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  • ढाबला फंटा के पास तेज रफ्तार टक्कर ने छीनी युवक की जिंदगी, हादसे के बाद कार छोड़कर फरार हुआ चालक

    ढाबला फंटा के पास तेज रफ्तार टक्कर ने छीनी युवक की जिंदगी, हादसे के बाद कार छोड़कर फरार हुआ चालक


    उज्जैन । उज्जैन में गुरुवार रात जावरा-उज्जैन रोड पर हुए सड़क हादसे में एक बाइक सवार युवक की मौत हो गई। हादसा भेरूगढ़ थाना क्षेत्र में ढाबला फंटा के पास रात करीब 11 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि इसी दौरान एक चार पहिया वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद वाहन चालक घटनास्थल पर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

    मृतक की पहचान खेड़ला निवासी कालू पिता हेमा जी बंजारा के रूप में हुई है। हादसे के समय कालू बाइक पर अकेले सवार थे। रात के समय जावरा-उज्जैन रोड पर हुई इस दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों में भी हड़कंप की स्थिति बन गई। हादसे की सूचना पुलिस को दी गई जिसके बाद भेरूगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचने से पहले ही टक्कर मारने वाला चालक अपना वाहन मौके पर छोड़कर वहां से फरार हो चुका था।

    पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर दुर्घटना में शामिल चार पहिया वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। वाहन को जब्त करने के बाद पुलिस अब उसके चालक की पहचान करने की कोशिश कर रही है। पुलिस का मानना है कि जब्त वाहन के आधार पर फरार चालक तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हादसा किस वजह से हुआ और टक्कर के समय वाहन की गति कितनी थी इन बिंदुओं को लेकर भी जांच की जा रही है।

    भेरूगढ़ थाना प्रभारी शैलेंद्र प्रताप राजावत के अनुसार दुर्घटना के समय बाइक पर सिर्फ कालू सवार थे। हादसे में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। शुक्रवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद परिजन शव को लेकर अपने गांव रवाना हुए।

    हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ा दी है। अब पुलिस दुर्घटना के कारणों के साथ ही फरार चालक की पहचान करने में जुटी है। मौके पर छोड़े गए चार पहिया वाहन को जांच का अहम आधार माना जा रहा है। पुलिस वाहन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारी के जरिए चालक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    जावरा-उज्जैन रोड पर देर रात हुए इस हादसे ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक वजह और फरार चालक की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश जारी है।

  • 25 हजार स्थानों पर एक साथ वंदे मातरम्, मालवा में 1.52 लाख लोगों ने मिलकर रचा नया इतिहास

    25 हजार स्थानों पर एक साथ वंदे मातरम्, मालवा में 1.52 लाख लोगों ने मिलकर रचा नया इतिहास

    उज्जैन । देशभर में शुक्रवार को वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में एक साथ सामूहिक गायन का अनोखा आयोजन किया गया। नमामि भारतम् कार्यक्रम के तहत देश के 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों शिक्षकों अभिभावकों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एक ही समय पर एक स्वर और एक लय में संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया। इस दौरान मालवा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और कई स्थानों पर देशभक्ति का माहौल देखने को मिला।

    विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मालवा प्रांत के 522 सरस्वती शिशु मंदिरों को जोड़ा गया। आयोजकों के अनुसार इन स्कूलों में करीब 1 लाख 52 हजार 850 लोग सामूहिक गायन में शामिल हुए। उज्जैन शहर में मारुति गंज और ऋषिनगर स्थित सरस्वती स्कूलों में भी विशेष आयोजन किया गया। यहां विद्यार्थी शिक्षक अभिभावक और समाज के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे और निर्धारित समय पर सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया।

    कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे प्रतिभागियों के एकत्रीकरण के साथ हुई। इसके बाद ठीक 11 बजे देशभर के निर्धारित स्थानों पर एक साथ संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया गया। इस दौरान स्कूल परिसरों में देशभक्ति का वातावरण नजर आया। मालवा प्रांत के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरस्वती शिशु मंदिरों को इस आयोजन के माध्यम से एक सूत्र में जोड़ने की तैयारी पहले से की गई थी।

    विद्या भारती मालवा प्रांत के प्रांत प्रचार प्रमुख सुदर्शन शिशुलकर के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। वहीं सरस्वती स्कूल के प्राचार्य भगवान सिंह ठाकुर ने बताया कि मध्य प्रदेश में ही 5 लाख से अधिक लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सामूहिक गायन तक सीमित नहीं था बल्कि राष्ट्रभाव मातृभूमि के प्रति श्रद्धा सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत करना भी था।

    इस आयोजन को लेकर रिकॉर्ड बनाने की दिशा में भी तैयारी की गई है। आयोजकों ने एक साथ सर्वाधिक विद्यार्थियों और जनसमुदाय द्वारा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से प्रतिभागियों की संख्या का सत्यापन किया जाएगा।

    दोपहर तक अलग अलग स्थानों से प्रतिभागियों की संख्या जुटाने का काम किया जाना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामूहिक गायन ने रिकॉर्ड के निर्धारित मानकों को पूरा किया है या नहीं। फिलहाल मालवा के 522 सरस्वती स्कूलों में एक साथ हजारों लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। एक ही समय पर अलग अलग शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजे वंदे मातरम् के स्वर ने पूरे आयोजन को देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता से जोड़ दिया।

  • नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

    नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार


    उज्जैन । उज्जैन में एक नाबालिग लड़की की तस्वीर का दुरुपयोग कर उसे बदनाम करने की साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिग की छवि धूमिल करने और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंवासा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

    जानकारी के अनुसार 21 जून को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी की तस्वीर का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। वायरल किए गए फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों का परिवार से कोई संबंध नहीं था लेकिन नाबालिग की तस्वीर जोड़कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। जांच में सामने आया कि मतदाता संबंधी सरकारी दस्तावेज में लगी नाबालिग की पासपोर्ट साइज फोटो बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी गई थी। इसके बाद यह फोटो कई लोगों के बीच साझा होती रही और अंततः गलत हाथों में पहुंचकर उसका दुरुपयोग किया गया।

    पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में तस्वीर साझा की और बाद में फोटो एडिटिंग के जरिए नाबालिग की तस्वीर को किसी अन्य युवती की तस्वीर के साथ जोड़कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई। इसके बाद उस सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया गया जिससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा।

    जांच के दौरान पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री किन-किन प्लेटफॉर्म और लोगों तक पहुंचाई गई थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

    कार्रवाई के तहत पुलिस ने आबिद पटेल मुजफ्फर पटेल और एहसान पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सरकारी दस्तावेज से फोटो साझा करने के मामले में बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की गई है। मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

    एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने कहा कि नाबालिग की पहचान और सम्मान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और जो भी व्यक्ति इस साजिश में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और संवेदनशीलता का ध्यान रखें।

  • उज्जैन में नीट विवाद पर सियासी गरमाहट, युवक कांग्रेस का प्रदर्शन-टावर चौक पर फूंका पुतला

    उज्जैन में नीट विवाद पर सियासी गरमाहट, युवक कांग्रेस का प्रदर्शन-टावर चौक पर फूंका पुतला


    नई दिल्ली। उज्जैन में NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द किए जाने के फैसले के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार देर शाम युवक कांग्रेस ने शहर के व्यस्त टावर चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के साथ-साथ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
    प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और इसे देश की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बार-बार होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।
    युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अर्पित यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के 22 लाख से अधिक छात्रों के सपनों और मेहनत पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने वर्षों तक कठिन परिश्रम किया, उन्हें अब अव्यवस्था और भ्रष्ट प्रणाली की कीमत चुकानी पड़ रही है।
    उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों ने अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए भारी कर्ज लिया, जबकि कुछ ने अपने गहने तक बेच दिए, लेकिन परिणामस्वरूप उन्हें अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। यादव ने इसे शिक्षा व्यवस्था में संगठित भ्रष्टाचार का परिणाम बताया और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ चुकी है। उनका आरोप था कि बार-बार पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों का भरोसा टूट रहा है।
    प्रदर्शन के दौरान युवक कांग्रेस ने NTA अधिकारियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में आ सकती है।
    टावर चौक पर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसमें चंद्रभान सिंह चंदेल, अजीत सिंह ठाकुर, रहीम लाल, ललित मीना, पोप सिंह, यश जैन, हिमांशु शुक्ला और योगेश दायमा सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
    पुलिस प्रशासन ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखा, जबकि प्रदर्शन कुछ समय बाद शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। हालांकि, छात्रों और संगठनों का आक्रोश अब भी जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है।
  • खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं

    खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं


    उज्जैन । उज्जैन शहर में आयोजित फिरोजिया ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांच और उत्साह के बीच संपन्न हुआ। क्षीर सागर मैदान पर खेले गए इस फाइनल मैच में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों को अंत तक रोमांच से बांधे रखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम में देर रात तक भारी संख्या में खेल प्रेमी मैदान में मौजूद रहे, जिससे शहर में क्रिकेट और खेल के प्रति गहरा जुनून देखने को मिला। फाइनल मुकाबला 12 से 19 अप्रैल तक चली इस प्रतियोगिता का समापन था, जिसमें दोनों टीमों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर विजेता टीम के लिए 1 लाख रुपये और उपविजेता टीम के लिए 51 हजार रुपये की नगद राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करते हैं और उनमें अनुशासन तथा टीम भावना को मजबूत बनाते हैं।

    सीएम ने उज्जैन में खेल सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि नानाखेड़ा स्टेडियम, माधव नगर मैदान और दशहरा मैदान का आधुनिकरण किया जाएगा। इसके साथ ही क्षीरसागर मैदान को भी एक आधुनिक खेल स्टेडियम के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    यह प्रतियोगिता पिछले 21 वर्षों से आयोजित की जा रही है और इसका आयोजन सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा उनके स्वर्गीय पिता भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में किया जाता है। इस बार आयोजन में महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिससे कार्यक्रम को सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम भी मिला।

    फाइनल मुकाबले के बाद पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और दर्शकों की भारी भागीदारी ने यह साबित किया कि उज्जैन में खेल संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

  • उज्जैन में प्रसव दिवस बना प्रेरणा का उत्सव, गुरुजी ने नवजातों को दिया आशीर्वाद

    उज्जैन में प्रसव दिवस बना प्रेरणा का उत्सव, गुरुजी ने नवजातों को दिया आशीर्वाद


    उज्जैन । उज्जैन में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर इस वर्ष एक विशेष और भावनात्मक आयोजन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया जहां चरक अस्पताल में प्रसव दिवस के रूप में एक अनोखी पहल की गई। यह आयोजन कृष्णा मिश्रा जिन्हें लोग श्रद्धा से गुरुजी कहते हैं उनके नेतृत्व में लगातार छठे वर्ष आयोजित किया गया जिसमें नवजात शिशुओं और माताओं के सम्मान को केंद्र में रखा गया।

    कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में जन्मे नवजात शिशुओं का पारंपरिक और भावनात्मक तरीके से स्वागत किया गया। कृष्णा मिश्रा ने नवजातों के चरण स्पर्श कर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके परिजनों से मुलाकात कर खुशी साझा की। पूरे माहौल में एक आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली जहां हर नवजात को जीवन के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

    इस अवसर पर प्रसव के बाद अस्पताल में भर्ती माताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें बेबी किट वितरित किए गए जिनमें नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल से जुड़ी सामग्री शामिल थी। साथ ही माताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें पोषण के लिए ड्राई फ्रूट लड्डू भी प्रदान किए गए जिससे उनके स्वास्थ्य लाभ में सहायता मिल सके।

    यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था बल्कि इसमें सेवा और समाजसेवा की गहरी भावना झलकती रही। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात जीवन के महत्व को समाज में सम्मान दिलाना और मातृत्व को विशेष पहचान देना था। आयोजन में उपस्थित सभी लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

    कार्यक्रम में चरक अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ कल्पना पवार और उनकी टीम ने गुरुजी का स्वागत किया और आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। अस्पताल के स्टाफ ने भी पूरी तत्परता से कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कृष्णा मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि नवजात शिशु केवल परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी होते हैं और उनका सम्मान करना समाज की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से परंपरा और सेवा भावना को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे जिनमें भारती मंडलोई तृप्ति बजाज राकेश बजाज राजेश पंडित पिंकू यादव और नितेश पटेल सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने इस पहल को समाज के लिए उपयोगी और प्रेरक बताया।

    अक्षय तृतीया के इस अवसर पर आयोजित प्रसव दिवस ने न केवल नवजीवन का स्वागत किया बल्कि सेवा और मानवता की भावना को भी एक नई दिशा दी जिससे यह आयोजन उज्जैन में चर्चा का विषय बन गया।

  • उज्जैन में चाइना डोर से बाइक सवार की नाक कटी एक महीने में चार लोग हुए घायल

    उज्जैन में चाइना डोर से बाइक सवार की नाक कटी एक महीने में चार लोग हुए घायल


    उज्जैन । उज्जैन में प्रतिबंध के बावजूद चाइना डोर से होने वाली दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। शनिवार को एक और बाइक सवार की नाक चाइना डोर से कट गई जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। तुलसीराम राठौर उम्र 52 वर्ष निवासी गायत्री नगर बाइक से इंदिरा नगर से गुजर रहे थे जब अचानक उनके चेहरे पर चाइना डोर आ गई। राठौर जैसे ही डोर को हटाने की कोशिश करते उसकी नाक कट गई जिससे काफी खून बहने लगा। गनीमत रही कि उनकी आंखें बच गईं हालांकि हाथ में भी गंभीर चोटें आईं।स्थानीय लोगों ने तत्काल राठौर को उपचार के लिए चरक अस्पताल भेजा जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    एक महीने में चार लोग घायल

    चाइना डोर के कारण हुए हादसों की यह कोई पहली घटना नहीं है। एक महीने के भीतर चार लोग इस खतरनाक डोर की चपेट में आ चुके हैं। 20 दिसंबर को एग्रीकल्चर थर्ड सेमेस्टर के छात्र योगेश आंजना उम्र 20 वर्ष अपने गांव पिपलियाधूमा झारड़ा से उज्जैन परीक्षा देने आया था। परीक्षा के बाद वह बाइक से घर लौट रहा था जब उसे भी चाइना डोर से गंभीर चोटें आईं। इसके अलावा पहले भी इस प्रकार की घटनाएं उज्जैन में हो चुकी हैं जिनमें लोग चाइना डोर से घायल हो चुके हैं।

    गंभीर चिंता का विषय

    चाइना डोर की इन घटनाओं ने शहरवासियों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। हालाँकि प्रशासन ने इसके उपयोग पर रोक लगाने के लिए कई प्रयास किए हैं लेकिन इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। यह जानलेवा डोर न केवल सड़कों पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बन गई है बल्कि इसका इस्तेमाल करने वाले लोग भी इसके खतरों से अनजान रहते हैं।
    शहरवासियों और प्रशासन से अपील की जा रही है कि चाइना डोर के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाई जाए और इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि और किसी की जान को खतरा न हो।

  • किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला

    किसानों के आगे झुकी सरकार उज्जैन सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना पूरी तरह निरस्त 2028 कुंभ से पहले बड़ा फैसला


    उज्जैन/भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए लाई गई विवादास्पद लैंड पूलिंग योजना’ को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया है। मंगलवार को सरकार द्वारा जारी आदेश के बाद उन हजारों किसानों ने राहत की सांस ली है जो पिछले कई महीनों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

    विरोध की ज्वाला और आंदोलन की चेतावनी

    इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय किसान संघ का कड़ा रुख रहा। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन सरकार को स्थायी निर्माण के लिए नहीं देंगे। 18 नवंबर को हुए ‘डेरा डालो घेरा डालो’ आंदोलन के बाद सरकार ने मौखिक रूप से योजना निरस्त करने की बात कही थी लेकिन बाद में केवल संशोधन का पत्र जारी किया गया। इस वादाखिलाफी से नाराज किसानों ने 26 दिसंबर से पुनः उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी थी जिसके दबाव में अंततः सरकार को पूर्ण निरस्तीकरण का आदेश जारी करना पड़ा।

    अपनों ने भी उठाए थे सवाल

    सरकार के लिए स्थिति तब और असहज हो गई जब सत्तापक्ष के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। उज्जैन उत्तर से भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर साफ कहा था कि यह योजना किसान हित में नहीं है। उन्होंने यहाँ तक चेतावनी दे दी थी कि यदि योजना रद्द नहीं हुई तो वे स्वयं किसानों के साथ आंदोलन में बैठने को मजबूर होंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के इस दबाव ने सरकार को पुनर्विचार के लिए विवश किया।

    क्या थी लैंड पूलिंग योजना और क्यों था विरोध

    अगला सिंहस्थ मेला वर्ष 2028 में आयोजित होना है। इसके लिए सरकार चाहती थी कि सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाली किसानों की निजी भूमि पर स्थायी निर्माण और बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। इसके लिए लैंड पूलिंग नीति लाई गई थी।

    किसानों के विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे

    स्थायी कब्जा बनाम अस्थायी उपयोग दशकों से परंपरा रही है कि सिंहस्थ के लिए किसान केवल 5-6 महीनों के लिए अपनी जमीन सरकार को उपयोग हेतु देते थे और मेला समाप्त होने पर जमीन वापस मिल जाती थी। लैंड पूलिंग के तहत जमीन का स्वरूप स्थायी रूप से बदल जाता। रोजी-रोटी का संकट किसानों को डर था कि स्थायी निर्माण के बाद वे खेती नहीं कर पाएंगे जिससे उनकी आजीविका छिन जाएगी।
    अधिकारों का हनन किसान अपनी जमीन पर मालिकाना हक खोने को तैयार नहीं थे।

    निष्कर्ष पुरानी परंपरा ही रहेगी बरकरार

    अब योजना निरस्त होने के बाद 2028 के सिंहस्थ मेले के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहने की संभावना है। सरकार अब किसानों से आपसी सहमति और किराए के आधार पर ही मेले के समय जमीन का उपयोग कर सकेगी। यह निर्णय न केवल किसानों की बड़ी जीत माना जा रहा है बल्कि इसे आगामी चुनावों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के सरकारी प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।