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  • ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए यूएएन सेवाओं की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के तकनीकी उन्नयन के बाद अब यूएएन एक्टिवेशन और नया यूएएन जारी करने की सुविधा पहले की तरह पोर्टल पर उपलब्ध नहीं रहेगी। इन सेवाओं को नई डिजिटल व्यवस्था के तहत स्थानांतरित किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीक आधारित बनाई जा सके।

    नए बदलाव के तहत यूएएन को सक्रिय करने और नया यूएएन प्राप्त करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को अधिक मजबूत बनाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद सदस्यों को अपनी पहचान की पुष्टि डिजिटल माध्यम से करनी होगी, जिसके बाद ही संबंधित सेवा उपलब्ध होगी।

    तकनीकी अपग्रेड के साथ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के इंटरफेस और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार यूएएन एक्टिवेशन, नया यूएएन जारी करने और पहली बार यूएएन प्राप्त करने जैसी सेवाओं की प्रक्रिया पूरी तरह नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी। इससे डेटाबेस का बेहतर एकीकरण होगा और सेवाओं की गति तथा सुरक्षा दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

    जिन कर्मचारियों का यूएएन अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना होगा। वहीं जिन कर्मचारियों को पहली बार यूएएन जारी किया जाना है, उनके लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल सत्यापन के बाद नया यूएएन संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते से जोड़ दिया जाएगा, जिससे आगे की सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

    संगठन ने यूएएन भूल जाने वाले सदस्यों के लिए रिकवरी प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। अब पंजीकृत मोबाइल नंबर के सत्यापन, आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद सदस्य अपना यूएएन दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबे समय बाद अपने खाते की जानकारी प्राप्त करनी होती है।

    हालांकि यूएएन से जुड़ी अधिकांश सेवाओं की प्रक्रिया नई व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरित कर दी गई है, लेकिन ऑनलाइन डेथ क्लेम दाखिल करने की सुविधा पहले की तरह यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का आकार और फाइल प्रारूप भी तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होगा।

    तकनीकी उन्नयन के बाद शुरुआती दिनों में ऑनलाइन क्लेम और अन्य अनुरोधों के निपटारे में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अतिरिक्त सत्यापन और सिस्टम जांच के कारण यह स्थिति अस्थायी मानी जा रही है। सदस्यों को सलाह दी गई है कि एक ही अनुरोध को बार-बार जमा करने या अनावश्यक रूप से बार-बार लॉगिन करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी उपयोगकर्ताओं को सुचारु सेवाएं मिल सकें।

    नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य निधि सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने से पहचान संबंधी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खाताधारकों को भविष्य में तेज, विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • 26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए डेटाबेस माइग्रेशन तथा क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेशन कर रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के चलते 26 जून से 30 जून तक ईपीएफओ की कई प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। इस दौरान सदस्य और नियोक्ता दोनों ही कई जरूरी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    ईपीएफओ के अनुसार, 26 जून की मध्यरात्रि से 30 जून की रात 11:59 बजे तक मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन पांच दिनों के दौरान उपयोगकर्ता अपने खाते में लॉग इन नहीं कर पाएंगे, जिससे ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कई कार्य पूरी तरह बाधित रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि सभी सेवाएं 1 जुलाई से दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस अवधि में कर्मचारी नया पीएफ क्लेम जमा नहीं कर सकेंगे और पहले से जमा क्लेम की स्थिति भी ऑनलाइन नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा ई-पासबुक डाउनलोड करने या खाते का विवरण देखने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। जिन कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते से संबंधित किसी प्रक्रिया को पूरा करना है, उन्हें सेवाएं बहाल होने तक इंतजार करना होगा।

    नियोक्ताओं पर भी इस तकनीकी अपग्रेडेशन का असर पड़ेगा। वे इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल नहीं कर सकेंगे और नए कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। इससे नई नियुक्तियों और नियमित मासिक अनुपालन से जुड़े कुछ कार्य निर्धारित अवधि तक प्रभावित रह सकते हैं।

    ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन की डिजिटल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सिस्टम माइग्रेशन पूरा होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के पहले से अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित होने की उम्मीद है। इसलिए यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संगठन ने सदस्यों और नियोक्ताओं से अपील की है कि जिन कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवाओं की आवश्यकता है, वे उन्हें 1 जुलाई के बाद पूरा करने की योजना बनाएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन से भविष्य में क्लेम निपटान की गति बेहतर होगी और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। हालांकि जिन कर्मचारियों को तत्काल पीएफ निकासी, क्लेम स्टेटस या अन्य डिजिटल सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें अगले कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। 1 जुलाई से सभी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना जताई गई है।