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  • PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील

    PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील


    लंदन।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir-PoK) में बिगड़ते हालात को लेकर 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों (British MPs) ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (United Nations Secretary-General António Guterres) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही पाकिस्तानी बलों द्वारा किए जा रहे नरसंहार को खत्म करने और नागरिकों की जान की सुरक्षा के उपाय करने की अपील भी की गई है।

    ब्रिटिश सांसदों की अपील क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार के बीच आई है, जहां पाकिस्तानी बलों की क्रूर कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। क्षेत्र में अभी भी सख्त नाकाबंदी, कर्फ्यू और पूरी तरह से कम्युनिकेशन्स ब्लैकआउट लागू है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव को संबोधित पत्र में ब्रिटिश सांसदों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, मौतों, संचार पर प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, आवश्यक आपूर्ति में व्यवधान और शांतिपूर्ण नागरिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर लगाम की रिपोर्टों ने काफी चिंता पैदा की है। हमने ब्रिटिश कश्मीरियों से भी लगातार सुना है, जो संबंधित क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।


    संयुक्त राष्ट्र की तरफ से उठाया गया था मुद्दा

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पीओके में पाकिस्तान की बर्बरता को लेकर आवाज उठाई थी और कहा था कि शांतिपूर्ण प्रद्र्शन के दौरान इस तरह का अत्याचार करने को लेकर पाकिस्तानी सरकार को जवाब देना चाहिए।


    खत्म कर दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए जाने तथा पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

    हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ”यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।” पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की।

    मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था। संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • UN महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था को सराहा… बोले- AI Summit के लिए यह उपयुक्त स्थान

    UN महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था को सराहा… बोले- AI Summit के लिए यह उपयुक्त स्थान

    UN Secretary-General

    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस (UN Secretary-General Antonio Guterres) ने कहा है कि भारत (India0 वैश्विक मामलों में प्रभाव रखने वाली एक ‘बेहद सफल’ उभरती अर्थव्यवस्था है और यह एआई शिखर सम्मेलन (AI Summit) के लिए उपयुक्त स्थान है। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (‘India-AI Impact Summit 2026’) से गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम मेधा (AI) से पूरी दुनिया को लाभ होना चाहिए, न कि यह केवल विकसित देशों या दो महाशक्तियों के लिए आरक्षित विशेषाधिकार हो।

    उन्होंने कहा, ‘मैं इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत को हार्दिक बधाई देता हूं। यह अत्यंत आवश्यक है कि एआई का विकास हर किसी के लाभ के लिए हो और ‘ग्लोबल साउथ’ के देश भी एआई के लाभ का हिस्सा बनें।’ ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

    यह उच्च स्तरीय कार्यक्रम 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला है जो ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में आयोजित होने वाला पहला एआई शिखर सम्मेलन होगा और यह ‘लोग, धरती और प्रगति’ के तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है। गुतारेस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि ”यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि एआई केवल सर्वाधिक विकसित देशों का विशेषाधिकार हो’।

    गुतारेस की इस टिप्पणी को स्पष्ट रूप से अमेरिका और चीन पर केन्द्रित माना जा रहा है। गुतारेस ने कहा, ”यह बेहद आवश्यक है कि कृत्रिम मेधा मानव जाति के लाभ के लिए एक सार्वभौमिक साधन बने।’ उन्होंने कहा, ‘भारत की भूमिका आज एक बेहद सफल उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में है और यह न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में बल्कि वैश्विक मामलों में भी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत बिल्कुल उपयुक्त जगह है और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि एआई की अपार संभावनाओं एवं इसके सभी जोखिमों के साथ इस पर गहराई से चर्चा हो क्योंकि एआई पूरी दुनिया से संबंधित है, न कि केवल कुछ लोगों से।’


    सम्मेलन में कौन से नेता लेंगे हिस्सा

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिन नेताओं ने शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज पेरेज-कास्टेजोन, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक शामिल हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, यूनान के प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोटाकिस, कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री ओलझास बेक्टेनोव और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने भी ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में शामिल होने की पुष्टि की है।