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  • ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने का आदेश

    ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने का आदेश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत फिर बढ़ गई है। मंगलवार को विशेष अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले में 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने के आदेश दिए हैं।

    एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में दोनों आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। सुनवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट शोभना भलावे की अदालत में हुई। ट्विशा शर्मा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों की पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने वाली थी। सीबीआई ने इसे बढ़ाने के लिए आवेदन पेश किया और 19 अगस्त तक न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 17 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया।

    अधिवक्ता शुभांग दीक्षित के अनुसार, सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और एजेंसी 19 अगस्त से पहले चार्जशीट पेश कर देगी। हालांकि अदालत ने सीबीआई को 17 अगस्त तक ही चार्जशीट पेश करने का निर्देश दिया है। यानी अब जांच एजेंसी को इसी तारीख तक चालान पेश करना होगा।

    अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों के मामले में 90 दिन की वैधानिक अवधि भी नजदीक है। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी 21 मई को हुई थी, इसलिए उसकी 90 दिन की अवधि 19 अगस्त को पूरी होगी। वहीं गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी 27 मई को हुई थी, इसलिए उनकी 90 दिन की अवधि 25 अगस्त को पूरी होगी।

    अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि सीबीआई 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश नहीं करती है तो आरोपियों की ओर से डिफॉल्ट बेल का आधार बन सकता है। उनका कहना है कि इसी वजह से संभावना है कि सीबीआई 17 अगस्त को ही चार्जशीट पेश कर दे।

    शुभांग दीक्षित ने बताया कि सीबीआई के अनुसार, उसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। गिरिबाला सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में जमानत आवेदन लंबित है और इस कारण केस डायरी का बड़ा हिस्सा उच्च न्यायालय भेजा गया है। इसी वजह से मंगलवार को चार्जशीट पेश नहीं हो सकी। हालांकि सीबीआई ने 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने की बात कही है।

    इधर, सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह की ओर से लीगल एड के तहत पेश होने वाले अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद समर्थ सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एनर्स जॉर्ज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गिरिबाला सिंह से उनकी ओर से पेश होने की अनुमति ली। गिरिबाला सिंह ने सहमति दी, जिसके बाद एनर्स जॉर्ज ने उनकी ओर से वकालतनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी।

    अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पहले से लंबित है। मंगलवार को भी सुनवाई में सीबीआई 11 अगस्त को अपना चालान प्रस्तुत करने वाली थी, लेकिन सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि कुछ मेडिकल व फॉरेंसिक रिपोर्ट का अभी पूरी तरह से अध्ययन व उसके आधार पर विवेचना चल रही है। इस कारण आगामी पेशी पर अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 अगस्त मुकर्रर की है, इससे संभव है कि सीबीआई 17 अगस्त को अपनी अंतिम स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी।

    हाईकोर्ट में जमानत पर भी टल गई सुनवाई

    वहीं, इधर गिरिबाला सिंह ने उम्र, स्वास्थ्य कारणों, अभी तक कोई ठोस अपराध सिद्ध नहीं होने और अपनी मां की सेवा जैसे विषयों को लेकर उच्च न्यायालय में जमानत की याचिका दायर की थी। जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब 12 अगस्त को उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका का ट्विशा के परिजनों ने भी आवेदन देकर विरोध किया है। उनके आवेदन पर भी उच्च न्यायालय सुनवाई नहीं हो सकी है। संभवतः 12 अगस्त को दोनों पर सुनवाई हो। इससे पहले 25 जुलाई को भोपाल जिला अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। इसके बाद गिरिबाला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

    उल्लेखनीय है कि 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र के बागमुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी स्थित अपनी ससुराल में ट्विशा शर्मा फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी। नोएडा निवासी परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टमम किया। परिजनों ने एक सप्ताह तक भोपाल में जमकर हंगामा, प्रदर्शन और आंदोलन किया, इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। अब सीबीआई की दिल्ली इकाई की टीम ही पूरे मामले की जांच कर रही है। दहेज हत्या के आरोप में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह भोपाल केंद्रीय जेल में बंद हैं।

  • Twisha Sharma Case: गिरिबाला सिंह की जमानत पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

    Twisha Sharma Case: गिरिबाला सिंह की जमानत पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला


    भोपाल।
    राजधानी भोपाल (Bhopal) के बहुचर्चित त्विषा शर्मा संदिग्ध मृत्यु मामले (Twisha Sharma case) में जेल में बंद सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को जिला न्यायालय में तीखी बहस हुई। सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत और परिजनों के अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

    शनिवार को इस पर फैसला आने की संभावना है। मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे पहले तीन न्यायाधीश अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों से इस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुके हैं। शुक्रवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने भी यह कहते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया कि उन्होंने आरोपी गिरिबाला सिंह के अधीन न्यायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके पश्चात मामला प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामप्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां विस्तृत सुनवाई हुई।


    बचाव पक्ष ने दिया बुजुर्ग मां का हवाला

    बचाव पक्ष के वक्ताओं ने तर्क दिया कि गिरिबाला सिंह की मां लगभग 100 वर्ष की हैं और वे पूरी तरह अपनी बेटी की देखभाल पर निर्भर हैं। याचिकाकर्ता स्वयं भी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं और जेल में उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके अलावा, आरोपी को नियमित पेंशन एवं युद्ध वीरांगना पेंशन मिलती है। आर्थिक रूप से पूरी तरह सक्षम होने के कारण उन पर दहेज प्रताड़ना का आरोप स्वाभाविक प्रतीत नहीं होता। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और उनके जेल में रहने के दौरान उनके घर पर चोरी भी हो चुकी है।


    सीबीआई और त्विषा के परिजनों ने किया विरोध

    सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता अंकुर पांडेय ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि केवल महिला होना या आर्थिक रूप से संपन्न होना जमानत का आधार नहीं बन सकता। सीबीआई ने अदालत में जेल प्रशासन की मेडिकल रिपोर्ट पेश कर आरोपी के स्वास्थ्य को सामान्य बताया। साथ ही ध्यान दिलाया कि उच्च न्यायालय पहले ही उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है और जांच के दौरान आरोपी ने अपना वॉइस सैंपल देने से भी साफ इनकार कर दिया था।

    सीबीआई ने खुलासा किया कि आरोपी ने सीसीटीवी तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क कर निजी प्रतिनिधि के माध्यम से फुटेज हासिल करने का प्रयास किया था। जमानत मिलने पर गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की प्रबल संभावना है। त्विषा शर्मा के परिजनों के अधिवक्ता ने मां की देखभाल वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की बुजुर्ग मां कभी उनके साथ नहीं रही हैं। वे केवल जेल से बाहर निकलने के लिए मां का सहारा ले रही हैं ताकि बाहर आकर मामले की निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकें। अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के उपरांत अदालत ने मामले का फैसला सुरक्षित रख लिया है। संभावना है कि शनिवार को जमानत याचिका पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

    ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत


    भोपाल भोपाल  के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को हुई अदालत की सुनवाई ने एक बार फिर इस बहुचर्चित प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने जेल में मिलने वाली सुविधाओं और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अदालत के समक्ष रखे।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कहा कि जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से संबंधित खबरों को काट दिया जाता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार पढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने मामले से जुड़ी खबरों और घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकें।

    इसके अलावा उन्होंने वकीलों से मुलाकात के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे समाप्त करने या बढ़ाने की मांग की। गिरिबाला का कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए प्रभावी कानूनी सलाह के लिए अधिक समय जरूरी है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक साथ अपने अधिवक्ताओं से मिलने की अनुमति दी जाए, जिससे कानूनी रणनीति पर बेहतर समन्वय किया जा सके।

    गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि ट्विशा शर्मा के परिजन और रिश्तेदार लगातार मीडिया में बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान ट्विशा की जब्त की गई दवाइयों का जब्ती पंचनामा अभी तक बचाव पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला ने सीबीआई द्वारा दाखिल न्यायिक हिरासत बढ़ाने संबंधी आवेदन की प्रति भी मांगी। अदालत के निर्देश पर संबंधित दस्तावेज उनके वकीलों को उपलब्ध करा दिए गए। वहीं ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने अदालत को बताया कि सीबीआई को अभी तक दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 जून तक बढ़ा दिया। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    इधर, मामले में लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को शिकायत भेजकर कुछ लीगल एड वकीलों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष से जुड़े दिखाई दिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की निगाहें सीबीआई की आगे की जांच, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही इस मामले की आगामी दिशा तय करेंगे।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात

    ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात


    मध्‍य प्रदेश। एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और अब एजेंसी मेडिकल, डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर विभिन्न तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर न्यायिक हिरासत में बंद ट्विशा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की।

    महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। आयोग की टीम ने गिरिबाला सिंह से भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। आयोग के अनुसार गिरिबाला सिंह ने किसी प्रकार की परेशानी या शिकायत नहीं बताई और कहा कि उन्हें जेल में कोई विशेष समस्या नहीं है।

    निरीक्षण के दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय से संबंधित एक पुस्तक पढ़ती हुई दिखाई दीं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि बातचीत के दौरान वह शांत रहीं और आयोग को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो। आयोग ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।

    दूसरी ओर सीबीआई मामले के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी को मिली दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर अब मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में कथित रूप से प्रेग्नेंसी, मेडिकल उपचार, शरीर पर मिले चोटों के निशान तथा घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसी ने अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    सूत्रों के अनुसार सीबीआई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो तथा डिलीट किए गए डेटा की भी जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला को समझना और उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है।

    मामले में ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने प्रारंभिक जांच प्रक्रिया और कुछ दस्तावेजी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि घटनास्थल से जब्त सामग्री और जांच प्रक्रिया में कुछ गंभीर विसंगतियां रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंचने की आशंका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला न्यायालय में विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिवक्ताओं द्वारा वकालतनामा प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

    फिलहाल सीबीआई मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।

  • दहेज हत्या केस में तेज़ी, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से 5 दिन तक पूछताछ करेगी सीबीआई

    दहेज हत्या केस में तेज़ी, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह से 5 दिन तक पूछताछ करेगी सीबीआई

    नई दिल्ली । भोपाल में ट्विशा शर्मा कथित दहेज हत्या मामले ने एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया में बड़ा मोड़ ले लिया है, जहां अदालत ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को पांच दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। यह निर्णय उस समय आया जब मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो के पास आने के बाद आरोपियों से गहन पूछताछ की आवश्यकता बताई गई। अदालत ने सभी तथ्यों और जांच की प्रगति को देखते हुए यह अनुमति दी, ताकि केस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की गहराई से जांच की जा सके।

    जानकारी के अनुसार दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया था। इससे पहले उनकी मेडिकल जांच कराई गई और फिर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत सेशन कोर्ट में लाया गया। सुनवाई के दौरान अदालत में दोनों आरोपी एक साथ कटघरे में खड़े रहे और कार्यवाही के दौरान आपस में धीमी आवाज में बातचीत करते देखे गए। इस पूरे घटनाक्रम ने अदालत परिसर में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    सीबीआई ने इस मामले में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरिबाला सिंह को उनके भोपाल स्थित निवास से कई घंटे की लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनके घर पर विस्तृत पूछताछ और प्रारंभिक जांच भी की थी। इसके बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए एक विशेष केंद्र में ले जाया गया और फिर अदालत में पेश किया गया।

    दूसरी ओर समर्थ सिंह को पहले ही पुलिस हिरासत में लिया गया था। उन्हें 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद कुछ दिनों तक लापता रहने के बाद जबलपुर से गिरफ्तार किया गया था। प्रारंभिक पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें पहले पुलिस रिमांड पर भेजा गया था, जो अब समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद सीबीआई ने मामले की गहराई से जांच के लिए उनकी नई हिरासत की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

    इस मामले की पृष्ठभूमि में ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर गंभीर आरोप सामने आए थे, जिसमें परिवार ने दहेज उत्पीड़न और ससुराल पक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए थे। आरोप है कि ट्विशा शर्मा अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। इसके बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया और विस्तृत जांच की मांग उठी।

    जांच के दौरान सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर और आसपास के स्थानों का भी निरीक्षण किया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल रही। एजेंसी ने घटनाक्रम को समझने के लिए विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं की भी जांच शुरू की है।

    गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी उस समय हुई जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने उन्हें अपनी हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की। अब अदालत के आदेश के बाद दोनों आरोपियों से पांच दिन तक गहन पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले से जुड़े कई अहम तथ्यों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?

    ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने कमान संभाल ली है. सोमवार को सीबीआई ने भोपाल पुलिस से केस डायरी और तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से एफआईआर दर्ज की है. इस बड़े घटनाक्रम के बीच, भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस की 7 दिन की रिमांड में मौजूद ट्विशा के पति समर्थ सिंह (Samarth Singh) से हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समर्थ पूछताछ में ज्यादातर वही जवाब दे रहा है, जो शुरुआत से उसकी मां गिरीबाला सिंह कहती आई हैं. उसने पूरी घटना के पीछे ट्विशा के बदले हुए व्यवहार और उनके ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े होने को वजह बताया है. समर्थ ने बताया कि शादी के बाद शुरुआती दिनों में उसके और ट्विशा के बीच रिश्ते पूरी तरह सामान्य थे. विवाद की शुरुआत 17 अप्रैल से हुई, जब ट्विशा को पता चला कि वह प्रेग्नेंट है. इसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया।

    समर्थ ने पुलिस के सामने दावा किया कि ट्विशा अक्सर खुद के ग्लैमर वर्ल्ड (मॉडलिंग और एक्टिंग) से जुड़े होने की दुहाई देती थी. वह कहती थी कि वह एक साधारण घरेलू महिला वाली जिंदगी नहीं जी सकती और यह उसके लिए बेहद मुश्किल है. समर्थ के अनुसार, इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होने लगी थी।

    पूछताछ में समर्थ ने अप्रैल महीने की एक घटना का जिक्र करते हुए दोनों के बीच बढ़ती दूरियों की बात कही. समर्थ ने बताया, ‘अप्रैल में हमें एक साथ बेंगलुरु जाना था. लेकिन ऐन वक्त पर ट्विशा ने जाने से मना कर दिया और कहा कि उसे अपने भाई के पास अजमेर जाना है।

    समर्थ के मुताबिक, वह अकेले बेंगलुरु चला गया और ट्विशा अजमेर के लिए निकल गई. लेकिन बाद में उसे पता चला कि ट्विशा अजमेर में सिर्फ एक दिन रुकी और उसे बिना बताए दिल्ली चली गई. इस बात को लेकर जब समर्थ ने आपत्ति जताई, तो दोनों के बीच विवाद और ज्यादा बढ़ गया।


    12 मई की रात को क्या हुआ था?

    ट्विशा की मौत वाली रात यानी 12 मई की कहानी बयां करते हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि उस दिन सब कुछ सामान्य दिख रहा था. उसने दावा किया कि रात को खाना खाने के बाद दोनों कुछ देर सोसाइटी के पार्क में टहले और फिर घर लौटकर टीवी देखने लगे।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्थ ने दावा करते हुए कहा, ‘कुछ देर बाद मैं सोने चला गया, जबकि ट्विशा नीचे जाकर अपने परिजनों से फोन पर बात करने लगी. देर रात मेरी मां गिरिबाला सिंह ने मुझे जगाया और कहा कि ट्विशा की मां का फोन आया था कि वह फोन नहीं उठा रही है।

    समर्थ के मुताबिक, जब दोनों ने घर में ट्विशा को ढूंढना शुरू किया, तो वह छत पर फंदे से लटकी मिली. समर्थ का दावा है कि उसने और उसकी मां ने मिलकर ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा, CPR दिया और तुरंत भोपाल AIIMS लेकर भागे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


    घटना के बाद कहां छिप गया था समर्थ?

    घटना के बाद फरार हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह एक हफ्ते से ज्यादा समय तक जबलपुर में छिपा रहा. पकड़े जाने के डर से उसने अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके. समर्थ के इस कबूलनामे के बाद अब भोपाल पुलिस और सीबीआई के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरारी के दौरान जबलपुर में समर्थ को किसने पनाह दी और उसकी मदद की? हालांकि, समर्थ ने अपने मददगारों के नाम उगलने से इनकार कर दिया है।

    गौरतलब है कि 33 वर्षीय मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसे जान देनी पड़ी. भोपाल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), 85 (क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) के साथ दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. दूसरी तरफ, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद द्विशा का दिल्ली एम्स के जरिए दूसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया है।


    सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञान

    इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. अदालत ने कहा कि एक महिला की असामयिक मौत बेहद गंभीर विषय है और इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अफवाहों और अटकलों से बचना चाहता है. अदालत ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी को खोने का दर्द असहनीय होता है और अदालत परिवार की पीड़ा को समझती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं पर भी चिंता जताई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियों को अत्यंत जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।

  • MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में

    MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में


    भोपाल।
    भोपाल की ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की मौत से जुड़े मामले में बुधवार को कई अहम घटनाएं सामने आईं. एक तरफ अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम (Post mortem) कराने की याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए औपचारिक पत्र भेजेगी.

    33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मॉडलिंग और एक्टिंग से जुड़ी थीं, 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं. परिजनों ने आरोप लगाया है कि विवाह के बाद से उन्हें दहेज को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था.


    46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल सुरक्षित रखने की मांग

    इस बीच परिवार ने 46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डाटा, व्हाट्सऐप और डिजिटल मेटाडाटा सुरक्षित रखने की भी मांग की है. इसमें परिवार, घरेलू कर्मचारी, ड्राइवर, करीबी सहयोगी और घटना से पहले व बाद में जुड़े लोगों के नंबर शामिल हैं.


    परिवार ने जांच पर उठाए सवाल

    ट्विशा के परिवार ने स्थानीय पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना वजह प्रशासनिक देरी से शव खराब हो सकता है और अहम फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट होने का खतरा है. परिवार ने आरोप लगाया कि जमानत पर बाहर मौजूद मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह ने न्यायिक कार्यालय परिसर का उपयोग कर मीडिया से बातचीत की और मृतका के खिलाफ बयान दिए.

    इस पर मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी पटेल को संवैधानिक ज्ञापन सौंपकर गिरिबाला सिंह की अर्ध-न्यायिक पद पर भूमिका की समीक्षा की मांग की है.


    FIR और मेडिकल रिपोर्ट में क्या?

    परिवार ने कहा कि एफआईआर और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ के साथ शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी उल्लेख है. उनका कहना है कि इन तथ्यों ने परिवार के मन में मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है.


    पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन

    इसी बीच भोपाल में 50 से अधिक पूर्व सैनिक मोटरसाइकिल रैली निकालकर ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने और मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते नजर आए. उल्लेखनीय है कि ट्विशा शर्मा के भाई भारतीय सेना में मेजर हैं।

  • औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    भोपाल से जुड़े मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है, जहां इस संवेदनशील प्रकरण पर बयानबाजी तेज हो गई है। मामले को लेकर सार्वजनिक मंचों पर उठी टिप्पणियों ने विवाद को और गहरा कर दिया है और विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे ताजा प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) की सांसद Priyanka Chaturvedi की ओर से आई है, जिन्होंने ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि “औरत ही औरत की दुश्मन होती है” का कोई चेहरा होता, तो वह इस मामले में सामने आए बयान से जुड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    यह विवाद तब और बढ़ गया जब गिरिबाला सिंह द्वारा मीडिया से बातचीत में दिए गए बयान सार्वजनिक हुए। उन्होंने दावा किया कि ट्विशा शर्मा गर्भावस्था से जुड़ी स्थिति के कारण मानसिक तनाव में थीं और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के बाद वह अपने फैसले को लेकर असमंजस में थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन परिस्थितियां जटिल थीं। उनके इन बयानों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान देना, जो अब इस दुनिया में नहीं है, उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष की छवि पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। उनके अनुसार, एक पूर्व न्यायिक पद पर रह चुकी व्यक्ति से अधिक संतुलित बयान की अपेक्षा की जाती है।

    इस बीच मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, और लोग इस बात पर भी बहस कर रहे हैं कि व्यक्तिगत मामलों को सार्वजनिक मंचों पर किस हद तक लाया जाना चाहिए। यह घटना न केवल एक कानूनी और पारिवारिक विवाद बन गई है, बल्कि अब सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक संवाद के स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बयानबाजी से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है, खासकर तब जब मामला पहले से ही न्यायिक या जांच प्रक्रिया के दायरे में हो। सार्वजनिक बयानों का प्रभाव न केवल कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है, बल्कि संबंधित परिवारों और व्यक्तियों की सामाजिक छवि पर भी असर डाल सकता है।

    फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती दिख रही है। राजनीतिक प्रतिक्रिया के जुड़ने के बाद यह मुद्दा अब केवल एक निजी विवाद न रहकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

  • भोपाल मॉडल डेथ केस: परिवार का हत्या का दावा, अग्रिम जमानत पर टिकी निगाहें, SIT जांच तेज

    भोपाल मॉडल डेथ केस: परिवार का हत्या का दावा, अग्रिम जमानत पर टिकी निगाहें, SIT जांच तेज

    भोपाल में मॉडल और साउथ इंडियन एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शादी के कुछ ही महीनों बाद सामने आई इस घटना ने न केवल उनके परिवार को सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे शहर में भी चर्चा का माहौल बना दिया है। परिवार ने साफ तौर पर इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या बताया है और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां पर भी आरोप लगाए गए हैं, जिससे यह केस और अधिक संवेदनशील हो गया है।

    परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच उनकी संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा विवाद जांच प्रक्रिया को लेकर सामने आया है, जहां पोस्टमार्टम के दौरान वह बेल्ट उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसे कथित तौर पर घटना में इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है। बाद में उस बेल्ट को जांच के लिए भेजा गया, लेकिन तब तक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जांच प्रभावित हो चुकी थी।

    परिजनों ने इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही हुई है, जिससे साक्ष्यों के सही विश्लेषण में बाधा आई है। इसी आधार पर परिवार लगातार मामले की दोबारा जांच और उच्च स्तर की निगरानी की मांग कर रहा है। परिवार ने यह भी कहा है कि उन्हें न्याय मिलने तक वह शव लेने से इनकार कर रहे हैं।

    इस बीच, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच के लिए विशेष जांच दल गठित कर दिया गया है। वहीं, आरोपी पति की अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत में सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। परिवार इस याचिका का विरोध कर रहा है और जमानत रद्द करने की मांग कर रहा है।

    परिवार ने यह भी मांग की है कि मामले का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली के एम्स में कराया जाए ताकि मौत के कारणों को लेकर कोई संदेह न रहे। साथ ही वे इस केस को किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर करने की भी अपील कर रहे हैं, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

    इस पूरे प्रकरण ने न केवल कानूनी और जांच प्रणाली को सवालों के घेरे में खड़ा किया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर लगातार बहस जारी है। परिवार न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है, जबकि पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई हैं।