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  • अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    नई दिल्ली ।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों का एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने का आह्वान किया। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे।

    डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार मजबूत स्थिति में है और उसे कोई ताकत सत्ता से हटा नहीं सकती। उन्होंने पार्टी की स्थिति को अंगद के पैर से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और 2027 के चुनाव की तैयारियों में जुटने को कहा।

    शाह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता को लेकर पार्टी की आगामी योजना भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि 2027 में जनता के समर्थन से भाजपा की तीसरी बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में UCC लागू की जाएगी। इस घोषणा के साथ उन्होंने इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल कर दिया। हालांकि, बैठक में इसके लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, समयसीमा और प्रस्तावित प्रावधानों का विवरण सामने नहीं आया।

    अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई गोलीबारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन निहत्थे रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले दल अब किस आधार पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।

    उन्होंने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी, जबकि दूसरी ओर भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम को देश की जनता याद रखेगी। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक अंतर को सामने रखने की कोशिश की।

    बैठक में वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों की तुलना मैच हारने के बाद अंपायर पर सवाल उठाने से की। शाह ने कहा कि यदि विपक्ष को मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो वह संसद में चर्चा करे।

    गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर सरकार की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों का बिंदुवार जवाब देने के लिए तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

    अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में कठोर और पारदर्शी शासन के कारण माफिया गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई है और उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। उन्होंने योगी सरकार के कामकाज को भाजपा की राजनीतिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए उसकी सराहना की।

    गृहमंत्री ने वर्ष 2014 से पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमजोर संगठनात्मक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने संगठन को मजबूत किया और जनता का विश्वास हासिल किया। इसी आधार पर भाजपा ने राज्य में बड़ी चुनावी सफलता प्राप्त की। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। बैठक के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य स्पष्ट करते हुए संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया।

  • UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    UCC पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध, भोपाल बैठक में कानूनी लड़ाई की रणनीति और 17 सितंबर के कार्यक्रम पर चर्चा

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक हुई। खानूगांव कैंपस में आयोजित बैठक में UCC के विरोध के साथ इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई की रणनीति पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और बोर्ड के रुक्न-ए-आमला एवं कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने मुस्लिम समाज की ओर से अपना पक्ष रखा।

    शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि मुस्लिम समाज UCC को स्वीकार नहीं करता और इस मुद्दे पर पहले भी अपनी बात रखता आया है। उन्होंने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है। ऐसे में UCC की जरूरत और उसके संभावित असर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार और जिम्मेदार लोगों से इस विषय पर गंभीरता से सोचने की बात कही।

    शहर काजी ने अपने पक्ष को रखते हुए आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 में दिल्ली में दिए गए एक भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस भाषण में गोलवलकर ने कौमी इत्तेहाद के लिए सिविल कोड को जरूरी नहीं बताया था। शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर मुस्लिम समाज और इस विषय के जानकारों की बात सुनी जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ को समझने के लिए उसे पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है। उनका कहना था कि इस विषय को केवल सामान्य चर्चा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े पक्षों को भी गंभीरता से समझना जरूरी है।

    बैठक में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी चर्चा हुई। शहर काजी ने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को पहले से अधिकार और सम्मान दिया है। उन्होंने महिलाओं के मां, बेटी और पत्नी के रूप में अधिकारों के साथ संपत्ति में हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में मुस्लिम समाज किसी से पीछे नहीं है।

    UCC के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम का भी मुद्दा बैठक में उठा। मध्य प्रदेश से लोगों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई। शहर काजी ने मुस्लिम समाज के साथ सेक्युलर नागरिकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।

    आरिफ मसूद ने कहा कि UCC के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए बोर्ड की लीगल टीम तैयार है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग जिलों में भी वकील अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। बोर्ड की ओर से याचिका का मसौदा तैयार होने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने के बजाय कानूनी लड़ाई के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की।

    इस तरह भोपाल की बैठक में UCC को लेकर विरोध के साथ आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया, दोनों स्तरों पर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बोर्ड की ओर से 17 सितंबर के दिल्ली कार्यक्रम में भागीदारी बढ़ाने और कानूनी कार्रवाई को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  • मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मिसाइल टिप्पणी पर ओवैसी और रामेश्वर शर्मा आमने-सामने, काजी कैंप से UCC तक भोपाल में तेज हुई राजनीतिक बयानबाजी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विवाद की शुरुआत रामेश्वर शर्मा की उस टिप्पणी से हुई, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान करोंद चौराहे से काजी कैंप तक मिसाइल गिराने की बात कही थी। बाद में शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा भोपाल के काजी कैंप की ओर नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप की ओर था।

    इस बयान के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। 15 सितंबर को भोपाल में आयोजित सभा में असदुद्दीन ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा की टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो काजी कैंप में आकर मिसाइल गिराकर दिखाएं। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह इस तरह के बयानों से डरने वाले नहीं हैं।

    ओवैसी की टिप्पणी के बाद रामेश्वर शर्मा ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़कर उनका पूरा बयान सुनना चाहिए। शर्मा ने कहा कि यदि उनके बयान को लेकर कोई आपत्ति है तो अदालत का रास्ता अपनाया जा सकता है।

    रामेश्वर शर्मा ने अपने जवाब में ऑपरेशन सिंदूर, भारतीय मिसाइलों और आतंकवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में अपनी ताकत दिखाई है। शर्मा का कहना था कि जहां आतंकवाद के कैंप और भारत विरोधी गतिविधियां होंगी, वहां भारत की मिसाइल तैयार है।

    शर्मा ने यह भी कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं। इस दौरान उन्होंने ओवैसी के खिलाफ कई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई।

    यह राजनीतिक विवाद केवल मिसाइल वाली टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी रामेश्वर शर्मा और असदुद्दीन ओवैसी के बीच मतभेद सामने आए। रामेश्वर शर्मा ने UCC का समर्थन करते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल हिंदुओं के वोट चाहते हैं तो हिंदू कानून को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

    शर्मा ने कहा कि UCC लागू होने से शादी और परिवार से जुड़े नियमों में एक समान व्यवस्था आएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है और मध्य प्रदेश में यह लागू हो चुका है।

    वहीं, असदुद्दीन ओवैसी UCC का लगातार विरोध करते रहे हैं। भोपाल में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। इस तरह दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद मिसाइल टिप्पणी से आगे बढ़कर समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे तक पहुंच गए।

    करोंद चौराहे और काजी कैंप के संदर्भ से शुरू हुआ यह विवाद अब आतंकवाद और UCC से जुड़े बयानों तक पहुंच चुका है। दोनों नेताओं की ओर से लगातार सामने आए बयानों और जवाबी टिप्पणियों के कारण भोपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। फिलहाल पूरा विवाद दोनों नेताओं के सार्वजनिक बयानों और उनके जवाबी बयानों के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

  • ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता

    ओवैसी की चुनौती पर रामेश्वर शर्मा का जवाब काजी कैंप और UCC को लेकर फिर आमने सामने आए दोनों नेता


    भोपाल । AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भोपाल में दिए गए बयान के बाद भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पलटवार किया है। ओवैसी ने मंगलवार को भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित UCC विरोधी सभा के दौरान रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप में मिसाइल लॉन्च करने वाले बयान का जिक्र किया था। उन्होंने विधायक को काजी कैंप आने की चुनौती दी थी। इसके बाद बुधवार को रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने पुराने बयान पर कायम रहने की बात कही।

    रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वह बैरिस्टर हैं तो उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद विधायक ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए ओवैसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय सेना ने किया और पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। शर्मा ने दावा किया कि आतंकवाद और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े ठिकानों के खिलाफ भारत की मिसाइल कार्रवाई जारी रहेगी।

    विधायक ने कहा कि मिसाइल चलती थी और मिसाइल चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि जहां आतंकवाद के कैंप होंगे और जहां भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े कैंप होंगे वहां भारत की मिसाइल तैयार है। शर्मा ने कहा कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर कल भी कायम थे और आज भी कायम हैं। उन्होंने ओवैसी को पूरा भाषण सुनने की बात कहते हुए कहा कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वह वकील होने के नाते इसे अदालत में ले जा सकते हैं।

    इसके बाद रामेश्वर शर्मा ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी ओवैसी के बयान पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल हिंदुओं से वोट मांगते हैं तो हिंदुओं से जुड़े कानूनों को लेकर सवाल क्यों उठाए जाते हैं। उन्होंने UCC को लेकर अपनी पार्टी के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि मध्यप्रदेश में UCC लागू हो चुका है। शर्मा ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू होने की बात कही है।

    ओवैसी ने भोपाल में आयोजित अपनी सभा में UCC को लेकर अलग रुख रखा था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को उनकी संस्कृति परंपरा और धार्मिक पहचान के कारण UCC से बाहर रखा गया है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों शामिल किया गया। उन्होंने UCC के जरिए RSS का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया था। ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान में दिए गए अधिकारों का भी हवाला दिया था।

    इस तरह भोपाल में UCC को लेकर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर ओवैसी UCC के प्रावधानों और इसके दायरे को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर रामेश्वर शर्मा इसे लागू करने के समर्थन में अपना पक्ष रख रहे हैं। मिसाइल संबंधी पुराने बयान को लेकर ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा के जवाब ने इस राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

  • UCC के विरोध में भोपाल पहुंचे ओवैसी RSS पर लगाया एजेंडा चलाने का आरोप भाजपा विधायक को दी चुनौती

    UCC के विरोध में भोपाल पहुंचे ओवैसी RSS पर लगाया एजेंडा चलाने का आरोप भाजपा विधायक को दी चुनौती


    नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी मंगलवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए समान नागरिक संहिता यानी UCC का विरोध किया। यह सभा AIMIM के UCC विरोधी अभियान का हिस्सा थी। इस दौरान ओवैसी ने मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय को UCC से बाहर रखने और मुसलमानों को इसके दायरे में लाने को लेकर सवाल उठाए।

    ओवैसी ने कहा कि मध्यप्रदेश की आबादी में आदिवासियों की बड़ी हिस्सेदारी है और उनकी अलग संस्कृति परंपराएं तथा सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। उनके मुताबिक इन्हीं कारणों से आदिवासियों को UCC से बाहर रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि अलग संस्कृति और परंपराओं को आधार मानकर एक समुदाय को UCC से अलग रखा जा सकता है तो मुसलमानों को इसके दायरे में क्यों लाया जा रहा है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC के जरिए RSS का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सभा में ओवैसी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान है। उन्होंने UCC के जरिए हिंदू मैरिज एक्ट हिंदू सक्सेशन एक्ट और अडॉप्शन एंड कस्टडी से जुड़े प्रावधानों को गैर हिंदुओं पर लागू करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 29 का उल्लेख करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों की बात कही।

    ओवैसी ने केंद्र में भाजपा के सहयोगी दलों से भी UCC को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की। उन्होंने TDP JDU चिराग पासवान एचडी कुमारस्वामी और जयंत चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि यदि इन दलों का भाजपा से कुछ वैचारिक अंतर अभी भी है तो उन्हें UCC का विरोध करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब समान नागरिक संहिता को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।

    भोपाल की सभा में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का मुद्दा भी उठा। ओवैसी ने काजी कैंप से जुड़े उनके पुराने मिसाइल वाले बयान का जिक्र करते हुए उन्हें काजी कैंप आने की चुनौती दी। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम के योगदानकर्ताओं के नाम भी गिनाए और कहा कि भोपाल की इस जमीन का अपना ऐतिहासिक महत्व है।

    ओवैसी ने भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तानों को नुकसान पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप उनके राजनीतिक वक्तव्य के तौर पर सामने आए। उन्होंने सागर में जहरीली शराब के मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की। लव जिहाद से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा कि यदि दो बालिग अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं तो उन्हें रोकने का अधिकार सरकार या किसी अन्य व्यक्ति को नहीं होना चाहिए।

    सभा के दौरान ओवैसी ने सोवियत यूनियन का उदाहरण देते हुए RSS पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां कम्युनिस्ट शासन के दौरान मदरसों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई घर पर जारी रखी। भोपाल में हुई इस सभा के दौरान UCC के साथ धार्मिक स्वतंत्रता सामाजिक पहचान अल्पसंख्यक अधिकार और राजनीतिक मुद्दों पर ओवैसी ने अपनी पार्टी का पक्ष रखा।

  • बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….

    बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….


    पटना।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के समान आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- Uniform Civil Code- UCC) को लेकर की गई घोषणा के बाद बिहार (Bihar) में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (National Democratic Alliance) के दलों का अलग-अलग रुख सामने आ रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) साथ देने के मूड में है तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने ड्राफ्ट देखने के बाद फैसले की बात कही है। चिराग पासवान ने भी ड्राफ्ट देखने पर ही बात रखने का एलान किया है। लेकिन, सबसे बड़ा और कड़ा रुख जनता दल यूनाईटेड का है। जदयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड का हवाला देते हुए यूसीसी के खिलाफ बयान दिया है।


    जदयू विधायक बोले- लागू नहीं होने देंगे

    जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा या राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का अब तक सीधा बयान नहीं आया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने सिर्फ इतना कहा है कि इसपर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेंगे। लेकिन, जनता दल यूनाईटेड के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ शब्दाें में एलान किया कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार है और जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने शुरुआत से ही यूसीसी का विरोध किया है। इसलिए, एनडीए सरकार में जदयू इसे लागू नहीं होने देगा।


    चिराग पासवान को देखना है ड्राफ्ट, तब बोलेंगे

    चिराग पासवान ने केंद्र की अपनी एनडीए सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर आंख बंद कर भरोसा नहीं है। एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के अमित शाह के बयान के बाद चिराग ने कहा कि वह ड्राफ्ट देखे बगैर कुछ नहीं कह सकते। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए, उसके सभी हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाए और व्यापक विमर्श के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।


    उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के अंदर विमर्श करना है

    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके और इस समय राज्यसभा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अंदर यूसीसी पर विचार-विमर्श करना है। उन्होंने अमित शाह के बयान के बाद कहा कि क्या प्रस्ताव आता है, वह देखकर ही निर्णय होगा। मतलब, वह सीधे तौर पर अमित शाह के फैसले पर मुहर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट आने के बाद वह पार्टी के अंदर उसपर विमर्श करेंगे, फिर निर्णय लेंगे।


    मांझी की पार्टी का रुख साफ, हम शाह के साथ

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का रुख इसपर सामने नहीं आया है, लेकिन उनके बेटे, बिहार सरकार के मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. संतोष सुमन ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान दिया है तो वह हितकारी ही होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने में हर्ज तो नहीं दिखता है, बस घटक दलों से इसपर विमर्श कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता देश के लिए दूरगामी तौर पर बेहतर ही होगा।


    गिरिराज सिंह के बयान से तल्खी, बाकी मौन स्वीकृत

    बिहार में यूसीसी लागू हो या नहीं, इसपर प्रदेश के पार्टी नेता चुप्पी साधे हैं। मौन स्वीकृति की बड़ी वजह यह है कि एनडीए के घटक दलों से तकरार न हो। चूंकि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह का बयान है तो इसपर सभी की स्वीकृति स्वाभाविक है। इस बीच, हंगामा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुख को लेकर है। एनडीए के घटक दलों के अलग-अलग सुर के बीच गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति के तहत इसे आजादी के समय लागू नहीं होने दिया। गिरिराज ने कहा कि यूसीसी को लागू होने से रोक कर कांग्रेस ने देश को गर्त में धकेल दिया। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद यूसीसी के खिलाफ बोलने वाले एनडीए के दल असहज महसूस कर रहे हैं। इसलिए, ड्राफ्ट देखने की बात पर जोर दिया जा रहा है।

  • गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    नई दिल्ली ।AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। ओवैसी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है तो गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा कानून लागू करके दिखाए।

    ओवैसी ने अमित शाह के उस संदर्भ पर सवाल उठाया, जिसमें वह लोगों से ‘क्रोनोलॉजी समझने’ की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार UCC को लेकर अपनी बात स्पष्ट करना चाहती है तो उसे गोवा जाकर यह ऐलान करना चाहिए कि वहां भी वही कानून लागू किया जाएगा, जो उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू किया गया है।

    उन्होंने दावा किया कि सरकार ऐसा नहीं करेगी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि गुजरात में UCC की बात करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने गोवा के मौजूदा कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    ओवैसी के मुताबिक, गोवा में कुछ परिस्थितियों में हिंदू दंपति के बच्चों से जुड़ी स्थिति के आधार पर पति को दूसरी शादी की अनुमति देने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कैथोलिक समुदाय को कुछ विशेष छूट मिली हुई है।

    उन्होंने कहा कि गोवा में कैथोलिक विवाहों के पंजीकरण की व्यवस्था भी अलग है। ओवैसी के अनुसार, कुछ मामलों में कैथोलिक विवाह का पंजीकरण सरकार के बजाय चर्च के पादरी कर सकते हैं। उन्होंने इस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए गोवा में मौजूद वैवाहिक कानूनों में समुदाय आधारित अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

    ओवैसी ने यह भी कहा कि चर्च की धार्मिक संस्थाएं ईसाइयों से जुड़े वैवाहिक मामलों में कुछ फैसले ले सकती हैं। इसके विपरीत, उनके मुताबिक दूसरे समुदायों के लोगों को तलाक या वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत का सहारा लेना पड़ता है।

    उन्होंने आगे दावा किया कि गोवा के कानून में कुछ परिस्थितियों में चर्च ट्रिब्यूनल को विवाह को अमान्य घोषित करने से जुड़े अधिकार भी हासिल हैं। ओवैसी ने इसकी तुलना गैर-ईसाइयों की व्यवस्था से करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे मामलों में अदालत जाना पड़ता है।

    AIMIM प्रमुख ने इन्हीं प्रावधानों के आधार पर गोवा को पूरी तरह समान नागरिक संहिता का मॉडल बताए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो गोवा को UCC का पूरी तरह समान मॉडल बताना उचित नहीं है।

    ओवैसी ने सरकार से गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा UCC लागू करने की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ऐसा कर सकती है तो उसे इसे करके दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा के UCC का उदाहरण बार-बार देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

  • 2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

    मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि वर्ष 2029 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि बाकी राज्यों में भी इसे तय समयसीमा से पहले लागू किया जाएगा।

    अमित शाह ने रविवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। UCC के तहत विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म से अलग समान कानून की व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है।

    आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का किया जिक्र

    गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की सुरक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा को हर क्षेत्र में प्राथमिकता दी गई है।

    शाह ने कहा कि 2014 से पहले देश की राजनीति में भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला था, जबकि भाजपा सरकार आने के बाद राजनीति का आधार प्रदर्शन और कामकाज बना है। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश और रक्षा नीति भी मजबूत हुई है तथा इसमें ‘इंडिया फर्स्ट’ को प्राथमिकता दी जा रही है।

    भारत की आर्थिक प्रगति का भी किया उल्लेख

    अमित शाह ने भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत पहले कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने पहली तिमाही में GDP की 7.8 प्रतिशत वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

    गृह मंत्री ने अनुच्छेद 370, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक ये ऐसे मुद्दे थे, जो लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती बने रहे।

    मणिपुर में NRC पर नेताओं से बातचीत जारी

    मणिपुर में 1951 को आधार वर्ष मानकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने से जुड़े सवाल पर शाह ने कहा कि राज्य के नेताओं और राजनीतिक दलों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी।

    अवैध घुसपैठ को लेकर गृह मंत्री ने सरकार का रुख दोहराते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मातृभाषा को प्राथमिकता देने की वकालत

    भाषा को लेकर जारी बहस के बीच अमित शाह ने मातृभाषा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य के नेतृत्व को इस विषय का समाधान निकालना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भाषा के मुद्दे पर लोगों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

    सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों के विरोध करने के अधिकार का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती।

    चीन पर संवेदनशील जानकारी साझा करने से इनकार

    चीन और अन्य संवेदनशील रणनीतिक मुद्दों पर अमित शाह ने सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी साझा करने से सशस्त्र बलों को कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को देश की रक्षा क्षमता पर पूरा भरोसा है।

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’

    अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भी घोषणा की। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा।

    17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन है। अभियान में भाजपा, NDA के सहयोगी दल, सामाजिक संगठन और आम लोग शामिल होंगे। इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा जिलों, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों तथा बूथ स्तर तक ले जाया जाएगा।

    शाह ने कहा कि अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन, उनकी उपलब्धियों और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखा जाएगा। अभियान के तहत 12 तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गांवों में स्थानीय भाषाओं में संगीत और नाटक के कार्यक्रम भी होंगे, जिन्हें ‘अनटोल्ड स्टोरीज ऑफ नमो सेवा’ नाम दिया गया है।

    फडणवीस बोले- जनकल्याण पर रहेगा जोर

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार और भाजपा मिलकर ‘सेवा संकल्प अभियान’ में हिस्सा लेंगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में NDA के सभी सहयोगी दल अभियान के साथ हैं।

    फडणवीस के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन का अपना महत्व है। अभियान का उद्देश्य आम लोगों के जीवन में बदलाव लाना और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाना है।

  • MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं

    MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में यूसीसी कानून (UCC Law) के विरोध में सैंकड़ों की संख्या में बुर्का और हिजाब पहन कर मुस्लिम महिलाएं (Muslim Women) सड़क पर उतर गई हैं। इन दौरान मुस्लिम महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंची। इन तख्तियों पर लिखा,काला कानून वापस लो,धर्म निरपेक्षता जिंदाबाद,शरीयत में छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जाएगी। इस दौरान महिलाओं ने सरकार को चेताया की मुस्लिम लॉ के तहत निकाह हमारा, फैसला हमारा,शरीयत में दखल मंजूर नही करेंगे। UGC को लेकर महिलाओं के समर्थन देने पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम उनको बताना चाहते हैं कि ये स्पष्ठ नही है। कुछ बाते जानने की जरूरत है। इस दौरान तीन थानों के थाना प्रभारी सहित एसडीएम, सीएसपी ओर पुलिस के जवान तैनात रहे।

    उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में रविवार सेकड़ों की संख्या में मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर UGC द्वारा बनाए कानून को मानने से इंकार किया। उन्होंने आरोप लगाए की यह कानून तीन तलाक,विवाह सहित कई मामलों में स्पष्ठ नहीं है।इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। मंच पर महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं, जबकि सामने एकत्रित महिलाओं के हाथों में तख्तियां और तिरंगे झंडे देखे गए। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर है, जिन्हें वे अपने धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मानती हैं। डॉक्टर फौजिया अंजुम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को केवल समानता के नाम पर विधेयक का समर्थन करने के बजाय उसके प्रावधानों को गहराई से समझना चाहिए।


    राष्ट्रपति को ज्ञापन में पुर्नविचार की मांग

    बताया जा रहा है कि 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर उज्जैन की मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक- 2026 को लेकर विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। कमेटी ने राष्ट्रपति से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करना शामिल है। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, सभी प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श और मुस्लिम या अन्य धर्म-निर्देशित समुदायों को कानून में अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन में शामिल शाइस्ता परवीन शेख ने कहा कि महिलाएं संविधान और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई हैं। प्रसासनिक अधिकारों ज्ञापन में संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। कमेटी ने अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

    पार्षद नाजिया कुरैशी ने बताया कि यह प्रदर्शन मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और शरीयत से जुड़े मामलों को लेकर है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा UCC के समर्थन की बात कही जा रही है।

  • 12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    12 राज्यों के युवाओं ने संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 में लिया हिस्सा, सीएम यादव बोले लोकतंत्र मजबूत करें युवा

    मध्य प्रदेश। विधानसभा में गुरुवार को संसद यूथ पार्लियामेंट 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 12 राज्यों के 52 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का दिल है और भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। उन्होंने कहा कि देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है और ऐसे समय में विधानसभा भवन में आयोजित युवा संसद ने इसे मिनी इंडिया का स्वरूप दे दिया है। उनके अनुसार सदन कल्याणकारी नीतियों के निर्माण का महत्वपूर्ण स्थान है और युवाओं को इसकी कार्यप्रणाली को समझना चाहिए।

    डॉ. यादव ने युवा संसद में बेटियों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका दिखाई देती है। उन्होंने महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति में माताओं और बहनों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    मुख्यमंत्री ने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि देश को अनेकता में एकता, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ आगे बढ़ाने के लिए केवल विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए संकल्प और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समान कानून के मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर में सभी नागरिकों के लिए कानून समान होना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता से जुड़े विधायी प्रयासों और सुझाव प्रक्रिया का उल्लेख किया। उनके अनुसार विभिन्न जिलों और धर्मों के लोगों से इस विषय पर सुझाव लिए गए हैं।

    डॉ. यादव ने युवाओं से राजनीति को केवल चुनावी गतिविधि के रूप में नहीं देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बनने के साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित और जागरूक युवाओं की भागीदारी आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने आईसीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नौकरी छोड़कर देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने युवाओं से देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े वक्ताओं ने भी युवाओं की भूमिका और मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ छोटी औद्योगिक इकाइयों में भी निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं। राजनीति और समाज सेवा को समर्पण और जिम्मेदारी वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं को समाज के लिए काम करने की प्रेरणा दी गई।

    युवा संसद में युवा सांसद की भूमिका निभाने वाले प्रतिभागियों ने भी प्रदेश में युवाओं से जुड़ी योजनाओं और शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। कार्यक्रम में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में खेल और युवा कल्याण के लिए 800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट रखा गया है। प्रदेश में 274 सांदीपनि विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और 200 नए विद्यालय स्थापित करने की योजना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर युवाओं की आवश्यकता है। युवा संसद जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली समझने और सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका तय करने का अवसर मिलता है।