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  • केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर

    केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर


    नई दिल्ली।
    देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (Domestic LPG Cylinder Prices) में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार (Government) ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojna) के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है।

    इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था।


    9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडर

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत अब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाता है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है.


    2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्या

    मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है.

    उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है।


    उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर का दाम

    बता दें कि 7 जून को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई. इससे पहले 7 मार्च को तेल वितरण कंपनियों ने 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा.

    पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।

  • चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए

    चौपाटियों पर घरेलू गैस का इस्तेमाल उजागर, उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी नजर आए


    मध्य प्रदेश । रीवा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। जहां एक ओर आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर की समय पर उपलब्धता और रिफिल में होने वाली देरी को लेकर परेशान दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की चौपाटियों और खानपान की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग होता नजर आ रहा है। हालिया पड़ताल में सामने आए तथ्यों ने गैस वितरण व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित चौपाटियों और फूड स्टॉल्स का निरीक्षण करने पर पाया गया कि बड़ी संख्या में दुकानदार घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शहर की करीब 90 प्रतिशत चौपाटियों पर घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर भी उपयोग में दिखाई दिए, जबकि इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को घरेलू ईंधन उपलब्ध कराना है।

    सबसे अधिक चौंकाने वाली स्थिति सिरमौर चौराहे के पीछे स्थित एमपी-17 चौपाटी क्षेत्र में देखने को मिली। यहां संचालित अधिकांश दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग में पाए गए। निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई प्रतिष्ठान नहीं मिला जहां नियमानुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा हो। इससे यह सवाल उठने लगा है कि नियमों का उल्लंघन इतने बड़े पैमाने पर होने के बावजूद संबंधित विभागों की नजर इस ओर क्यों नहीं गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम परिवारों की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे सिलेंडरों का व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गैस आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में घरेलू सिलेंडर व्यवसायों में खपाए जाएंगे तो वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।

    शहर के कई उपभोक्ताओं ने समय पर रिफिल नहीं मिलने और बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करने की शिकायतें भी की हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि घरेलू सिलेंडरों के दुरुपयोग की जांच की जानी चाहिए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं देते। उनका आरोप है कि यदि नियमित और निष्पक्ष निरीक्षण किए जाएं तो घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है।

    नियमों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फास्ट फूड सेंटर, चाय की दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कई स्थानों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग जारी है, जिससे सुरक्षा और नियामकीय दोनों प्रकार की चिंताएं बढ़ रही हैं।

    मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसडीएम अनुराग तिवारी ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसी शिकायतें सामने आई हैं तो संबंधित विभागों से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। शहरवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।