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  • यूक्रेन की बढ़ती स्ट्राइक क्षमता से रूस पर नया दबाव, मिसाइल हमलों का दायरा बढ़ा; क्या युद्ध निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है?

    यूक्रेन की बढ़ती स्ट्राइक क्षमता से रूस पर नया दबाव, मिसाइल हमलों का दायरा बढ़ा; क्या युद्ध निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है?

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच चार वर्षों से जारी युद्ध अब ऐसे चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां संघर्ष का प्रभाव केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। हालिया विश्लेषणों के अनुसार यूक्रेन ने अपनी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसके चलते रूस के बड़े हिस्से में मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है। इससे युद्ध का रणनीतिक स्वरूप बदलता नजर आ रहा है और रूस के भीतर भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां गहराने लगी हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन अब अपनी स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों और आधुनिक ड्रोन प्रणाली का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहा है। इन हथियारों की मदद से वह रूस के भीतर स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों, रक्षा उत्पादन इकाइयों और रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर चुका है। हाल के महीनों में रूस के कई ऐसे क्षेत्रों में भी मिसाइल अलर्ट जारी किए गए हैं, जो पहले इस प्रकार के खतरे से अपेक्षाकृत दूर माने जाते थे।

    बताया गया है कि पिछले कुछ समय में रूस के मध्य, दक्षिणी और वोल्गा क्षेत्र के अनेक हिस्सों में संभावित मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी करनी पड़ी। इससे यह संकेत मिलता है कि यूक्रेन अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस के अंदर काफी दूर स्थित लक्ष्यों तक भी अपनी पहुंच बना चुका है। इससे रूस की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन की इस रणनीति का प्रमुख उद्देश्य रूस की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के साथ-साथ उस पर राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाना भी है। लंबे समय से जारी युद्ध के बीच कीव चाहता है कि रूस पर इतना दबाव बने कि वह भविष्य में वार्ता के विकल्प पर गंभीरता से विचार करने को मजबूर हो। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों का रूस के राजनीतिक नेतृत्व के निर्णयों पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

    रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रूस की बड़ी आबादी अब ऐसे क्षेत्रों में रह रही है जहां कम से कम एक बार मिसाइल हमले का अलर्ट जारी किया जा चुका है। इससे युद्ध का असर आम नागरिकों तक भी महसूस होने लगा है। लगातार बढ़ते सुरक्षा अलर्ट और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमलों के कारण रूस को अपनी वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य संसाधनों का व्यापक स्तर पर पुनर्विन्यास करना पड़ रहा है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पहले भी दावा कर चुके हैं कि देश ने ऐसी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल विकसित की है, जो 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है। हाल के महीनों में रूस के भीतर रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठिकानों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिन्हें यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

    हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन की बढ़ी हुई मारक क्षमता निश्चित रूप से रूस पर दबाव बढ़ा रही है, लेकिन केवल इन हमलों के आधार पर युद्ध की दिशा बदलने या रूस को तत्काल शांति वार्ता के लिए बाध्य मान लेना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच संघर्ष अभी भी कई सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक कारकों से प्रभावित है। ऐसे में आने वाले समय में युद्ध की दिशा और संभावित वार्ता की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

    संक्षिप्त सार:
    यूक्रेन की लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल और ड्रोन क्षमता में वृद्धि से रूस के अंदर हमलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। विश्लेषणों के अनुसार अब रूस के बड़े हिस्से में मिसाइल अलर्ट जारी किए जा रहे हैं, जिससे युद्ध का रणनीतिक संतुलन बदलता दिखाई दे रहा है।

    English Keywords:
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    नई दिल्ली । विश्व

    रूस और यूक्रेन के बीच चार वर्षों से जारी युद्ध अब ऐसे चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां संघर्ष का प्रभाव केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। हालिया विश्लेषणों के अनुसार यूक्रेन ने अपनी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिसके चलते रूस के बड़े हिस्से में मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है। इससे युद्ध का रणनीतिक स्वरूप बदलता नजर आ रहा है और रूस के भीतर भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां गहराने लगी हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन अब अपनी स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों और आधुनिक ड्रोन प्रणाली का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहा है। इन हथियारों की मदद से वह रूस के भीतर स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों, रक्षा उत्पादन इकाइयों और रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाने की क्षमता हासिल कर चुका है। हाल के महीनों में रूस के कई ऐसे क्षेत्रों में भी मिसाइल अलर्ट जारी किए गए हैं, जो पहले इस प्रकार के खतरे से अपेक्षाकृत दूर माने जाते थे।

    बताया गया है कि पिछले कुछ समय में रूस के मध्य, दक्षिणी और वोल्गा क्षेत्र के अनेक हिस्सों में संभावित मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी करनी पड़ी। इससे यह संकेत मिलता है कि यूक्रेन अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस के अंदर काफी दूर स्थित लक्ष्यों तक भी अपनी पहुंच बना चुका है। इससे रूस की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन की इस रणनीति का प्रमुख उद्देश्य रूस की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के साथ-साथ उस पर राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ाना भी है। लंबे समय से जारी युद्ध के बीच कीव चाहता है कि रूस पर इतना दबाव बने कि वह भविष्य में वार्ता के विकल्प पर गंभीरता से विचार करने को मजबूर हो। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों का रूस के राजनीतिक नेतृत्व के निर्णयों पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

    रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रूस की बड़ी आबादी अब ऐसे क्षेत्रों में रह रही है जहां कम से कम एक बार मिसाइल हमले का अलर्ट जारी किया जा चुका है। इससे युद्ध का असर आम नागरिकों तक भी महसूस होने लगा है। लगातार बढ़ते सुरक्षा अलर्ट और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमलों के कारण रूस को अपनी वायु रक्षा प्रणाली और सैन्य संसाधनों का व्यापक स्तर पर पुनर्विन्यास करना पड़ रहा है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पहले भी दावा कर चुके हैं कि देश ने ऐसी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल विकसित की है, जो 1,500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है। हाल के महीनों में रूस के भीतर रक्षा उद्योग से जुड़े कई ठिकानों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिन्हें यूक्रेन अपनी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।

    हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन की बढ़ी हुई मारक क्षमता निश्चित रूप से रूस पर दबाव बढ़ा रही है, लेकिन केवल इन हमलों के आधार पर युद्ध की दिशा बदलने या रूस को तत्काल शांति वार्ता के लिए बाध्य मान लेना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच संघर्ष अभी भी कई सैन्य, राजनीतिक और कूटनीतिक कारकों से प्रभावित है। ऐसे में आने वाले समय में युद्ध की दिशा और संभावित वार्ता की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी

    यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी


    कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए हैं। यूक्रेन ने रूस की दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है, जिसके बाद वहां आग लगने और नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया है कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति बन रही है।

    रिफाइनरी पर हमला, आग और नुकसान

    रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को यूक्रेन ने रूस के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र के स्लाव्यांस्क-ना-कुबानी स्थित इस रिफाइनरी में हमले के बाद एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

    यह रिफाइनरी हर साल लगभग 40 लाख टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है और काला सागर के बंदरगाहों के जरिए पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करती है।

    यूक्रेन का दावा- दो रिफाइनरियां निशाने पर

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया कि उनके देश के ड्रोन हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि हर सफल हमला रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर कर रहा है और शांति की दिशा में एक कदम है। हालांकि रूसी अधिकारियों ने यारोस्लाव क्षेत्र की दूसरी रिफाइनरी पर हमले की पुष्टि नहीं की है।

    रूस में ईंधन संकट के संकेत

    यूक्रेन द्वारा लगातार ऊर्जा ठिकानों पर किए जा रहे हमलों का असर अब रूस के भीतर दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की कमी की स्थिति बन गई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कुछ इलाकों में ईंधन की बिक्री पर सीमा तय कर दी गई है।

    साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में एक सरकारी तेल कंपनी के पंप पर एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर ईंधन देने का नियम लागू किया गया है। वहीं रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ईंधन निर्यात समझौतों की समीक्षा की जा रही है।

    पुतिन का बयान और सैन्य स्थिति

    राष्ट्रपति पुतिन ने स्वीकार किया कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार तेल संयंत्रों की सुरक्षा बढ़ाएगी, उत्पादन तेज करेगी और जरूरत पड़ने पर आयात पर भी विचार किया जाएगा।

    हालांकि पुतिन ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन के हमलों का मोर्चे पर चल रही लड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन का उद्देश्य रूस के भीतर अस्थिरता पैदा करना है।

    दोनों ओर से हमले जारी

    युद्ध के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले जारी रखे हैं। रूस ने यूक्रेन के जापोरिज्जिया शहर पर बमबारी की, जिसमें दो लोगों की मौत और 16 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

    रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक रात में 213 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। वहीं यूक्रेन की वायुसेना का कहना है कि रूस ने 142 ड्रोन और 8 मिसाइलें दागीं, जिनमें से अधिकांश को नष्ट कर दिया गया।

  • युद्ध खत्म करने की नई पहल, जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र, सीधी बातचीत का दिया प्रस्ताव

    युद्ध खत्म करने की नई पहल, जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र, सीधी बातचीत का दिया प्रस्ताव

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी लंबे युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल सामने आई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने मुलाकात और सीधी वार्ता का प्रस्ताव दिया है। इस पहल को युद्ध समाप्ति की दिशा में एक नए प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

    अपने विस्तृत पत्र में जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई या मध्यस्थों के जरिए नहीं निकल सकता। उनका मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच सीधा संवाद ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा हालात में नेतृत्व स्तर पर बातचीत की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात किसी तटस्थ देश में आयोजित की जा सकती है। उनका तर्क है कि निष्पक्ष वातावरण में होने वाली बातचीत से विश्वास बहाली की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है और लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को तोड़ने का अवसर मिल सकता है।

    पत्र में जेलेंस्की ने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण यूक्रेन युद्ध वैश्विक प्राथमिकताओं की सूची में पीछे जा सकता है। ऐसे में उन्होंने दोनों पक्षों से समय रहते शांति की दिशा में ठोस पहल करने की अपील की है। उनका कहना है कि संघर्ष जितना लंबा चलेगा, मानवीय और आर्थिक नुकसान उतना ही बढ़ता जाएगा।

    जेलेंस्की ने अपने पत्र में रूस पर दबाव बनाए रखने की रणनीति का भी संकेत दिया। उन्होंने हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध का कोई भी पक्ष इस भ्रम में नहीं रह सकता कि केवल सैन्य ताकत के आधार पर स्थायी समाधान हासिल किया जा सकता है। उनके अनुसार संवाद और समझौता ही अंततः संघर्ष का रास्ता रोक सकते हैं।

    दूसरी ओर रूस ने इस पहल पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। मॉस्को ने संकेत दिया है कि बातचीत के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं, लेकिन किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने रुख में लचीलापन दिखाना होगा। रूस अब भी उन प्रमुख शर्तों पर कायम है जिन्हें वह अपनी सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़ा मानता है।

    युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद क्षेत्रीय नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बना हुआ है। रूस जिन क्षेत्रों को अपने प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा मानता है, उन्हें लेकर यूक्रेन कोई समझौता करने को तैयार नहीं दिखता। वहीं यूक्रेन का कहना है कि क्षेत्रीय रियायतें भविष्य में उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संभावित मुलाकात को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई देशों और वैश्विक नेताओं का मानना है कि यदि दोनों राष्ट्रपति आमने-सामने बैठकर बातचीत करते हैं तो इससे शांति प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है। हालांकि पिछले वर्षों में कई दौर की वार्ताएं बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हुई हैं, इसलिए इस पहल की सफलता को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।

    फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक प्रयास वास्तव में दोनों नेताओं को एक ही मेज पर ला पाएगा। यदि ऐसा होता है तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है और लंबे समय से जारी संघर्ष के समाधान की दिशा में नई उम्मीद जगा सकता है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल समेत बड़े हमले में 4 की मौत, कीव में भारी तबाही; जेलेंस्की बोले- रूस पागल हो चुका है



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रविवार को एक बार फिर बड़ा सैन्य तनाव देखने को मिला जब रूस ने यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हमलों का मुख्य निशाना राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके रहे।

    रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह हमला यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। इस दौरान रूस ने ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया, जिसे परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताया जाता है। यह मिसाइल अपनी तेज गति और आधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हमलों में जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पानी आपूर्ति की एक सुविधा, एक बाजार, कई घर और स्कूल इस हमले में क्षतिग्रस्त हुए हैं। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि रूसी मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी और रूस “पागल हो चुका है।”

    यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने दावा किया कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। उन्होंने कहा कि रूस द्वारा यह मिसाइल सिर्फ डर पैदा करने और शक्ति प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

    यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं, जिनमें से 604 को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। अधिकारियों ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया है।

    इस बीच रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन की ओर से उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर हमले किए गए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के “आतंकी हमलों” के जवाब में ओरेश्निक और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने ओरेश्निक मिसाइल के इस्तेमाल को बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध में गंभीर बढ़ोतरी बताया है।

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध पहले से ही चरम पर है और दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयां संघर्ष को और अधिक खतरनाक दिशा में ले जा सकती हैं।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार

    रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार



    नई दिल्ली। Russia-Ukraine War को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक संकेत देते हुए रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy से किसी तीसरे देश में मुलाकात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह बैठक केवल अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए होगी।

    पुतिन ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मुलाकात तभी संभव है जब दोनों देशों के बीच विशेषज्ञ स्तर पर पूरा और ठोस शांति समझौता पहले से तैयार हो जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत की बजाय यह बैठक सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया का अंतिम चरण होनी चाहिए।

    रूसी राष्ट्रपति ने पुराने Minsk agreements का हवाला देते हुए कहा कि पिछली शांति प्रक्रियाओं की तरह लंबी और असफल चर्चाओं से बचना जरूरी है। उनका कहना है कि इस बार पहले तकनीकी और विशेषज्ञ स्तर पर सभी मुद्दों को पूरी तरह सुलझाया जाना चाहिए, ताकि बाद में नेताओं की मुलाकात सिर्फ हस्ताक्षर तक सीमित रहे।

    यह युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पुतिन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की दिशा में एक संभावित नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट

    रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़: विक्ट्री डे से पहले अस्थायी सीजफायर का ऐलान, सुरक्षा को लेकर सख्त अलर्ट


    नई दिल्ली। जारी संघर्ष के बीच रूस और यूक्रेन ने विक्ट्री डे से पहले अलग-अलग समय पर अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की है। यह कदम 9 मई को मनाए जाने वाले द्वितीय विश्व युद्ध विजय दिवस से पहले तनाव कम करने की कोशिश माना जा रहा है।

    क्या है रूस का फैसला?
    रूस ने घोषणा की है कि वह विक्ट्री डे के मौके पर सीमित अवधि के लिए सैन्य कार्रवाई रोक देगा। यह फैसला द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की 81वीं वर्षगांठ को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।हालांकि रूस की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी तरह का हमला या बाधा उत्पन्न होती है तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

    🇺🇦 यूक्रेन की स्थिति
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम की सहमति का संकेत दिया है और कहा है कि उनका देश निर्धारित समय से संघर्ष रोकने को तैयार है, लेकिन किसी भी हमले का जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है।

    सुरक्षा और तनाव बरकरार
    रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्ट्री डे परेड को लेकर रूस में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को देखते हुए कई सैन्य तैयारियों में बदलाव किया गया है और कुछ भारी हथियारों की प्रदर्शनी भी सीमित कर दी गई है।

    विक्ट्री डे का महत्व
    विक्ट्री डे रूस के लिए एक बेहद अहम राष्ट्रीय दिवस है, जिसे देशभक्ति और सैन्य शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस बार पहली बार वर्षों में परेड का स्वरूप पहले से अलग और सीमित नजर आएगा।हालांकि दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर की घोषणा की है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे युद्धविराम अक्सर टिकाऊ साबित नहीं हुए हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • ट्रंप ने ईरान डील से किया इनकार, नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर जताया शक

    ट्रंप ने ईरान डील से किया इनकार, नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर जताया शक


    वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव को लेकर संभावित समझौते को खारिज कर दिया है। शनिवार को एनबीसी न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने बातचीत में दिलचस्पी दिखाई है लेकिन प्रस्तावित शर्तें काफी अच्छी नहीं हैं”। उन्होंने साफ किया कि जब तक युद्ध की स्थिति जारी है वाशिंगटन जल्दबाजी में कोई सीजफायर डील नहीं करेगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा ईरान डील करना चाहता है और मैं इसे नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें अभी पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने संभावित समझौते की शर्तों पर अधिक जानकारी देने से इनकार किया लेकिन यह स्वीकार किया कि न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं को छोड़ना किसी भी मामले में प्राथमिकता होगी।

    इंटरव्यू में ट्रंप ने अमेरिकी फोर्स द्वारा ईरान के रणनीतिक ऑयल हब खार्ग आइलैंड पर स्ट्राइक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खार्ग आइलैंड को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है लेकिन जरूरत पड़ने पर हम फिर से हमला कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऊर्जा लाइनों को नहीं छुआ क्योंकि उन्हें फिर से बनाने में सालों लग जाते हैं।

    ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के जीवित होने पर भी संदेह व्यक्त किया। उन्होंने कहा मुझे नहीं पता कि वह जिंदा भी हैं या नहीं। अभी तक कोई उन्हें सार्वजनिक रूप में नहीं देख पाया है। मैं सुन रहा हूं कि वह जिंदा नहीं हैं और अगर हैं तो उन्हें अपने देश के लिए स्मार्ट काम करना चाहिए और वह है सरेंडर करना।”

    ट्रंप ने किसी खास ईरानी नेता को भविष्य के विकल्प के रूप में नामित करने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका के पास ऐसे लोग हैं जो देश के भविष्य के लिए बेहतरीन नेतृत्व कर सकते हैं। उन्होंने ग्लोबल ऊर्जा की कीमतों के बीच रूस के तेल पर लगाए गए बैन को अस्थायी रूप से कम करने की रणनीति का भी जिक्र किया। ट्रंप के अनुसार यह बैन 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद लगाया गया था और संकट खत्म होते ही इसे वापस ले लिया जाएगा।

    यूक्रेन को मदद देने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि हमें जिस आखिरी इंसान से मदद चाहिए वह वोलोडिमिर जेलेंस्की हैं। उनका यह बयान वैश्विक राजनीति और सुरक्षा स्थिति में अमेरिका के रुख को स्पष्ट करता है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति का ईरान डील से इनकार और नए सुप्रीम लीडर के जीवित होने पर संदेह ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई अस्थिरता की संभावना पैदा कर दी है। ट्रंप ने अपनी प्राथमिकताओं में ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य सटीकता को सबसे ऊपर रखा है जबकि वार्ता और रणनीतिक समझौते फिलहाल लंबित हैं।

  • US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…

    US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…


    कीव।
    जिनेवा (Geneva) में अमेरिका (America) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच चल रही वार्ता के बीच रूस ने कीव पर भयंकर हवाई हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelensky) ने गुरुवार को कहा कि रूस (Russia) ने रात भर में यूक्रेन पर 420 ड्रोन और 39 मिसाइलों से हमला किया। यह हमला अमेरिकी और यूक्रेनी दूतों द्वारा जिनेवा में युद्ध समाप्त करने के लिए और अधिक बातचीत करने से कुछ घंटे पहले हुआ, जो अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और यूक्रेन के आठ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तथा आवासीय इलाकों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों सहित दर्जनों लोग घायल हुए हैं, हालांकि मृतकों की सटीक संख्या की तुरंत पुष्टि नहीं की गई।

    जेलेंस्की ने बुधवार देर रात कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में उनके प्रयासों तथा भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। अमेरिका की मध्यस्थता में मॉस्को और कीव के बीच वार्ता जारी है, लेकिन रूस द्वारा दावा किए गए यूक्रेनी क्षेत्र के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन की मांग की है और कहा है कि आमने-सामने की बैठक किसी समझौते तक पहुंचने में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, सिवाय यूक्रेनी राष्ट्रपति को मॉस्को आमंत्रित करने के, जिसे जेलेंस्की ने ठुकरा दिया।

    ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने वार्ता में हिस्सा लिया। ये दोनों जिनेवा में ईरान के साथ परमाणु वार्ता पर विचार करने के बाद यूक्रेन युद्ध पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। उन्होंने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की। वे जेलेंस्की के साथ ट्रंप की बातचीत में भी शामिल हुए। उमेरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दूतों के साथ यूक्रेन को आर्थिक सहायता, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करने के तरीकों और दीर्घकालिक सहयोग के ढांचे पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, बैठक में रूस को शामिल करके त्रिपक्षीय वार्ता के अगले दौर की तैयारियों पर भी विचार किया गया, साथ ही कैदियों के संभावित आदान-प्रदान पर भी बात हुई।

    जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने पोल्टावा क्षेत्र में गैस बुनियादी ढांचे तथा कीव और ड्नीप्रो क्षेत्रों में बिजली सबस्टेशनों पर हमला किया। राजधानी कीव सहित पांच अन्य क्षेत्रों में आपातकालीन दल मौके पर पहुंचे। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने रूस की अधिकांश मिसाइलों को मार गिराया और पश्चिमी सहयोगियों को समय पर अतिरिक्त वायु रक्षा हथियारों की आपूर्ति के लिए धन्यवाद दिया। रूस की बड़ी सेना के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए यूक्रेन को विदेशी मदद की सख्त जरूरत है।

    यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सहयोगी देशों से अधिक सैन्य सहायता देने की अपील की। उन्होंने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट में कहा कि जब पूरी दुनिया मॉस्को से इस व्यर्थ युद्ध को रोकने की मांग कर रही है, तो पुतिन और अधिक आतंक, हमलों और आक्रामकता पर उतारू हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने रात भर में कई रूसी क्षेत्रों के साथ-साथ काला सागर और आज़ोव सागर के ऊपर 17 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। यूक्रेन के स्वदेशी लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के अंदरूनी इलाकों में तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और सैन्य रसद केंद्रों पर हमले किए हैं।


    रूस और यूक्रेन ने सैनिकों के शवों का किया आदान-प्रदान

    गौरतलब है कि पिछली वार्ताओं में रूसी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख व्लादिमीर मेदिंस्की ने गुरुवार को बताया कि रूस ने 1000 शहीद यूक्रेनी सैनिकों के शव यूक्रेन को सौंपे और बदले में अपने 35 शहीद सैनिकों के शव वापस लिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि यह आदान-प्रदान कब हुआ। बाद में यूक्रेन के युद्धबंदियों के समन्वय मुख्यालय ने शवों की वापसी की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये यूक्रेनी रक्षकों के हो सकते हैं।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    कीव । रूस ने यूक्रेन पर एक और हमला बोला है। चार दिनों के अंदर यह यूक्रेन पर चौथा बड़ा ड्रोन हमला है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इस बार भी पावर ग्रिड पर निशाना लगाया गया। इन हमलों से अमेरिका द्वारा रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद कराने के प्रयासों को भी ठेस पहुंची है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच करीब चार साल से युद्ध जारी है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि रूस ने करीब 300 ड्रोन, 18 बैलेस्टिक मिसाइल और सात क्रूज मिसाइल से हमला बोला है। रात भर चला यह हमला आठ क्षेत्रों पर हुआ। इसमें उत्तर पूर्व खारकीव में एक मेल डिपो में चार लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा कीव क्षेत्र में सैकड़ों घर अंधेरे में डूब गए। यूक्रेन की राजधानी में इन दिनों भीषण ठंड पड़ रही है। यहां पर दिन का तापमान माइनस 12 डिग्री सेल्सियस है।

    गलियां बर्फ से ढंकी हुई हैं और जेनरेटरों के शोर से शहर का बुरा हाल है।

    कई आवासीय भवनों को नुकसान
    स्थानीय अधिकारियों मुताबिक रूसी हमलों में यूक्रेन के खारकीव क्षेत्र में, 10 लोग घायल हुए। वहीं, दक्षिणी शहर ओडेसा में, छह लोग घायल हुए। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेह किपर ने कहा कि हमलों ने एनर्जी ग्रिड, एक अस्पताल, एक किंडरगार्टन, एक शैक्षिक संस्थान और कई आवासीय भवनों को नुकसान पहुंचाया। रूसी हमलों ने भीषण ठंड में यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रूस द्वारा पावर ग्रिड पर हमले से बिजली और पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। रूस चाहता है कि यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाकर वह युद्ध में बढ़त हासिल कर ले। वहीं यूक्रेनी अधिकारियों ने इस रणनीति को सर्दी को हथियार बनाने की रणनीति बताया है।

    चार दिन पहले भी निशाना
    चार दिन पहले रूस ने यूक्रेन पर सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइल से बड़ा हमला किया था। इस युद्ध में सिर्फ दूसरी बार ऐसा हुआ जब ताकतवर हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया।

    पश्चिमी यू्क्रेन पर हुए इस हमले के जरिए रूस ने यू्क्रेन के नाटो सहयोगियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि पीछे हटने वाला नहीं है। सोमवार को ही अमेरिका ने रूस पर आरोप लगाया है कि वह युद्ध को गैरजरूरी ढंग से भड़का रहा है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस कोशिश में जुटे हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद हो जाए।
  • यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी

    यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia and Ukraine war) को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन (Ukraine) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के उत्तरी रूस में स्थित एक आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की. रूस का दावा है कि इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया. शांति समझौतों पर बातचीत के बीच हुए इस हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खासा नाराज हैं. उनकी पुतिन से बात भी हुई है।

    यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे रूस की ओर से “झूठ का एक और दौर” बताया और कहा कि ऐसे बयान शांति वार्ता को कमजोर करने के लिए दिए जा रहे हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बीच में आना पड़ा. ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी. फ्लोरिडा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि पुतिन ने सुबह-सुबह उन्हें बताया कि उन पर हमला हुआ है. ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह दावा गलत भी हो सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “एक बात युद्ध के दौरान हमला करने की होती है और दूसरी बात किसी नेता के घर पर हमला करने की. यह ऐसा करने का सही समय नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यह घटना सच साबित होती है, तो यह तनाव को और बढ़ा सकती है.

    बीते 24 घंटों में ट्रंप ने पुतिन से दो बार बात की है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत “काफी सकारात्मक” रही और कुछ जटिल मुद्दों के बावजूद शांति की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है.

    हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के जापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं. क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग की है कि यूक्रेन अपने सैनिकों को डोनबास के उन इलाकों से हटा ले, जहां अब भी उसकी मौजूदगी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ड्रोन हमले का यह दावा सच साबित होता है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और बड़ा तनावपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे पहले से नाजुक शांति प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है.