Tag: Umangsinghar

  • मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस सक्रिय, जल-जंगल-जमीन संरक्षण के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी

    मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस सक्रिय, जल-जंगल-जमीन संरक्षण के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ी पहल की है। जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा तथा आदिवासी समुदाय के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से पार्टी ने एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का गठन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर किया गया है और इसे प्रदेश में आदिवासी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से गठित इस समिति में पार्टी के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को समिति में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इसके अलावा पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया तथा आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को भी सदस्य बनाया गया है।

    कांग्रेस का मानना है कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक संरचना दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से समिति को विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन कर सुझाव देने और पार्टी की भावी रणनीति तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। समिति प्रदेश के आदिवासी अंचलों में जाकर जमीनी स्तर की समस्याओं का आकलन भी करेगी।

    समिति का प्रमुख फोकस जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा पर रहेगा। इसके साथ ही आदिवासी समुदाय को मिले संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी यह समिति कार्य करेगी। वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना और उससे जुड़े मुद्दों को सामने लाना भी इसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

    इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में भूमि विवाद, वन भूमि के पट्टों, विस्थापन और अधिकारों से जुड़े मामलों का अध्ययन कर पार्टी को सुझाव दिए जाएंगे। समिति इन विषयों पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कांग्रेस की रणनीति भी तैयार करेगी ताकि आदिवासी वर्ग की आवाज को प्रभावी तरीके से उठाया जा सके।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है और कांग्रेस इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विशेष समिति का गठन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर कांग्रेस आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को सड़क से लेकर विधानसभा तक मजबूती से उठाने की तैयारी कर सकती है।

    कांग्रेस का यह कदम न केवल आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाकर आदिवासी समुदाय की समस्याओं को प्रमुखता से सामने लाया जाए।

  • कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया

    कैग ने 2019 में दूषित पानी को लेकर सरकार को चेताया था फिर भी सरकार ने नहीं उठाए जरूरी कदम 906 करोड़ का कर्ज लिया


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके आरोप लगाया कि 2019 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कैग ने मध्य प्रदेश सरकार को इंदौर और भोपाल में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

    कैग की 2019 की रिपोर्ट में साफ तौर पर दोनों शहरों की जल आपूर्ति में गंभीर कमियों का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इंदौर और भोपाल में जल आपूर्ति व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं जिनमें पानी के नमूनों का परीक्षण भी सही नहीं किया गया था और कई नमूनों में गंदगी और मल कोलिफॉर्म पाए गए थे जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरे का कारण हैं। इस रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे अब इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है।

    उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक एडीबी से 906 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था ताकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर में पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। हालांकि इस कर्ज का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कैग की रिपोर्ट में यह साफ सामने आया कि इन शहरों में पानी का प्रबंधन अपर्याप्त था और भ्रष्टाचार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।कैग की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उजागर किया गया था:

    इंदौर में सिर्फ चार जोनों और भोपाल में पांच जोनों को ही नियमित पानी की आपूर्ति हो रही है। शहरों के 9.41 लाख परिवारों में से केवल 5.30 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिल पाए हैं।2013 से 2018 तक 4,481 पानी के नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे।दोनों शहरों में 5.45 लाख जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए थे।नगर निगमों ने रिसाव को ठीक करने में बेहद लंबा समय लिया था 22 से 182 दिन ।पानी के 30 से 70 प्रतिशत हिस्से का कोई हिसाब नहीं था जो पानी बिना कारण बर्बाद हो रहा था।

    उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है जिस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कैग ने 2019 में ही इन मुद्दों को उठाया था लेकिन सरकार तब भी सोती रही और अब जब बड़ा हादसा हो चुका है तब सरकार जागी है। सिंघार का कहना था कि बिना किसी बड़ी त्रासदी के सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती और अब सरकार को इस गंभीर लापरवाही पर जवाब देना चाहिए।इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।