Tag: Uber

  • नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने Uber पर ठोंका ₹9,226 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है मामला?

    नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने Uber पर ठोंका ₹9,226 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है मामला?


    नई दिल्ली।
    कैब बुकिंग कंपनी उबर (Cab Booking Company Uber) पर यूरोप (Europe) में बड़ा जुर्माना लगाया गया है। नीदरलैंड्स (Netherlands) के डेटा प्रोटेक्शन वॉचडॉग (Data Protection Watchdog) ने कंपनी पर 825 मिलियन यूरो यानी करीब ₹9,226 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला ड्राइवरों के अकाउंट को कथित तौर पर बिना पहले चेतावनी दिए और बिना इंसानी जांच के ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए सस्पेंड या डिएक्टिवेट करने से जुड़ा है। नियामक ने इसे ड्राइवरों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। उसका कहना है कि किसी कंप्यूटर सिस्टम को अकेले ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जिनसे किसी व्यक्ति की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ सकता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी के मुताबिक Uber ने कुछ मामलों में ड्राइवरों के अकाउंट को बिना पर्याप्त चेतावनी और मानवीय हस्तक्षेप के बंद किया। नियामक की डिप्टी चेयर मोनिक वर्डियर ने इसे “गंभीर उल्लंघन” बताया। उनका कहना है कि कई ड्राइवरों के लिए अकाउंट बंद होने का सीधा मतलब उनकी आय का अचानक खत्म होना था। नियामक का तर्क है कि जब किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी पर इतना बड़ा असर पड़ रहा हो, तो केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम के आधार पर फैसला लेना उचित नहीं है और प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    यह मामला यूरोप में 2018 से 2022 के बीच हुई घटनाओं से जुड़ा है। इसकी शुरुआत फ्रांस में एक शिकायत से हुई थी, बाद में जांच नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने संभाली, क्योंकि Uber का यूरोपीय मुख्यालय नीदरलैंड्स में स्थित है। जांच में Uber के उन सिस्टम पर सवाल उठे, जिनका इस्तेमाल ड्राइवरों की संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने और उनके अकाउंट पर कार्रवाई करने के लिए किया जाता था। कंपनी के सिस्टम कुछ ड्राइवरों पर अनावश्यक लंबे रास्ते लेने से किराया बढ़ाने या यात्रा स्वीकार करने के बाद उसे पूरा न करने जैसी गतिविधियों का संदेह कर सकते थे।

    Uber का कहना है कि ऐसे कई सस्पेंशन अस्थायी थे और स्थायी रूप से अकाउंट बंद करने का फैसला इंसानी समीक्षा के बिना नहीं किया जाता था। कंपनी ने नियामक के इस निष्कर्ष को भी खारिज किया कि कम ग्राहक रेटिंग के आधार पर कुछ ड्राइवरों को स्थायी रूप से ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए डिएक्टिवेट किया गया। Uber ने जुर्माने को अनुपातहीन और अत्यधिक बताते हुए कहा कि वह ड्राइवरों के अधिकारों को गंभीरता से लेती है। कंपनी के मुताबिक उसके पास मानव समीक्षा और ड्राइवरों को सस्पेंशन के खिलाफ चुनौती देने का विकल्प देने वाली नीतियां मौजूद हैं।

    इस मामले में यूरोप के GDPR (General Data Protection Regulation) के नियम महत्वपूर्ण हैं। GDPR के तहत कंपनियां ऐसे फैसले केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम के भरोसे नहीं छोड़ सकतीं, जिनका किसी व्यक्ति पर महत्वपूर्ण असर पड़ता हो। ऐसे मामलों में सार्थक मानवीय निगरानी और फैसले को चुनौती देने का अवसर जरूरी माना जाता है। Uber पर लगाया गया जुर्माना इसी सिद्धांत से जुड़ा है। नियामक ने बताया कि जुर्माने की राशि कंपनी के 2025 के सालाना कारोबार के एक हिस्से के आधार पर तय की गई है। Uber का कहना है कि प्रभावित ड्राइवरों की संख्या सीमित थी और 2021 में कम ग्राहक रेटिंग के कारण पूरे यूरोप में केवल 126 ड्राइवरों को डिएक्टिवेट किया गया था।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यूरोपीय नियामक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों पर डेटा प्राइवेसी, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल नियमों के उल्लंघन को लेकर लगातार सख्ती कर रहे हैं। Meta, Google, Apple और Amazon जैसी कंपनियों पर भी अरबों यूरो के जुर्माने लग चुके हैं। Uber के मामले में यह फैसला एक बड़ा संदेश देता है कि AI और ऑटोमेशन से लिए गए फैसलों में भी इंसानी निगरानी और अपील का अधिकार जरूरी है, खासकर तब जब किसी फैसले का सीधा असर किसी व्यक्ति की नौकरी या आय पर पड़ता हो।

  • Cab Tip Rules: अब राइड पूरी होने के बाद ही दे सकेंगे टिप, बुकिंग से पहले अतिरिक्त भुगतान पर सरकार की सख्ती

    Cab Tip Rules: अब राइड पूरी होने के बाद ही दे सकेंगे टिप, बुकिंग से पहले अतिरिक्त भुगतान पर सरकार की सख्ती

    नई दिल्ली । कैब बुकिंग के दौरान यात्रियों को राइड जल्दी कन्फर्म कराने के लिए अतिरिक्त रकम या एडवांस टिप देने के लिए प्रेरित करने वाले विकल्प अब उपलब्ध नहीं होंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने Ola, Uber, Rapido समेत कैब एग्रीगेटर्स को ऐसे सभी फीचर, मैसेज और पेमेंट विकल्प हटाने के निर्देश दिए हैं, जिनसे यात्रियों को सामान्य किराये के अलावा अतिरिक्त भुगतान करने पर जल्दी राइड मिलने का संकेत मिलता है।

    मंत्रालय की ताजा एडवाइजरी के बाद कैब बुकिंग से जुड़े डिजिटल इंटरफेस की समीक्षा करने को कहा गया है। एग्रीगेटर्स को ऐसे फीचर तत्काल हटाने या उनमें बदलाव करने होंगे, जो अतिरिक्त भुगतान को राइड की पुष्टि, ड्राइवर द्वारा ट्रिप स्वीकार करने या कम इंतजार के समय से जोड़ते हैं।

    कैब बुकिंग के दौरान कुछ प्लेटफॉर्म पर Advance Tip, Choose an Add-on या बेहतर और जल्दी राइड कन्फर्म होने की संभावना बढ़ाने जैसे विकल्प दिखाई देने की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे विकल्पों से यात्रियों को यह धारणा बन सकती थी कि सामान्य किराये से अधिक भुगतान करने पर उनकी राइड को प्राथमिकता मिल सकती है।

    सरकार ने इसी व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। निर्देश के अनुसार यात्री को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि अतिरिक्त रकम देने से उसे बेहतर या तेज सेवा मिल सकती है। राइड की बुकिंग सामान्य किराये के आधार पर होनी चाहिए और अतिरिक्त भुगतान को सेवा की प्राथमिकता से नहीं जोड़ा जा सकता।

    Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 के Clause 14.15 के तहत ड्राइवर को दी जाने वाली टिप पूरी तरह स्वैच्छिक रखी गई है। इसका विकल्प यात्रा पूरी होने के बाद ही उपलब्ध कराया जा सकता है। बुकिंग के समय, यात्रा शुरू होने से पहले या यात्रा के दौरान टिप देने के लिए प्रेरित करने वाला विकल्प नहीं होना चाहिए।

    नियमों के मुताबिक यात्री द्वारा दी गई पूरी टिप राशि ड्राइवर को ही मिलनी चाहिए। एग्रीगेटर इसमें किसी प्रकार की कटौती नहीं कर सकता। साथ ही टिप से जुड़ा इंटरफेस ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे यात्री पर अतिरिक्त भुगतान करने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव बने।

    सरकार ने इससे पहले दिसंबर 2025 में एग्रीगेटर गाइडलाइंस में बदलाव करते हुए टिप को यात्रा पूरी होने के बाद तक सीमित किया था। इसके बावजूद कुछ प्लेटफॉर्म पर एडवांस टिप से जुड़े विकल्प दिखाई देने की शिकायतों के बाद अब मंत्रालय ने दोबारा सख्ती दिखाई है।

    11 अगस्त 2026 को जारी एडवाइजरी में कैब एग्रीगेटर्स को अपने मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म की तत्काल समीक्षा करने को कहा गया है। नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले इंटरफेस, संदेश, पेमेंट विकल्प और ऐड-ऑन को हटाने या संशोधित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    एडवांस टिप को लेकर उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी चिंताएं पहले भी सामने आती रही हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने भी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म पर बुकिंग से पहले टिप मांगने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। मुख्य चिंता यह थी कि अतिरिक्त भुगतान करने वाले यात्रियों को सामान्य बुकिंग प्रक्रिया में अनुचित प्राथमिकता मिलने का संकेत न जाए।

    नए निर्देशों के बाद यात्रियों के लिए कैब बुकिंग प्रक्रिया अधिक स्पष्ट रहने की उम्मीद है। अब बुकिंग के समय अतिरिक्त टिप देकर राइड जल्दी हासिल करने का विकल्प नहीं दिया जा सकेगा। यात्री सामान्य किराये पर राइड बुक करेंगे और यात्रा पूरी होने के बाद, यदि वे ड्राइवर की सेवा से संतुष्ट हैं, तो अपनी इच्छा के अनुसार टिप दे सकेंगे।

    इस व्यवस्था का उद्देश्य कैब बुकिंग में अतिरिक्त भुगतान और राइड की प्राथमिकता के बीच किसी भी तरह के संबंध को खत्म करना है। एग्रीगेटर्स को अपने ऐप के इंटरफेस और भुगतान व्यवस्था को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखना होगा, ताकि यात्रियों को सेवा पाने के लिए अतिरिक्त भुगतान करने का दबाव महसूस न हो।

  • भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया

    भोपाल में टैक्सी ड्राइवरों का अनोखा प्रदर्शन: कटोरा लेकर मांगी भीख, बोले- ओला-उबर की नीतियों ने बदहाल किया


    मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों का एक अनोखा और भावनात्मक प्रदर्शन देखने को मिला। भोपाल टैक्सी चालक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में ड्राइवर बोर्ड ऑफिस चौराहे पर एकत्र हुए और अपनी आर्थिक परेशानियों को उजागर करने के लिए फटे कपड़े पहनकर तथा हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक भीख मांगते नजर आए। प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार, प्रशासन और टैक्सी सेवा संचालित करने वाली कंपनियों का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    प्रदर्शन के दौरान ड्राइवरों ने ओला, उबर और रेपिडो जैसी ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप था कि कंपनियों की मौजूदा नीतियों और कम किराया दरों ने उन्हें आर्थिक संकट में धकेल दिया है। कई ड्राइवरों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और वाहन रखरखाव के खर्चों के बीच उन्हें मिलने वाला किराया बेहद कम है, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

    प्रदर्शन में शामिल एक चालक ने भावुक होकर कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अपने लिए नए कपड़े तक नहीं खरीद पा रहे हैं। उनका कहना था कि किराए की दरें इतनी कम हैं कि वाहन चलाने के बाद भी पर्याप्त आय नहीं हो पाती। ऐसे में परिवार का भरण-पोषण और वाहन की किस्तों का भुगतान एक साथ करना कठिन हो गया है।

    भोपाल टैक्सी चालक संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष श्रवण कुमार शर्मा ने दावा किया कि वर्तमान समय में ड्राइवरों को औसतन करीब नौ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराया मिल रहा है, जबकि डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के कारण वाहन संचालन का खर्च लगभग ग्यारह रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, इस अंतर के कारण ड्राइवरों को प्रतिदिन आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग और आरटीओ द्वारा निर्धारित किराया दरों का पालन कंपनियां नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि जब इन कंपनियों ने भोपाल में अपनी सेवाएं शुरू की थीं, तब निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया जाता था, लेकिन समय के साथ कंपनियों ने अपने स्तर पर किराया संरचना में बदलाव करना शुरू कर दिया। इसके चलते ड्राइवरों की आमदनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनका आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

    टैक्सी चालक संघ ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग सरकार द्वारा निर्धारित किराया दरों को सख्ती से लागू कराना है। संघ का कहना है कि यदि कंपनियां निर्धारित मानकों के अनुरूप भुगतान करें तो ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदर्शन के अंत में संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि बढ़ती लागत और घटती आय के बीच टैक्सी चालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो भोपाल में टैक्सी और ऑटो सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।

  • बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

    बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश


    इंदौर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर खंडपीठ से एक महत्वपूर्ण और दिशा-निर्देशात्मक फैसला सामने आया है, जिसमें बाइक का सार्वजनिक परिवहन जैसे उपयोग पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है। न्यायालय ने कहा है कि धारा 66 के तहत किसी भी वाहन को बिना परमिट सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल करना अवैध है और ऐसे उपयोग को रोकना राज्य सरकार और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है।

    मामला यह है कि इंदौर शहर सहित पूरे प्रदेश में ओला, उबर, रैपिडो जैसी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर कंपनियां दो-पहिया वाहनों बाइक का उपयोग सार्वजनिक परिवहन की तरह कर रही हैं, जबकि इन वाहनों के पास किसी भी प्रकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट परमिट नहीं है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयोग से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्री संरक्षण के मानकों को भी खतरा होता है।

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे कानून के तहत परमिट नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और बिना वैध अनुमति वाले वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग से रोकें। आदेश में यह भी कहा गया कि परिवहन विभाग को नियमों के अनुरूप परमिट जारी करने, मॉनिटरिंग और अनुपालन की प्रक्रिया को सशक्त बनाना होगा, ताकि कानून का सही ढंग से पालन हो सके।

    दरअसल, मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक परिवहन के लिए वाहन का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वह वैध परिवहन परमिट/लाइसेंस धारक हो। बिना परमिट वाहन को जनता के आवागमन में शामिल करना गैरकानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे से भरा माना जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी वाहनों का सार्वजनिक परिवहन की तरह उपयोग कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही क्यों न होता हो।

    स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखें और किसी भी निजी वाहन के बिना परमिट पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन को रोका जाए। अदालत का यह आदेश राज्य में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा के मानकों की पूर्ति और सड़कों पर नियम-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

    विशेष रूप से हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इस तरह के वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में संचालित करने की अनुमति चाहता है, तो उसे परिवहन नियमों के अनुकूल वैध परमिट और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इलेक्ट्रॉनिक और ऐप-आधारित मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अदालत की यह टिप्पणी कानून-व्यवस्था और सड़क यातायात नियमों के स्पष्ट पालन को सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है।