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  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, सीबीआई ने उठाए साक्ष्यों से जुड़े सवाल

    मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सीबीआई और राज्य सरकार ने उनकी जमानत का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने और साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फिलहाल गिरिबाला सिंह को जमानत मिलेगी या नहीं, इस पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने दलील दी कि जांच के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया। यह आरोप भी लगाया गया कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। सीबीआई और राज्य सरकार ने आशंका जताई कि यदि उन्हें जमानत मिलती है, तो मामले के गवाहों और साक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकारी पक्ष ने याचिका खारिज करने की मांग की।

    सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से संबंधित रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। सरकारी पक्ष के अनुसार, इन रिपोर्टों से जांच को आगे बढ़ाने और मामले से जुड़े तथ्यों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट लंबित होने का मुद्दा भी जमानत का विरोध करते समय उठाया गया।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश बचाव पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की। उनके वकील ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, बीमारियों और करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला भी दिया। इसके अलावा यह तर्क रखा गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ दहेज अधिनियम की धाराओं में चालान पेश नहीं किया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

    यह मामला भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। ट्विशा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या तथा दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। घटना के बाद मामले की जांच और जमानत को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।

    गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठी। इसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए थे। 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।

    मामले में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने सुनवाई मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस याचिका में सीबीआई, गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को प्रतिवादी बनाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिए थे।

    अब हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें टिकी हैं। जमानत के पक्ष में बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य, उम्र और हिरासत की अवधि से जुड़े तर्क रखे हैं, जबकि सीबीआई और राज्य सरकार ने जांच की स्थिति तथा साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की आशंका के आधार पर विरोध किया है। अदालत का अंतिम आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिलती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में रहना होगा।

  • ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    ट्विशा शर्मा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, भोपाल की अदालत में सुनवाई पर अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई भोपाल से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने भोपाल की निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह याचिका ट्विशा के पिता की ओर से दायर की गई है।

    ट्विशा के पिता ने अपनी याचिका में मांग की है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई भोपाल के बजाय दिल्ली में कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। साथ ही, याचिका पर आगे विचार किए जाने तक भोपाल की अदालत में चल रही कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई का स्थान बदलने को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला उनके परिवार की ओर से घटना पर सवाल उठाए जाने और निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने के बाद चर्चा में आया था। ट्विशा पूर्व मॉडल और अभिनेत्री थीं। उन्होंने मॉडलिंग के अलावा तेलुगु फिल्मों में भी काम किया था। बाद में उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने लगीं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। दोनों की शादी दिसंबर 2025 में हुई थी। इसके बाद 12 मई को ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मायके पक्ष ने घटना की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और मामले की जांच की मांग की।

    ट्विशा के परिजनों ने उनके पति समर्थ सिंह और ससुराल के अन्य सदस्यों पर दहेज उत्पीड़न तथा मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। उनके पिता नवनिधि शर्मा ने दावा किया था कि शादी से पहले ही समर्थ का व्यवहार ठीक नहीं था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हनीमून के दौरान उनकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार किया गया था। परिवार की ओर से समर्थ की मां और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह पर भी दहेज के लिए ट्विशा को परेशान करने का आरोप लगाया गया है।

    मामले में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के सिर, कान और हाथ पर चोट के निशान पाए गए थे। रिपोर्ट में इन चोटों के मौत से पहले लगने की बात सामने आई थी। हालांकि, चोटों की परिस्थितियों और मौत से उनके संबंध को लेकर जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

    इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया था। वहीं, जमानत याचिका में गिरिबाला सिंह की ओर से बहू के व्यवहार और कथित नशे की आदत को लेकर आरोप लगाए गए थे। आवेदन में दावा किया गया था कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी और नशा नहीं मिलने पर उनका व्यवहार असामान्य हो जाता था। ये दावे जमानत आवेदन में लगाए गए आरोप हैं, इन्हें अपने आप में न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

    ट्विशा के भाई हर्षित शर्मा ने भी परिवार की स्थिति को लेकर जानकारी दी थी। उनके मुताबिक, ट्विशा काफी परेशान थीं और उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए नोएडा लौटने की इच्छा जताई थी।
    अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस और भोपाल की अदालत में सुनवाई पर लगी अंतरिम रोक के बाद मामले की आगे की प्रक्रिया संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। दिल्ली में सुनवाई स्थानांतरित करने की मांग पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इस बीच, ट्विशा की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार जारी रहेगा।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI ने मांगा एक सप्ताह का समय

    ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI ने मांगा एक सप्ताह का समय


    जबलपुर:
     एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। करीब तीन सप्ताह से लंबित याचिका पर अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से पेश वकीलों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।

    गिरिबाला सिंह फिलहाल जेल में बंद हैं। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए नियमित जमानत की मांग की है। मंगलवार की सुनवाई में उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने गिरिबाला सिंह की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत दिए जाने की दलील रखी।

    गिरिबाला सिंह के वकील के मुताबिक, उनकी मुवक्किल की ओर से ऐसा कोई कृत्य नहीं किया गया है, जिसके आधार पर उन्हें अपराध में संलिप्त माना जाए। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि ट्विशा शर्मा ने आत्महत्या की थी। वकील ने गिरिबाला सिंह की ओर से किसी तरह की गलती किए जाने से इनकार किया।

    सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। एजेंसी ने कहा कि वह मामले की केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना चाहती है और जमानत याचिका पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराना चाहती है। इसके लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया।

    अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। फिलहाल गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनकी जमानत का निर्णय अगली सुनवाई में CBI के जवाब और मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ेगा।

    मामले के अनुसार, ट्विशा शर्मा 12 मई को अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई पाई गई थीं। उनकी मौत के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और गिरिबाला सिंह तथा उनके बेटे समर्थ सिंह को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

    फिलहाल गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह जेल में हैं। इसी मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया गया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में बचाव पक्ष ने उम्र और स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों को जमानत के पक्ष में रखा, जबकि CBI ने जवाब और केस डायरी प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।

    अदालत द्वारा अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह का समय दिए जाने के बाद अब मामले में CBI का जवाब महत्वपूर्ण होगा। इसके बाद अदालत जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलों और जांच से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आगे सुनवाई करेगी। अभी पूर्व जज गिरिबाला सिंह को जमानत नहीं मिली है और वह न्यायिक हिरासत में हैं।