई

    ट्विशा केस की जांच तेज: CBI की दबिश, बेल्ट-फंदे को FSL भेजा गया, आज कोर्ट में अहम सुनवाई


    नई दिल्ली । एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब कानूनी और जांच दोनों स्तरों पर गंभीर मोड़ ले लिया है। मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर आज भोपाल जिला अदालत में अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई पर पूरे केस की दिशा काफी हद तक निर्भर मानी जा रही है।

    ट्विशा के परिवार की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने कोर्ट में आवेदन देकर CDR सुरक्षित रखने की मांग की है, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आवेदन दायर किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलों पर मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें कोर्ट रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को संरक्षित करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर सकता है।

    इस बीच, सीबीआई ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार को कटारा हिल्स थाने में दर्ज एफआईआर को री-रजिस्टर कर दिया है। अब इस केस में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने अपनी जांच में दहेज के रूप में 20 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग के आरोपों को आधार बनाया है।

    सोमवार देर शाम सीबीआई की टीम भोपाल पहुंची और जांच को तेज कर दिया। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ पूछताछ शुरू की और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। इसी दौरान SIT की टीम ने भी समर्थ सिंह के घर पहुंचकर करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की और स्पॉट वेरिफिकेशन कराया।

    जांच के दौरान समर्थ सिंह ने पुलिस को बताया कि ट्विशा गर्भपात के बाद मानसिक तनाव में थी। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, मामले को प्रभावित करने की कोशिश की गई और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है।

    इसी बीच, एक अहम विवाद उस बेल्ट को लेकर भी सामने आया है, जिसे कथित तौर पर फांसी लगाने में इस्तेमाल किया गया था। डीसीपी विकास कुमार शहवाल ने स्पष्ट किया कि जिमनास्टिक बेल्ट को पहले ही 7 दिन पूर्व सागर FSL लैब भेजा जा चुका है और उसकी जांच प्रक्रिया जारी है।

    मामले में यह भी सामने आया है कि पुलिस को सूचना देने में देरी हुई थी, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। आरोप है कि अस्पताल में मृत्यु की पुष्टि के बाद भी समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी गई, जिससे केस के शुरुआती साक्ष्यों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    ट्विशा की मौत 12 मई की रात कथित तौर पर फांसी लगाने से हुई थी, जबकि 13 मई की सुबह मामला दर्ज किया गया। इस देरी को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और संबंधित डॉक्टरों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

    उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए टिप्पणी की है और मीडिया को संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा जाए और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने दिया जाए। अब सभी की नजरें भोपाल कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां CDR और CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने को लेकर अहम फैसला आ सकता है।

  • एक्ट्रेस ट्विशा केस: पुलिस जांच पर गंभीर सवाल, परिजनों ने उठाई आपत्ति

    एक्ट्रेस ट्विशा केस: पुलिस जांच पर गंभीर सवाल, परिजनों ने उठाई आपत्ति


    भोपाल  भोपाल की चर्चित एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है और अब यह केस पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला बता रही है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्य और परिजनों के आरोपों ने पूरी कहानी को और जटिल बना दिया है। इस केस में पुलिस की पांच बड़ी चूकें सामने आने के बाद मुख्य आरोपी समर्थ सिंह घटना के 9 दिन बाद भी फरार है, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, भोपाल एम्स की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घटना के 24 घंटे के भीतर पुलिस को मिल गई थी, जिसमें मृतका के शरीर पर कई चोटों के निशान दर्ज थे। इसके बावजूद पुलिस द्वारा मामले को आत्महत्या मानते हुए शुरुआती जांच में तेजी नहीं दिखाई गई, जिसे बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि शुरुआत से ही उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और समय रहते आरोपी तक पहुंचने में भी पुलिस विफल रही।

    इस बीच पुलिस कमिश्नर ने आरोपी पर इनाम राशि 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छह विशेष टीमें गठित की गई हैं। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है और लुक-आउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है, लेकिन अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

    परिजनों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए दूसरी एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि 13 मई की रात जब वे कटारा हिल्स थाने पहुंचे थे, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें थाने से बाहर निकाल दिया गया। परिवार का कहना है कि उनकी बातों को अनसुना किया गया, जिससे उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता दिखाई दे रहा है। इसी असंतोष के चलते परिवार हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।

    मामले में अदालत ने भी अहम हस्तक्षेप करते हुए शव को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने आदेश दिया है कि शव को माइनस 80 डिग्री तापमान में संरक्षित किया जाए, क्योंकि मौजूदा मॉर्च्युरी में केवल माइनस 4 डिग्री तापमान की सुविधा है, जो लंबे समय तक शरीर को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश के बाहर दोबारा पोस्टमॉर्टम की अनुमति उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।

    वहीं पुलिस का कहना है कि एसआईटी निष्पक्ष जांच कर रही है और शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। पुलिस के अनुसार मृतका के गले पर मिले निशान फांसी लगाने के संकेत देते हैं। हालांकि परिजन इस दावे को खारिज करते हुए इसे संदिग्ध हत्या का मामला बता रहे हैं।

    फिलहाल यह केस सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में है और #JusticeForTwisha जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपील कर रहे हैं। CCTV फुटेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है, जहां एक तरफ पुलिस अपनी जांच को सही बता रही है, वहीं दूसरी तरफ परिजन न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।