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  • अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    अमेरिकी-रूसी डीजल समझौते पर जेलेंस्की का विरोध, ट्रंप की अपील ठुकराकर रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले जारी रखने का ऐलान

    नई दिल्ली ।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए कहा गया था। जेलेंस्की के इस रुख से दोनों देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है, जब अमेरिका ने पिछले सप्ताह रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी। इसके बदले रूस ने वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर सहमति जताई। इस समझौते को लेकर यूक्रेन ने नाराजगी जाहिर की है। जेलेंस्की का मानना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली अतिरिक्त राहत युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत कर सकती है।

    यूक्रेन ने इस समझौते को कमजोर फैसला बताते हुए चिंता जताई है कि रूस को ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई युद्ध जारी रखने में मदद कर सकती है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस को आर्थिक राहत मिलने से यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई लंबी खिंच सकती है। इस समझौते की यूरोप में भी आलोचना हुई है। यूक्रेन का रुख है कि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले उसकी सैन्य क्षमता और युद्ध से जुड़े संसाधनों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

    इस बीच, ट्रंप ने एक साक्षात्कार में जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा कि उनके साथ बातचीत करना आसान नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की समझौता करने की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तव में इसके लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति के बड़े प्रशंसक नहीं हैं और उनके नेतृत्व में यूक्रेन को भारी नुकसान हुआ है।

    ट्रंप ने रूस और यूक्रेन की सैन्य क्षमताओं की तुलना करते हुए कहा कि रूस एक बड़ा देश है और उसके पास बड़ी संख्या में सैनिक उपलब्ध हैं, जबकि यूक्रेन के पास इतनी बड़ी जनशक्ति नहीं है। उन्होंने रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की भी आलोचना की। उनका तर्क है कि डीजल उत्पादन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है और तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर अस्थायी संघर्षविराम की कोशिशें भी प्रभावित हुई हैं। यूक्रेन का कहना है कि रूस की ओर से उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहने के कारण वह एकतरफा तौर पर अपनी कार्रवाई रोककर नहीं रख सकता। कीव के अनुसार, ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की किसी भी व्यवस्था में दोनों पक्षों की ओर से समान प्रतिबद्धता जरूरी है।

    इस घटनाक्रम से अमेरिका और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक मतभेद और गहरे होने की आशंका बढ़ी है। एक ओर ट्रंप प्रशासन ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने पर जोर दे रहा है, वहीं यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करने को तैयार नहीं दिख रहा। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनती है या नहीं, इसका असर युद्ध की आगे की दिशा और रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर पड़ सकता है।

  • जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज

    जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा है कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए। उनका आरोप है कि जेलेंस्की के पास रूस के साथ समझौता करने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने इन मौकों का लाभ नहीं उठाया।

    ट्रंप की नाराजगी खास तौर पर रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर है। उनका मानना है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से ईंधन की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले जारी हैं और रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना भी विवाद का विषय बनी हुई है।

    ‘ऐसा नेता चाहिए, जो रूस से समझौता कर सके’

    ट्रंप पहले भी जेलेंस्की को रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की सलाह दे चुके हैं। उनका तर्क है कि ऐसे हमलों से युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

    ट्रंप का आरोप है कि जेलेंस्की ने रूस के साथ समझौता करने के कई मौके गंवा दिए। अब उन्होंने यूक्रेन में ऐसे नेतृत्व की जरूरत बताई है, जो रूस के साथ बातचीत कर किसी समझौते तक पहुंच सके। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने को लेकर अमेरिका की भूमिका और जेलेंस्की के नेतृत्व पर ट्रंप की नाराजगी फिर चर्चा में आ गई है।

    रूस के हमलों में 20 लोगों की मौत का दावा

    इस बीच यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल बताए गए हैं, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं।

    रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को भी मिसाइल हमले से निशाना बनाया। इस हमले में चार लोगों के घायल होने की खबर है। रूस के हमलों में रिहायशी इलाकों और शहरों के साथ ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रहे हमलों के बीच युद्धविराम और बातचीत की संभावनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं।

    रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना पर विवाद

    ट्रंप ने शुक्रवार को रूस से डीजल खरीदने से जुड़े समझौते का ऐलान किया था। उनके मुताबिक, रूस अमेरिका को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे भी बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की योजना बताई गई।

    इस फैसले को लेकर यूक्रेन ने चिंता जताई है। उसकी आशंका है कि रूस को ऊर्जा उत्पाद बेचकर मिलने वाली कमाई युद्ध जारी रखने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इस वजह से अमेरिकी योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिका पहले रूस पर आर्थिक दबाव बनाने और प्रतिबंधों के जरिए उसकी युद्ध क्षमता सीमित करने की नीति का समर्थन करता रहा है।

    यूरोपीय देशों को भी रूस की ऊर्जा कमाई पर चिंता

    रूस से डीजल खरीदने की योजना को लेकर यूरोप के कुछ देशों ने भी चिंता जताई है। स्वीडन ने कहा है कि ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई रूस के युद्ध खर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, जर्मनी ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखने की बात कही है।

    इस पूरे विवाद में ट्रंप का जोर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने पर है। इसके विपरीत, जेलेंस्की का रुख रहा है कि रूस पर दबाव कम करने से उसके हमले रुकने के बजाय और बढ़ सकते हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों, अमेरिकी डीजल खरीद योजना और युद्ध समाप्त करने के तरीके को लेकर दोनों पक्षों के बीच यही मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

  • रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में मची तबाही…. 33 लोगों की मौत

    रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में मची तबाही…. 33 लोगों की मौत


    कीव।
    रूस- यूक्रन (Russia-Ukraine War) के बीच जंग जारी है। दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। इस बीच पूर्वी यूक्रेन (Ukraine) में रूस (Russia) की ओर से किए गए हवाई हमलों में 33 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इस घटना 18 अन्य घायल हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelenskyy) ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। गुरुवार सुबह क्रामाटोर्स्क शहर में एक सामान्य सार्वजनिक बस स्टॉप को निशाना बनाया गया, जिसमें 12 लोगों की जान चली गयी। बता दें कि रूस ने सर्दियों की शुरुआत से पहले यूक्रेन पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे राजधानी कीव में बिजली संकट गहरा गया है।

    क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख वादिम फिलाश्किन ने कहा कि दोनेत्स्क क्षेत्र के क्रामातोर्स्क और स्लोवियांस्क में सुरक्षा की स्थिति में तेजी से आई गिरावट के कारण सार्वजनिक परिवहन रोक दिया गया है। फिलाश्किन ने रूस पर नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में हमें यात्रियों और चालकों की जान जोखिम में डालने का कोई अधिकार नहीं है। क्रामातोर्स्क और स्लोवियांस्क के निवासियों की सुरक्षा सबसे अहम है।

    बता दें कि रूस ने इससे एक दिन पहले पूर्वी यूक्रेन के प्राइलुकी में मिसाइल हमले किए थे, जिनमें पांच बच्चों समेत 22 लोगों की मौत हो गई थी और 54 अन्य घायल हो गए थे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि जैसे-जैसे सर्दी नजदीक आ रही है, रूस की ओर से रोजाना किए जाने वाले मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ सकते हैं। उन्होंने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के सदस्य देशों से अतिरिक्त रक्षा सहायता की अपील की।

    यूक्रेनी नेतृत्व ने रूसी अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने वाले अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। यह भी कहा गया कि केवल शाब्दिक समर्थन काफी नहीं है और इसे तत्काल नये सैन्य रक्षा पैकेजों के रूप में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। एंटी-बैलिस्टिक क्षमताओं की आपूर्ति, लड़ाकू विमानों के लिए गोला-बारूद और इंटरसेप्टर तकनीक में निवेश प्रतिदिन निर्दोष नागरिकों की जान बचाने में सीधे तौर पर मददगार साबित हो रहा है।

  • ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने कार्गो शिप पर किया हमला, कैप्टन की मौत; एक भारतीय घायल, 11 क्रू सदस्य बचाए गए

    ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने कार्गो शिप पर किया हमला, कैप्टन की मौत; एक भारतीय घायल, 11 क्रू सदस्य बचाए गए


    नई दिल्ली: ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने एक कार्गो शिप को निशाना बनाया, जिसमें शिप के कैप्टन की मौत हो गई और कई क्रू सदस्य घायल हो गए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। हमले के बाद कार्गो शिप एमवी रोयाद ममादोव में भीषण आग लग गई और बाद में यह डूब गया। शिप पर कुल तीन भारतीय नागरिक मौजूद थे। भारतीय दूतावास के मुताबिक तीनों भारतीय सुरक्षित हैं। इनमें से एक घायल हुआ है और उसका रोमानिया के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। रोमानिया के गृह मंत्रालय ने बताया कि जहाज के 11 क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है।

    यह हमला रोमानिया की समुद्री सीमा के बाहर हुआ। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि दो रूसी ड्रोन ने तुर्की के एक नागरिक जहाज को निशाना बनाया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और क्रू सदस्यों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। रोमानिया की नौसेना प्राधिकरण ने जहाज की पहचान एमवी रोयाद ममादोव के रूप में की है। घटना के बाद जहाज पर मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई की गई।

    जहाज पर तीन भारतीय नागरिकों के मौजूद होने की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय दूतावास ने उनकी स्थिति पर नजर रखी। दूतावास ने तीनों भारतीय नागरिकों से बात की और उनकी सुरक्षा की पुष्टि की। इनमें एक भारतीय क्रू सदस्य घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए रोमानिया के अस्पताल ले जाया गया। दूतावास ने अस्पताल के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने और घायल भारतीय नागरिक को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। अन्य दोनों भारतीय नागरिकों की स्थिति सुरक्षित बताई गई है।

    जानकारी के मुताबिक, एमवी रोयाद ममादोव मक्का यानी कॉर्न लेकर इटली के रेवेना जा रहा था। जहाज सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे के साथ चल रहा था और आखिरी बार यूक्रेन के इजमेल बंदरगाह पर रुका था। हमले के दौरान जहाज ब्लैक सी में था। घटना के बाद जहाज में लगी आग और उसके डूबने से क्रू सदस्यों को बचाने की चुनौती बढ़ गई। रोमानिया के अधिकारियों ने अभियान चलाकर 11 क्रू सदस्यों को बचाया।

    यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक और चिंता के रूप में सामने आई है। जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहा। फिलहाल तीनों भारतीय नागरिकों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है, जबकि घायल क्रू सदस्य का रोमानिया के अस्पताल में इलाज जारी है।

  • यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    कीव। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बुधवार को यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि रातभर चले हमलों में राजधानी कीव और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। हमलों में ऊर्जा ढांचे के साथ एक अहम इंटरनेट केंद्र को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक कीव और उसके उत्तरी बाहरी इलाके में दो महिलाओं और 14 वर्षीय बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है।

    कीव के मेयर विटाली क्लिचको ने बताया कि शहर के एक गोदाम पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं, कीव क्षेत्र के विशहोरोद में एक निजी मकान के मलबे से 14 वर्षीय बच्चे का शव बरामद किया गया। इसी मकान से तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको के अनुसार, राजधानी और आसपास के इलाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    अगस्त के अंत से बढ़े हवाई हमले

    यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के अंत से रूस ने हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाई है। यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब यूक्रेन सर्दियों की तैयारी कर रहा है। रूस की ओर से लगातार ऊर्जा संयंत्रों, बिजली सबस्टेशनों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।

    यूक्रेन की बिजली कंपनी डीटीईके ने नुकसान का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन बताया कि उसके कर्मचारियों ने हमलों के बाद करीब 8,000 घरों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी।

    188 ड्रोन और कई मिसाइलें दागने का दावा

    यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर के हमलों में एंटी-शिप और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ 188 ड्रोन दागे। यूक्रेन का दावा है कि इनमें से पांच मिसाइलों और 155 ड्रोन को रोक दिया गया। बाकी हथियारों में से कुछ अपने निशाने तक पहुंचे।

    रूस ने भी हमलों की पुष्टि की है। उसके रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी सेना ने कीव में सैन्य गतिविधियों से जुड़े एक डेटा सेंटर, कीव क्षेत्र के बिजली संयंत्र, ओडेसा क्षेत्र के एक औद्योगिक परिसर और इजमाइल बंदरगाह की सुविधाओं को निशाना बनाया।

    हालांकि, यूक्रेन ने रूस के इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि कीव के कम से कम चार जिलों में नागरिक इलाके भी हमलों की चपेट में आए।

    जेलेंस्की बोले- ऊर्जा व्यवस्था पर है मुख्य निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस के हमलों का मुख्य निशाना कीव और उसके आसपास की ऊर्जा व्यवस्था है। उन्होंने इसे मुश्किल हमला बताते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों से यूक्रेन की वायु रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

    जेलेंस्की ने उन देशों का भी आभार जताया, जिन्होंने हाल में यूक्रेन को हवाई रक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराई है।

    युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच जारी हैं हमले

    रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए साढ़े चार साल से अधिक समय हो चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस अमेरिकी प्रयासों के तहत युद्ध समाप्त करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।

    वहीं, रूस का कहना है कि वह सीमित अवधि के युद्धविराम के बजाय व्यापक और स्थायी समझौता चाहता है। रूस की ओर से यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर उसके दावे और क्षेत्रीय रियायतों की मांग विवाद का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है, जबकि कीव अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के बीच शांति वार्ता में प्रगति नहीं हो सकी है और इसी दौरान हवाई हमले लगातार जारी हैं।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें

    रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें


    नई दिल्ली।
    रूस (Russia) ने यूक्रेन (Ukraine) के कई शहरों पर एक साथ कई तरह की मिसाइलों और ड्रोनों से हमला (Missiles and Drones Attack) किया. इस हमले में ओनिक्स-एम, जिरकॉन और इस्कंदर-एम जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल बताया गया है. साथ ही सैकड़ों ड्रोन भी दागे गए. हमला 10 क्षेत्रों में हुआ जिसमें कीव, द्निप्रो और क्रिवी रीह शामिल हैं।

    यूक्रेनी बलों ने ज्यादातर खतरों को रोक लिया लेकिन कुछ हमले लक्ष्य तक पहुंच गए. इससे आग लगी, कारखाने क्षतिग्रस्त हुए और चेर्निहिव में 1 लाख लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. द्निप्रो में तीन या चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

    रूस ने इस हमले को मास्को के पास यूक्रेनी हमलों का जवाब बताया. दोनों पक्ष ऊर्जा और औद्योगिक ठिकानों पर हमले बढ़ा रहे हैं. यह घटना लंबे संघर्ष के बीच तनाव को और बढ़ाने वाली साबित हुई है. हमले में विभिन्न प्रकार की मिसाइलों का मिश्रण इस्तेमाल हुआ. ओनिक्स-एम सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है लेकिन जमीन के ठिकानों पर भी लगाई जा सकती है.

    जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल है जो तेज गति से लक्ष्य पर हमला करती है. इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइल है जो सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इनके अलावा कुछ क्रूज मिसाइलें भी दागी गईं. ड्रोन की संख्या सैकड़ों में बताई गई है जो विभिन्न दिशाओं से आए।

    यूक्रेनी वायु रक्षा ने इनमें से अधिकांश को मार गिराया. कुल 186 खतरों को रोकने का दावा किया गया. बावजूद इसके कुछ मिसाइल और ड्रोन लक्ष्य तक पहुंच गए. कीव और अन्य शहरों में विस्फोट की आवाजें सुनाई दीं. औद्योगिक क्षेत्रों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।


    नुकसान और नागरिक प्रभाव

    द्निप्रो में सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें आईं. वहां मौतें हुईं और कई लोग घायल हुए. चेर्निहिव में बिजली कटौती से एक लाख लोग प्रभावित हुए. आग बुझाने और मलबा हटाने का काम जारी रहा. कारखानों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. नागरिक इलाकों में भी हमले की खबरों ने लोगों में भय पैदा किया।

    यूक्रेनी अधिकारियों ने नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा की. रूस ने सैन्य और ऊर्जा लक्ष्यों को निशाना बनाने का दावा किया. दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं लेकिन जमीनी हकीकत में नुकसान साफ दिख रहा है. यह हमला यूक्रेन द्वारा मास्को के आसपास किए गए हमलों के जवाब में बताया जा रहा है।

    दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे को निशाना बना रहे हैं. ड्रोन और मिसाइल हमलों की संख्या बढ़ने से वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है. सर्दियों के करीब आने के साथ ऊर्जा सुविधाओं पर हमले नागरिकों के लिए और मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की निंदा हुई है. संघर्ष के लंबे होते जाने से दोनों पक्ष नई रणनीति अपना रहे हैं. हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है. बचाव और पुनर्निर्माण का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    यूक्रेन अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. रूस लगातार हमलों से दबाव बनाए रखना चाहता है. आम नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बहाली सबसे बड़ी जरूरत है. यह हमला दिखाता है कि संघर्ष अभी भी तीव्र चरण में है और शांति की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं. दोनों पक्षों को संयम बरतने और राजनयिक समाधान तलाशने की सलाह दी जा रही है लेकिन मैदान में तनाव जारी है।

  • रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    नई दिल्ली । रूस में 2026 के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में पार्टी ने 355 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस परिणाम के साथ यूनाइटेड रशिया ने संसद में अपना मजबूत बहुमत बरकरार रखा है।

    यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद पहला संसदीय चुनाव था। ऐसे समय में हुए इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रही। चुनाव के दौरान यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। यूनाइटेड रशिया ने पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अधिक सीटें हासिल की हैं।

    रूस की 450 सदस्यीय संसद में 225 सीटों के लिए पार्टी-लिस्ट प्रणाली के तहत मतदान होता है, जबकि बाकी 225 सीटों पर सीधे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है। उपलब्ध नतीजों के अनुसार यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार सिंगल-मेंबर सीटों में से 208 पर आगे रहे। पार्टी को पार्टी-लिस्ट मतदान में भी 58 प्रतिशत के आसपास वोट मिले हैं।

    2021 में हुए पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार 355 सीटों का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले काफी अधिक है। इससे संसद में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।

    चुनाव में मतदान प्रतिशत भी चर्चा में रहा। रूस में कुल मतदान करीब 57 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। मॉस्को में भी मतदान को लेकर लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। चुनाव के दौरान कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।

    इस बार युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी-लिस्ट चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। हालांकि उसके कुछ नेताओं को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। इसके अलावा कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों के चुनाव में हिस्सा लेने पर भी रोक रही।

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। हालांकि वह वर्ष 2008 से 2012 तक पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। उस समय भी पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए औपचारिक सदस्यता जरूरी नहीं थी। वर्ष 2012 में पुतिन ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव ने पार्टी की कमान संभाली।

    चुनाव के अंतिम चरण में रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर भी दिखाई दिया। मतदान के आखिरी दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई। मॉस्को को निशाना बनाकर सैकड़ों ड्रोन भेजे जाने का दावा किया गया, जबकि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन की कुल संख्या 1,600 से अधिक बताई गई।

    युद्ध के बीच हुए इस संसदीय चुनाव के नतीजों में यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की जीत ने रूस की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पार्टी की मजबूत स्थिति को फिर सामने ला दिया है।

  • रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को समेत कई इलाकों में नुकसान; चुनाव के आखिरी दिन बढ़ा तनाव

    रूस पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन हमला, मॉस्को समेत कई इलाकों में नुकसान; चुनाव के आखिरी दिन बढ़ा तनाव

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान रविवार को रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, रातभर में यूक्रेन की ओर से एक हजार से अधिक ड्रोन भेजे गए। इनमें बड़ी संख्या में ड्रोन मॉस्को और उसके आसपास के इलाकों की ओर बढ़े। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने इसे राजधानी पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया।

    रूसी अधिकारियों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में ड्रोन को हवा में ही नष्ट किया गया। रक्षा मंत्रालय ने 1,100 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को रोकने की जानकारी दी, जबकि मॉस्को के मेयर के अनुसार राजधानी की ओर बढ़ रहे करीब 450 ड्रोन को नष्ट किया गया। बाद में सामने आई जानकारी में रूस के अलग-अलग मोर्चों पर 1,600 से अधिक ड्रोन गिराए जाने का दावा भी किया गया।

    हमले के दौरान मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा। रिहायशी इमारत से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मॉस्को क्षेत्र के अधिकारियों के मुताबिक, एक 21 मंजिला इमारत से करीब 400 लोगों को निकाला गया, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।

    मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव के अनुसार, हमले में दो लोगों की मौत हुई। मृतकों में 44 वर्षीय महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। क्षेत्र में 20 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंचाया गया।

    हमले का असर ऐसे समय में सामने आया जब रूस में तीन दिन से चल रहा संसदीय चुनाव अपने अंतिम दिन में था। मतदान 18 सितंबर से शुरू हुआ था और 20 सितंबर को अंतिम चरण में पहुंचा। मॉस्को के मेयर ने आरोप लगाया कि ड्रोन हमले का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालना था। हालांकि, मतदान जारी रहा और अधिकारियों ने कहा कि हमला चुनाव को रोकने में सफल नहीं हुआ।

    रूस ने यूक्रेन के कब्जे वाले कुछ इलाकों और क्रीमिया में भी संसदीय चुनाव के लिए मतदान कराया है। यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में रूस की ओर से कराए जा रहे मतदान को अवैध बताया है। ऐसे में चुनाव के अंतिम दिन हुआ यह बड़ा ड्रोन हमला पहले से तनावपूर्ण राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों के बीच हुआ।

    यूक्रेन की ओर से इस हमले को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है और ऊर्जा ढांचे तथा अन्य महत्वपूर्ण ठिकाने हमलों का लक्ष्य बनते रहे हैं।

    मॉस्को की तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमले युद्ध के दौरान बार-बार सामने आए हैं। अधिकारियों ने रिफाइनरी परिसर में ड्रोन पहुंचने और नुकसान की पुष्टि की है। आपातकालीन दलों को प्रभावित स्थानों पर भेजकर स्थिति संभालने का काम किया गया।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव बना हुआ है। मॉस्को और आसपास के क्षेत्र में हुए नुकसान तथा जानमाल की हानि ने युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों के बढ़ते प्रभाव को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • रूसी तेल खरीद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख, बोले युद्ध ऊर्जा कारोबार से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से खत्म होगा

    रूसी तेल खरीद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख, बोले युद्ध ऊर्जा कारोबार से नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति से खत्म होगा

    नई दिल्ली ।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत का रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए कहा है कि यूक्रेन युद्ध का समाधान किसी देश के तेल खरीदने या नहीं खरीदने से नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि करीब पांचवें वर्ष में पहुंच चुका यह संघर्ष संवाद, कूटनीति और गंभीर बातचीत के जरिए ही समाप्त हो सकता है।

    कीव में गुरुवार को जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। करीब 1.4 अरब आबादी वाले देश के लिए पर्याप्त और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का अपना दृष्टिकोण है और भारत उसका सम्मान करता है, लेकिन युद्ध खत्म करने का रास्ता केवल तेल खरीदने या रोकने से नहीं निकल सकता।

    अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के सवाल पर भी विदेश मंत्री ने भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए उन उपायों पर ध्यान देना जरूरी है, जो सीधे शांति और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हों।

    जयशंकर ने कहा कि रूस से तेल, खनिज, धातु, एल्यूमिना या उर्वरक खरीदना अथवा नहीं खरीदना युद्ध का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक वास्तविक समाधान बातचीत के जरिए ही संभव है और भारत दोनों पक्षों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने की अपनी नीति पर कायम है।

    रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। भारत ने लगातार कहा है कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए ऊर्जा की उपलब्धता और उचित कीमत सुनिश्चित करना है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव के बीच रूसी तेल भारत के लिए एक व्यावहारिक ऊर्जा विकल्प भी बना है।

    जयशंकर इन दिनों तीन दिवसीय यूक्रेन और पोलैंड यात्रा पर हैं। कीव में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

    उन्होंने भारत की उस नीति को भी दोहराया कि यह युद्ध का युग नहीं है और किसी संघर्ष का स्थायी समाधान युद्ध के मैदान में नहीं खोजा जा सकता। भारत दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए है। जयशंकर ने हाल में मॉस्को में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद अब कीव में भी सीधे संवाद किया है।

    विदेश मंत्री ने हाल में कीव पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए वहां हुई भारतीय नागरिक की मौत पर भी शोक जताया। उन्होंने कहा कि संघर्ष में जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों के प्रति भारत की संवेदनाएं हैं। इस घटना ने यूक्रेन में मौजूद भारतीय नागरिकों और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

    जयशंकर ने यूक्रेनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय नाविक विभिन्न देशों के जहाजों पर काम करते हैं और ऐसे हमलों से उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है।

    भारत ने काला सागर में नागरिक और व्यावसायिक जहाजों पर किसी भी पक्ष की ओर से किए जाने वाले हमलों को अस्वीकार्य बताया है। समुद्री मार्ग बाधित होने से ईंधन, उर्वरक और खाद्य सामग्री की आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। भारत का जोर इसलिए युद्धविराम, संवाद और कूटनीतिक समाधान के साथ नागरिकों तथा वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर भी बना हुआ है।

  • यूक्रेन में मिसाइलों के साए में पढ़ाई, जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकरों में तैयार हो रही नई पीढ़ी

    यूक्रेन में मिसाइलों के साए में पढ़ाई, जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकरों में तैयार हो रही नई पीढ़ी


    नई दिल्ली। चार साल से ज्यादा समय से रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन में बच्चों की पढ़ाई का तरीका भी युद्ध के बीच बदल गया है। देश में अब 74 पूरी तरह भूमिगत स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां जमीन के ऊपर से सिर्फ खेल का मैदान या फुटबॉल टर्फ दिखाई देता है, लेकिन कई मीटर नीचे कंक्रीट की मजबूत दीवारों के बीच बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं। सुरंगनुमा गलियारों में बने क्लासरूम, बेंचों पर बैठे बच्चे और ब्लैकबोर्ड पर लिखे नए पाठ इस बात की तस्वीर पेश करते हैं कि युद्ध के बीच भी शिक्षा को जारी रखने की कोशिश कैसे हो रही है।

    दक्षिणी यूक्रेन के औद्योगिक शहर जापोरिजिया में स्कूल खुलने का दृश्य किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा नजर आता है। शहर युद्ध के मोर्चे से महज 15 किलोमीटर दूर है और लगातार ड्रोन व मिसाइल हमलों के बावजूद यहां बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। माता-पिता के लिए ये भूमिगत स्कूल डर के बीच सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा दोनों का भरोसा बन गए हैं।

    ‘पाताल में गए बिना बच्चों को पढ़ाना मुश्किल’

    39 वर्षीय किराना दुकानदार ऑलेक्सांद्र लागिन के दो बेटे भी जमीन के नीचे बने स्कूल में पढ़ते हैं। उनका कहना है कि ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौर में बच्चों को सुरक्षित रखते हुए सामान्य तरीके से पढ़ाना बेहद मुश्किल हो गया है। जापोरिजिया ने इस चुनौती से निपटने के लिए भूमिगत स्कूलों का विकल्प अपनाया है।

    दिलचस्प यह है कि युद्ध क्षेत्र के इतने करीब होने के बावजूद जापोरिजिया बच्चों को निर्बाध शिक्षा देने के मामले में राजधानी कीव से बेहतर तैयार नजर आता है।

    कीव में सायरन बजते ही पढ़ाई बंद

    कीव के स्कूलों में हवाई हमले का अलर्ट शिक्षा व्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है। यहां एक स्कूल के दिन में औसतन 158 मिनट तक हवाई सायरन बजते रहते हैं। सायरन शुरू होते ही बच्चों को सामान्य बेसमेंट में ले जाया जाता है। वहां जगह सीमित होने के कारण पढ़ाई रुक जाती है और बच्चे अलर्ट खत्म होने का इंतजार करते हैं।

    इसके उलट जापोरिजिया में यूरोपीय फंडिंग की मदद से 10 अत्याधुनिक भूमिगत स्कूल बनाए गए हैं। इन स्कूलों की खास डिजाइन के कारण हवाई हमले के सायरन के दौरान भी कक्षाएं जारी रखी जा सकती हैं।

    बंकर में सुरक्षा के साथ पढ़ाई की पूरी व्यवस्था

    भूमिगत स्कूलों को सिर्फ कंक्रीट की मोटी दीवारों से सुरक्षित नहीं बनाया गया है, बल्कि यहां सामान्य स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ सुरक्षा की आधुनिक तकनीक भी इस्तेमाल की गई है।

    इन स्कूलों में ऐसे अत्याधुनिक एयर डक्ट लगाए गए हैं, जो रेडिएशन और जहरीले धुएं को फिल्टर करने में सक्षम हैं। रूसी हमलों के दौरान बिजली का ग्रिड ठप होने की स्थिति में हेवी-ड्यूटी डीजल जनरेटर अपने आप चालू हो जाते हैं। बच्चों के लिए वेंटिलेशन पाइपों की व्यवस्था कंक्रीट की दीवारों के सहारे की गई है, जबकि इन्हीं सुरक्षित गलियारों और जगहों के बीच वे खेलते भी हैं।

    छात्र बोले- सायरन से डर नहीं, खेल छूटने का अफसोस

    8वीं कक्षा के छात्र डामिर का कहना है कि उसे भूमिगत स्कूल में पढ़ना अच्छा लगता है और यहां उसे डर नहीं लगता। हालांकि, फुटबॉल खेलते समय अगर सायरन बज जाए तो उसे खेल बीच में छोड़कर नीचे जाना पड़ता है और यही बात उसे खराब लगती है।

    युद्ध के माहौल में पले-बढ़ रहे बच्चों के लिए अब सायरन, बंकर और हमले रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

    सैनिक पिता: अब मोर्चे पर कम चिंता होती है

    8वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय डैनिलो के पिता दिमित्रो सिजीख युद्ध के मोर्चे पर तैनात हैं। बेटे के सुरक्षित भूमिगत स्कूल में पढ़ने से उन्हें भी राहत मिली है। उनका कहना है कि बेटे की सुरक्षा को लेकर भरोसा होने के कारण वे मोर्चे पर अपने कर्तव्य का निर्वहन अधिक निश्चिंत होकर कर पा रहे हैं।

    युद्ध का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी

    सुरक्षित स्कूलों के बावजूद युद्ध का मानसिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। कीव की रिसर्च संस्था ‘सीडोस’ की शिक्षा विश्लेषक टेटियाना झेरियोबकिना के मुताबिक युद्ध से पैदा हुआ मानसिक तनाव और लगातार बना डर परीक्षाओं में बच्चों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है। तनाव और भय के कारण उनके टेस्ट स्कोर में गिरावट देखने को मिल रही है।

    जापोरिजिया के एक स्कूल की प्रिंसिपल हलीना वोल्कोवा गलियारे से गुजरते एक बच्चे को गले लगाते हुए कहती हैं कि वे मौजूदा हालात को भयावह या कयामत का मंजर कहकर नहीं देखते, क्योंकि यही अब उनकी जिंदगी की वास्तविकता बन चुकी है।

    युद्ध ने यूक्रेन के बच्चों से सामान्य बचपन छीन लिया है, लेकिन इन भूमिगत स्कूलों में किताबें, ब्लैकबोर्ड और खेल के बीच उनकी पढ़ाई जारी है। जमीन के ऊपर युद्ध चल रहा है और जमीन के नीचे एक पूरी पीढ़ी अपने भविष्य की तैयारी कर रही है।