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  • भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा

    भारत ने UN में मानवाधिकार रिपोर्ट पर उठाए सवाल…. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरा


    वाशिंगटन।
    न्यूयॉर्क (New York) में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के 81वें सत्र में मानवाधिकार उच्चायोग के साथ ‘इंटरैक्टिव डायलॉग’ के दौरान प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने भारत का बयान रखा. उन्होंने ओएचसीएचआर (OHCHR) के चयनात्मक रवैये और दोहरे मानदंडों पर चिंता जाहिर करते हुए सवाल खड़े किए. उनकी ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिका के उल्लंघनों पर रिपोर्ट की मांग की गई।

    दरअसल, अनुज स्वरूप ने मानवाधिकार परिषद में भारत के सदस्य के रूप में अपनी रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया. अपने संबोधन के दौरान उम्होंने कहा कि मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) की ओर से चुनिंदा मुद्दों पर ध्यान देने और दोहरे मानदंड अपनाने से बहुपक्षीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।


    पाकिस्तान पर OHCHR रिपोर्ट जारी करने की मांग

    इस दौरान भारत ने पाकिस्तान पर एक ओएचसीएचआर रिपोर्ट जारी करने की मांग की, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ओर से लोगों की हत्या के मामलों की निष्पक्ष जांच, हिरासत में रखे गए आवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक अधिकार दिए जाने और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं पर लगी सभी पाबंदियां हटाने जैसे मुद्दों को शामिल करने की बात कही।


    भारत की पाकिस्तान को दो टूक

    भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस बात पर आत्ममंथन करें कि उसके देश के कई हिस्सों, खासकर उसके अवैध कब्जे वाले क्षत्रों में मानवाधिकारों का किस तरीके से उल्लंघन हो रहा है. प्रथम सचिव की ओर से कहा गया कि मानवाधिकारों की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है और इस दिशा में निष्पक्षता तथा पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    बता दें इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया गया था. स्थायी मिशन के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर बेदी ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर परमाणु हथियारों की धमकी से दबने वाला नहीं है. बेदी ने कहा कि भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी आतंकी हमले का जवाब देगा।


    भारत ने पाकिस्तान को दी सीधी चेतावनी

    उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ होने वाली किसी भी आतंकी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा. भारत आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा. बेदी ने यह भी कहा कि पिछले साल पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद किया गया था. पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।

  • UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    न्यूयार्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने शुक्रवार को ईरान और रूस (Iran and Russia) के अपने समकक्षों से मुलाकात की, जिनके साथ द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर (Jaishankar) ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergey Lavrov) से मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के इस समूह का जिक्र करते हुए कहा कि आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ सकारात्मक बैठक हुई। कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स में सहयोग की भी समीक्षा की।

    भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिस्सा लिया था। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बातचीत उपयोगी रही। हमने खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की।

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कड़ा जवाब दिया, जिसने उनसे आतंकवाद से जुड़ा सवाल पूछा था। यहां पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का कड़ा जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। आप तो बोलो ही मत। जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पोत परिवहन और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर बने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया।

    उनके संबोधन के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार ने खड़े होकर जयशंकर से चिल्लाते हुए पूछा कि आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी? संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तानी पत्रकार से कहा कि आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ-साफ सुन लिया है। गुरुवार को, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ संयुक्त राष्ट्र भवन में दाखिल हो रहे थे, तो एक भारतीय पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?

  • UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर पूछा सवाल, जयशंकर बोले- ‘एक आतंकी देश मुझसे ये पूछ रहा’

    UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर पूछा सवाल, जयशंकर बोले- ‘एक आतंकी देश मुझसे ये पूछ रहा’


    नई दिल्ली। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया। जयशंकर ने जवाब देते हुए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए वहां से चले गए। घटना के दौरान भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने भी पत्रकार से कहा कि उसे उसका जवाब साफ तौर पर मिल चुका है।

    पत्रकार ने बीच में टोककर पूछा- आतंकवाद कब बंद करेंगे?

    जयशंकर न्यूयॉर्क में भारत और लाइबेरिया की ओर से शुरू किए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ से जुड़े प्रेस इंटरैक्शन में बोल रहे थे। उनके साथ लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यांती भी मौजूद थीं।

    प्रेस बातचीत के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर को बीच में टोकते हुए पूछा कि भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी। उसने भारत पर ‘प्रॉक्सी टेररिज्म’ को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया।

    जयशंकर ने बिना लंबी प्रतिक्रिया दिए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद वह मुस्कुराए और वहां से चले गए।

    भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने इसके बाद पत्रकार से कहा, “आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ तौर पर सुन लिया है।” इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

    25 देशों के साथ समुद्री सुरक्षा पर पहल

    यह सवाल-जवाब उस प्रेस इंटरैक्शन के दौरान हुआ, जिसमें जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा को लेकर नई पहल की जानकारी दे रहे थे। भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की शुरुआत की है।

    जयशंकर ने कहा कि समुद्र में कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों को रुकना ही चाहिए।

    विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत समुद्री कर्मचारियों का एक प्रमुख सोर्स देश है, जबकि लाइबेरिया के पास टनेज के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्रियों में से एक है। दोनों देशों ने समान हितों वाले अन्य देशों और प्रमुख जहाज मालिकों को भी इस पहल से जोड़ने की कोशिश की है।

    ‘हमलों को रुकना ही चाहिए’

    जयशंकर ने कहा कि हाल के महीनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, रेड सी और ब्लैक सी समेत अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में कमर्शियल शिपिंग और मर्चेंट मैरिनर्स पर हमले हुए हैं। उनके मुताबिक, इन घटनाओं से समुद्री व्यापार प्रभावित होता है और लोगों की जान जाती है।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा और जान-माल के नुकसान का कोई औचित्य नहीं हो सकता। भारत और लाइबेरिया की पहल का उद्देश्य समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर दुनिया का ध्यान बढ़ाना है।

    जयशंकर के मुताबिक, दुनिया के मर्चेंट फ्लीट को करीब 20 लाख समुद्री कर्मचारी चलाते हैं। उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और हाल के घटनाक्रम ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    पीएम मोदी भी उठा चुके हैं नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

    नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स बैठक के दौरान समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया है।

    जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर बयानबाजी भी चर्चा में है।

  • UN में पाकिस्तान की हार को जीत बता रहे थे शहबाज, भारतीय दूत की छूट गई हंसी, वीडियो वायरल

    UN में पाकिस्तान की हार को जीत बता रहे थे शहबाज, भारतीय दूत की छूट गई हंसी, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की ओर से इसे अपनी सफलता के तौर पर पेश किया। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष रोकने में कथित ‘समय पर हस्तक्षेप’ के लिए धन्यवाद भी दिया। शहबाज के भाषण के दौरान वहां मौजूद भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास का रिएक्शन कैमरे में कैद हो गया और उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

    शहबाज ने ट्रंप को दिया ‘क्रेडिट’

    शुक्रवार को UNGA में अपने करीब 23 मिनट के संबोधन में शहबाज शरीफ ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘समय पर हस्तक्षेप’ से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बची।

    शरीफ ने ट्रंप के ‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’ के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर ट्रंप उस समय हस्तक्षेप नहीं करते तो हालात और गंभीर हो सकते थे।

    हालांकि, भारत लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए किसी तीसरे पक्ष ने मध्यस्थता की थी। भारत का कहना है कि संघर्ष विराम को लेकर सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद बनी थी।

    भारतीय राजनयिक का रिएक्शन कैमरे में कैद

    शहबाज शरीफ जब 2025 के संघर्ष को लेकर पाकिस्तान का पक्ष रख रहे थे, उसी दौरान सभा में मौजूद भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास की प्रतिक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में उनका हंसना नजर आया।

    शहबाज ने अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा 2025 जैसी स्थिति में जाने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का ‘न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान’ जरूरी है।

    भारत संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।

    सिंधु जल संधि का भी उठाया मुद्दा

    शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत के इस फैसले पर आपत्ति जताई कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को ‘अबेयांस’ में रखने का फैसला किया था।

    भारत का रुख है कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की कार्रवाई से जुड़े सवालों के समाधान तक संधि स्थगित रहेगी। वहीं पाकिस्तान इस फैसले को चुनौती देता रहा है।

    शहबाज ने UNGA में भारत की ओर से सिंधु नदी के पानी को लेकर किसी भी कदम को गंभीर परिणामों से जोड़ते हुए चेतावनी भी दी।

    कश्मीर पर फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से बात

    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे को भी अपने भाषण का हिस्सा बनाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर पर अपनी स्थिति के अनुरूप कार्रवाई की मांग दोहराई और कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा।

    भारत का रुख इसके उलट है। नई दिल्ली कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों को खारिज करता रहा है और इसे भारत-पाकिस्तान के बीच का विषय मानता है।

    आसिम मुनीर की भी कई बार तारीफ

    शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का भी कई बार उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कूटनीति के लिए रास्ता बनाने में मुनीर के लगातार प्रयासों की भूमिका रही।

    2025 के संघर्ष का जिक्र करते हुए शरीफ ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की भी प्रशंसा की और इसे अपनी ओर से प्रभावी जवाब के तौर पर पेश किया।

    भारत देगा ‘राइट टू रिप्लाई’

    UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण के बाद भारत की ओर से ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत जवाब दिए जाने की प्रक्रिया भी तय है। भारत आमतौर पर पाकिस्तान के नेता के संबोधन के बाद अपने स्थायी मिशन के अपेक्षाकृत युवा राजनयिक को जवाब देने के लिए भेजता है।

    इस बार भी पाकिस्तान के कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि से जुड़े बयानों पर भारत की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

  • यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    नई दिल्ली । इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ममदानी की गाजा और इस्राइल से जुड़ी टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी बयानबाजी से न्यूयॉर्क में रहने वाले यहूदी समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। नेतन्याहू ने ममदानी को यहूदी-विरोधी मेयर भी बताया।

    अपने भाषण में नेतन्याहू ने कहा कि ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद कई यहूदी न्यूयॉर्क में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनसे बातचीत के दौरान कहते हैं कि शहर तेजी से बदल गया है और अब वह पहले जैसा नहीं रहा। यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे सार्वजनिक विवाद के बीच आई है।

    ममदानी गाजा में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और फिलिस्तीनी अधिकारों की वकालत की है। ममदानी का रुख रहा है कि इस्राइल की नीतियों की आलोचना करना अपने आप में यहूदी-विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को इस्राइल और यहूदी समुदाय की सुरक्षा से जोड़ते रहे हैं।

    नेतन्याहू और ममदानी के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी का गिरफ्तारी वारंट भी रहा है। ममदानी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो वह उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लागू कराने की कोशिश करेंगे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क शहर के पास किसी विदेशी नेता को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। हाल के दिनों में उन्होंने अमेरिकी संघीय सरकार से आईसीसी के वारंट का सम्मान करने की अपील भी की है।

    नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान इस मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ममदानी ने उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोकने और चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें और न ही सच्चाई को चुप कराया जा सकता है।

    इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ममदानी के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात भी हुई थी। दोनों नेताओं के बीच कई राजनीतिक और नीतिगत मतभेद हैं, लेकिन बैठक में शहर से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप के इस्राइल के प्रति समर्थन की प्रशंसा की और उन्हें अपना महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ ममदानी इस्राइल की गाजा नीति और फिलिस्तीनी अधिकारों को लेकर अपनी आलोचना पर कायम हैं, वहीं नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को यहूदी समुदाय की सुरक्षा और यहूदी-विरोधी भावना के संदर्भ में पेश कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव अब गाजा युद्ध के साथ-साथ न्यूयॉर्क में यहूदी सुरक्षा, आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट और अमेरिकी सरकार की भूमिका जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।

    नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र संबोधन के दौरान कई प्रतिनिधि सभागार से बाहर भी चले गए और न्यूयॉर्क में उनके दौरे के खिलाफ प्रदर्शन हुए। इस घटनाक्रम ने उनके भाषण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी राजनीतिक मतभेदों को भी सामने ला दिया।

  • संयुक्त राष्ट्र के नए मानचित्र प्रस्ताव पर भारत का स्पष्ट रुख, कहा संप्रभु क्षेत्र को गलत दिखाना किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं

    संयुक्त राष्ट्र के नए मानचित्र प्रस्ताव पर भारत का स्पष्ट रुख, कहा संप्रभु क्षेत्र को गलत दिखाना किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को अधिक वास्तविक क्षेत्रफल के साथ प्रस्तुत करने वाले Equal Earth Projection को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। भारत ने प्रस्ताव के मूल उद्देश्य का समर्थन करते हुए कहा है कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही भारत ने यह भी साफ किया कि उसके संप्रभु क्षेत्र को किसी भी गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार्य नहीं है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को पेश किए गए प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने मतदान किया। छह देश मतदान से दूर रहे, जबकि अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे मानचित्र प्रक्षेपण को बढ़ावा देना है, जिसमें विभिन्न महाद्वीपों और क्षेत्रों के क्षेत्रफल को पारंपरिक नक्शों की तुलना में वास्तविक अनुपात के अधिक करीब दिखाया जा सके।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को लेकर स्पष्ट किया कि इसका संबंध किसी विशेष राजनीतिक मानचित्र को स्वीकार करने से नहीं है। भारत के अनुसार, समान-क्षेत्र वाले मानचित्र प्रक्षेपण का मूल उद्देश्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से अफ्रीका जैसे बड़े भूभागों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप बेहतर प्रतिनिधित्व देना है।

    भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन इसके साथ अपनी स्थिति भी स्पष्ट की। भारत ने जोर दिया कि प्रस्ताव किसी विशेष मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेपण या किसी देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा के चित्रण को प्रमाणित नहीं करता। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से भौगोलिक क्षेत्रफल के प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाना है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश के आधिकारिक मानचित्र और संप्रभु क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। भारत के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख समेत उसका संपूर्ण संप्रभु क्षेत्र आधिकारिक भारतीय मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

    भारत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच, प्रकाशन या मानचित्र में उसके क्षेत्र को गलत तरीके से प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। भारत का कहना है कि गलत या भ्रामक नक्शे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े गंभीर विषय हैं। ऐसे चित्रण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    इस पूरे मामले में मानचित्रों के राजनीतिक और भौगोलिक इस्तेमाल के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है। Equal Earth Projection जैसे मानचित्र प्रक्षेपण मुख्य रूप से पृथ्वी के अलग-अलग क्षेत्रों के आकार को तुलनात्मक रूप से सही ढंग से दिखाने पर केंद्रित होते हैं। इसके विपरीत राजनीतिक मानचित्र देशों की सीमाओं, विवादित क्षेत्रों और स्थानों के नामों को प्रदर्शित करते हैं।

    भारत ने इसी अंतर को रेखांकित करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव किसी राजनीतिक सीमा या विवादित क्षेत्र की स्थिति तय नहीं करता। इसलिए प्रस्ताव के समर्थन को भारत की सीमाओं से संबंधित किसी अलग राजनीतिक स्थिति के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    प्रस्ताव के पारित होने के बाद दुनिया के नक्शे में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बदल गई हैं। यह पहल मुख्य रूप से मानचित्र प्रक्षेपण और भौगोलिक क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व से संबंधित है।

    भारत का संदेश इस मामले में दो हिस्सों में स्पष्ट है। एक ओर उसने वास्तविक क्षेत्रफल को बेहतर तरीके से दर्शाने वाले मानचित्र प्रक्षेपण के सिद्धांत का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े आधिकारिक मानचित्रण पर किसी भी तरह की गलत प्रस्तुति को अस्वीकार किया है। इसी रुख के साथ भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी सीमा संबंधी स्थिति दोहराई है।

  • एस. जयशंकर ने रखा भारत का वैश्विक विजन; बोले- संघर्ष और अस्थिरता के दौर में संयुक्त राष्ट्र को निभानी होगी निर्णायक भूमिका

    एस. जयशंकर ने रखा भारत का वैश्विक विजन; बोले- संघर्ष और अस्थिरता के दौर में संयुक्त राष्ट्र को निभानी होगी निर्णायक भूमिका

    नई दिल्ली । भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 2028-29 की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए अपना औपचारिक अभियान शुरू करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अभियान की शुरुआत के दौरान कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अभूतपूर्व संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्य करना होगा।

    डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल सुरक्षा परिषद की सदस्यता हासिल करना नहीं, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने में सक्रिय योगदान देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ऐसी विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है जहां सभी देशों की आवाज को समान महत्व मिले और विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ, को निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। उनके अनुसार बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय संस्थाओं को भी समय के अनुरूप स्वयं को ढालना आवश्यक है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि भारत का पूरा अभियान एसएचएएनटीआई दृष्टिकोण पर आधारित होगा, जिसका उद्देश्य विश्वास, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सहयोग के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न देशों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से संभव हो सके। उनका मानना है कि स्थायी शांति केवल बातचीत और सहयोग से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पीसकीपिंग मिशनों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और स्पष्ट रणनीति से लैस करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा तथा शांति अभियानों में महिला शांति सैनिकों की भूमिका को और मजबूत करने का समर्थन करेगा।

    नई और उभरती तकनीकों का उल्लेख करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मानव-केंद्रित और जिम्मेदार उपयोग का समर्थक है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समावेशी विकास, सार्वजनिक हित और सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा पर संभावित खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।

    समुद्री सुरक्षा को भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि नियम-आधारित और स्वतंत्र समुद्री व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने सुरक्षित समुद्री व्यापार, समुद्री डकैती पर नियंत्रण, नाविकों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों को निरंतर समर्थन देने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी रोक लगाने और आतंकी संगठनों के खिलाफ पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित वैश्विक प्रतिबंध प्रणाली की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    अपने संबोधन के अंत में डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज की चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बने। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का अभियान वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी, संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा विश्व समुदाय के सामने मौजूद नई चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • US: ट्रंप ने फिर फोड़ा टैरिफ बम…. UN से आने वाले वाहनों पर लगाया 25% टैक्स

    US: ट्रंप ने फिर फोड़ा टैरिफ बम…. UN से आने वाले वाहनों पर लगाया 25% टैक्स


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर से टैरिफ बम (Tariff Bomb) फोड़ा है। इस बार उन्होंने कहा कि वह अगले हफ्ते से यूरोपीय यूनियन (European Union) से आने वाली कारों और ट्रकों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ा देंगे। वह इसे बढ़ाकर 25 फीसदी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गुट पहले हुए एक व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है।

    उन्होंने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर लिखा, “इस तथ्य के आधार पर कि यूरोपीय यूनियन हमारे पूरी तरह से सहमत व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है, अगले सप्ताह मैं अमेरिका में आने वाली कारों और ट्रकों पर यूरोपीय यूनियन से लिए जाने वाले टैरिफ को बढ़ा दूंगा। टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।”

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, ”हालांकि, यदि वे अमेरिका के प्लांट्स में कारों और ट्रकों का प्रोडक्शन करते हैं, तो कोई टैरिफ नहीं लगेगा। कई ऑटोमोबाइल और ट्रक प्लांट्स वर्तमान में निर्माणाधीन हैं, जिनमें 100 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया जा रहा है। जो कार और ट्रक निर्माण के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। ये प्लांट्स, जिनमें अमेरिकी कर्मचारी काम करेंगे, जल्द ही खुलने वाले हैं। आज अमेरिका में जो हो रहा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ! इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद।

    ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति को और आक्रामक रूप से लागू करते हुए भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाया है। इन टैरिफ का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सस्ती विदेशी आयात से बचाना और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देना बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और कई देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी तेज हो सकता है। भारत पर ट्रंप ने पहले 25 फीसदी का टैरिफ लगाया था, लेकिन फिर रूस से तेल खरीदने को लेकर इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया था। हालांकि, बाद में ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल आयात नहीं करेगा, जिसकी वजह से 25 फीसदी टैरिफ हटा दिया गया।

  • UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन

    UN में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन


    संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन को एक बड़ा झटका लगा है. अफ्रीकी देशों की मांग पर UN जनरल असेंबली में एक प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें ब्रिटेन और अन्य पूर्व उपनिवेशवादी देशों से ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार के लिए मुआवजा देने की मांग की गई है. इस प्रस्ताव में गुलाम व्यापार को मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध बताया गया है.

    यह प्रस्ताव अफ्रीकी देश घाना की ओर से अफ्रीकी संघ के तत्वावधान में पेश किया गया था. इस पर हुए वोटिंग में 124 देशों ने समर्थन किया, जिसमें भारत भी शामिल है. इस प्रस्ताव का तीन देशों ने विरोध किया और 52 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

    इस बिल का विरोध करने वाले देशों में अमेरिका, इजराइल और अर्जेंटीना शामिल हैं. वहीं ब्रिटेन के साथ फ्रांस और यूरोपीय संघ (European Union) के कई देशों ने वोटिंग से परहेज किया है. ब्रिटेन ने साफ कर दिया कि वह इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है. ब्रिटेन के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा पर आपत्ति है. ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा, “ब्रिटेन का रुख साफ है, हम मुआवजा नहीं देंगे.”

    यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह अफ्रीकी देशों के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत है. अब अफ्रीकी देश इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. उनका तर्क है कि गुलाम व्यापार की वजह से अफ्रीका का विकास रुका और आज भी इसकी वजह से नस्लभेद की समस्या बनी हुई है.

    अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों की रैंकिंग बनाने का विरोध करता है. अमेरिका ने उन मुस्लिम देशों के गुलाम व्यापार का भी मुद्दा उठाया जो 20वीं सदी तक जारी रहा. UN में ब्रिटेन के खिलाफ पारित इस प्रस्ताव में मुआवजे की मांग की गई है. भारत ने इसके समर्थन में वोट किया, जिससे ब्रिटेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अब अगला दौर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ा जा सकता है.

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।