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  • विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना

    विधानसभा में दिनभर सियासी संग्राम, UCC बिल पास तो पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस का धरना


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर मुख्यमंत्री कक्ष तक राजनीतिक हलचल तेज रही। दिन की शुरुआत समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से हुई, जबकि दिन का समापन पेपर लीक मामले और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के सामने कांग्रेस विधायकों के धरने के साथ हुआ। पूरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

    सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में समान नागरिक संहिता के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान तीन सांकेतिक शव रखे गए, जिन पर भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी के नाम लिखे कफन ओढ़ाए गए। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि सरकार बेरोजगारी, किसानों और युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए अन्य विषयों को प्राथमिकता दे रही है।

    इसके बाद सरकार ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक सदन में पेश किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे के चलते विधानसभा अध्यक्ष को दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सरकार ने बहुमत के आधार पर UCC सहित चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा लिए।

    विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं ने संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। विपक्षी विधायकों ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से राय लेना जरूरी था। सरकार का पक्ष था कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लाया गया है और इसे पारित किया जाना आवश्यक है।

    शाम को कांग्रेस ने दिल्ली में पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा विधानसभा में उठाया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने की मांग की, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

    धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसे मामलों का असर देशभर के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस विषय को लेकर कांग्रेस चर्चा चाहती है, वह राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला है। सरकार ने विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए चर्चा से इनकार किया और विपक्ष के विरोध को राजनीतिक प्रदर्शन बताया।

    दिनभर चले घटनाक्रम ने एक बार फिर विधानसभा के मानसून सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद गर्म बना दिया। एक ओर सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया, तो दूसरी ओर विपक्ष ने छात्रों, युवाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की।

  • विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जिसके साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम पूरी तरह विधानसभा और उससे जुड़ी बैठकों पर केंद्रित रहा। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की तैयारी है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह विधानसभा पहुंचे। इसके बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विभिन्न विधायी कार्यों और चर्चा के एजेंडे पर विचार किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए, जहां पहले दिन की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रही।

    इस मॉनसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक को माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी कर चुकी है। यदि विधेयक पेश होता है तो इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सरकार इसे महत्वपूर्ण विधायी पहल के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

    मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम में दोपहर के समय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों से मुलाकात का समय भी निर्धारित रहा। इसके बाद समिति कक्ष में गुरु पूर्णिमा महोत्सव से संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। आधिकारिक बैठकों के बाद मुख्यमंत्री के निवास लौटने का कार्यक्रम तय रहा। शाम को समत्व भवन में विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी सदन की रणनीति और विभिन्न विधायी विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना प्रस्तावित है।

    विधानसभा का यह मॉनसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार विकास योजनाओं, प्रशासनिक निर्णयों और नई नीतियों को सदन के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष राज्य से जुड़े अनेक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुका है।

    सत्र के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के मुआवजे, उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े मामलों, नीट यूजी परीक्षा से संबंधित विवाद, सीबीएसई परीक्षा में कथित अनियमितताओं सहित कई अन्य विषयों के सदन में उठने की संभावना है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष अपने फैसलों और योजनाओं का पक्ष मजबूती से रखने का प्रयास करेगा।

    राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य सरकार की कई नीतियों और निर्णयों की परीक्षा भी होगी। सत्ता पक्ष जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की नजर बनी रहेगी।

  • पश्चिम बंगाल में नए कानूनों की बड़ी पहल, UCC विधेयक सहित 5 प्रस्तावित बिलों पर विधानसभा में होगा जोरदार सत्र

    पश्चिम बंगाल में नए कानूनों की बड़ी पहल, UCC विधेयक सहित 5 प्रस्तावित बिलों पर विधानसभा में होगा जोरदार सत्र

    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है क्योंकि विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में कई अहम विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। प्रस्तावित विधेयकों में समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा बिल सबसे प्रमुख माना जा रहा है, जिस पर पूरे राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। इसके साथ ही सरकार कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़े अन्य चार विधेयक भी पेश करने की योजना बना रही है।

    प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू करने की बात कही जा रही है। इस कदम को सरकार समान नागरिक अधिकार और लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा सुधार बताने की तैयारी में है।

    इसके साथ ही सरकार ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर तैयार एक विधेयक भी पेश कर सकती है, जिसका उद्देश्य संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करना बताया जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून में अवैध खनन, हथियार और ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर कठोर प्रावधान शामिल होने की बात कही जा रही है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कानून के तहत अपराधियों को जन सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए हिरासत में रखने और उनकी संपत्ति जब्त व नीलाम करने जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा सार्वजनिक अव्यवस्था, दंगे, आगजनी और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए भी अलग विधेयक लाया जा सकता है।

    राज्य सरकार का दावा है कि इन प्रस्तावित कानूनों से कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन विधेयकों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले जा सकती है। वहीं, कानून-व्यवस्था से जुड़े सख्त प्रावधानों पर मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।

    सोमवार को होने वाला यह विशेष सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य की नीतिगत दिशा और भविष्य की कानून व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालने वाले निर्णय सामने आ सकते हैं।