नए बदलाव के तहत यूएएन को सक्रिय करने और नया यूएएन प्राप्त करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को अधिक मजबूत बनाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद सदस्यों को अपनी पहचान की पुष्टि डिजिटल माध्यम से करनी होगी, जिसके बाद ही संबंधित सेवा उपलब्ध होगी।
तकनीकी अपग्रेड के साथ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के इंटरफेस और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार यूएएन एक्टिवेशन, नया यूएएन जारी करने और पहली बार यूएएन प्राप्त करने जैसी सेवाओं की प्रक्रिया पूरी तरह नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी। इससे डेटाबेस का बेहतर एकीकरण होगा और सेवाओं की गति तथा सुरक्षा दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।
जिन कर्मचारियों का यूएएन अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना होगा। वहीं जिन कर्मचारियों को पहली बार यूएएन जारी किया जाना है, उनके लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल सत्यापन के बाद नया यूएएन संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते से जोड़ दिया जाएगा, जिससे आगे की सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
संगठन ने यूएएन भूल जाने वाले सदस्यों के लिए रिकवरी प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। अब पंजीकृत मोबाइल नंबर के सत्यापन, आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद सदस्य अपना यूएएन दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबे समय बाद अपने खाते की जानकारी प्राप्त करनी होती है।
हालांकि यूएएन से जुड़ी अधिकांश सेवाओं की प्रक्रिया नई व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरित कर दी गई है, लेकिन ऑनलाइन डेथ क्लेम दाखिल करने की सुविधा पहले की तरह यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का आकार और फाइल प्रारूप भी तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होगा।
तकनीकी उन्नयन के बाद शुरुआती दिनों में ऑनलाइन क्लेम और अन्य अनुरोधों के निपटारे में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अतिरिक्त सत्यापन और सिस्टम जांच के कारण यह स्थिति अस्थायी मानी जा रही है। सदस्यों को सलाह दी गई है कि एक ही अनुरोध को बार-बार जमा करने या अनावश्यक रूप से बार-बार लॉगिन करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी उपयोगकर्ताओं को सुचारु सेवाएं मिल सकें।
नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य निधि सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने से पहचान संबंधी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खाताधारकों को भविष्य में तेज, विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

